
प्राचीन भारत का इतिहास भाग-08 MCQ-2026
हड़प्पा सभ्यता के धमाकेदार 25 MCQs | हर परीक्षा में आने वाले सवाल
प्रश्न 1. हड़प्पा सभ्यता का ‘केंद्रीय प्रशासन’ का अनुमान किस साक्ष्य से होता है?
✅ उत्तर: (B) दूर-दूर बसे सभी नगरों की नगर योजना में आश्चर्यजनक समरूपता से
हड़प्पा सभ्यता के नगर दूर-दूर बसे होने के बावजूद उनके बसाने की योजना और सड़कों की समरूपता आश्चर्यजनक थी। इससे अनुमान लगाया जाता है कि प्रशासन किसी केंद्रीय शक्ति या नगर नियोजन संस्था द्वारा संचालित था। भवनों और घरों का समान निर्माण यह प्रमाण देता है कि नगर पालिका जैसी संस्था मौजूद थी। नगरों में सड़कों की सुव्यवस्था, नालियों के माध्यम से जल निकासी और सार्वजनिक भवनों की व्यवस्था हड़प्पा सभ्यता की संगठित और सुव्यवस्थित प्रशासनिक क्षमता को दर्शाती है। यह भी दिखाता है कि हड़प्पावासी शांतिप्रिय और सुव्यवस्थित जीवन जीते थे।
प्रश्न 2. हड़प्पा सभ्यता में ‘वणिक वर्ग’ (Commercial Classes) के शासन का अनुमान क्यों है?
✅ उत्तर: (B) हड़प्पावासी व्यापार की ओर अधिक आकर्षित थे और कोई स्पष्ट राजतंत्रीय साक्ष्य नहीं मिले
हड़प्पाकालीन राजनीतिक व्यवस्था के वास्तविक स्वरूप के बारे में कोई सटीक जानकारी नहीं है। लेकिन चूँकि हड़प्पावासी व्यापार की ओर अधिक आकर्षित थे, इसलिए माना जाता है कि संभवतः वहाँ का शासन वणिक वर्ग (Commercial Classes) के हाथों में था। हड़प्पावासियों का व्यापार मेसोपोटामिया और फारस तक फैला हुआ था और वे वस्तु विनिमय प्रणाली (Barter System) पर आधारित व्यापार करते थे। यह दर्शाता है कि हड़प्पा सभ्यता में आर्थिक गतिविधियाँ और व्यापारिक दक्षता अत्यंत विकसित थी।
प्रश्न 3. हड़प्पा सभ्यता के पतन के बारे में वर्तमान दृष्टिकोण क्या है?
✅ उत्तर: (B) इसके पतन के भिन्न-भिन्न कारण थे, यहाँ तक कि एक स्थल के भी पतन के कारण अलग-अलग हो सकते हैं
हड़प्पा सभ्यता के पतन के कारण एक नहीं बल्कि भिन्न-भिन्न थे, यहाँ तक कि एक ही स्थल के पतन के कारण भी अलग-अलग हो सकते थे। इसलिए अब विद्वान पतन का सिर्फ कारण खोजने के बजाय यह अध्ययन करते हैं कि हड़प्पा सभ्यता ने परवर्ती युगीन सभ्यता और संस्कृति को कैसे प्रभावित किया। यह दृष्टिकोण अधिक वैज्ञानिक और व्यापक माना जाता है।
प्रश्न 4. हड़प्पा सभ्यता के ‘शांतिप्रिय’ होने के क्या प्रमाण हैं?
✅ उत्तर: (B) किसी भी स्थल से तलवारों, ढालों, शिरस्त्राणों और धारदार हथियारों के प्रमाण नहीं मिले
किसी भी हड़प्पाई स्थल से धारदार हथियार के प्रमाण नहीं मिले हैं, जिससे अनुमान लगाया जाता है कि हड़प्पावासी शांतिप्रिय थे। यद्यपि कुछ स्थलों से कुठार, भाले, कटार, गदा जैसे हथियार मिले हैं, लेकिन तलवार, ढाल, शिरस्त्राण और अन्य रक्षा उपकरणों के प्रमाण बहुत कम हैं। हथियारों की अनुपस्थिति यह दिखाती है कि हड़प्पा सभ्यता में अशांति और युद्ध का प्रभाव न्यूनतम था। यही कारण है कि इसे स्थिर और शांतिपूर्ण समाज के उदाहरण के रूप में माना जाता है।
प्रश्न 5. हड़प्पा सभ्यता और मेसोपोटामिया सभ्यता में मंदिरों के संदर्भ में क्या अंतर है?
✅ उत्तर: (B) हड़प्पा में मंदिरों के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले, जबकि मेसोपोटामिया में अनेक निश्चित मंदिरों के अवशेष हैं
हड़प्पा सभ्यता में मंदिरों के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं, जो इस तथ्य को दो बार उल्लिखित किया गया है। इसके विपरीत, समकालीन मेसोपोटामिया में अनेक निश्चित मंदिरों के अवशेष प्राप्त हुए हैं। यह दिखाता है कि हड़प्पा और मेसोपोटामिया सभ्यताओं में धार्मिक अभिव्यक्ति भिन्न थी और हड़प्पा में धर्म का स्वरूप अलग और साधारण था।
प्रश्न 6. बुर्जाहोम (Burzahom) कहाँ स्थित है और हड़प्पा सभ्यता से इसका क्या संबंध है?
✅ उत्तर: (B) कश्मीर में; यहाँ से भी मालिक के शव के साथ पशु दफन के साक्ष्य मिले हैं
बुर्जाहोम कश्मीर में स्थित एक नवपाषाणकालीन (Neolithic Age) बस्ती है। यहाँ से शव के साथ पशु दफन के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं, जो यह दर्शाते हैं कि हड़प्पा सभ्यता में पशु-पूजा और अंतिम संस्कार की परंपरा मौजूद थी। इसी तरह रोपड़ में मालिक के साथ कुत्ते का दफन और लोथल में कब्रिस्तान से बकरी की हड्डी प्राप्त हुई। इस समानता से पता चलता है कि हड़प्पाई संस्कृतियाँ और अन्य समकालीन क्षेत्रीय संस्कृतियाँ सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से संबंधित थीं। यह तथ्य परीक्षाओं में अक्सर ‘कहाँ समान साक्ष्य मिले’ के रूप में पूछा जाता है।
📚 नीचे दी गई पोस्ट जरूर देखें 👇
👉 हड़प्पा सभ्यता (सिंधु घाटी सभ्यता)(Part-3) के MCQ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
प्रश्न 7. हड़प्पा सभ्यता में ‘सेलाखड़ी’ (Steatite) की प्राप्ति कहाँ से होती थी?
✅ उत्तर: (C) बलूचिस्तान, पाकिस्तान से
हड़प्पावासी अपनी जरूरत की वस्तुएँ दूर-दूर के क्षेत्रों से मँगाते थे। सेलाखड़ी (Steatite) बलूचिस्तान, पाकिस्तान से प्राप्त होती थी और इसका प्रमुख प्रयोग हड़प्पाई मुहरें बनाने में होता था। अधिकांश मुहरें इसी से बनी हैं। अन्य महत्वपूर्ण सामग्रियाँ — ताँबा : खेतड़ी (राजस्थान), सोना : कोलार (कर्नाटक), टिन और चाँदी : अफगानिस्तान और ईरान, फिरोजा और जेड : मध्य एशिया, और लाजवर्द मणि : बदख्शाँ (अफगानिस्तान) से प्राप्त होती थीं। यह विस्तृत व्यापारिक नेटवर्क और हड़प्पावासियों की व्यापारिक दक्षता का प्रमाण है।
प्रश्न 8. हड़प्पा और मोहनजोदड़ो दोनों स्थलों से प्राप्त एक समान साक्ष्य क्या है?
✅ उत्तर: (B) अन्नागार (Granary House) दोनों स्थलों से मिला है
अन्नागार (Granary House) हड़प्पा और मोहनजोदड़ो दोनों स्थलों से मिला है, जो अनाज के केंद्रीय भंडारण और केंद्रीय प्रशासन का स्पष्ट प्रमाण है। हड़प्पा से प्राप्त प्रमुख साक्ष्यों में अन्नागार, तरबूज के बीज, मातृदेवी की मुहर, और शंख का बना बैल शामिल हैं। मोहनजोदड़ो से भी अन्नागार के साथ सूती कपड़े, कांसे की नर्तकी, पशुपति शिव की मुहर, विशाल स्नानागार, और मेसोपोटामियाई मुहरें प्राप्त हुई हैं। दोनों स्थलों से अन्नागार का मिलना यह संकेत देता है कि हड़प्पा सभ्यता में संगठित प्रशासन और केंद्रीय नियंत्रण था।
प्रश्न 9. हड़प्पा सभ्यता में ‘फिरोजा और जेड’ की प्राप्ति कहाँ से होती थी?
✅ उत्तर: (C) मध्य एशिया से
हड़प्पावासी कीमती पत्थरों और धातुओं का प्रयोग आभूषण और अलंकरण के लिए करते थे। फिरोजा और जेड मध्य एशिया से आते थे, लाजवर्द मणि बदख्शाँ (अफगानिस्तान) से, ताँबा खेतड़ी (राजस्थान) से, सोना कोलार (कर्नाटक) से, टिन और चाँदी अफगानिस्तान और ईरान से, और सेलाखड़ी बलूचिस्तान से प्राप्त होती थी। यह विस्तृत व्यापारिक नेटवर्क हड़प्पावासियों की व्यापारिक दक्षता और संपर्क शक्ति का प्रमाण है।
प्रश्न 10. हड़प्पा सभ्यता में ‘ऋग्वेद’ में योग के साक्ष्य न मिलने का क्या निहितार्थ है?
✅ उत्तर: (B) योग की परंपरा हड़प्पाई (आयेंत्तर) लोगों की देन है, आर्यों की नहीं
ऋग्वेद में योग की मुद्राओं का कोई साक्ष्य नहीं मिलता। इसलिए माना जाता है कि योग की परंपरा हड़प्पाई (आयेंत्तर) लोगों की देन है। हड़प्पावासी योग में विश्वास करते थे — मोहनजोदड़ो से प्राप्त पद्मासन मुद्रा (पशुपति शिव की मुहर में) और शाम्भवी मुद्रा (खंडित पत्थर की मूर्ति) इसके प्रमाण हैं। यह दर्शाता है कि भारतीय योग परंपरा हड़प्पाकालीन समय से ही प्रचलित थी।
प्रश्न 11. हड़प्पाई ‘पशु-पूजा’ में ‘गिलगमिश’ जैसी कथा का परिदृश्य क्या दर्शाता है?
✅ उत्तर: (B) हड़प्पा और मेसोपोटामिया के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान था जो व्यापारिक संबंधों से उत्पन्न हुआ
मोहनजोदड़ो की एक मुहर पर गिलगमिश की पौराणिक कथा जैसा दृश्य मिला है जिसमें अर्द्ध मानव-अर्द्ध पशु श्रृंगी बाघ से युद्ध कर रहा है। यह दर्शाता है कि हड़प्पा और मेसोपोटामिया के बीच केवल व्यापारिक संबंध नहीं बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी था। लोथल से प्राप्त फारसी मुहरें और मोहनजोदड़ो से मिली मेसोपोटामियाई मुहरें इस व्यापक संपर्क का प्रमाण हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि हड़प्पावासी अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सांस्कृतिक नेटवर्क में सक्रिय थे।
प्रश्न 12. हड़प्पा सभ्यता में ‘लिंग पूजन’ के साक्ष्य विशेष रूप से किन स्थलों से मिले?
✅ उत्तर: (B) हड़प्पा, मोहनजोदड़ो और राणाघुण्डई-पेरियानो घुण्डई (बलूचिस्तान)
हड़प्पा और मोहनजोदड़ो से प्राप्त कुछ पत्थरों पर लिंग के रूप में चिन्हित साक्ष्य मिले हैं। इन पत्थरों के चक्रों के मध्य छिद्र को योनि का प्रतीक माना गया। पाकिस्तान के बलूचिस्तान में राणाघुण्डई और पेरियानो घुण्डई से लिंग और योनि के स्पष्ट साक्ष्य प्राप्त हुए। इनकी उपासना प्रकृति की प्रचण्ड शक्ति के रूप में होती थी। यह हड़प्पाकालीन परंपरा परवर्ती हिंदू धर्म में शिवलिंग पूजा से जुड़ती है और धार्मिक निरंतरता का प्रमाण है।
📚 नीचे दी गई पोस्ट जरूर देखें 👇
👉 भारत पर अरबों का आक्रमण के MCQ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
प्रश्न 13. हड़प्पा सभ्यता के पतन को समझने का नया दृष्टिकोण क्या है?
✅ उत्तर: (B) परवर्ती युगीन सभ्यता और संस्कृति पर हड़प्पा के प्रभाव का अध्ययन करना
हड़प्पा सभ्यता के पतन के कारणों को लेकर विवाद है। अब विद्वान सीधे कारण खोजने के बजाय यह अध्ययन करते हैं कि हड़प्पा सभ्यता ने परवर्ती युगीन सभ्यता और संस्कृति पर किस तरह प्रभाव डाला। इस दृष्टिकोण को अधिक वैज्ञानिक और व्यापक माना जाता है। हड़प्पाई धार्मिक परंपराएँ जैसे योग, मातृदेवी पूजा, शिव उपासना और पीपल पूजा परवर्ती हिंदू धर्म में जारी रहीं। यह स्पष्ट करता है कि हड़प्पा सभ्यता और बाद की भारतीय संस्कृति के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक निरंतरता थी। यह तथ्य परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 14. ‘द्रवी मोम विधि’ (Lost Wax Method) क्या है?
✅ उत्तर: (B) पहले मोम की मूर्ति बनाकर, फिर धातु ढालकर मूर्ति बनाने की विधि
द्रवी मोम विधि या Lost Wax Method हड़प्पाकालीन एक प्राचीन धातु-ढलाई तकनीक है। इसमें सबसे पहले मोम की मूर्ति बनाई जाती है और उस पर मिट्टी का आवरण चढ़ाया जाता है। जब इसे गर्म किया जाता है, मोम पिघलकर निकल जाता है और खाली जगह में पिघली धातु डाली जाती है। मोहनजोदड़ो से प्राप्त कांसे की नर्तकी की मूर्ति इसी विधि से बनाई गई है। यह तकनीक न केवल हड़प्पावासियों की उन्नत धातु कला को दिखाती है, बल्कि आज भी भारतीय कारीगरों द्वारा प्रयोग की जाती है।
प्रश्न 15. कांसे की नर्तकी की मूर्ति किस स्थल से और किस धातु की बनी है?
✅ उत्तर: (B) मोहनजोदड़ो से; कांसे की — Lost Wax Method से निर्मित
मोहनजोदड़ो से कांसे की नर्तकी की मूर्ति मिली है, जो एक ब्रॉन्ज़ (कांसे) की नर्तक या dancing girl figurine है। इसमें दाहिना हाथ कूल्हे पर और बायाँ हाथ चूड़ियों से ढका हुआ है। यह मूर्ति द्रवी मोम विधि या Lost Wax Method से बनाई गई है। यह हड़प्पावासियों की उन्नत धातु-कला का प्रमाण है। इस तकनीक में पहले मोम की मूर्ति बनाई जाती थी, फिर मिट्टी का आवरण चढ़ाकर गर्म किया जाता था और मोम पिघलने के बाद उसमें पिघली धातु डाली जाती थी। UPSC 2012, 2019 में पूछा गया।
प्रश्न 16. हड़प्पा सभ्यता के राजनीतिक जीवन के बारे में निश्चित रूप से क्या कहा जा सकता है?
✅ उत्तर: (B) हड़प्पाकालीन राजनीतिक व्यवस्था के वास्तविक स्वरूप के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है
हड़प्पा सभ्यता का राजनीतिक जीवन विवादास्पद है। विभिन्न विद्वानों ने अलग-अलग मत व्यक्त किए हैं — हण्टर ने इसे जनतंत्रात्मक बताया, मैके ने प्रतिनिधि शासन कहा, व्हीलर ने इसे मध्यमवर्गीय जनतंत्रात्मक माना और स्टुअर्ट पिग्गट ने पुरोहित वर्ग का प्रभाव माना। हड़प्पाकालीन राजनीतिक व्यवस्था के वास्तविक स्वरूप के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। इसका कारण इस सभ्यता की अपठनीय लिपि है। हड़प्पावासियों के शासन का ढांचा आज भी इतिहासविदों के लिए एक रहस्य है। यह तथ्य परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है।
प्रश्न 17. हड़प्पा से ‘R-37 (Cemetery R-37)’ की स्थिति क्या थी?
✅ उत्तर: (B) यह हड़प्पा के सामान्य स्थल के दक्षिण में था
हड़प्पा के पश्चिमी दुर्गीकृत भाग को सर मार्टिमर व्हीलर ने ‘माउन्ट-AB’ नाम दिया। इसके सामान्य स्थल के दक्षिण में R-37 (Cemetery R-37) समाधि स्थल मिला, जो हड़प्पावासियों की अंतिम संस्कार परंपरा और सामाजिक जीवन की जानकारी देता है। हड़प्पा का उत्खनन 1921 में सर जॉन मार्शल के नेतृत्व में दयाराम साहनी ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में रावी नदी के बायें तट पर किया। यह स्थल पुरातात्विक महत्व का है और UPSC में भी पूछा गया।
प्रश्न 18. चन्हुदड़ो में ‘ईंटों पर कुत्ते और बिल्ली के पंजों के निशान’ का क्या महत्व है?
✅ उत्तर: (B) यह दर्शाता है कि ईंटें खुले में सुखाई जाती थीं और जानवर उन पर से गुजरते थे
चन्हुदड़ो से कुछ ईंटों पर कुत्ते और बिल्ली के पंजों के निशान मिले। यह दर्शाता है कि ईंटें खुले में धूप में सुखाई जाती थीं और जानवर उनके ऊपर से गुजरते थे, जिससे निशान बन गए। यह दैनिक जीवन का रोचक साक्ष्य है। चन्हुदड़ो एकमात्र स्थल था जहाँ शहर का कोई हिस्सा दुर्गीकृत नहीं था। यह तथ्य नगर नियोजन और हड़प्पावासियों के जीवन के बारे में जानकारी देता है।
📚 नीचे दी गई पोस्ट जरूर देखें 👇
👉 इस्लाम धर्म का उदय के MCQ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
प्रश्न 19. हड़प्पा सभ्यता के सभी स्थलों में नगर योजना की समरूपता का वर्तमान में क्या निहितार्थ निकाला जाता है?
✅ उत्तर: (B) किसी केंद्रीय शक्ति या नगर नियोजन संस्था (नगर पालिका जैसी) द्वारा नियंत्रित प्रशासन था
हड़प्पा सभ्यता के नगर दूर-दूर बसे होने के बावजूद उनकी नगर योजना में आश्चर्यजनक समरूपता देखी जाती है। इससे स्पष्ट होता है कि प्रशासन केंद्रीय शक्ति द्वारा संचालित था। भवन निर्माण में समरूपता यह भी बताती है कि नगर पालिका या नगर निगम जैसी संस्था मौजूद थी। इन सभी साक्ष्यों से यह प्रमाणित होता है कि हड़प्पा सभ्यता सुव्यवस्थित और संगठित थी। नगरों की व्यवस्थित सड़कों और जल निकासी प्रणाली से प्रशासन की कुशलता और समाज के शांतिप्रिय स्वभाव का पता चलता है।
प्रश्न 20. हड़प्पा सभ्यता में ‘गोदीबाड़ा या बंदरगाह’ (Dockyard) का साक्ष्य किस स्थल से मिला?
✅ उत्तर: (C) लोथल
लोथल के पूर्वी भाग में मिले पक्की ईंटों के घेरे को गोदीबाड़ा / बंदरगाह (Dockyard) माना गया है। यह स्थल गुजरात में खंभात की खाड़ी के पास भोगवा नदी के किनारे स्थित था, जिससे यह समुद्री व्यापार केंद्र बनता था। यहाँ से फारस की मुहरें भी मिलीं, जो बाह्य व्यापार का प्रमाण हैं। लोथल को लघु हड़प्पा या लघु मोहनजोदड़ो कहा जाता है। इन साक्ष्यों से यह स्पष्ट होता है कि हड़प्पावासी व्यापारिक दृष्टि से कुशल थे और विदेशों के साथ व्यापारिक संबंध रखते थे।
प्रश्न 21. हड़प्पावासी अग्नि पूजा करते थे — कालीबंगा से प्राप्त अग्नि-वेदिकाओं में क्या मिला?
✅ उत्तर: (B) पशुओं की हड्डियाँ और राख
कालीबंगा से 7 अग्नि-वेदिकाएँ मिली हैं जिनमें पशुओं की हड्डियाँ और राख शामिल है। इससे स्पष्ट होता है कि हड़प्पावासी पशुबलि के साथ अग्नि पूजा करते थे। लोथल से भी अग्निकुण्ड के प्रमाण मिले हैं, लेकिन कालीबंगा के साक्ष्य श्रेष्ठ माने जाते हैं। यह परवर्ती वैदिक यज्ञ परंपरा से मेल खाता है। इन साक्ष्यों से यह साबित होता है कि हड़प्पा सभ्यता और वैदिक संस्कृति के बीच धार्मिक निरंतरता थी, जो हड़प्पा धार्मिक प्रथाओं की महत्वता और प्राचीनता को दर्शाता है।
प्रश्न 22. मोहनजोदड़ो में ‘विशाल स्नानागार’ के अलावा और क्या-क्या प्रमुख साक्ष्य मिले हैं?
✅ उत्तर: (B) अन्नागार, सूती कपड़े का साक्ष्य, कांसे की नर्तकी, पशुपति शिव की मुहर, मेसोपोटामियाई मुहरें
मोहनजोदड़ो हड़प्पा सभ्यता का सबसे महत्वपूर्ण स्थल है। यहाँ अन्नागार (Granary House) मिला है जो केंद्रीय अनाज भंडारण का प्रमाण है। सूती कपड़े का साक्ष्य मिलता है जो वस्त्र निर्माण की जानकारी देता है। मेसोपोटामियाई मुहरें व्यापारिक संबंध दिखाती हैं। कांसे की नर्तकी की मूर्ति Lost Wax Method से निर्मित है। पशुपति शिव की मुहर और शाम्भवी मुद्रा की मूर्ति धार्मिक विश्वास दिखाती हैं। विशाल स्नानागार, साहुल-सूत्र (Plumb Line) और मलेरिया के साक्ष्य से जीवन, निर्माण तकनीक और स्वास्थ्य का ज्ञान मिलता है।
प्रश्न 23. हड़प्पा सभ्यता के पतन के लिए ‘आर्यों के आक्रमण’ सिद्धांत की सबसे बड़ी कमजोरी क्या है?
✅ उत्तर: (C) हड़प्पाई स्थलों पर भीषण युद्ध और नरसंहार के स्पष्ट साक्ष्य नहीं मिले
व्हीलर ने आर्यों के आक्रमण का सिद्धांत प्रस्तुत किया था। लेकिन इसकी सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि हड़प्पाई स्थलों पर युद्ध या नरसंहार के साक्ष्य नहीं मिले हैं। इसके अलावा, हड़प्पावासियों के पास तलवार, ढाल जैसे हथियारों के प्रमाण भी कम हैं। इन तथ्यों के आधार पर यह सिद्धांत कमजोर माना जाता है। वास्तविकता में हड़प्पा सभ्यता के पतन के कारण भिन्न-भिन्न थे और एक स्थल के लिए कारण दूसरे से अलग हो सकते हैं। वर्तमान दृष्टिकोण अधिक वैज्ञानिक और व्यापक है।
प्रश्न 24. हड़प्पावासियों में ‘नाग-पूजा’ के साथ-साथ ‘वृक्ष-पूजा’ के कौन-से साक्ष्य हैं?
✅ उत्तर: (B) मुहरों और मृद्भाण्डों पर पीपल सहित विभिन्न वृक्षों और नाग का चित्रण
हड़प्पावासी वृक्ष और नाग पूजा करते थे। मुहर और मृद्भाण्डों पर पीपल, बबूल, नीम, केला, ताड़, खजूर जैसे पेड़ों का चित्रण मिलता है। कुछ मुहरों पर पीपल बाड़े से घिरा दिखाया गया है। नाग का चित्रण भी मुहरों पर पाया गया। आज भी पीपल पूजा हिंदू धर्म में प्रचलित है। यह परंपरा हड़प्पा सभ्यता और परवर्ती हिंदू धर्म के बीच सांस्कृतिक निरंतरता का प्रमाण है।
प्रश्न 25. हड़प्पा सभ्यता में ‘साहुल-सूत्र’ (Plumb Line) का क्या उपयोग था और यह कहाँ से मिला?
✅ उत्तर: (B) मोहनजोदड़ो से (मैके द्वारा खोजा गया); दीवारों को सीधा बनाने के लिए
मैके नामक पुराविद् को मोहनजोदड़ो से साहुल-सूत्र (Plumb Line) मिला। इसका प्रयोग दीवारों को सीधा बनाने के लिए किया जाता था। यह हड़प्पावासियों की उन्नत भवन निर्माण तकनीक का प्रमाण है। इंग्लिश बॉन्ड मेथड से ईंटों की चिनाई और साहुल-सूत्र से दीवारों की सीधाई मिलकर हड़प्पाई वास्तुकला की उन्नतता सिद्ध करती है।
📚 नीचे दी गई पोस्ट जरूर देखें 👇
👉 हड़प्पा सभ्यता (सिंधु घाटी सभ्यता)के MCQ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें