उत्तर वैदिक काल के 25 महत्वपूर्ण MCQs | वैदिक समाज, स्त्रियाँ, विवाह और सामाजिक प्रथाएँ

उत्तर वैदिक काल का वैदिक समाज दिखाती हुई इमेज जिसमें महिलाएँ गुरुकुल में शिक्षा ले रही हैं, वैदिक विवाह और सामाजिक अनुष्ठान जैसे ब्रह्म, दैव, आर्ष, प्रजापत्य, गांधर्व, असुर, राक्षस, पैशाच विवाह दिखाए गए हैं, शिक्षा और सामाजिक प्रथाएँ

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उत्तर वैदिक काल के 25 महत्वपूर्ण MCQs

प्रश्न 1. उत्तर वैदिक काल में महिलाओं का कौन-सा संस्कार बंद हो गया था?
(A) विवाह संस्कार
(B) अंत्येष्टि संस्कार
(C) उपनयन संस्कार
(D) नामकरण संस्कार

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उत्तर: (C) उपनयन संस्कार

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उत्तर वैदिक काल में महिलाओं का उपनयन संस्कार बंद हो गया था, जो पहले ऋग्वैदिक काल में स्त्रियों द्वारा भी किया जाता था और जिसमें बालक को गुरु के पास शिक्षा ग्रहण के लिए भेजा जाता तथा यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण कराया जाता था; इस बंद होने के कारण महिलाओं की शिक्षा, धार्मिक गतिविधियों और आध्यात्मिक भागीदारी सीमित हो गई, जिससे उनके सामाजिक और धार्मिक जीवन में गिरावट आई, क्योंकि यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि कैसे सामाजिक और धार्मिक अनुष्ठानों में महिलाओं की भूमिका धीरे-धीरे घटती गई।
प्रश्न 2. उत्तर वैदिक काल में स्त्रियों की स्थिति के बारे में कौन-सा कथन सही है?
(A) उत्तर वैदिक काल में बाल विवाह और सती प्रथा प्रचलित हो गई
(B) उत्तर वैदिक काल में विधवा पुनर्विवाह और नियोग प्रथा अभी भी प्रचलित थी
(C) उत्तर वैदिक काल में स्त्रियों को संपत्ति का अधिकार मिल गया
(D) उत्तर वैदिक काल में स्त्रियों की स्थिति पूर्णतः समाप्त हो गई

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उत्तर: (B) उत्तर वैदिक काल में विधवा पुनर्विवाह और नियोग प्रथा अभी भी प्रचलित थी

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उत्तर वैदिक काल में यद्यपि स्त्रियों की स्थिति में गिरावट आई, परंतु बाल विवाह, सती प्रथा और पर्दा प्रथा अभी भी पूरी तरह नहीं आई थी; विधवाओं का पुनर्विवाह होता था और नियोग प्रथा अभी भी प्रचलित थी; अथर्ववेद में विधवा के शव के साथ लेटने का उल्लेख मिलता है पर यह सती प्रथा नहीं थी, केवल एक प्रतीकात्मक अनुष्ठान था; इस काल की अनेक विदुषियाँ जैसे गार्गी, मैत्रेयी, सुलभा भी सक्रिय थीं; क्योंकि यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि उत्तर वैदिक काल में महिलाओं की सामाजिक, धार्मिक और शिक्षा में स्थिति कैसे बदलती गई
प्रश्न 3. गोत्र व्यवस्था किस काल में अस्तित्व में आई?
(A) ऋग्वैदिक काल
(B) उत्तर वैदिक काल
(C) महाजनपद काल
(D) मौर्य काल

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उत्तर: (B) उत्तर वैदिक काल

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गोत्र व्यवस्था उत्तर वैदिक काल में अस्तित्व में आई, जिसमें ‘गोत्र’ का शाब्दिक अर्थ गाय बाँधने का स्थान है, परंतु इसका सामाजिक अर्थ है कि लोग एक ही पूर्वज (ऋषि) से उत्पन्न वंश-परंपरा से आते हैं; इस व्यवस्था के अनुसार सगोत्र विवाह निषेध होता था यानी एक ही गोत्र के लोगों में विवाह नहीं किया जाता था; इस नियम ने भारतीय विवाह-परंपरा को गहराई से प्रभावित किया और आज भी हिंदू समाज में यह प्रथा प्रचलित है; इसलिए इसे समझना और याद रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 4. गृह्य सूत्र में विवाह के कितने प्रकारों का उल्लेख है?
(A) चार
(B) छः
(C) सात
(D) आठ

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उत्तर: (D) आठ

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गृह्य सूत्र में आठ प्रकार के विवाह का उल्लेख मिलता है — ब्रह्म विवाह, दैव विवाह, आर्ष विवाह, प्रजापत्य विवाह, असुर विवाह, गांधर्व विवाह, राक्षस विवाह, और पैशाच विवाह; इनमें से प्रथम चार विवाह शास्त्रसम्मत माने जाते हैं; गृह्य सूत्र वैदिक साहित्य के कल्पसूत्र का भाग है, जिसमें गार्हस्थ्य जीवन के अनुष्ठानों का विवरण दिया गया है
प्रश्न 5. विवाह के आठ प्रकारों में सर्वोत्तम और सर्वाधिक प्रचलित विवाह कौन-सा था?
(A) दैव विवाह
(B) आर्ष विवाह
(C) ब्रह्म विवाह
(D) प्रजापत्य विवाह

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उत्तर: (C) ब्रह्म विवाह

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ब्रह्म विवाह को सर्वोत्तम और सर्वाधिक प्रचलित विवाह माना जाता था, जिसमें कन्या का पिता एक योग्य, विद्वान और शीलवान वर को आमंत्रित करके अलंकृत कन्या सौंपता था; इस विवाह में न तो कन्या का मूल्य लिया जाता था और न ही दान-दहेज की अधिकता होती थी; यह विवाह पूरी तरह कन्या के पिता की इच्छा और सामाजिक मर्यादा पर आधारित था; आज भी हिंदू समाज में प्रचलित विवाह पद्धति मूलतः ब्रह्म विवाह का ही स्वरूप है; यह वैदिक समाज में विवाह के सर्वोत्तम प्रकार को दर्शाता है।
प्रश्न 6. दैव विवाह में कन्या का विवाह किसके साथ किया जाता था?
(A) राजा के साथ
(B) यज्ञ संपन्न कराने वाले ब्राह्मण के साथ
(C) धनी वर के साथ
(D) वीर योद्धा के साथ

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उत्तर: (B) यज्ञ संपन्न कराने वाले ब्राह्मण के साथ

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दैव विवाह वह विवाह था जिसमें कन्या का विवाह यज्ञ संपन्न कराने वाले ब्राह्मण के साथ किया जाता था; इस विवाह में कन्या दान के रूप में यज्ञ की दक्षिणा मानी जाती थी; ‘दैव’ शब्द देवताओं से संबंधित है और यज्ञ देवताओं को समर्पित होते थे, इसलिए इसे दैव विवाह कहा गया; यह विवाह ब्राह्मण विवाह के बाद सबसे उत्तम माना जाता था और इसमें भी कन्या का पिता स्वेच्छा से विवाह करता था;
प्रश्न 7. आर्ष विवाह में वर पक्ष से क्या लिया जाता था?
(A) सोना और चांदी
(B) एक जोड़ी बैल तथा एक गाय
(C) जमीन और संपत्ति
(D) कुछ नहीं लिया जाता था

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उत्तर: (B) एक जोड़ी बैल तथा एक गाय

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आर्ष विवाह में कन्या के पिता द्वारा वर पक्ष से एक जोड़ी बैल और एक गाय लेकर विवाह संपन्न किया जाता था; यह व्यवस्था धार्मिक कार्यों के लिए आवश्यक गाय के दूध और बैल के जोड़े की सुविधा के कारण बनाई गई थी; ‘आर्ष’ शब्द ऋषि से संबंधित है और यह विवाह ऋषियों द्वारा मान्यता प्राप्त था; यह विवाह व्यापारिक लेन-देन की तरह नहीं बल्कि धार्मिक आवश्यकता पर आधारित था; असुर विवाह (क्रय विवाह) से यह भिन्न था क्योंकि इसमें धन लेन-देन और निंदनीय प्रथा नहीं थी।
प्रश्न 8. प्रजापत्य विवाह में कन्या के पिता द्वारा क्या आदेश दिया जाता था?
(A) “तुम दोनों राज्य का कल्याण करो”
(B) “तुम दोनों साथ-साथ अपने धर्म का आजीवन पालन करो”
(C) “तुम दोनों सदा सुखी रहो”
(D) “तुम दोनों संतान उत्पन्न करो”

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उत्तर: (B) “तुम दोनों साथ-साथ अपने धर्म का आजीवन पालन करो”

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प्रजापत्य विवाह में कन्या के पिता वर पक्ष को वचन दिलाते थे और आदेश देते थे — “तुम दोनों साथ-साथ अपने धर्म का आजीवन पालन करो“; ‘प्रजापति’ सृष्टिकर्ता ब्रह्मा का नाम है; इस विवाह में पिता अपनी पुत्री के लिए उचित वर का चयन करता था; डॉ. अल्तेकर की मान्यता है कि मूलतः विवाह के सात प्रकार ही थे और प्रजापत्य विवाह को ब्रह्म विवाह के ही एक उपभेद के रूप में जोड़ा गया था; ब्रह्म और प्रजापत्य विवाह समान ही लगते हैं।

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प्रश्न 9. प्रजापत्य विवाह के संदर्भ में डॉ. अल्तेकर की क्या मान्यता है?
(A) यह सर्वोत्तम विवाह है
(B) यह ब्रह्म विवाह का एक उपभेद मात्र है जो सात प्रकारों को आठ बनाने के लिए जोड़ा गया
(C) यह असुर विवाह का ही एक रूप है
(D) यह विवाह उत्तर वैदिक काल में प्रचलित नहीं था

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उत्तर: (B) यह ब्रह्म विवाह का एक उपभेद मात्र है जो सात प्रकारों को आठ बनाने के लिए जोड़ा गया

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डॉ. ए.एस. अल्तेकर भारतीय इतिहास के एक प्रमुख विद्वान थे; उनकी मान्यता है कि विवाह के मूलतः सात प्रकार ही थे और सात प्रकारों को पूर्ण बनाने के लिए प्रजापत्य विवाह को ब्रह्म विवाह के अंतर्गत एक अलग भेद के रूप में जोड़ा गया था; ब्रह्म और प्रजापत्य दोनों विवाहों में कन्या का पिता वर को कन्या देता है और दोनों शास्त्रसम्मत हैं; इस मान्यता से विवाह की वर्गीकरण प्रणाली की कृत्रिमता का बोध होता है
प्रश्न 10. असुर विवाह की विशेषता क्या थी?
(A) प्रेम विवाह
(B) वर पक्ष से मूल्य लेकर पुत्री को सौंपना
(C) कन्या का अपहरण
(D) यज्ञ में कन्या दान

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उत्तर: (B) वर पक्ष से मूल्य लेकर पुत्री को सौंपना

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असुर विवाह में कन्या के पिता वर पक्ष से मूल्य (धन) लेकर अपनी पुत्री को सौंप देते थे; यह विवाह क्रय विवाह (purchase marriage) का रूप था; इस विवाह की शास्त्रों में निंदा की गई क्योंकि इसमें कन्या को वस्तु की तरह बेचा जाता था; ‘असुर’ शब्द नकारात्मक अर्थ वाला है और राक्षसों से संबंधित माना जाता है; यह विवाह नैतिक दृष्टि से निंदनीय था; आर्ष विवाह में भी कुछ लेन-देन होता था परंतु वह धार्मिक प्रयोजन के लिए था, न कि क्रय-विक्रय; यह वैदिक समाज में विवाह के प्रकार और नैतिकता को दर्शाता है।
प्रश्न 11. गांधर्व विवाह क्या था?
(A) राजाओं का विवाह
(B) प्रेम विवाह या स्वयंवर जिसमें माता-पिता की अनुमति की अवहेलना होती थी
(C) बलपूर्वक किया जाने वाला विवाह
(D) धार्मिक अनुष्ठान में किया जाने वाला विवाह

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उत्तर: (B) प्रेम विवाह या स्वयंवर जिसमें माता-पिता की अनुमति की अवहेलना होती थी

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गांधर्व विवाह प्रेम विवाह या स्वयंवर विवाह था जिसमें युवक-युवती परस्पर सहमति से विवाह करते थे और माता-पिता की अनुमति की अवहेलना की जाती थी; ‘गंधर्व’ आकाशीय प्राणी माने जाते थे जो प्रेम और संगीत के देवता थे; महाभारत में शकुंतला और दुष्यंत का विवाह गांधर्व विवाह का प्रसिद्ध उदाहरण है और इसी प्रकार अर्जुन और सुभद्रा का विवाह भी इसी श्रेणी में आता है; यह विवाह प्रेम-प्रसंग और परस्पर आकर्षण पर आधारित था।
प्रश्न 12. राक्षस विवाह की क्या विशेषता थी?
(A) प्रेम से किया गया विवाह
(B) कन्या का अपहरण कर उससे विवाह
(C) धन देकर किया गया विवाह
(D) परिवार की सहमति से किया गया विवाह

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उत्तर: (B) कन्या का अपहरण कर उससे विवाह

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राक्षस विवाह में कन्या का बलपूर्वक अपहरण करके उससे विवाह किया जाता था; ‘राक्षस’ शब्द इसकी क्रूरता को दर्शाता है; यह विवाह युद्ध जीतने के बाद या बलपूर्वक कन्या प्राप्त करने के बाद किया जाता था; महाभारत में कृष्ण के पिता वसुदेव का देवकी से विवाह और रामायण में रावण द्वारा सीता का अपहरण राक्षस विवाह के संदर्भ में उद्धृत हैं (हालांकि रावण ने विवाह नहीं किया); यह विवाह क्षत्रियों में कभी-कभी अपनाई जाती थी।
प्रश्न 13. पैशाच विवाह कैसा विवाह था?
(A) प्रेम विवाह
(B) अचेतन, सुप्त या उन्मत्त कन्या से छल और कपट द्वारा किया जाने वाला विवाह
(C) कन्या के माता-पिता की सहमति से किया विवाह
(D) देवताओं की उपस्थिति में किया विवाह

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उत्तर: (B) अचेतन, सुप्त या उन्मत्त कन्या से छल और कपट द्वारा किया जाने वाला विवाह

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पैशाच विवाह आठ विवाह प्रकारों में सबसे निंदनीय और निकृष्ट माना जाता था; इसमें अचेतन (बेहोश), सुप्त (सोई हुई) या उन्मत्त (पागल) कन्या के साथ छल और कपट द्वारा जबरदस्ती विवाह किया जाता था; ‘पिशाच’ शब्द नकारात्मक और भूत-प्रेत के अर्थ में है और इसी कारण इसे पैशाच कहा गया; इसे सभी धर्मशास्त्रों में अत्यंत निंदनीय माना गया है; आधुनिक कानून की दृष्टि से यह बलात्कार की श्रेणी में आता है।
प्रश्न 14. विवाह के आठ प्रकारों में से कितने विवाहों को शास्त्रसम्मत माना गया है?
(A) दो
(B) तीन
(C) चार
(D) छः

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उत्तर: (C) चार

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विवाह के आठ प्रकारों में प्रथम चार — ब्रह्म, दैव, आर्ष और प्रजापत्य — को शास्त्रसम्मत माना गया है और शेष चार — असुर, गांधर्व, राक्षस और पैशाच — को निंदनीय या अनुचित माना जाता था; हालांकि समाज में ये विवाह वास्तव में होते थे; शास्त्रसम्मत चारों विवाहों में कन्या के पिता की सहमति और सम्मान होता था; गांधर्व विवाह को कभी-कभी क्षत्रियों के लिए स्वीकार्य माना जाता था; पैशाच विवाह सबसे निंदनीय था।
प्रश्न 15. महाभारत में शकुंतला और दुष्यंत का विवाह किस प्रकार का था?
(A) ब्रह्म विवाह
(B) असुर विवाह
(C) गांधर्व विवाह
(D) राक्षस विवाह

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उत्तर: (C) गांधर्व विवाह

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महाभारत में शकुंतला और दुष्यंत का विवाह गांधर्व विवाह का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है जिसमें दोनों ने परस्पर प्रेम और सहमति से विवाह किया और माता-पिता की अनुमति नहीं ली; इनके पुत्र का नाम भरत था जिसके नाम पर भारतवर्ष का नाम पड़ा; कालिदास ने अपने नाटक ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ में इस प्रेम-कथा को अमर किया; गांधर्व विवाह में दोनों पक्षों की सहमति अनिवार्य होती है; महाभारत में यह विवाह उदाहरण के लिए और अर्जुन एवं सुभद्रा का विवाह भी इसी प्रकार का था।
प्रश्न 16. अथर्ववेद में विधवा स्त्री के बारे में क्या उल्लेख मिलता है?
(A) विधवा को पुनर्विवाह का अधिकार नहीं था
(B) विधवा स्त्री मृत पति के शव के साथ लेटती थी, फिर संबंधी उसे घर जाने को कहते थे
(C) विधवा को जीवित जलाया जाता था
(D) विधवा को समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता था

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उत्तर: (B) विधवा स्त्री मृत पति के शव के साथ लेटती थी, फिर संबंधी उसे घर जाने को कहते थे

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अथर्ववेद में इस बात का जिक्र है कि विधवा स्त्री मृत पति के शव के साथ लेटती थी और उसके बाद उसके संबंधी उसे घर जाने को कहते थे; यह एक प्रतीकात्मक अनुष्ठान था, सती प्रथा नहीं; उत्तर वैदिक काल में सती प्रथा का चलन नहीं था; परंतु इस प्रकार के अनुष्ठान सती प्रथा के भविष्य में विकसित होने के संकेत माने जा सकते हैं; विधवाओं का पुनर्विवाह इस काल में भी होता था और नियोग प्रथा भी प्रचलित थी।
प्रश्न 17. उत्तर वैदिक काल में स्त्रियों की स्थिति में गिरावट के कारणों में से कौन-सा सही नहीं है?
(A) विदथ और सभा में स्त्रियों की भागीदारी समाप्त हो गई
(B) मैत्रायणी संहिता में स्त्रियों को पुरुष की बुराई बताया गया
(C) उपनयन संस्कार बंद हो गया
(D) विधवा पुनर्विवाह पूरी तरह बंद हो गया

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उत्तर: (D) विधवा पुनर्विवाह पूरी तरह बंद हो गया

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उत्तर वैदिक काल में स्त्रियों की स्थिति में गिरावट के अनेक प्रमाण मिलते हैं — विदथ और सभा में भागीदारी समाप्त, उपनयन संस्कार बंद, मैत्रायणी संहिता में निंदा, तैत्तिरीय आरण्यक में शूद्रवत् बताना, अथर्ववेद में कन्या-जन्म की निंदा आदि; परंतु यह कहना गलत होगा कि विधवा पुनर्विवाह पूरी तरह बंद हो गया था क्योंकि उत्तर वैदिक काल में भी विधवाओं का पुनर्विवाह होता था और नियोग प्रथा प्रचलित थी
प्रश्न 18. उत्तर वैदिक काल में विदुषियों में से कौन-सी विदुषी का नाम नहीं है?
(A) मैत्रेयी
(B) गार्गी
(C) लोपामुद्रा
(D) सुलभा

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उत्तर: (C) लोपामुद्रा

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लोपामुद्रा ऋग्वैदिक काल की प्रसिद्ध विदुषी थीं, न कि उत्तर वैदिक काल की; वे ऋषि अगस्त्य की पत्नी थीं; उत्तर वैदिक काल की प्रमुख विदुषियाँ थीं — मैत्रेयी (याज्ञवल्क्य की पत्नी), गार्गी (वृहदारण्यक उपनिषद में प्रसिद्ध), सुलभा, वडवा, प्राशितैयी और कात्यायनी; यद्यपि उत्तर वैदिक काल में स्त्रियों की सामान्य स्थिति में गिरावट आई, फिर भी विदुषी महिलाओं की एक श्रृंखला मिलती है; यह तथ्य काल-विभाजन और विदुषियों के नाम याद रखने के दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।
प्रश्न 19. ब्रह्म विवाह और प्रजापत्य विवाह के बीच मुख्य अंतर क्या है?
(A) ब्रह्म विवाह में वर पक्ष को धन दिया जाता था
(B) प्रजापत्य में वर वधू के साथ पूर्ण समता का व्यवहार करने की प्रतिज्ञा करता है
(C) ब्रह्म विवाह में किसी भी पक्ष पर कोई बाध्यता नहीं होती
(D) दोनों में कोई अंतर नहीं है

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उत्तर: (B) प्रजापत्य में वर वधू के साथ पूर्ण समता का व्यवहार करने की प्रतिज्ञा करता है

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ब्रह्म और प्रजापत्य विवाह बहुत मिलते-जुलते हैं, फिर भी इनमें कुछ अंतर है; प्रजापत्य विवाह में वर पक्ष को दी जाने वाली भेंट ब्रह्म विवाह से उत्तम होती है; इस विवाह में वर वधू के साथ पूर्ण समता का व्यवहार करने की प्रतिज्ञा करता है; डॉ. अल्तेकर मानते हैं कि प्रजापत्य विवाह मूलतः ब्रह्म विवाह का ही एक उपभेद है; दोनों में कन्या के पिता स्वेच्छा से विवाह करते हैं और किसी पर कोई बाध्यता नहीं होती।
प्रश्न 20. निम्नलिखित में से कौन-सा विवाह ‘क्रय विवाह’ (purchase marriage) कहलाता है?
(A) ब्रह्म विवाह
(B) दैव विवाह
(C) असुर विवाह
(D) आर्ष विवाह

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उत्तर: (C) असुर विवाह

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असुर विवाह को ‘क्रय विवाह‘ (Purchase Marriage) कहा जाता है क्योंकि इसमें कन्या को धन देकर खरीदा जाता था; कन्या के पिता वर पक्ष से धन (मूल्य) लेकर कन्या सौंपते थे; शास्त्रों ने इस विवाह की कठोर निंदा की है; ‘असुर‘ शब्द यह दर्शाता है कि यह विवाह अनुचित और निंदनीय माना जाता था; आर्ष विवाह में भी एक जोड़ी बैल और गाय ली जाती थी परंतु वह क्रय नहीं बल्कि धार्मिक आवश्यकता के लिए था।
प्रश्न 21. अर्जुन और सुभद्रा का विवाह किस प्रकार का था?
(A) ब्रह्म विवाह
(B) राक्षस विवाह
(C) गांधर्व विवाह
(D) असुर विवाह

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उत्तर: (C) गांधर्व विवाह

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महाभारत में अर्जुन और सुभद्रा का विवाह गांधर्व विवाह का एक प्रसिद्ध उदाहरण है; अर्जुन ने सुभद्रा का अपहरण किया था जो श्रीकृष्ण की बहन थीं; हालांकि यह अपहरण कृष्ण की सहमति से था और सुभद्रा भी अर्जुन से प्रेम करती थीं, इसलिए इसे गांधर्व विवाह माना जाता है; कुछ विद्वान इसे राक्षस विवाह भी मानते हैं क्योंकि इसमें अपहरण था; परस्पर सहमति होने के कारण इसे प्रायः गांधर्व विवाह की श्रेणी में रखा जाता है; इनके पुत्र अभिमन्यु थे।
प्रश्न 22. उत्तर वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था के बारे में कौन-सा कथन सही है?
(A) इस काल में वर्ण व्यवस्था पूरी तरह समाप्त हो गई
(B) इस काल में वर्ण व्यवस्था समाज का अभिन्न अंग बनी और जन्म-आधारित हो गई
(C) इस काल में वर्ण व्यवस्था का आधार केवल शिक्षा था
(D) इस काल में वर्ण व्यवस्था कर्म-आधारित रही

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उत्तर: (B) इस काल में वर्ण व्यवस्था समाज का अभिन्न अंग बनी और जन्म-आधारित हो गई

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उत्तर वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था समाज के अभिन्न अंग के रूप में स्थापित हो गई और इसका आधार कर्म से बदलकर जन्म हो गया; ऋग्वैदिक काल में वर्ण कर्म पर आधारित था परंतु उत्तर वैदिक काल में जन्म से ही वर्ण निर्धारित होने लगा; इस परिवर्तन ने भारतीय समाज की जाति व्यवस्था की नींव रखी; ब्राह्मणों का प्रभुत्व इस काल में बढ़ गया और वे धार्मिक अनुष्ठानों के एकाधिकारी बन गए; यह भारतीय सामाजिक इतिहास की एक महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया है।
प्रश्न 23. निम्नलिखित में से विवाह के आठ प्रकारों का सही क्रम कौन-सा है (उत्तम से निकृष्ट की ओर)?
(A) गांधर्व, ब्रह्म, दैव, असुर, राक्षस, पैशाच, आर्ष, प्रजापत्य
(B) ब्रह्म, दैव, आर्ष, प्रजापत्य, असुर, गांधर्व, राक्षस, पैशाच
(C) पैशाच, राक्षस, असुर, गांधर्व, प्रजापत्य, आर्ष, दैव, ब्रह्म
(D) असुर, गांधर्व, ब्रह्म, दैव, आर्ष, प्रजापत्य, पैशाच, राक्षस

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उत्तर: (B) ब्रह्म, दैव, आर्ष, प्रजापत्य, असुर, गांधर्व, राक्षस, पैशाच

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विवाह के आठ प्रकारों का उत्तम से निकृष्ट क्रम इस प्रकार है — ब्रह्म (सर्वोत्तम), दैव, आर्ष, प्रजापत्य (ये चारों शास्त्रसम्मत), असुर, गांधर्व, राक्षस, और पैशाच (सबसे निकृष्ट); प्रथम चार विवाह शास्त्रसम्मत माने गए; ब्रह्म विवाह में न तो मूल्य लिया जाता था और न ही बल प्रयोग होता था; पैशाच विवाह सबसे निंदनीय था क्योंकि यह छल-कपट और बल पर आधारित था।
प्रश्न 24. उत्तर वैदिक काल में स्त्रियों की भागीदारी किन संस्थाओं में समाप्त हो गई?
(A) केवल समिति में
(B) विदथ और सभा दोनों में
(C) केवल विदथ में
(D) तीनों संस्थाओं में

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उत्तर: (B) विदथ और सभा दोनों में

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उत्तर वैदिक काल में विदथ और सभा दोनों में स्त्रियों की भागीदारी समाप्त हो गई; ऋग्वैदिक काल में स्त्रियाँ विदथ और सभा में भाग लेती थीं, केवल समिति में नहीं; उत्तर वैदिक काल में विदथ का महत्त्व समाप्त हो गया और सभा पुरुष-प्रधान हो गई; यह परिवर्तन स्त्रियों की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति में गिरावट का प्रतीक है; वैदिक संस्थाओं में महिलाओं की भूमिका प्रतियोगी परीक्षाओं में महत्त्वपूर्ण विषय है।
प्रश्न 25. ऋग्वैदिक काल में वस्त्र ‘वास’ क्या था?
(A) शाल जैसा ऊपरी वस्त्र
(B) अंडर गारमेंट
(C) निचला वस्त्र
(D) सिर पर ओढ़ने वाला वस्त्र

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उत्तर: (C) निचला वस्त्र

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ऋग्वैदिक काल में वास निचला वस्त्र था, जो धोती जैसा होता था; अधिवास शाल की तरह ओढ़ा जाने वाला ऊपरी वस्त्र था और नीवि अंडर गारमेंट था। वैदिक काल में वस्त्र-परंपरा काफी सुविकसित थी और इसमें सूती और ऊनी दोनों प्रकार के वस्त्र शामिल थे। ‘वास’ शब्द आज भी वस्त्र के अर्थ में कई भारतीय भाषाओं में प्रयोग होता है। वैदिक साहित्य में परिधान, उत्तरीय और अंतरीय जैसे शब्द वस्त्रों की विविधता और परंपरा को दर्शाते हैं।

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