
प्राचीन भारत का इतिहास भाग-41 MCQ-2026
प्राचीन इतिहास MCQ 2026 | नयनार, विष्णु अवतार, मंदिर MCQs 2026
प्रश्न 1: नयनार संत अप्पार किस शासक के समकालीन थे?
✅ उत्तर: (B) महेन्द्रवर्मन प्रथम
प्रश्न 2: नयनार संत सुंदरमूर्ति की उपाधि क्या थी?
✅ उत्तर: (B) ईश्वर मिश्र
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प्रश्न 3: मणिक्कवाचगर द्वारा रचित प्रसिद्ध ग्रंथ का नाम क्या है?
✅ उत्तर: (B) तिरुवाशंगम्
प्रश्न 4: उड़ीसा के कोणार्क का सूर्य मंदिर किस शताब्दी में निर्मित हुआ?
✅ उत्तर: (C) तेरहवीं शताब्दी
उड़ीसा के कोणार्क का सूर्य मंदिर तेरहवीं शताब्दी (1238–64 ई.) में गंग वंशीय शासक नरसिंह देव के शासनकाल में निर्मित हुआ। यह मंदिर उड़ीसा स्थापत्य कला की सर्वोच्च उपलब्धियों में गिना जाता है। इसका निर्माण अत्यंत भव्य और विशाल स्तर पर किया गया है, जो अपनी अद्भुत शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर को रथ के रूप में डिजाइन किया गया है, जिसमें बारह जोड़ी विशाल पत्थर के पहिए और सुंदर नक्काशीदार संरचना है। यह मंदिर भारतीय मंदिर स्थापत्य का उत्कृष्ट और अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करता है।
प्रश्न 5: कोणार्क के सूर्य मंदिर को किस नाम से भी जाना जाता है?
✅ उत्तर: (B) ब्लैक पैगोडा (काला पैगोडा)
कोणार्क के सूर्य मंदिर को ‘काला पैगोडा’ (Black Pagoda) के नाम से भी जाना जाता है। वर्षा और समुद्री हवाओं के प्रभाव से इसके पत्थर काले पड़ गए, जिसके कारण इसे यह नाम मिला। प्राचीन समय में समुद्र में आने वाले नाविक इसे दिशा निर्धारण के लिए उपयोग करते थे। यह मंदिर उड़ीसा शैली में निर्मित है, जो नागर शैली से मिलती-जुलती है। इसकी अद्भुत भव्यता और उत्कृष्ट शिल्पकला आज भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है।
प्रश्न 6: कश्मीर में मार्तंड का सूर्य मंदिर किस शासक ने बनवाया?
✅ उत्तर: (B) ललितादित्य मुक्तापीड़
कश्मीर के कर्कोट वंशीय शासक ललितादित्य मुक्तापीड़ (725–756 ई.) ने श्रीनगर के पास मार्तंड का सूर्य मंदिर बनवाया। यह मंदिर कश्मीरी स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। ललितादित्य एक महान विजेता और कला प्रेमी शासक था, जिसने अपने शासनकाल में कई भव्य निर्माण कराए। इस मंदिर की विशालता और भव्यता आज भी इसके खंडहरों में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। यह हिमालयी क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण सूर्य मंदिर था।
प्रश्न 7: भागवद् धर्म को अन्य किस नाम से जाना जाता है?
✅ उत्तर: (B) पांचरात्र धर्म
भागवद् धर्म को पांचरात्र धर्म या नारायण धर्म के नाम से भी जाना जाता है। ‘पांचरात्र’ शब्द का अर्थ ‘पाँच रातों का’ होता है। यह नाम इसलिए पड़ा क्योंकि इसके मूल सिद्धांत पाँच रातों में प्रकट हुए माने जाते हैं। इस धर्म में भगवान विष्णु तथा उनके अवतारों, विशेषकर भगवान कृष्ण की भक्ति और पूजा की जाती है। यह परंपरा वैदिक और तांत्रिक तत्वों का समन्वय प्रस्तुत करती है तथा भक्ति मार्ग को विशेष महत्व देती है।
प्रश्न 8: मथुरा किस महाजनपद की राजधानी थी?
✅ उत्तर: (C) शूरसेन
मथुरा शूरसेन (सूरसेन) महाजनपद की राजधानी थी। यह यमुना नदी के किनारे स्थित एक प्रमुख व्यापारिक और धार्मिक केंद्र था। यूनानी दूत मेगस्थनीज ने उल्लेख किया कि यहाँ के लोग हेराक्लीज (कृष्ण) और डायोनीसियस (शिव) की पूजा करते थे। मथुरा को भगवान कृष्ण की जन्मभूमि माना जाता है, जिससे यह वैष्णव धर्म का प्रमुख केंद्र बन गया। साथ ही, यह कुषाण काल में एक महत्वपूर्ण कला केंद्र के रूप में भी विकसित हुआ।
प्रश्न 9: कृष्ण किस वंश से संबंधित थे?
✅ उत्तर: (B) यदुवंश (वृष्णि कबीला)
भगवान कृष्ण मथुरा के यदुवंशीय वृष्णि कबीले से संबंध रखते थे। यदुवंश को चंद्रवंश की एक प्रमुख शाखा माना जाता है। वृष्णि एक क्षत्रिय कुल था, जो मथुरा क्षेत्र में शासन करता था और अपनी शक्ति के लिए प्रसिद्ध था। कृष्ण को वासुदेव के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि उनके पिता का नाम वसुदेव था। यह वंश अपनी वीरता, धर्मनिष्ठा और आदर्शों के लिए प्रसिद्ध रहा।
प्रश्न 10: छांदोग्य उपनिषद में कृष्ण को किसका शिष्य बताया गया है?
✅ उत्तर: (B) घोरा अंगिरस
छांदोग्य उपनिषद में कृष्ण को देवकी का पुत्र तथा ऋषि घोरा अंगिरस का शिष्य बताया गया है। यह उल्लेख कृष्ण के ऐतिहासिक अस्तित्व का प्राचीनतम साक्ष्य माना जाता है। घोरा अंगिरस अंगिरस ऋषि परंपरा से संबंधित थे और उनके द्वारा दिए गए उपदेश महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस वर्णन में कृष्ण को एक दार्शनिक और आध्यात्मिक व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत किया गया है, न कि केवल एक देवता के रूप में।
प्रश्न 11: गुप्त वंशीय शासकों ने कौन सी उपाधि धारण की?
✅ उत्तर: (B) परम भागवत
गुप्त वंश के अधिकांश शासकों ने ‘परम भागवत’ की उपाधि धारण की, जो उनकी भगवान विष्णु के प्रति गहरी भक्ति को दर्शाती है। समुद्रगुप्त, चन्द्रगुप्त द्वितीय और कुमारगुप्त जैसे प्रमुख शासक परम भागवत थे। यह उपाधि उनके सिक्कों और अभिलेखों में स्पष्ट रूप से मिलती है। यद्यपि वे वैष्णव धर्म के अनुयायी थे, फिर भी उन्होंने अन्य धर्मों के प्रति सहिष्णुता का परिचय दिया। गुप्त काल को वैष्णव धर्म का स्वर्णिम युग माना जाता है।
प्रश्न 12: विष्णु का कौन सा अवतार समुद्र मंथन में सहायक हुआ?
✅ उत्तर: (B) कूर्म (कछुआ)
विष्णु का कूर्म (कछुआ) अवतार समुद्र मंथन में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। इस अवतार में भगवान विष्णु ने कछुए का रूप धारण कर मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर संभाला, जिसे देवताओं और असुरों ने मथानी के रूप में उपयोग किया। इस मंथन से अमृत, लक्ष्मी तथा अन्य चौदह रत्न प्राप्त हुए। यह अवतार सृष्टि के संतुलन और कल्याण के लिए विष्णु के महान प्रयास और रक्षक स्वरूप को दर्शाता है।
प्रश्न 13: विष्णु के किस अवतार ने हिरण्यकशिपु का वध किया?
✅ उत्तर: (B) नरसिंह (मानव-सिंह)
विष्णु के नरसिंह (आधा मनुष्य, आधा सिंह) अवतार ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा और हिरण्यकशिपु का वध करने के लिए अवतार लिया। हिरण्यकशिपु को ऐसा वरदान प्राप्त था कि उसे न मनुष्य मार सकता है, न पशु; न दिन में, न रात में; न घर के अंदर, न बाहर। तब भगवान विष्णु ने नरसिंह रूप धारण कर संध्या समय दहलीज पर उसका वध किया। यह अवतार धर्म की अधर्म पर विजय और भक्त की रक्षा का शक्तिशाली प्रतीक है।
प्रश्न 14: विष्णु के किस अवतार ने तीन पगों में त्रिलोक नाप लिया?
✅ उत्तर: (B) वामन (बौना)
विष्णु के वामन (बौना ब्राह्मण) अवतार में भगवान विष्णु ने तीन पगों में संपूर्ण ब्रह्मांड को नाप लिया। राजा बलि के यज्ञ में वामन ने तीन पग भूमि का दान माँगा। पहले दो पगों में उन्होंने पृथ्वी और स्वर्ग को नाप लिया, जबकि तीसरा पग राजा बलि ने अपने सिर पर रखवाया। इस अवतार में दानशीलता, विनम्रता और धर्मपालन का संदेश मिलता है तथा अंततः बलि को पाताल का स्वामी बना दिया गया।
प्रश्न 15: परशुराम अवतार का मुख्य उद्देश्य क्या था?
✅ उत्तर: (B) क्षत्रियों का संहार
परशुराम (फरसा धारण करने वाले राम) अवतार का मुख्य उद्देश्य अत्याचारी क्षत्रियों का संहार करना था। भगवान परशुराम ने इक्कीस बार पृथ्वी को क्षत्रियों से रहित किया। यह उन्होंने अपने पिता जमदग्नि की हत्या के प्रतिशोध में प्रतिज्ञा लेकर किया था। यह अवतार शक्ति के दुरुपयोग करने वालों को दंड मिलने का संदेश देता है। साथ ही, परशुराम को चिरंजीवी माना जाता है, जो आज भी जीवित माने जाते हैं।
प्रश्न 16: राम अवतार का मुख्य उद्देश्य किसका वध करना था?
✅ उत्तर: (B) रावण
राम अवतार (अयोध्या के राजकुमार) का मुख्य उद्देश्य लंका के राक्षस राज रावण का वध करना था। भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है, जिन्होंने धर्म, सत्य और न्याय की स्थापना की। रामायण में उनके जीवन का विस्तृत वर्णन मिलता है। उनका चरित्र आदर्श शासक, आदर्श पुत्र और आदर्श पति का प्रतीक है। राम भक्ति विशेष रूप से उत्तर भारत में अत्यधिक प्रचलित है।
प्रश्न 17: बुद्ध अवतार को क्यों शामिल किया गया?
✅ उत्तर: (B) पशु बलि रोकने
बुद्ध को विष्णु के नौवें अवतार के रूप में शामिल किया गया, जिससे पशु बलि की प्रथा को रोकने का संदेश दिया गया। यह कदम बौद्ध धर्म को हिन्दू धर्म में समाहित करने का प्रयास भी माना जाता है। कुछ विद्वानों के अनुसार, यह ब्राह्मणवादी परंपरा द्वारा बौद्ध धर्म को कमजोर करने की रणनीति थी। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि बुद्ध ने लोगों को भ्रमित करने के लिए अवतार लिया। यह विचार अवतारवाद की लचीलापन और व्यापकता को दर्शाता है।
प्रश्न 18: अलवार और आचार्य में मुख्य अंतर क्या था?
✅ उत्तर: (B) भक्त और विद्वान का
अलवार संत पण्डित या आचार्य न होकर भक्त होते थे, जो भावनात्मक भक्ति पर विशेष बल देते थे। वे स्वयं को भगवान में लीन रखकर उपासना और भक्ति मार्ग का उपदेश देते थे। इसके विपरीत आचार्य विद्वान और पण्डित होते थे, जो अपने ग्रंथों के माध्यम से तर्क और दर्शन प्रस्तुत करते थे। अलवार संत अपनी रचनाएँ सरल तमिल भाषा में गाते थे, जबकि आचार्य मुख्यतः संस्कृत भाषा में अपने विचार व्यक्त करते थे।
प्रश्न 19: शैव धर्म का सबसे प्राचीन संप्रदाय कौन सा माना जाता है?
✅ उत्तर: (B) पाशुपत
पाशुपत सम्प्रदाय शैवों का सबसे प्राचीन संप्रदाय माना जाता है। इसके प्रवर्तक लकुलीश थे, जिन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है। ‘पाशुपत’ शब्द का अर्थ ‘पशुओं का स्वामी’ है, जो शिव की उपाधि ‘पशुपति’ से संबंधित है। यह संप्रदाय योग, तपस्या और वैराग्य पर विशेष बल देता है। पाशुपत सूत्र इस संप्रदाय का प्रमुख और मूल ग्रंथ माना जाता है।
प्रश्न 20: कालामुख सम्प्रदाय की क्या विशेषता थी?
✅ उत्तर: (B) कापालिकों से भी अधिक अतिवादी
कालामुख सम्प्रदाय के अनुयायी कापालिकों के समान थे, किन्तु उन्हें और अधिक अतिवादी तथा भयंकर प्रवृत्ति का माना जाता है। ‘कालामुख’ का अर्थ ‘काला मुख’ या ‘काली आभा’ होता है। ये साधक अपने माथे पर काली राख लगाते थे, जो उनकी पहचान थी। उनकी साधना पद्धति अत्यंत कठोर, तपस्वी और रहस्यमय मानी जाती थी। यह सम्प्रदाय मुख्यतः दक्षिण भारत में प्रचलित था।
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प्रश्न 21: तिरुवाशंगम् ग्रंथ का क्या महत्व है?
✅ उत्तर: (B) नयनारों के लिए उपनिषद् के समान
मणिक्कवाचगर द्वारा रचित ‘तिरुवाशंगम्’ का नयनार संतों के जीवन में वही महत्व है, जो उपनिषद् का हिन्दू जन-जीवन में माना जाता है। यह ग्रंथ शैव भक्ति साहित्य का सर्वोच्च काव्य माना जाता है। इसमें भगवान शिव के प्रति गहन प्रेम, समर्पण और भक्ति की अत्यंत मार्मिक अभिव्यक्ति मिलती है। यह कृति दार्शनिक गहराई और भावनात्मक तीव्रता का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है तथा तमिल साहित्य में विशेष स्थान रखती है।
प्रश्न 22: कोणार्क के सूर्य मंदिर का निर्माण किस शासक ने करवाया?
✅ उत्तर: (B) नरसिंह देव
उड़ीसा के गंग वंशीय शासक नरसिंह देव (1238–1264 ई.) ने कोणार्क के सूर्य मंदिर का निर्माण करवाया। यह मंदिर सूर्य देव के रथ के रूप में निर्मित है, जिसमें बारह जोड़ी विशाल पहिए और सात घोड़े दर्शाए गए हैं, जो सूर्य के रथ का प्रतीक हैं। यह मंदिर भारतीय मंदिर स्थापत्य का अद्वितीय और उत्कृष्ट उदाहरण है। साथ ही, इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में भी मान्यता प्राप्त है।
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प्रश्न 23: मोढेरा का सूर्य मंदिर किस राज्य में स्थित है?
✅ उत्तर: (C) गुजरात
मोढेरा का सूर्य मंदिर गुजरात राज्य में स्थित है, जिसका निर्माण सोलंकी वंश के राजा भीम प्रथम ने लगभग 1026 ई. के आसपास करवाया था। यह मंदिर पुष्पावती नदी के किनारे स्थित है और अपनी उत्कृष्ट वास्तुकला एवं मूर्तिकला के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर परिसर में स्थित भव्य सूर्य कुंड इसकी विशेषता है, जो अत्यंत सुंदर और कलात्मक है। यह मंदिर पश्चिमी भारत में सूर्य पूजा का एक प्रमुख धार्मिक केंद्र माना जाता था।
प्रश्न 24: चतुर्व्यूह की अवधारणा में कौन शामिल नहीं है?
✅ उत्तर: (C) साम्ब
चतुर्व्यूह की अवधारणा में वासुदेव (कृष्ण), संकर्षण (बलराम), प्रद्युम्न और अनिरुद्ध शामिल हैं, जो वैष्णव दर्शन के महत्वपूर्ण अंग माने जाते हैं। साम्ब को कुष्ठ रोग हो जाने के कारण पंचवृष्णि वीरों से हटा दिया गया था। इस सिद्धांत के अनुसार, प्रत्येक व्यूह विशेष गुणों और शक्तियों का प्रतिनिधित्व करता है। यह अवधारणा भगवान विष्णु के विभिन्न रूपों और उनके कार्यों को समझाने का एक महत्वपूर्ण दार्शनिक आधार प्रदान करती है।
प्रश्न 25: हेलियोडोरस के बेसनगर अभिलेख में किस देवता का उल्लेख है?
✅ उत्तर: (C) वासुदेव
हेलियोडोरस के बेसनगर (विदिशा) गरुड़ स्तम्भ अभिलेख में वासुदेव (कृष्ण) का उल्लेख मिलता है। हेलियोडोरस ने स्वयं को ‘भागवत’ (वैष्णव) कहा है और वासुदेव के सम्मान में गरुड़ स्तम्भ स्थापित किया। यह अभिलेख भागवत धर्म का सबसे प्रारंभिक अभिलेखीय साक्ष्य माना जाता है। यह एक यूनानी द्वारा भारतीय धर्म को अपनाने का महत्वपूर्ण प्रमाण है तथा इसका काल दूसरी शताब्दी ई.पू. माना जाता है।
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