UPSC/SSC/PSC के लिए 25 High-Scoring वैष्णव और शैव MCQs 2026

नटराज शिव की नृत्य मूर्ति – cosmic dance, high scoring MCQs

प्राचीन भारत का इतिहास भाग-40 MCQ-2026

UPSC/SSC/PSC के लिए 25 High-Scoring वैष्णव और शैव MCQs 2026

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प्रश्न 1: विष्णु का सर्वप्रथम उल्लेख किस वेद में मिलता है?

(A) यजुर्वेद
(B) सामवेद
(C) ऋग्वेद
(D) अथर्ववेद

उत्तर: (C) ऋग्वेद

📝 विष्णु का सर्वप्रथम उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है, हालांकि वैष्णव धर्म ने अपनी महत्ता छठी शताब्दी ई.पू. में स्थापित की। प्रारंभ में विष्णु एक गौण देवता थे, लेकिन बाद में वे प्रमुख देवता बन गए। वैष्णव धर्म को भागवद् धर्म, नारायण धर्म या पांचरात्र धर्म के नाम से भी जाना जाता है। यह धर्म भगवान कृष्ण की पूजा पर केंद्रित है। इस धर्म की परंपरा में भक्ति को सर्वोच्च माना गया और भक्तों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक अनुष्ठान जैसे पूजा, पाठ और उत्सव आयोजित किए गए। वैष्णव धर्म का प्रभाव भारतीय इतिहास, साहित्य और कला पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
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प्रश्न 2: कृष्ण का प्राचीनतम उल्लेख किस उपनिषद में मिलता है?

(A) बृहदारण्यक उपनिषद
(B) छांदोग्य उपनिषद
(C) कठोपनिषद
(D) ईशोपनिषद

उत्तर: (B) छांदोग्य उपनिषद

📝 कृष्ण का प्राचीनतम उल्लेख छांदोग्य उपनिषद में मिलता है, जिसमें उन्हें देवकी का पुत्र और ऋषि घोरा अंगिरस का शिष्य बताया गया है। यह उल्लेख महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कृष्ण के ऐतिहासिक अस्तित्व को प्रमाणित करता है। हालांकि, इस समय वे देवता के रूप में नहीं, बल्कि मानव व्यक्तित्व के रूप में वर्णित हैं। इस संदर्भ से पता चलता है कि कृष्ण की जीवन गाथा और उनकी शिक्षाएँ प्राचीन भारतीय धार्मिक परंपराओं में प्रारंभिक रूप से मानवीय अनुभव और सामाजिक संदर्भ के साथ जुड़ी थीं, जो बाद में वैष्णव धर्म में देवत्व के रूप में विकसित हुईं।
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प्रश्न 3: किस व्याकरणाचार्य के ग्रन्थ में कृष्ण को भगवान के रूप में पूजे जाने की सर्वप्रथम जानकारी मिलती है?

(A) पतंजलि
(B) पाणिनी
(C) कात्यायन
(D) भर्तृहरि

उत्तर: (B) पाणिनी

📝 पाणिनी कृत ‘अष्टाध्यायी’ (पांचवीं शताब्दी ई.पू.) में कृष्ण को भगवान के रूप में पूजे जाने की सर्वप्रथम जानकारी मिलती है, जिसमें वासुदेव के पूजकों को ‘वासुदेव पूजक‘ कहा गया है; पाणिनी गांधार के रहने वाले थे और उन्होंने संस्कृत व्याकरण का पहला व्यवस्थित ग्रन्थ लिखा, जो वैष्णव धर्म के विकास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। इस ग्रन्थ से यह स्पष्ट होता है कि प्राचीन काल में कृष्ण की पूजा और धार्मिक प्रतिष्ठा विद्वानों और समाज में पहले से स्थापित थी और बाद में वैष्णव परंपरा का आधार बनी।
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प्रश्न 4: मेगस्थनीज ने किस देवता को ‘हेराक्लीज’ कहकर संबोधित किया?

(A) शिव
(B) विष्णु
(C) कृष्ण
(D) ब्रह्मा

उत्तर: (C) कृष्ण

📝 चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में आए यूनानी राजदूत मेगस्थनीज ने मथुरा के लोगों द्वारा ‘हेराक्लीज’ (कृष्ण) और ‘डायोनीसियस’ (शिव) की पूजा का विस्तार से उल्लेख किया है, जो यूनानी-भारतीय सांस्कृतिक संपर्क का अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक साक्ष्य माना जाता है; मेगस्थनीज ने इस ग्रंथ में भारतीय देवताओं को यूनानी देवताओं से तुलना करके वर्णित किया ताकि उनके धर्म और पूजा पद्धति को समझाया जा सके; यह घटना तीसरी-चौथी शताब्दी ई.पू. की है और यह प्राचीन भारत में वैष्णव और शैव पूजा की स्थिति के बारे में ठोस जानकारी देती है, साथ ही मौर्यकालीन धार्मिक और सामाजिक परंपराओं को उजागर करती है।
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प्रश्न 5: पतंजलि ने किस ग्रन्थ पर ‘महाभाष्य’ नामक टीका की रचना की?

(A) निरुक्त
(B) अष्टाध्यायी
(C) वार्तिक
(D) शिक्षा

उत्तर: (B) अष्टाध्यायी

📝 शुंग वंश के शासक पुष्यमित्र शुंग के पुरोहित पतंजलि (द्वितीय शताब्दी ई.पू.) ने पाणिनी कृत ‘अष्टाध्यायी’ पर ‘महाभाष्य’ नामक प्रसिद्ध टीका लिखी, जो संस्कृत व्याकरण का अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रन्थ माना जाता है; इस टीका में पाणिनी के सूत्रों की विस्तृत व्याख्या दी गई है और साथ ही तत्कालीन समाज, धर्म, संस्कृति, धार्मिक आचार और भाषाई परंपराओं की गहन जानकारी मिलती है, जिससे यह न केवल व्याकरण अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि प्राचीन भारतीय जीवन और धार्मिक व्यवहार को समझने का भी एक मूल्यवान स्रोत है और भारत के प्राचीन शास्त्रीय ज्ञान का प्रमुख साक्ष्य भी माना जाता है।
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प्रश्न 6: भागवत् धर्म के बारे में जानकारी देने वाला पहला अभिलेखीय साक्ष्य कौन सा है?

(A) जूनागढ़ अभिलेख
(B) हेलियोडोरस का बेसनगर गरुड़ स्तम्भ अभिलेख
(C) रुद्रदामन का गिरनार अभिलेख
(D) अशोक का कलिंग अभिलेख

उत्तर: (B) हेलियोडोरस का बेसनगर गरुड़ स्तम्भ अभिलेख

📝 हेलियोडोरस का बेसनगर (विदिशा, मध्य प्रदेश) का गरुड़ स्तम्भ अभिलेख भागवत् धर्म का पहला अभिलेखीय साक्ष्य माना जाता है; हेलियोडोरस तक्षशिला के यूनानी शासक एण्टीयाल्कीड्स का दूत था और वह शुंग शासक भागभद्र के दरबार में विदिशा आया था; इस अभिलेख में हेलियोडोरस ने स्वयं को भागवत (वैष्णव) कहा है, जो विदेशी व्यक्ति द्वारा भारतीय धर्म में धार्मिक रूपांतरण का स्पष्ट प्रमाण है और यह भारत-यूनानी सांस्कृतिक आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण साक्ष्य भी प्रस्तुत करता है, जिससे यह वैष्णव धर्म के प्रारंभिक अभिलेखीय प्रमाण के रूप में ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत मूल्यवान माना जाता है।
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प्रश्न 7: हेलियोडोरस किस यूनानी शासक का दूत था?

(A) डेमेट्रियस
(B) मिनांडर
(C) एण्टीयाल्कीड्स
(D) यूक्रेटाइड्स

उत्तर: (C) एण्टीयाल्कीड्स

📝 हेलियोडोरस तक्षशिला के यूक्रेटाइडीज वंशीय यूनानी शासक एण्टीयाल्कीड्स का दूत था और वह शुंग वंश के नौवें शासक भागभद्र के दरबार में विदिशा (बेसनगर) आया; उसने वहाँ वासुदेव (कृष्ण) के सम्मान में एक गरुड़ स्तम्भ स्थापित किया, जो भारत-यूनानी सांस्कृतिक आदान-प्रदान का उत्कृष्ट उदाहरण है और यह दूसरी शताब्दी ई.पू. का महत्वपूर्ण ऐतिहासिक साक्ष्य भी प्रस्तुत करता है, जो वैष्णव धर्म के प्रारंभिक अभिलेखीय प्रमाण के रूप में अत्यंत मूल्यवान है और उस समय की राजनीतिक एवं धार्मिक परिस्थितियों को समझने में मदद करता है।
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प्रश्न 8: पंचवृष्णि वीरों का एक साथ उल्लेख किस अभिलेख में मिलता है?

(A) मोरा कुआं अभिलेख
(B) नानाघाट अभिलेख
(C) घोसुंडी अभिलेख
(D) हाथीगुम्फा अभिलेख

उत्तर: (A) मोरा कुआं अभिलेख

📝 तोषा नामक महिला द्वारा मथुरा के पास मोरा गाँव के एक कुएं की दीवार पर खुदवाए गए अभिलेख में पंचवृष्णि वीरों का एक साथ उल्लेख मिलता है; ये पाँच वीर हैं – संकर्षण (बलराम), प्रद्युम्न, अनिरुद्ध, साम्ब और वासुदेव (कृष्ण); यह अभिलेख वैष्णव धर्म के विकास में पंचवीर पूजा परंपरा को दर्शाता है, जो बाद में चतुर्व्यूह में परिवर्तित हुई, और यह प्रारंभिक वैष्णव धार्मिक प्रथाओं तथा धार्मिक-सांस्कृतिक इतिहास को समझने का महत्वपूर्ण स्रोत है।
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प्रश्न 9: पंचवृष्णि वीरों से किसे बाद में हटा दिया गया?

(A) संकर्षण
(B) प्रद्युम्न
(C) साम्ब
(D) अनिरुद्ध

उत्तर: (C) साम्ब

📝

पौराणिक मान्यता के अनुसार साम्ब को कुष्ठ रोग हो जाने के कारण उन्हें पंचवृष्णि वीरों से हटा दिया गया; इसके बाद भागवद् धर्म में ‘चतुर्व्यूह’ की अवधारणा विकसित हुई जिसमें वासुदेव, संकर्षण, प्रद्युम्न और अनिरुद्ध शामिल हैं; इस परिवर्तन ने वैष्णव धर्म में पंचवीर पूजा परंपरा को पूर्ण रूप से बदलकर धार्मिक शुद्धता और पवित्रता की नई अवधारणा स्थापित की; इससे सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं में समग्र सुधार हुआ और वैष्णव धर्म के इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घटना मानी जाती है।

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प्रश्न 10: वैष्णव धर्म किस काल में अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंचा?

(A) मौर्य काल
(B) गुप्त काल
(C) कुषाण काल
(D) वर्धन काल

उत्तर: (B) गुप्त काल

📝

गुप्तकाल (चौथी-छठी शताब्दी ई.) में वैष्णव धर्म अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंचा, इस दौरान अधिकांश गुप्त शासक भागवत धर्मानुयायी थे और उन्होंने स्वयं को ‘परम भागवत’ की उपाधि दी; उनका राजकीय चिन्ह गरुड़ था, जो विष्णु का वाहन माना जाता है; इस काल में विष्णु के दस अवतारों की अवधारणा व्यापक रूप से प्रसिद्ध हुई, साथ ही मंदिर निर्माण, मूर्तिकला और साहित्य में भी वैष्णव धर्म का प्रभाव अत्यंत स्पष्ट था; गुप्तकाल में यह धार्मिक और सांस्कृतिक समृद्धि वैष्णव धर्म की लोकप्रियता और सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व को दर्शाती है, जिससे यह धर्म साम्राज्य और समाज में गहराई से स्थापित हुआ।

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प्रश्न 11: गुप्त वंशीय शासकों का राजकीय चिन्ह क्या था?

(A) सिंह
(B) गरुड़
(C) हाथी
(D) बैल

उत्तर: (B) गरुड़

📝

गुप्त वंश के शासकों का राजकीय चिन्ह गरुड़ था, जो विष्णु का वाहन माना जाता है और उनकी वैष्णव धर्म के प्रति निष्ठा को स्पष्ट रूप से दर्शाता है; गुप्त सिक्कों और अभिलेखों में गरुड़ का चित्रण मिलता है और गरुड़ स्तम्भ वैष्णव मंदिरों की एक प्रमुख विशेषता बन गए; यह प्रतीक शक्ति, गति और भक्ति का प्रतिनिधित्व करता है, साथ ही सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को भी दर्शाता है, जो गुप्तकाल में वैष्णव धर्म के व्यापक प्रभाव और समाज में उसकी लोकप्रियता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है और मंदिर कला तथा पूजा परंपरा में स्थायी योगदान देता है।

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प्रश्न 12: विष्णु के दस अवतारों में प्रथम अवतार कौन सा है?

(A) कूर्म
(B) मत्स्य
(C) वराह
(D) वामन

उत्तर: (B) मत्स्य

📝

विष्णु का प्रथम अवतार मत्स्य (मछली) अवतार है, जिसे जलप्रलय से पृथ्वी को बचाने वाला अवतार माना जाता है; इस अवतार में विष्णु ने मनु की नाव को महाप्रलय से सुरक्षित रखा और वेदों की रक्षा की, जिससे धर्म और सृष्टि की स्थिरता बनी रही; यह अवतार सृष्टि की रक्षा, धर्म की सुरक्षा और मानवता के उद्धार का प्रतीक है; मत्स्य पुराण में इस अवतार का विस्तृत वर्णन मिलता है, जो वैष्णव धर्म में अवतार सिद्धांत के महत्व को दर्शाता है; इसे धार्मिक परंपराओं, भक्ति और मंदिर कला में भी आदर्श के रूप में चित्रित किया गया है, और यह विश्वव्यापी न्याय और धर्म की स्थापना का संदेश देता है।

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प्रश्न 13: गुप्त काल में विष्णु का कौन सा अवतार सर्वाधिक लोकप्रिय हुआ?

(A) मत्स्य
(B) कूर्म
(C) वराह
(D) नरसिंह

उत्तर: (C) वराह

📝

गुप्त काल में विष्णु का वराह (सूअर) अवतार अत्यंत लोकप्रिय हुआ; इस अवतार में विष्णु ने हिरण्याक्ष दैत्य का वध किया और पृथ्वी को समुद्र से बाहर निकाला, जिससे धर्म और पृथ्वी की सुरक्षा सुनिश्चित हुई; उदयगिरि (मध्य प्रदेश) की गुफाओं में इस अवतार की विशाल वराह मूर्तियां आज भी देखने को मिलती हैं, जो वैष्णव धर्म में इस अवतार की महत्ता को दर्शाती हैं; यह अवतार राजसत्ता द्वारा प्रजा की सुरक्षा, धर्म की स्थापना और सत्य के पक्ष में शक्ति के प्रयोग का प्रतीक माना जाता था; गुप्त शासकों द्वारा इसे राजकीय संरक्षण और मंदिर कला में प्रदर्शित किया गया और यह अवतार सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से आदर्श बन गया।

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प्रश्न 14: विष्णु के दस अवतारों में नौवां अवतार किसे माना जाता है?

(A) कृष्ण
(B) बुद्ध
(C) कल्कि
(D) परशुराम

उत्तर: (B) बुद्ध

📝

विष्णु के दस अवतारों में बुद्ध को नौवें अवतार के रूप में शामिल किया गया है; यह कदम बौद्ध धर्म को हिन्दू धर्म में समाहित करने का प्रयास माना जाता है और इससे दोनों धर्मों के बीच धार्मिक सामंजस्य स्थापित हुआ; ऐसा भी कहा जाता है कि बुद्ध ने पशु बलि को रोकने और अहिंसा का संदेश फैलाने के उद्देश्य से अवतार लिया; हालांकि, विभिन्न परंपराओं में बलराम को भी नौवां अवतार माना जाता है, जो इस सिद्धांत की लचीलापन और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है; यह अवतार धर्म, नैतिकता और धार्मिक समरसता के प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठित है; इस प्रकार, विष्णु अवतार सिद्धांत में ऐतिहासिक, धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से विविधता का महत्वपूर्ण योगदान देखने को मिलता है।

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प्रश्न 15: कल्कि अवतार का प्रतीक चिन्ह क्या है?

(A) काला घोड़ा
(B) सफेद घोड़ा
(C) लाल घोड़ा
(D) नीला घोड़ा

उत्तर: (B) सफेद घोड़ा

📝

कल्कि अवतार, जो अभी आना बाकी है, का प्रतीक चिन्ह सफेद घोड़े पर सवार होकर हाथ में तलवार लिए आना है; इसे मैत्रेय (बौद्ध धर्म के भविष्य के बुद्ध) के प्रतीक के समान माना जाता है; कल्कि को कलियुग के अंत में धर्म की पुनर्स्थापना और अधर्म का नाश करने के लिए अवतार लेना माना जाता है; यह अवतार न्याय, धर्म और सत्य की अंतिम विजय का प्रतीक है; हिन्दू धर्मशास्त्र में कल्कि के आगमन को समाज में धार्मिक और नैतिक व्यवस्था बहाल करने वाला महत्वपूर्ण भविष्यवाणी माना गया है; यह अवतार सर्वधर्म समरसता और आदर्श शासन का संदेश देता है और अधर्म पर धर्म की स्थायी विजय की आशा व्यक्त करता है।

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प्रश्न 16: दक्षिण भारत में अलवार संतों का उदय किस वंश के शासनकाल में हुआ?

(A) चोल
(B) पांड्य
(C) पल्लव
(D) चालुक्य

उत्तर: (C) पल्लव

📝

दक्षिण भारत में पल्लवों के शासनकाल (छठी-नौवीं शताब्दी ई.) में अलवार और नयनार संतों का उदय हुआ; अलवार संत विशेष रूप से वैष्णव धर्म के भक्त थे और उन्होंने भक्ति आंदोलन को बढ़ावा दिया; इस भक्ति आंदोलन ने दक्षिण भारत के धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को गहराई से प्रभावित किया; संतों ने जाति व्यवस्था की कठोरता को चुनौती दी और भक्ति मार्ग को सर्वसुलभ बनाया; उन्होंने साधारण जनता में ईश्वर भक्ति का संदेश फैलाया, भक्ति साहित्य और काव्य की रचना की, और लोकधर्म और आध्यात्मिक जागरूकता को प्रोत्साहित किया; अलवारों की शिक्षाएँ ईश्वर प्रेम, नैतिकता और सामाजिक समरसता पर केंद्रित थीं; इस काल में भक्ति ने दक्षिण भारतीय संस्कृति और मंदिर परंपरा में स्थायी प्रभाव डाला।

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प्रश्न 17: अलवार संतों की कुल संख्या कितनी थी?

(A) 10
(B) 12
(C) 15
(D) 18

उत्तर: (B) 12

📝

अलवार संतों की कुल संख्या 12 थी, जिनमें अंडाल, नाम्मालवार और कुलशेखर प्रमुख थे; इन संतों ने तमिल भाषा में भक्ति काव्य की रचना की और विष्णु के विभिन्न रूपों की स्तुति की; अलवार का अर्थ है ‘ईश्वर में डूबा हुआ’; इन संतों ने हजारों पद रचे, जो ‘नालायिर दिव्य प्रबन्धम्’ नामक संग्रह में संकलित हैं; उनकी रचनाएँ भक्ति, प्रेम, निष्ठा और ईश्वर में आत्मसमर्पण का संदेश देती हैं; इनकी काव्य रचनाएँ दक्षिण भारत की धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा को प्रभावित करती हैं; अलवार संतों का योगदान वैष्णव धर्म के विकास और मंदिर संस्कृति में महत्वपूर्ण माना जाता है और उनकी शिक्षाएँ आज भी भक्ति मार्ग और धार्मिक अभ्यास में मार्गदर्शक हैं।

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प्रश्न 18: अंडाल को किस नाम से भी जाना जाता है?

(A) दक्षिण भारत की मीरा
(B) दक्षिण भारत की राधा
(C) तमिल की संत
(D) विष्णु की भक्त

उत्तर: (A) दक्षिण भारत की मीरा

📝

अंडाल एकमात्र महिला अलवार संत थीं, जिन्हें ‘दक्षिण भारत की मीरा’ कहा जाता है; उन्होंने विष्णु (रंगनाथ) के प्रति अटूट प्रेम और भक्ति व्यक्त की; उनकी रचनाएँ ‘तिरुप्पावै’ और ‘नाच्चियार तिरुमोळि’ अत्यंत प्रसिद्ध हैं; वे आठवीं शताब्दी में हुईं और उनकी भक्ति भावना उत्तर भारत की मीरा से तुलनीय है; अंडाल ने अपने संपूर्ण जीवन को विष्णु भक्ति में समर्पित किया और संगीत, काव्य और भक्ति रचनाओं के माध्यम से वैष्णव धर्म को दक्षिण भारत में गहराई से प्रभावित किया; उनकी रचनाएँ सामाजिक और धार्मिक चेतना का प्रतीक हैं और भक्ति मार्ग के लिए मार्गदर्शक मानी जाती हैं।

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प्रश्न 19: अलवार संत कुलशेखर किस राज्य के शासक थे?

(A) तमिलनाडु
(B) केरल
(C) कर्नाटक
(D) आंध्र

उत्तर: (B) केरल

📝

कुलशेखर केरल के शासक थे और एक प्रमुख अलवार संत थे; उन्होंने अपना राज्य छोड़कर विष्णु भक्ति में जीवन समर्पित कर दिया; उनकी रचना ‘पेरुमाळ तिरुमोळि’ अत्यंत प्रसिद्ध है; वे राम भक्त थे और राम के प्रति अपनी भक्ति में विभिन्न पात्रों की भूमिका निभाते थे; उनका जीवन त्याग, भक्ति और सेवा का उदाहरण है; कुलशेखर ने अपने संपूर्ण जीवन को धार्मिक कर्तव्य और वैष्णव परंपरा के प्रचार में लगाया; उनकी शिक्षाएँ भक्ति मार्ग और सदाचार के लिए मार्गदर्शक मानी जाती हैं और दक्षिण भारत में वैष्णव धर्म की स्थापनाओं में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।

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प्रश्न 20: शिव से संबंधित धर्म को क्या कहा जाता है?

(A) वैष्णव धर्म
(B) शैव धर्म
(C) शाक्त धर्म
(D) स्मार्त धर्म

उत्तर: (B) शैव धर्म

📝

शिव से संबंधित धर्म को शैव धर्म कहा जाता है और इसके अनुयायियों को शैव कहते हैं; भगवान शिव शैवों के प्रधान इष्टदेव हैं; शैव धर्म भारत के प्राचीनतम धर्मों में से एक है; सिंधु घाटी सभ्यता में पशुपति मुहर शैव परंपरा का प्रारंभिक साक्ष्य मानी जाती है; यह धर्म योग, तपस्या और त्याग पर बल देता है; शैव धर्म ने भारतीय सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक जीवन में गहरी छाप छोड़ी है; इसके संत, संप्रदाय और साधना पद्धतियाँ शैव परंपरा की विविधता और समृद्धि को दर्शाती हैं और पूरे भारत में आज भी इसका प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।

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प्रश्न 21: शैव धर्म के उदय की ठोस ऐतिहासिक जानकारी किस ग्रंथ से मिलती है?

(A) अर्थशास्त्र
(B) इंडिका
(C) मुद्राराक्षस
(D) अष्टाध्यायी

उत्तर: (B) इंडिका

📝

शैव धर्म के उदय की ठोस ऐतिहासिक जानकारी चौथी शताब्दी ई.पू. में मेगस्थनीज के ग्रंथ ‘इंडिका’ से मिलती है; इस ग्रंथ में डायोनिसियस (शिव) और हेराक्लीज (कृष्ण) नामक दो भारतीय देवताओं का वर्णन है; यह ग्रंथ मौर्यकालीन भारत की धार्मिक स्थिति का महत्वपूर्ण विदेशी साक्ष्य है; मेगस्थनीज ने भारतीय धर्म और धार्मिक परंपराओं को यूनानी दृष्टिकोण से समझाने का प्रयास किया; इस ग्रंथ से शैव और वैष्णव धर्म के प्रारंभिक प्रभाव, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और धार्मिक दृष्टिकोणों की जानकारी मिलती है, जो प्राचीन भारतीय धार्मिक इतिहास का महत्वपूर्ण प्रमाण है।

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प्रश्न 22: पाणिनी के अष्टाध्यायी में कितने प्रकार के शैव सम्प्रदायों का उल्लेख है?

(A) दो
(B) तीन
(C) चार
(D) पाँच

उत्तर: (C) चार

📝

पाणिनी के ‘अष्टाध्यायी’ में चार प्रकार के शैव सम्प्रदायों का उल्लेख किया गया है – शैव, पाशुपत, कापालिक और कालामुख; इनमें पाशुपत सम्प्रदाय को सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध माना जाता है; प्रत्येक सम्प्रदाय की अपनी विशिष्ट साधना पद्धति और दार्शनिक मान्यताएं थीं; शैव सम्प्रदायों के माध्यम से शैव धर्म की विविधता, आध्यात्मिक दृष्टिकोण और साधना परंपरा का पता चलता है; इन सम्प्रदायों का प्रभाव प्राचीन भारतीय धार्मिक इतिहास में स्पष्ट है और ये योग, तपस्या और त्याग के महत्व को भी दर्शाते हैं; पाशुपत सम्प्रदाय विशेषकर समाज और राजसत्ता में अपने आध्यात्मिक तथा राजनीतिक प्रभाव के लिए प्रसिद्ध था।

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प्रश्न 23: पाशुपत सम्प्रदाय के प्रवर्तक कौन थे?

(A) शंकराचार्य
(B) लकुलीश
(C) गोरखनाथ
(D) मत्स्येन्द्रनाथ

उत्तर: (B) लकुलीश

📝

पाशुपत सम्प्रदाय के प्रवर्तक लकुलीश थे, जिन्हें शिव का अट्ठाईसवां और अंतिम अवतार माना जाता है; उन्होंने गुजरात के काठियावाड़ क्षेत्र में कायावरोहण (करवन) नामक स्थान के श्मशान घाट में शिव के अवतार के रूप में जन्म लिया माना जाता है; पाशुपत सम्प्रदाय योग और तपस्या पर विशेष बल देता है और यह शैवों का सबसे प्राचीन संगठित सम्प्रदाय माना गया; इसका उद्देश्य आध्यात्मिक साधना, आत्मा की मुक्ति और तपस्वी जीवन के माध्यम से शिव की भक्ति को बढ़ावा देना था; पाशुपत सम्प्रदाय ने प्राचीन भारत में शैव धर्म की सामाजिक और धार्मिक संरचना पर गहरा प्रभाव डाला।

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प्रश्न 24: कापालिकों के इष्ट देव कौन थे?

(A) शिव
(B) भैरव
(C) विष्णु
(D) ब्रह्मा

उत्तर: (B) भैरव

📝

कापालिक सम्प्रदाय के इष्ट देव भैरव थे, जिन्हें शिव के उग्र अवतार के रूप में माना जाता है; इस सम्प्रदाय के अनुयायी भैरव को सृजन और संहार करने वाला मानते थे; कापालिक सम्प्रदाय की साधना पद्धति अत्यंत कठोर और रहस्यमय थी; वे मानव खोपड़ी (कपाल) को धारण करते थे, जिससे उनका नाम कापालिक पड़ा; यह सम्प्रदाय तांत्रिक परंपरा से जुड़ा था; कापालिक सम्प्रदाय ने शैव धर्म में अत्यधिक उग्र साधना, तांत्रिक अनुष्ठान और रहस्यवाद को बढ़ावा दिया; इसका उद्देश्य शिव की शक्ति और तंत्र साधना के माध्यम से आध्यात्मिक शक्ति और मोक्ष प्राप्त करना था।

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प्रश्न 25: नयनार संतों की संख्या कितनी बताई गई है?

(A) 12
(B) 36
(C) 63
(D) 84

उत्तर: (C) 63

📝

ग्रंथों में नयनार संतों की संख्या तिरसठ (63) बताई गई है; ये शैव धर्म के भक्त संत थे जिन्होंने पल्लव काल में दक्षिण भारत में शैव भक्ति आंदोलन का नेतृत्व किया; प्रमुख नयनार संतों में अप्पार, सुंदरमूर्ति, मणिक्कवाचगर और संबंदर शामिल हैं; इन संतों ने तमिल भाषा में शिव स्तुति काव्य की रचना की जो ‘तेवारम’ नामक संग्रह में संकलित है; नयनार संतों की रचनाएँ भक्ति भावना, सामाजिक समरसता और शैव धर्म की प्रचार का महत्वपूर्ण स्रोत मानी जाती हैं; उनके काव्य और स्तोत्र शैव धर्म की परंपरा, दर्शन और सांस्कृतिक जीवन में गहरी छाप छोड़ते हैं।

जैन धर्म MCQ 2026 – परीक्षा में बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न-
जैन धर्म MCQ 2026 ये 25 सवाल बार-बार पूछे जाते हैं

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