मध्यकालीन भारत का इतिहास भाग-5 MCQ-2026
राजपूत काल के टॉप 25 MCQ | 100% Exam में पूछे जाते हैं
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Q1. चंदावर का युद्ध किस नदी के तट पर लड़ा गया?
(A) गंगा नदी
(B) यमुना नदी
(C) सरस्वती नदी
(D) सिंधु नदी
✅ उत्तर: (B) यमुना नदी
📝 चंदावर का युद्ध 1194 ईस्वी में यमुना नदी के तट पर कन्नौज और इटावा के बीच लड़ा गया था। यह युद्ध मुहम्मद गौरी और गाहड़वाल वंश के शासक जयचंद्र के बीच हुआ। इस युद्ध में गौरी की विजय हुई, जिससे उत्तर भारत में उसकी शक्ति और अधिक मजबूत हो गई। चंदावर की हार के बाद कन्नौज पर मुस्लिम सत्ता स्थापित हुई। यह युद्ध इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इससे राजपूत शक्ति को गहरा आघात पहुँचा और गौरी को गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र पर नियंत्रण प्राप्त हुआ।
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Q2. मुहम्मद गौरी ने मुल्तान पर आक्रमण के लिए किस दर्रे का उपयोग किया?
(A) खैबर दर्रा
(B) बोलन दर्रा
(C) गोमल दर्रा
(D) कुर्रम दर्रा
✅ उत्तर: (C) गोमल दर्रा
📝 1175 ईस्वी में मुहम्मद गौरी ने भारत में अपने प्रथम अभियान के दौरान मुल्तान पर आक्रमण किया। इस आक्रमण के लिए उसने गोमल दर्रे का उपयोग किया, जो अफगानिस्तान से भारत में प्रवेश करने का एक महत्वपूर्ण मार्ग था। यह दर्रा सामरिक दृष्टि से सुरक्षित और उपयोगी माना जाता था। मुल्तान उस समय व्यापारिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र था। इस विजय ने गौरी को भारत में आगे के अभियानों के लिए आधार प्रदान किया और उसकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की शुरुआत यहीं से हुई।
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Q3. महमूद गजनवी और मुहम्मद गौरी में मूलभूत अंतर क्या था?
(A) दोनों के धर्म में अंतर था
(B) गजनवी का लक्ष्य लूट था, गौरी का स्थायी साम्राज्य स्थापना
(C) गजनवी भारतीय था, गौरी अफगानी
(D) गौरी अधिक कट्टर था
✅ उत्तर: (B) गजनवी का लक्ष्य लूट था, गौरी का स्थायी साम्राज्य स्थापना
📝 महमूद गजनवी और मुहम्मद गौरी दोनों तुर्क शासक थे, लेकिन उनके उद्देश्य अलग थे। महमूद गजनवी ने भारत पर 17 बार आक्रमण किए, जिनका मुख्य उद्देश्य धन और संपत्ति की लूट था। वह भारत में स्थायी शासन स्थापित करने का इच्छुक नहीं था। इसके विपरीत मुहम्मद गौरी का लक्ष्य भारत में स्थायी मुस्लिम साम्राज्य की स्थापना करना था। उसने प्रशासनिक व्यवस्था बनाई और अपने प्रतिनिधि कुतुबुद्दीन ऐबक को शासन सौंपा। इसी नीति के कारण आगे चलकर दिल्ली सल्तनत की स्थापना संभव हो सकी।
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Q4. पृथ्वीराज चौहान किन स्थानों का शासक था?
(A) दिल्ली और लाहौर
(B) दिल्ली और अजमेर
(C) अजमेर और कन्नौज
(D) दिल्ली और मुल्तान
✅ उत्तर: (B) दिल्ली और अजमेर
📝 पृथ्वीराज चौहान चौहान वंश के प्रसिद्ध और शक्तिशाली शासक थे, जिनका शासन दिल्ली और अजमेर पर था। वे अपनी वीरता और युद्ध कौशल के लिए प्रसिद्ध थे। 1191 ईस्वी में तराइन के प्रथम युद्ध में उन्होंने मुहम्मद गौरी को पराजित किया था। लेकिन 1192 ईस्वी में तराइन के द्वितीय युद्ध में गौरी ने बेहतर रणनीति अपनाकर उन्हें पराजित कर दिया। उनकी पराजय के बाद दिल्ली और अजमेर पर मुस्लिम सत्ता स्थापित हो गई। इस घटना ने भारतीय इतिहास की दिशा बदल दी।
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Q5. मुहम्मद गौरी ने भारत में पहला आक्रमण किस स्थान पर किया?
(A) लाहौर
(B) दिल्ली
(C) मुल्तान
(D) सिंध
✅ उत्तर: (C) मुल्तान
📝 मुहम्मद गौरी ने 1175 ईस्वी में भारत पर अपना पहला आक्रमण मुल्तान पर किया। मुल्तान उस समय करमथियों के अधीन था और व्यापारिक मार्गों पर स्थित एक महत्वपूर्ण केंद्र था। गौरी ने गोमल दर्रे से प्रवेश कर मुल्तान पर अधिकार कर लिया। यह विजय उसके भारतीय अभियानों की शुरुआत थी। मुल्तान पर नियंत्रण स्थापित करने के बाद उसने सिंध और पंजाब की ओर विस्तार किया। इस प्रकार मुल्तान की विजय ने भारत में स्थायी मुस्लिम शासन की नींव रखने की दिशा में पहला कदम साबित किया।
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Q6. तराईन का द्वितीय युद्ध भारतीय इतिहास में क्यों महत्वपूर्ण है?
(A) यह पहला मुस्लिम आक्रमण था
(B) इससे दिल्ली सल्तनत की नींव पड़ी
(C) इसमें पृथ्वीराज ने गौरी को हराया
(D) इससे मुगल साम्राज्य की शुरुआत हुई
✅ उत्तर: (B) इससे दिल्ली सल्तनत की नींव पड़ी
📝 1192 ईस्वी में लड़ा गया तराइन का द्वितीय युद्ध भारतीय इतिहास का निर्णायक मोड़ माना जाता है। इस युद्ध में मुहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को पराजित किया। इस विजय के बाद उत्तर भारत में मुस्लिम सत्ता की स्थायी स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ। गौरी ने अपने विश्वसनीय सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक को शासन सौंपा, जिसने आगे चलकर दिल्ली सल्तनत की स्थापना की। इस युद्ध के परिणामस्वरूप राजपूत शक्ति कमजोर हुई और भारतीय राजनीतिक संरचना में बड़ा परिवर्तन आया।
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Q7. किस युद्ध को “भारतीय इतिहास का निर्णायक युद्ध” कहा जाता है?
(A) तराईन का प्रथम युद्ध
(B) तराईन का द्वितीय युद्ध
(C) चंदावर का युद्ध
(D) पानीपत का प्रथम युद्ध
✅ उत्तर: (B) तराईन का द्वितीय युद्ध
📝 तराइन का द्वितीय युद्ध 1192 ईस्वी में लड़ा गया और इसे भारतीय इतिहास का सबसे निर्णायक युद्ध माना जाता है। इस युद्ध में मुहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को पराजित किया। इसके बाद उत्तर भारत में मुस्लिम शासन की स्थायी नींव पड़ी। इस विजय ने राजपूत शक्ति को गंभीर आघात पहुँचाया और दिल्ली सल्तनत की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया। राजनीतिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक दृष्टि से यह युद्ध भारत के मध्यकालीन इतिहास की दिशा बदलने वाली घटना सिद्ध हुआ।
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Q8. मुहम्मद गौरी के किस सेनापति ने बिहार और बंगाल जीते?
(A) कुतुबुद्दीन ऐबक
(B) इल्तुतमिश
(C) मुहम्मद बिन बख्तियार खिल्जी
(D) बलबन
✅ उत्तर: (C) मुहम्मद बिन बख्तियार खिल्जी
📝 मुहम्मद बिन बख्तियार खिल्जी, कुतुबुद्दीन ऐबक का सेनापति था, जिसे पूर्वी भारत की ओर अभियान के लिए भेजा गया था। उसने लगभग 1200 ईस्वी के आसपास बिहार और बंगाल पर अधिकार स्थापित किया। उसके आक्रमण के दौरान नालंदा और विक्रमशिला जैसे प्रसिद्ध बौद्ध विश्वविद्यालयों को भारी क्षति पहुँची। यह विजय केवल राजनीतिक नहीं थी, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी अत्यंत प्रभावशाली सिद्ध हुई। बंगाल पर नियंत्रण स्थापित करने के बाद मुस्लिम सत्ता पूर्वी भारत तक फैल गई।
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Q9. गौरी साम्राज्य का मूल क्षेत्र कहाँ था?
(A) तुर्किस्तान
(B) ईरान
(C) गौर (अफगानिस्तान)
(D) खुरासान
✅ उत्तर: (C) गौर (अफगानिस्तान)
📝 गौरी साम्राज्य का मूल क्षेत्र वर्तमान अफगानिस्तान में स्थित ‘गौर’ नामक पर्वतीय प्रदेश था। यह क्षेत्र पहले गजनवी साम्राज्य के अधीन एक सामंत राज्य था, लेकिन समय के साथ यहाँ शंसवानी वंश की शक्ति बढ़ती गई। गजनवी सत्ता के कमजोर होने पर गौर स्वतंत्र और शक्तिशाली राज्य बन गया। यहीं से गियासुद्दीन और उसके भाई मुहम्मद गौरी ने अपने साम्राज्य का विस्तार प्रारंभ किया। भारत पर किए गए अभियानों की योजना भी इसी क्षेत्र से बनाई गई थी।
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Q10. तराईन के प्रथम युद्ध (1191 ईस्वी) में पृथ्वीराज चौहान के किस सहयोगी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई?
(A) जयचंद्र
(B) गोविन्दराज
(C) हरिराज
(D) भीम द्वितीय
✅ उत्तर: (B) गोविन्दराज
📝 तराईन के प्रथम युद्ध (1191 ईस्वी) में पृथ्वीराज चौहान के सहयोगी गोविन्दराज ने अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे पृथ्वीराज के निकट संबंधी और विश्वसनीय सेनानायक थे। इस युद्ध में उन्होंने साहसपूर्वक नेतृत्व किया और गौरी की सेना को भारी क्षति पहुँचाई। कहा जाता है कि गौरी स्वयं घायल हुआ और युद्धभूमि छोड़कर भागना पड़ा। गोविन्दराज की वीरता ने राजपूत सेना का मनोबल बढ़ाया।
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Q11. मुहम्मद गौरी के भारत आक्रमण के समय राजपूतों की सबसे बड़ी कमजोरी क्या थी?
(A) सैनिक शक्ति का अभाव
(B) आपसी फूट और असंगठित प्रतिरोध
(C) हथियारों की कमी
(D) विदेशी सहयोग का अभाव
✅ उत्तर: (B) आपसी फूट और असंगठित प्रतिरोध
📝 मुहम्मद गौरी के आक्रमण के समय भारतीय राजपूत राज्यों में आपसी एकता का अभाव था। पृथ्वीराज चौहान और जयचंद्र जैसे शक्तिशाली शासकों के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता थी। वे एक संयुक्त मोर्चा बनाकर विदेशी आक्रमणकारियों का सामना नहीं कर सके। व्यक्तिगत वीरता तो प्रचुर मात्रा में थी, परंतु संगठित रणनीति और सामूहिक नेतृत्व की कमी स्पष्ट थी। यही कारण रहा कि तराईन के द्वितीय युद्ध में गौरी ने अवसर का लाभ उठाया।
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Q12. मुहम्मद गौरी ने अपने सिक्कों पर संस्कृत में लेख क्यों लिखवाए?
(A) संस्कृत उसकी मातृभाषा थी
(B) भारतीयों का विश्वास जीतने और स्थायी शासन हेतु
(C) धार्मिक कारणों से
(D) गजनवी परंपरा का अनुसरण करते हुए
✅ उत्तर: (B) भारतीयों का विश्वास जीतने और स्थायी शासन हेतु
📝 मुहम्मद गौरी ने अपने सिक्कों पर संस्कृत भाषा और नागरी लिपि का प्रयोग करवाया ताकि भारतीय जनता में अपनी स्वीकृति बढ़ा सके। उसने कुछ सिक्कों पर हिंदू प्रतीकों का भी उपयोग किया। इसका उद्देश्य धार्मिक नहीं बल्कि राजनीतिक था। वह समझता था कि स्थायी शासन स्थापित करने के लिए स्थानीय समाज का विश्वास जीतना आवश्यक है। यह नीति महमूद गजनवी से भिन्न थी, जो मुख्यतः लूट पर केंद्रित था।
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Q13. मुहम्मद गौरी के किस अभियान के बाद भारत में बौद्ध धर्म को भारी क्षति पहुँची?
(A) मुल्तान आक्रमण
(B) तराईन का युद्ध
(C) बिहार-बंगाल में मुहम्मद बिन बख्तियार खिल्जी का अभियान
(D) चंदावर का युद्ध
✅ उत्तर: (C) बिहार-बंगाल में मुहम्मद बिन बख्तियार खिल्जी का अभियान
📝 बिहार और बंगाल में मुहम्मद बिन बख्तियार खिल्जी के अभियान का भारतीय सांस्कृतिक इतिहास पर गहरा प्रभाव पड़ा। इस अभियान के दौरान नालंदा, विक्रमशिला और ओदंतपुरी जैसे महान बौद्ध शिक्षण केंद्रों को नष्ट कर दिया गया। इन विश्वविद्यालयों में दूर-दूर से विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने आते थे। इन संस्थानों के विनाश से बौद्ध धर्म की संगठित शैक्षिक संरचना टूट गई। यद्यपि बौद्ध धर्म पूर्णतः समाप्त नहीं हुआ, परंतु उसकी राजनीतिक और शैक्षिक शक्ति लगभग समाप्त हो गई।
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Q14. चंदावर के युद्ध में मुहम्मद गौरी ने किस शासक को पराजित किया?
(A) पृथ्वीराज चौहान
(B) जयचंद्र
(C) भीम द्वितीय
(D) हरिराज
✅ उत्तर: (B) जयचंद्र
📝 चंदावर का युद्ध 1194 ईस्वी में लड़ा गया था जिसमें मुहम्मद गौरी ने कन्नौज के शक्तिशाली गाहड़वाल शासक जयचंद्र को पराजित किया। यह युद्ध तराईन के द्वितीय युद्ध के लगभग दो वर्ष बाद हुआ। जयचंद्र की पराजय के साथ ही गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र पर गौरी का नियंत्रण स्थापित हो गया। इससे उत्तर भारत की प्रमुख राजपूत शक्ति कमजोर हो गई। यह विजय दिल्ली सल्तनत की नींव को और अधिक मजबूत करने वाली सिद्ध हुई।
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Q15. मुहम्मद गौरी की नीति किस शासक से भिन्न थी?
(A) महमूद गजनवी
(B) चंगेज खान
(C) तैमूर
(D) बाबर
✅ उत्तर: (A) महमूद गजनवी
📝 महमूद गजनवी और मुहम्मद गौरी दोनों ने भारत पर आक्रमण किए, परंतु उनके उद्देश्य अलग थे। महमूद गजनवी का मुख्य लक्ष्य धन और संपत्ति की लूट था। वह प्रत्येक आक्रमण के बाद वापस गजनी लौट जाता था। इसके विपरीत मुहम्मद गौरी ने स्थायी शासन स्थापित करने की नीति अपनाई। उसने अपने विश्वसनीय सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक को भारत में प्रशासन सौंपा। इसी नीति के कारण आगे चलकर दिल्ली सल्तनत की स्थापना संभव हुई।
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Q16. तराईन के प्रथम युद्ध में मुहम्मद गौरी को युद्ध छोड़ना क्यों पड़ा?
(A) सेना ने विद्रोह किया
(B) वह घायल हो गया
(C) रसद समाप्त हो गई
(D) संधि करनी पड़ी
✅ उत्तर: (B) वह घायल हो गया
📝 1191 ईस्वी में तराईन के प्रथम युद्ध में पृथ्वीराज चौहान की सेना ने गौरी को पराजित किया। युद्ध के दौरान गौरी गंभीर रूप से घायल हो गया। कहा जाता है कि उसके एक सैनिक ने उसे युद्धभूमि से सुरक्षित बाहर निकाला। यह पराजय गौरी के लिए अपमानजनक थी, किंतु उसने इससे सीख ली। अगले ही वर्ष उसने बेहतर तैयारी और नई रणनीति के साथ पुनः आक्रमण किया। यह घटना उसकी दृढ़ इच्छाशक्ति और संकल्प को दर्शाती है।
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Q17. तराईन की पहली पराजय के बाद गौरी ने क्या किया?
(A) आक्रमण बंद कर दिया
(B) संधि कर ली
(C) सेना पुनर्गठित कर नई रणनीति से लौटा
(D) भारत छोड़ दिया
✅ उत्तर: (C) सेना पुनर्गठित कर नई रणनीति से लौटा
📝 तराईन के प्रथम युद्ध में पराजित होने के बाद गौरी ने हार को स्वीकार कर हार नहीं मानी। उसने अपनी सैन्य कमजोरियों का विश्लेषण किया और घुड़सवार सेना को मजबूत किया। उसने रणनीति बदली और छापामार शैली अपनाई। 1192 ईस्वी में वह पुनः आक्रमण के लिए लौटा और इस बार उसने निर्णायक विजय प्राप्त की। यह उसकी राजनीतिक दूरदर्शिता और रणनीतिक क्षमता का प्रमाण है।
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Q18. गौरी ने सिक्कों पर ‘पृथ्वीराज’ नाम अंकित क्यों करवाया?
(A) सम्मान हेतु
(B) शासन की वैधता स्थापित करने हेतु
(C) धार्मिक कारणों से
(D) परंपरा के कारण
✅ उत्तर: (B) शासन की वैधता स्थापित करने हेतु
📝 तराईन के द्वितीय युद्ध के बाद गौरी ने जो सिक्के जारी किए, उन पर देवनागरी लिपि में ‘पृथ्वीराज’ अंकित कराया गया। इसका उद्देश्य राजनीतिक था। वह चाहता था कि स्थानीय जनता उसे वैध शासक के रूप में स्वीकार करे। पराजित लोकप्रिय शासक के नाम का प्रयोग कर उसने जनता का विश्वास जीतने का प्रयास किया। यह उसकी व्यावहारिक और दूरदर्शी नीति का उत्कृष्ट उदाहरण है।
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Q19. चंदावर का युद्ध किस वर्ष हुआ?
(A) 1192 ई.
(B) 1193 ई.
(C) 1194 ई.
(D) 1195 ई.
✅ उत्तर: (C) 1194 ई.
📝 चंदावर का युद्ध 1194 ईस्वी में हुआ था। यह युद्ध कन्नौज के शासक जयचंद्र और मुहम्मद गौरी के बीच लड़ा गया। तराईन के द्वितीय युद्ध के बाद गौरी ने अपनी विजय यात्रा जारी रखी और दो वर्ष के भीतर कन्नौज पर भी अधिकार कर लिया। इस युद्ध के बाद उत्तर भारत की प्रमुख राजपूत शक्तियाँ लगभग समाप्त हो गईं। इससे मुस्लिम सत्ता का विस्तार और सुदृढ़ हो गया।
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Q20. गौरी की मृत्यु के बाद भारत में सत्ता किसके हाथ में आई?
(A) इल्तुतमिश
(B) बलबन
(C) कुतुबुद्दीन ऐबक
(D) बख्तियार खिल्जी
✅ उत्तर: (C) कुतुबुद्दीन ऐबक
📝 1206 ईस्वी में मुहम्मद गौरी की मृत्यु के बाद भारत में उसके प्रतिनिधि कुतुबुद्दीन ऐबक ने सत्ता संभाली। ऐबक ने गुलाम वंश की स्थापना की, जो दिल्ली सल्तनत का पहला वंश बना। इस प्रकार गौरी द्वारा स्थापित राजनीतिक आधार को स्थायी रूप मिला। ऐबक के शासन से भारत में संगठित मुस्लिम प्रशासन की औपचारिक शुरुआत हुई। यह घटना मध्यकालीन भारतीय इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
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Q21. तराइन का द्वितीय युद्ध कब हुआ था?
(A) 1190 ई.
(B) 1191 ई.
(C) 1192 ई.
(D) 1193 ई.
✅ उत्तर: (C) 1192 ई.
📝 तराइन का द्वितीय युद्ध 1192 ईस्वी में मुहम्मद गोरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच लड़ा गया था। यह युद्ध वर्तमान हरियाणा के करनाल जिले के पास तराइन (तरावड़ी) के मैदान में हुआ। 1191 में तराइन के प्रथम युद्ध में पृथ्वीराज ने गोरी को हराया था, लेकिन इस बार गोरी ने बेहतर रणनीति अपनाई। गोरी की सेना ने घुड़सवार तीरंदाजों का कुशलता से प्रयोग किया और राजपूत सेना को परास्त कर दिया। पृथ्वीराज चौहान को बंदी बना लिया गया और बाद में मृत्युदंड दिया गया। इस युद्ध के परिणामस्वरूप भारत में मुस्लिम शासन की नींव पड़ी और दिल्ली सल्तनत की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ।
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Q22. चंदावर का युद्ध किनके बीच हुआ था?
(A) गौरी और पृथ्वीराज
(B) गौरी और जयचंद
(C) गौरी और भीमदेव
(D) गौरी और कुतुबुद्दीन
✅ उत्तर: (B) गौरी और जयचंद
📝 चंदावर का युद्ध 1194 ईस्वी में मुहम्मद गोरी और कन्नौज के राजा जयचंद (गहड़वाल वंश) के बीच लड़ा गया था। यह युद्ध उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के पास यमुना नदी के तट पर चंदावर नामक स्थान पर हुआ। जयचंद की विशाल सेना के बावजूद गोरी की कुशल सैन्य रणनीति के सामने राजपूत सेना टिक न सकी। जयचंद युद्ध में मारे गए। इस युद्ध के परिणामस्वरूप गंगा-यमुना दोआब और वाराणसी पर मुस्लिम शासन स्थापित हो गया तथा उत्तर भारत में गहड़वाल वंश का अंत हो गया।
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Q23. मोहम्मद गौरी ने भारत में अपने प्रतिनिधि के रूप में किसे नियुक्त किया?
(A) इल्तुतमिश
(B) बलबन
(C) कुतुबुद्दीन ऐबक
(D) रजिया
✅ उत्तर: (C) कुतुबुद्दीन ऐबक
📝 मुहम्मद गोरी ने भारत में अपने प्रतिनिधि के रूप में कुतुबुद्दीन ऐबक को नियुक्त किया था। ऐबक मूलतः एक तुर्क दास था, जो अपनी योग्यता और स्वामिभक्ति के कारण गोरी का विश्वासपात्र बन गया। 1192 में तराइन के द्वितीय युद्ध के बाद गोरी ने ऐबक को भारत का प्रशासन सौंपा। उसने दिल्ली को अपना केंद्र बनाया और धीरे-धीरे उत्तर भारत के बड़े भाग पर नियंत्रण स्थापित किया। 1206 में मुहम्मद गोरी की मृत्यु के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक स्वतंत्र शासक बना और दिल्ली सल्तनत की स्थापना की। उसने प्रसिद्ध कुतुब मीनार का निर्माण भी प्रारंभ करवाया।
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Q24. मोहम्मद गौरी की मृत्यु कब हुई?
(A) 1204 ई.
(B) 1205 ई.
(C) 1206 ई.
(D) 1207 ई.
✅ उत्तर: (C) 1206 ई.
📝 मुहम्मद गोरी की मृत्यु 15 मार्च 1206 ईस्वी को हुई थी। वह सिंधु नदी के तट पर धमयक (वर्तमान पाकिस्तान) नामक स्थान पर नमाज पढ़ते समय खोखर जनजाति के हत्यारों द्वारा मारा गया। गोरी का कोई पुत्र नहीं था, इसलिए उसने अपने दासों को ही अपना उत्तराधिकारी माना था। उसकी मृत्यु के बाद उसका साम्राज्य उसके विभिन्न दासों और सेनापतियों में बंट गया। भारत में कुतुबुद्दीन ऐबक स्वतंत्र शासक बना। मुहम्मद गोरी को भारत में इस्लामी शासन का वास्तविक संस्थापक माना जाता है।
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Q25. तराइन का प्रथम युद्ध किस वर्ष हुआ था?
(A) 1189 ई.
(B) 1190 ई.
(C) 1191 ई.
(D) 1192 ई.
✅ उत्तर: (C) 1191 ई.
📝 तराइन का प्रथम युद्ध 1191 ईस्वी में हुआ था। यह युद्ध मुहम्मद गोरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच हरियाणा के करनाल जिले के पास तराइन के मैदान में लड़ा गया। इस युद्ध में पृथ्वीराज चौहान की राजपूत सेना ने मुहम्मद गोरी को बुरी तरह पराजित किया। गोरी स्वयं घायल हुआ और युद्ध के मैदान से भाग खड़ा हुआ। यह राजपूतों की एक बड़ी विजय थी, परंतु पृथ्वीराज ने गोरी का पीछा नहीं किया। इसी भूल का परिणाम अगले वर्ष 1192 में तराइन के द्वितीय युद्ध में पृथ्वीराज की पराजय और मृत्यु के रूप में सामने आया।