परीक्षा में आने वाले ऋग्वैदिक & उत्तर वैदिक भूगोल के 25 MCQ (Explanation सहित)

Vedic Geography MCQ in Hindi Rigvedic and Later Vedic Age

प्राचीन भारत का इतिहास-16 MCQ-2026

परीक्षा में आने वाले ऋग्वैदिक & उत्तर वैदिक भूगोल के 25 MCQ (Explanation सहित)

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प्रश्न 1. उत्तर वैदिक काल में आर्यों की पूर्वी सीमा के विषय में किस ग्रंथ की कथा से जानकारी मिलती है?

(A) ऋग्वेद
(B) शतपथ ब्राह्मण — विदेह-माधव कथा
(C) कठोपनिषद्
(D) मुण्डकोपनिषद्

उत्तर: (B) शतपथ ब्राह्मण — विदेह-माधव कथा

उत्तर वैदिक काल में आर्यों के पूर्व की सीमा के बारे में जानकारी शतपथ ब्राह्मण में वर्णित विदेह-माधव कथा से मिलती है। इस कथा में बताया गया है कि विदेह-माधव की यात्रा सरस्वती तट से शुरू होकर सदानीरा (गंडक) नदी तक चली। यह यात्रा आर्यों के पूर्व की ओर विस्तार का प्रमाण है। इसके अलावा, अथर्ववेद में अंग, मगध और वैशाली का उल्लेख भी मिलता है, जो स्पष्ट करता है कि आर्य इस क्षेत्र तक फैल चुके थे। यह तथ्य इतिहास में उत्तर वैदिक काल के भौगोलिक विस्तार और आर्यों की पूर्वी गतिविधियों को समझने में मदद करता है। कुल मिलाकर, विदेह-माधव कथा और अथर्ववेद के ये उल्लेख यह दिखाते हैं कि आर्यों ने उत्तर भारत के पूर्वी हिस्सों में भी अपनी पहुँच बनाई थी।

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प्रश्न 2. अथर्ववेद में सर्वप्रथम किन तीन क्षेत्रों का उल्लेख मिलता है जो उत्तर वैदिक कालीन आर्यों के पूर्वी विस्तार का प्रमाण है?

(A) कोसल, काशी, मगध
(B) अंग, मगध, वैशाली
(C) पंचाल, कुरु, मत्स्य
(D) गंधार, कम्बोज, मद्र

उत्तर: (B) अंग, मगध, वैशाली

अथर्ववेद में ‘अंग’, ‘मगध’ और ‘वैशाली’ का सर्वप्रथम उल्लेख मिलता है। ये तीनों क्षेत्र आज के बिहार राज्य में स्थित हैं। इसका मतलब है कि उत्तर वैदिक काल में आर्यों का विस्तार पूर्व की ओर उत्तरी बिहार तक पहुँच गया था। मगध बाद में भारत का एक सबसे शक्तिशाली महाजनपद और मौर्य साम्राज्य का केंद्र बना। वहीं वैशाली को विश्व के पहले गणराज्यों में से एक माना जाता है। यह तथ्य इतिहास में आर्यों की भौगोलिक पहुँच और उत्तर भारत के राजनीतिक विकास को समझने में मदद करता है। कुल मिलाकर, अथर्ववेद के ये उल्लेख उत्तर वैदिक काल की पूर्वी सीमा और आर्यों की गतिविधियों का महत्वपूर्ण प्रमाण हैं।

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प्रश्न 3. उत्तर वैदिक कालीन साहित्य में विंध्य पर्वत का उल्लेख मिलता है या नहीं?

(A) नहीं, कोई उल्लेख नहीं
(B) हाँ, विंध्य पर्वत का उल्लेख मिलने लगता है
(C) केवल ऋग्वेद में उल्लेख है
(D) केवल उपनिषदों में उल्लेख है

उत्तर: (B) हाँ, विंध्य पर्वत का उल्लेख मिलने लगता है

उत्तर वैदिक कालीन साहित्य में विंध्य पर्वतमाला का उल्लेख मिलने लगता है, जबकि ऋग्वेद में इसका कोई जिक्र नहीं है। यह दर्शाता है कि ऋग्वैदिक काल में आर्य विंध्य से परिचित नहीं थे। लेकिन उत्तर वैदिक काल तक आर्यों ने पूर्वी और मध्य भारत में अपना विस्तार कर लिया था, और विंध्य पर्वत उनके ज्ञान का हिस्सा बन गया। यह तथ्य आर्यों के भौगोलिक विस्तार और उनके उत्तर भारत तक पहुँचने का महत्वपूर्ण प्रमाण है। कुल मिलाकर, विंध्य पर्वतमाला का उल्लेख यह बताता है कि उत्तर वैदिक काल में आर्य नए भूभागों और से अवगत हो गए थे।

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प्रश्न 4. उत्तर वैदिक काल में हिमालय की किन चोटियों का उल्लेख मिलता है?

(A) केदार, बद्री, कैलाश
(B) त्रिककुद, क्रौंच, मैनाक
(C) मुजवंत, हिमवंत, गंधमादन
(D) मेरु, सुमेरु, मंदराचल

उत्तर: (B) त्रिककुद, क्रौंच, मैनाक

उत्तर वैदिक कालीन साहित्य में हिमालय की प्रमुख चोटियों जैसे ‘त्रिककुद’, ‘क्रौंच’ और ‘मैनाक’ का उल्लेख मिलता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि उत्तर वैदिक काल में भी आर्यों की उत्तरी सीमा हिमालय तक थी। ऋग्वैदिक काल में केवल ‘मुजवंत’ चोटी का ही जिक्र था, लेकिन उत्तर वैदिक काल तक उन्होंने हिमालय की अन्य चोटियों का भी ज्ञान प्राप्त कर लिया था। यह तथ्य आर्यों के भौगोलिक ज्ञान और उनके उत्तर भारत और हिमालय क्षेत्र तक विस्तार का महत्वपूर्ण प्रमाण है। कुल मिलाकर, हिमालय की चोटियों का उल्लेख आर्यों के प्राकृतिक भूभागों और भौगोलिक समझ में वृद्धि को दर्शाता है।

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प्रश्न 5. उत्तर वैदिक काल में आर्यों की पश्चिमी सीमा कहाँ तक थी?

(A) पश्चिमी अफगानिस्तान
(B) ईरान
(C) पूर्वी अफगानिस्तान (ऋग्वैदिक काल के समान)
(D) मेसोपोटामिया

उत्तर: (C) पूर्वी अफगानिस्तान (ऋग्वैदिक काल के समान)

उत्तर वैदिक काल में आर्यों का विस्तार मुख्य रूप से पूर्व की ओर हुआ। इस कारण पश्चिमी सीमा ऋग्वैदिक काल के समान ही रही, जो कि अफगानिस्तान के पूर्वी भाग तक फैली हुई थी। उत्तर वैदिक काल में आर्यों ने नई भूमि की खोज की और अपनी पहुँच गंगा-यमुना दोआब और उत्तरी बिहार तक बढ़ा दी। जबकि पूर्वी विस्तार में उन्होंने नए क्षेत्रों और नदियों का ज्ञान प्राप्त किया, पश्चिम में कोई बदलाव नहीं हुआ। यह तथ्य आर्यों के भौगोलिक विस्तार और उत्तर भारत में उनकी सांस्कृतिक और राजनीतिक गतिविधियों को समझने में महत्वपूर्ण प्रमाण है।

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प्रश्न 6. ऋग्वेद में उल्लिखित ‘सप्त सैंधव क्षेत्र’ में ‘सप्त’ का क्या अर्थ है?

(A) पाँच
(B) छह
(C) सात
(D) आठ

उत्तर: (C) सात

‘सप्त सैंधव क्षेत्र’ में ‘सप्त’ का अर्थ सात है। इस क्षेत्र में सात नदियाँ आती हैं — सिंधु, सरस्वती और सिंधु की पाँच पूर्वी सहायक नदियाँ: झेलम, चिनाव, रावी, सतलज, व्यास‘सैंधव’ का अर्थ सिंधु से संबंधित है। यह क्षेत्र आधुनिक पंजाब (भारत और पाकिस्तान दोनों) से मेल खाता है। ऋग्वैदिक आर्यों की संस्कृति, धर्म और भाषा का विकास इसी क्षेत्र में हुआ। कुल मिलाकर, सप्त सैंधव क्षेत्र ऋग्वैदिक काल के भौगोलिक और सांस्कृतिक केंद्र का महत्वपूर्ण प्रमाण है।

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प्रश्न 7. उत्तर वैदिक काल में आर्यों की दक्षिणी सीमा क्या थी?

(A) यमुना नदी के समानांतर क्षेत्र
(B) विंध्य पर्वत के दक्षिण में कुछ क्षेत्र
(C) नर्मदा नदी
(D) गोदावरी नदी

उत्तर: (B) विंध्य पर्वत के दक्षिण में कुछ क्षेत्र

उत्तर वैदिक कालीन साहित्य में विंध्य पर्वत का उल्लेख मिलता है, जो यह दर्शाता है कि उत्तर वैदिक काल में आर्यों की दक्षिणी सीमा ऋग्वैदिक काल की तुलना में आगे बढ़ गई थी। अब उनकी सीमा विंध्य पर्वत के कुछ दक्षिणी भाग तक पहुँच गई थी। जबकि ऋग्वैदिक काल में आर्यों की दक्षिणी सीमा केवल यमुना नदी के समानांतर क्षेत्र तक थी। हालांकि, आर्यों का दक्षिण भारत में विस्तार बाद के काल में हुआ। यह तथ्य आर्यों के भौगोलिक विस्तार और उनके उत्तर-मध्य भारत तक पहुँचने का महत्वपूर्ण प्रमाण है।

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प्रश्न 8. ऋग्वैदिक काल और उत्तर वैदिक काल में गतिविधियों के केंद्र में क्या परिवर्तन आया?

(A) सप्त सैंधव से गंगा-यमुना दोआब की ओर
(B) गंगा-यमुना दोआब से सप्त सैंधव की ओर
(C) हिमालय क्षेत्र से दक्षिण की ओर
(D) कोई परिवर्तन नहीं आया

उत्तर: (A) सप्त सैंधव से गंगा-यमुना दोआब की ओर

ऋग्वैदिक काल में आर्यों की गतिविधियों का मुख्य केंद्र ‘सप्त सैंधव क्षेत्र’ (आधुनिक पंजाब) था। उत्तर वैदिक काल में यह केंद्र बदलकर गंगा-यमुना दोआब हो गया। यह परिवर्तन स्पष्ट रूप से आर्यों के पूर्व की ओर प्रवास का प्रमाण है। उत्तर वैदिक काल में लोहे के औजार के उपयोग से गंगा-यमुना दोआब के घने जंगल काटे गए और यह कृषि योग्य भूमि बन गई। इस बदलाव ने भारतीय इतिहास में भौगोलिक और कृषि विकास की दिशा को बदल दिया। कुल मिलाकर, यह आर्यों के पूर्वी विस्तार और उनके सांस्कृतिक और आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण प्रमाण है।

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प्रश्न 9. ऋग्वेद में सिंधु की कितनी पूर्वी सहायक नदियों का उल्लेख है?

(A) तीन
(B) चार
(C) पाँच
(D) छह

उत्तर: (C) पाँच

ऋग्वेद में सिंधु की पाँच पूर्वी सहायक नदियों का उल्लेख मिलता है — वितस्ता (झेलम), अस्किनी (चिनाव), परुष्णी (रावी), शुतुद्रि (सतलज) और विपासा (व्यास)। इन पाँच नदियों और सिंधु तथा सरस्वती नदी को मिलाकर ही ‘सप्त सैंधव क्षेत्र’ या सात नदियों का क्षेत्र बनता है। इसी क्षेत्र की वजह से इस इलाके का नाम पंजाब पड़ा — पंज का अर्थ है पाँच और आब का अर्थ है पानी या नदी, यानी पाँच नदियों की भूमि। यह तथ्य ऋग्वैदिक काल के भौगोलिक ज्ञान और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है।

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प्रश्न 10. ‘पंजाब’ नाम किन शब्दों से बना है और इसका अर्थ क्या है?

(A) पंज (तीन) + आब (पहाड़) = तीन पहाड़ों का क्षेत्र
(B) पंज (पाँच) + आब (पानी/नदी) = पाँच नदियों का क्षेत्र
(C) पंज (सात) + आब (नदी) = सात नदियों का क्षेत्र
(D) पंज (चार) + आब (झील) = चार झीलों का क्षेत्र

उत्तर: (B) पंज (पाँच) + आब (पानी/नदी) = पाँच नदियों का क्षेत्र

‘पंजाब’ शब्द फारसी भाषा के दो शब्दों से बना है — ‘पंज’ (पाँच) और ‘आब’ (पानी/नदी)। इसका अर्थ है — पाँच नदियों का क्षेत्र। ये पाँच नदियाँ हैं: झेलम (वितस्ता), चिनाव (अस्किनी), रावी (परुष्णी), सतलज (शुतुद्रि) और व्यास (विपासा)। ये वही नदियाँ हैं जो ऋग्वेद में वर्णित हैं। सप्त सैंधव क्षेत्र और पंजाब का यह भौगोलिक संबंध इतिहास और प्रतियोगी परीक्षाओं में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। कुल मिलाकर, यह क्षेत्र आर्यों की भौगोलिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को समझने में सहायक है।

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प्रश्न 11. ऋग्वेद में सिंधु की कितनी पश्चिमी सहायक नदियों का उल्लेख है?

(A) दो
(B) तीन
(C) चार
(D) पाँच

उत्तर: (C) चार

ऋग्वेद में सिंधु की चार पश्चिमी सहायक नदियों का उल्लेख है, जो अफगानिस्तान में बहती हैं — कुभा (काबुल), क्रुमु (कुर्रम), गोमती (गोमल) और सुवास्तु (स्वात)। इन नदियों के उल्लेख से यह स्पष्ट होता है कि ऋग्वैदिक आर्यों की पश्चिमी सीमा अफगानिस्तान के पूर्वी भाग तक थी। ये नदियाँ आज मॉडर्न पाकिस्तान और अफगानिस्तान में बहती हैं। इस तथ्य से ऋग्वैदिक काल के भौगोलिक विस्तार और आर्यों के पश्चिमी क्षेत्रीय ज्ञान का प्रमाण मिलता है।

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प्रश्न 12. उत्तर वैदिक काल में आर्यों की उत्तरी सीमा क्या थी?

(A) हिंदुकुश पर्वत
(B) हिमालय (ऋग्वैदिक काल के समान)
(C) विंध्य पर्वत
(D) अरावली पर्वत

उत्तर: (B) हिमालय (ऋग्वैदिक काल के समान)

उत्तर वैदिक कालीन साहित्य में हिमालय की चर्चा भी मिलती है, जिसमें प्रमुख चोटियों के रूप में त्रिककुद, क्रौंच और मैनाक का उल्लेख है। इससे यह स्पष्ट होता है कि उत्तर वैदिक काल में आर्यों की उत्तरी सीमा भी हिमालय तक थी, यानी यह ऋग्वैदिक काल की तरह स्थिर रही। केवल पूर्वी और दक्षिणी सीमाओं में विस्तार हुआ, जबकि उत्तरी और पश्चिमी सीमाएँ स्थिर बनी रहीं। यह तथ्य आर्यों के भौगोलिक ज्ञान और उत्तर भारत में उनके स्थायी क्षेत्रों का प्रमाण देता है।

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प्रश्न 13. ऋग्वेद में ‘नदी सूक्त’ का क्या महत्व है?

(A) इसमें देवताओं की स्तुति है
(B) इसमें विभिन्न नदियों का उल्लेख है जो ऋग्वैदिक आर्यों के भौगोलिक विस्तार की जानकारी देता है
(C) इसमें यज्ञ विधि का विवरण है
(D) इसमें राजाओं का वर्णन है

उत्तर: (B) इसमें विभिन्न नदियों का उल्लेख है जो ऋग्वैदिक आर्यों के भौगोलिक विस्तार की जानकारी देता है

ऋग्वेद के ‘नदी सूक्त’ में विभिन्न नदियों का उल्लेख मिलता है — सिंधु और उसकी पश्चिमी सहायक नदियाँ (अफगानिस्तान) तथा पूर्वी सहायक नदियाँ (पंजाब)। इन नदियों के विवरण से ऋग्वैदिक आर्यों की भौगोलिक सीमाओं का निर्धारण किया जाता है। नदी सूक्त भारतीय इतिहास में भौगोलिक पुनर्निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण साहित्यिक स्रोत माना जाता है। यह आर्यों के भौगोलिक ज्ञान, प्रवास और सांस्कृतिक विस्तार को समझने में मदद करता है।

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प्रश्न 14. ऋग्वेद में ‘यमुना’ शब्द कितनी बार और ‘गंगा’ शब्द कितनी बार आया है?

(A) यमुना — एक बार, गंगा — तीन बार
(B) यमुना — तीन बार, गंगा — एक बार
(C) यमुना — पाँच बार, गंगा — दो बार
(D) यमुना — दो बार, गंगा — दो बार

उत्तर: (B) यमुना — तीन बार, गंगा — एक बार

ऋग्वेद में ‘यमुना’ शब्द तीन बार और ‘गंगा’ शब्द केवल एक बार आया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि ऋग्वैदिक आर्य यमुना तक तो पहुँच गए थे, लेकिन गंगा उनके लिए उतनी परिचित नहीं थी। इसके बाद ऋग्वेद में किसी पूर्वी क्षेत्र का कोई उल्लेख नहीं है। उत्तर वैदिक काल में गंगा-यमुना दोआब प्रमुख सांस्कृतिक और कृषि केंद्र बन गया और गंगा का महत्व बढ़ गया। यह तथ्य आर्यों के पूर्वी विस्तार और भौगोलिक विकास का प्रमाण है।

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प्रश्न 15. शतपथ ब्राह्मण की ‘विदेह-माधव कथा’ में ‘विदेह-माथव’ कहाँ से चलकर किस नदी तक पहुँचे?

(A) सिंधु नदी से गंगा नदी तक
(B) सरस्वती नदी से सदानीरा (गंडक) नदी तक
(C) यमुना नदी से कोसी नदी तक
(D) गंगा नदी से ब्रह्मपुत्र नदी तक

उत्तर: (B) सरस्वती नदी से सदानीरा (गंडक) नदी तक

शतपथ ब्राह्मण में वर्णित ‘विदेह-माधव कथा’ के अनुसार विदेह-माधव सरस्वती नदी के किनारे से हाथों में अग्नि लेकर गौतम राहुगण के साथ पूर्वी भारत की ओर चले और सदानीरा (गंडक) नदी के तट तक पहुँचे। यह कथा पश्चिम से पूर्व की ओर आर्यों के प्रसार का प्रतीकात्मक वर्णन है। इसे इतिहास में आर्यों के पूर्वी विस्तार और उनके भौगोलिक ज्ञान का प्रमाण माना जाता है। यह विषय UPSC मुख्य परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है, इसलिए प्रतियोगी छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है।

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प्रश्न 16. ऋग्वैदिक काल और उत्तर वैदिक काल के बीच आर्यों के भौगोलिक विस्तार में क्या मुख्य अंतर था?

(A) उत्तर वैदिक काल में आर्य पश्चिम की ओर बढ़े
(B) उत्तर वैदिक काल में आर्य पूर्व की ओर गंगा-यमुना दोआब और उत्तरी बिहार तक बढ़े
(C) उत्तर वैदिक काल में आर्य दक्षिण भारत पहुँच गए
(D) उत्तर वैदिक काल में कोई विस्तार नहीं हुआ

उत्तर: (B) उत्तर वैदिक काल में आर्य पूर्व की ओर गंगा-यमुना दोआब और उत्तरी बिहार तक बढ़े

ऋग्वैदिक काल में आर्यों का मुख्य केंद्र सप्त सैंधव क्षेत्र (आधुनिक पंजाब) था और उनकी पूर्वी सीमा यमुना तक थी। उत्तर वैदिक काल में आर्यों ने पूर्व की ओर विस्तार किया और गंगा-यमुना दोआब उनका नया केंद्र बन गया। इस विस्तार के दौरान उन्होंने उत्तरी बिहार (सदानीरा/गंडक) तक अपनी पहुँच बनाई, जो उनके विस्तार की अंतिम सीमा मानी जाती है। इस विस्तार में लोहे का प्रयोग और कृषि की उन्नति महत्वपूर्ण कारण थे। यह तथ्य आर्यों के भौगोलिक और आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण प्रमाण है।

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प्रश्न 17. ऋग्वेद में ‘सरस्वती’ नदी का क्या महत्व था?

(A) यह व्यापार की दृष्टि से महत्वपूर्ण थी
(B) यह सप्त सैंधव क्षेत्र की एक प्रमुख पवित्र नदी थी
(C) यह केवल पीने के पानी के लिए उपयोग होती थी
(D) यह अफगानिस्तान में बहती थी

उत्तर: (B) यह सप्त सैंधव क्षेत्र की एक प्रमुख पवित्र नदी थी

सरस्वती नदी सप्त सैंधव क्षेत्र की सात नदियों में से एक थी और ऋग्वेद में इसे अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण नदी माना गया है। शतपथ ब्राह्मण में वर्णित ‘विदेह-माधव कथा’ में भी सरस्वती नदी के तट का उल्लेख है, जहाँ से आर्यों ने पूर्व की ओर प्रवास शुरू किया। आज यह नदी लुप्त हो गई है, लेकिन उपग्रह चित्र और पुरातात्विक प्रमाण इसके प्राचीन मार्ग की पुष्टि करते हैं। यह तथ्य आर्यों के भौगोलिक ज्ञान और उत्तर वैदिक काल में उनके पूर्वी विस्तार को समझने में मदद करता है।

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प्रश्न 18. ऋग्वेद के आधार पर ऋग्वैदिक आर्यों की किस सीमा का निर्धारण ‘नदी सूक्त’ में अफगानी नदियों के उल्लेख से होता है?

(A) उत्तरी सीमा
(B) दक्षिणी सीमा
(C) पूर्वी सीमा
(D) पश्चिमी सीमा

उत्तर: (D) पश्चिमी सीमा

ऋग्वेद के ‘नदी सूक्त’ में अफगानिस्तान में बहने वाली नदियों — कुभा (काबुल), क्रुमु (कुर्रम), गोमती (गोमल) और सुवास्तु (स्वात) — का उल्लेख है। इन नदियों के आधार पर ऋग्वैदिक आर्यों की पश्चिमी सीमा निर्धारित होती है, जो अफगानिस्तान के पूर्वी भाग तक फैली थी। इसके साथ ही उनकी पूर्वी सीमा यमुना, उत्तरी सीमा हिमालय और दक्षिणी सीमा यमुना के समानांतर क्षेत्र तक थी। यह तथ्य ऋग्वैदिक काल के भौगोलिक विस्तार और आर्यों के सीमाओं का ज्ञान को स्पष्ट करता है।

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प्रश्न 19. उत्तर वैदिक काल में ‘विदेह’ (मिथिला) किस क्षेत्र में था और यह किस कथा में उल्लिखित है?

(A) पंजाब में — ऋग्वेद में
(B) उत्तरी बिहार में — शतपथ ब्राह्मण में
(C) राजस्थान में — अथर्ववेद में
(D) बंगाल में — उपनिषद् में

उत्तर: (B) उत्तरी बिहार में — शतपथ ब्राह्मण में

‘विदेह’ (आधुनिक मिथिला) उत्तरी बिहार का एक प्राचीन राज्य था। शतपथ ब्राह्मण की ‘विदेह-माधव कथा’ में वर्णित है कि विदेह-माधव पश्चिम से पूर्वी भारत में सदानीरा (गंडक) नदी तक पहुँचे। विदेह के राजा जनक के दरबार में याज्ञवल्क्य और गार्गी का प्रसिद्ध दार्शनिक वाद-विवाद बृहदारण्यक उपनिषद् में वर्णित है। यह क्षेत्र उत्तर वैदिक कालीन आर्य संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। इस तथ्य से उत्तर वैदिक काल में आर्यों के पूर्वी विस्तार और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमाण मिलता है।

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प्रश्न 20. ऋग्वेद में सिंधु नदी के अतिरिक्त किस नदी का महत्व सर्वाधिक माना जाता है?

(A) गंगा
(B) यमुना
(C) सरस्वती
(D) रावी

उत्तर: (C) सरस्वती

ऋग्वेद में सिंधु नदी के बाद सरस्वती नदी का महत्व सर्वाधिक माना गया है। इसे ऋग्वेद में ‘नदियों की माता’ और ‘सर्वश्रेष्ठ नदी’ कहा गया है। यह नदी सप्त सैंधव क्षेत्र की सात नदियों में से एक थी। आर्यों की प्रमुख बस्तियाँ इसी नदी के तट पर स्थित थीं। आज यह नदी लुप्त हो गई है और इसे ‘अदृश्य नदी’ कहा जाता है। इलाहाबाद के त्रिवेणी संगम में इसकी अदृश्य धारा की मान्यता है। यह तथ्य उत्तर वैदिक कालीन भौगोलिक और सांस्कृतिक विस्तार को समझने में मदद करता है।

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प्रश्न 21. ऋग्वैदिक आर्यों और उत्तर वैदिक आर्यों की गतिविधियों के केंद्र में क्रमशः कौन से क्षेत्र थे?

(A) गंगा-यमुना दोआब — सप्त सैंधव
(B) सप्त सैंधव — गंगा-यमुना दोआब
(C) दोनों काल में सप्त सैंधव
(D) दोनों काल में गंगा-यमुना दोआब

उत्तर: (B) सप्त सैंधव — गंगा-यमुना दोआब

ऋग्वैदिक काल में आर्यों की गतिविधियों का मुख्य केंद्र सप्त सैंधव क्षेत्र (आधुनिक पंजाब) था, जबकि उत्तर वैदिक काल में यह केंद्र पूर्व की ओर खिसककर गंगा-यमुना दोआब बन गया। यह परिवर्तन भारतीय इतिहास में आर्य सभ्यता के भौगोलिक विकास का सबसे महत्वपूर्ण पहलू माना जाता है। इस बदलाव के साथ-साथ समाज, धर्म और अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। यह तथ्य उत्तर वैदिक काल में आर्यों के पूर्वी विस्तार और उनके सांस्कृतिक एवं आर्थिक विकास का प्रमाण देता है।

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प्रश्न 22. ‘विदेह-माधव कथा’ में अग्नि का क्या प्रतीकात्मक अर्थ है?

(A) युद्ध का प्रतीक
(B) आर्य सभ्यता और कृषि के विस्तार का प्रतीक
(C) यज्ञ परंपरा का प्रतीक
(D) वर्षा का प्रतीक

उत्तर: (B) आर्य सभ्यता और कृषि के विस्तार का प्रतीक

‘विदेह-माधव कथा’ में अग्नि को हाथ में लेकर पूर्व की ओर जाने का प्रतीकात्मक अर्थ यह है कि आर्यों ने पूर्वी भारत के घने जंगलों को अग्नि द्वारा साफ करके कृषि योग्य भूमि बनाया। यह आर्य सभ्यता और कृषि विस्तार का प्रतीक है। लोहे के हल और अग्नि के संयोग से गंगा-यमुना दोआब के घने जंगलों को उपजाऊ कृषि भूमि में परिवर्तित किया गया। यह तथ्य उत्तर वैदिक काल में भौगोलिक विस्तार और कृषि विकास का महत्वपूर्ण प्रमाण है।

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प्रश्न 23. शतपथ ब्राह्मण में ‘रेवा’ नदी का सर्वप्रथम उल्लेख मिलता है — ‘रेवा’ किस नदी का प्राचीन नाम है?

(A) गंगा
(B) यमुना
(C) नर्मदा
(D) गोदावरी

उत्तर: (C) नर्मदा

शतपथ ब्राह्मण में ‘रेवा’ नदी का सर्वप्रथम उल्लेख मिलता है, जो आधुनिक नर्मदा नदी का प्राचीन नाम है। इसी ग्रंथ में दो समुद्रों का भी वर्णन है। नर्मदा का उल्लेख यह दर्शाता है कि उत्तर वैदिक काल में आर्यों की दक्षिणी सीमा विंध्य पर्वतमाला के दक्षिण तक पहुँच गई थी। चूंकि नर्मदा विंध्य के दक्षिण में बहती है, इसलिए इसका उल्लेख भौगोलिक विस्तार और उत्तर वैदिक कालीन आर्य सभ्यता के दक्षिणी सीमाओं का महत्वपूर्ण प्रमाण है।

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प्रश्न 24. उत्तर वैदिक काल में आर्यों की दक्षिणी सीमा के विंध्य के दक्षिण तक पहुँचने का प्रमाण कौन से ग्रंथ से मिलता है?

(A) ऋग्वेद
(B) अथर्ववेद
(C) शतपथ ब्राह्मण
(D) कठोपनिषद्

उत्तर: (C) शतपथ ब्राह्मण

शतपथ ब्राह्मण में ‘रेवा’ (नर्मदा) नदी और दो समुद्रों का उल्लेख मिलता है। नर्मदा नदी विंध्य पर्वतमाला के दक्षिण में बहती है। इसका उल्लेख यह सिद्ध करता है कि उत्तर वैदिक काल में आर्यों की दक्षिणी सीमा विंध्य पर्वतमाला के दक्षिण तक चली गई थी। ऋग्वैदिक काल में विंध्य का कोई उल्लेख नहीं था, जबकि उत्तर वैदिक साहित्य में इसका उल्लेख मिलने लगता है। यह तथ्य आर्यों के भौगोलिक विस्तार और उत्तर भारत में उनके सांस्कृतिक व कृषि विकास का प्रमाण देता है।

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प्रश्न 25. ऋग्वैदिक काल में सबसे छोटी प्रशासकीय इकाई कौन सी थी?

(A) ग्राम
(B) विश
(C) कुल या परिवार
(D) जन

उत्तर: (C) कुल या परिवार

ऋग्वैदिक काल में प्रशासकीय इकाइयों का क्रम इस प्रकार था — कुल (सबसे छोटी), ग्राम, विश और जन (सबसे बड़ी)। कुल या परिवार सबसे छोटी इकाई थी। परिवार पितृसत्तात्मक था और संयुक्त परिवार प्रणाली प्रचलित थी। कुल के मुखिया को कुलप कहा जाता था। यह प्रशासनिक संरचना भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण है और UPSC, BPSC तथा राज्य PSC परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है। यह तथ्य ऋग्वैदिक काल में सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था की समझ के लिए आवश्यक है।

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