
प्रस्तावना (Introduction)
क्या आप जानते हैं कि भारत में वन्यजीवों और प्रकृति की सुरक्षा के लिए विशेष क्षेत्र बनाए गए हैं, जिन्हें National Park (राष्ट्रीय उद्यान) और Wildlife Sanctuary (अभयारण्य) कहा जाता है? 🌿
ये स्थान न केवल दुर्लभ और लुप्तप्राय जीवों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। भारत जैसे विविधता से भरे देश में ये संरक्षित क्षेत्र हमारी प्राकृतिक धरोहर को बचाने का काम करते हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UPSC, SSC, Railway, Banking आदि में National Park और अभयारण्य से जुड़े प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं—जैसे उनका स्थान, विशेषता और संबंधित राज्य।
इस लेख में हम आपको National Park और अभयारण्य से जुड़े महत्वपूर्ण MCQs आसान भाषा में देंगे, जिससे आपकी तैयारी और भी मजबूत हो जाएगी।
राजस्थान के राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्यजीव अभयारण्य
राजस्थान के राष्ट्रीय उद्यान
Keoladeo National Park (केवला देवी राष्ट्रीय उद्यान / घना पक्षी विहार)
केवला देवी राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित एक प्रमुख पक्षी विहार है, जिसे वर्ष 1985 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया। यह आर्द्रभूमि क्षेत्र है तथा प्रवासी पक्षियों, विशेषकर साइबेरियन क्रेन के लिए प्रसिद्ध रहा है। यहाँ सैकड़ों प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं। यह स्थल पूर्व में शाही शिकारगाह था, जिसे बाद में संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया।
Ranthambore National Park (रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान)
रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित एक प्रमुख टाइगर रिजर्व है। इसे वर्ष 1980 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला तथा यह प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत संरक्षित क्षेत्र है। यह उद्यान बंगाल टाइगर के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहाँ रणथम्भौर किला भी स्थित है, जो ऐतिहासिक महत्व रखता है। शुष्क पर्णपाती वन, विविध वन्यजीव एवं बाघों की अधिक संख्या के कारण यह प्रतियोगी परीक्षाओं में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Sariska Tiger Reserve (सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान)
सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान के अलवर जिले में स्थित एक प्रमुख टाइगर रिजर्व है। इसे वर्ष 1955 में वन्यजीव अभयारण्य तथा 1978 में प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। यहाँ बाघों का पुनर्वास (Relocation) कार्यक्रम विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यह अरावली पर्वतमाला में स्थित है तथा तेंदुआ, सियार, नीलगाय आदि वन्यजीवों के लिए जाना जाता है।
Desert National Park (डेजर्ट राष्ट्रीय उद्यान)
डेजर्ट राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान के जैसलमेर और बाड़मेर जिलों में स्थित है। इसकी स्थापना 1980 में हुई। यह थार मरुस्थल का प्रमुख संरक्षित क्षेत्र है तथा गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) के संरक्षण के लिए अत्यंत प्रसिद्ध है। यहाँ रेत के टीले, शुष्क जलवायु एवं मरुस्थलीय वन्यजीव पाए जाते हैं।
Mukundra Hills National Park (मुकुंदरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान)
मुकुंदरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान के कोटा, बूंदी, झालावाड़ एवं चित्तौड़गढ़ जिलों में फैला हुआ है। इसे वर्ष 2004 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया तथा पूर्व में इसे दर्रा राष्ट्रीय उद्यान के नाम से जाना जाता था। यह अरावली एवं विंध्य पर्वतमालाओं के संगम क्षेत्र में स्थित है। यहाँ बाघ पुनर्स्थापन कार्यक्रम भी चलाया गया है।
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राजस्थान के प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य
Tal Chhapar Sanctuary (ताल छापर अभयारण्य)
ताल छापर अभयारण्य राजस्थान के चूरू जिले में स्थित एक प्रसिद्ध वन्यजीव अभयारण्य है। इसकी स्थापना 1966 में की गई। यह मुख्यतः काले हिरण (ब्लैकबक) के लिए प्रसिद्ध है तथा यहाँ घासभूमि (Grassland) पारिस्थितिकी तंत्र पाया जाता है। यह प्रवासी पक्षियों के लिए भी महत्वपूर्ण स्थल है।
Mount Abu Wildlife Sanctuary (माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य)
माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य राजस्थान के सिरोही जिले में अरावली पर्वतमाला में स्थित है। इसकी स्थापना 1960 में की गई। यह राजस्थान का प्रमुख पर्वतीय अभयारण्य है, जहाँ समृद्ध जैव विविधता पाई जाती है। यहाँ तेंदुआ, भालू, सांभर, लंगूर तथा विभिन्न पक्षी प्रजातियाँ मिलती हैं। गुरु शिखर, जो अरावली की सर्वोच्च चोटी है, इसी क्षेत्र में स्थित है।
Kumbhalgarh Wildlife Sanctuary (कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य)
कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य राजस्थान के राजसमंद, उदयपुर एवं पाली जिलों में फैला हुआ है। इसकी स्थापना 1971 में की गई। यह अरावली पर्वतमाला में स्थित है तथा भेड़िया (वुल्फ) के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यहाँ तेंदुआ, भालू, सांभर, नीलगाय आदि वन्यजीव पाए जाते हैं। प्रसिद्ध कुंभलगढ़ किला भी इसी क्षेत्र में स्थित है।
Sitamata Wildlife Sanctuary (सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य)
सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में स्थित है। इसकी स्थापना 1979 में की गई। यह दक्षिणी राजस्थान का प्रमुख अभयारण्य है तथा यहाँ सागौन (टीक) वन पाए जाते हैं। यह उड़ने वाली गिलहरी (फ्लाइंग स्क्विरल) के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। जाखम एवं सीतामाता नदियाँ इस क्षेत्र से प्रवाहित होती हैं।
Phulwari Ki Nal Wildlife Sanctuary (फुलवारी की नाल वन्यजीव अभयारण्य)
फुलवारी की नाल वन्यजीव अभयारण्य राजस्थान के उदयपुर जिले में अरावली पर्वतमाला में स्थित है। इसकी स्थापना 1983 में की गई। यह एक संकीर्ण घाटी (नाल) क्षेत्र है, जहाँ समृद्ध जैव विविधता पाई जाती है। यहाँ तेंदुआ, भालू, जंगली बिल्ली एवं अनेक पक्षी प्रजातियाँ मिलती हैं। यह क्षेत्र आदिवासी जनजातियों के निवास के लिए भी जाना जाता है।
Jaisamand Wildlife Sanctuary (जैसमंद वन्यजीव अभयारण्य)
जैसमंद वन्यजीव अभयारण्य राजस्थान के उदयपुर जिले में स्थित है। इसकी स्थापना 1957 में की गई और यह राज्य के सबसे पुराने अभयारण्यों में से एक है। यह अभयारण्य एशिया की दूसरी सबसे बड़ी कृत्रिम झील ‘जैसमंद झील’ के आसपास स्थित है। यहाँ तेंदुआ, सियार, नीलगाय, हिरण तथा अनेक पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
National Chambal Sanctuary (राष्ट्रीय चंबल वन्यजीव अभयारण्य)
राष्ट्रीय चंबल वन्यजीव अभयारण्य राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के त्रिसीमा क्षेत्र में चंबल नदी के किनारे स्थित है। इसकी स्थापना 1979 में की गई। यह अभयारण्य घड़ियाल (Gharial) के संरक्षण के लिए विश्व प्रसिद्ध है तथा यहाँ भारतीय मगरमच्छ और गंगा डॉल्फ़िन भी पाई जाती हैं। यह एक प्रमुख नदी पारिस्थितिकी तंत्र है।
Bassi Wildlife Sanctuary (बस्सी वन्यजीव अभयारण्य)
बस्सी वन्यजीव अभयारण्य राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित है। इसकी स्थापना 1988 में की गई। यह अभयारण्य बस्सी किले के पास स्थित है तथा अरावली पर्वतमाला का हिस्सा है। यहाँ तेंदुआ, जंगली बिल्ली, नीलगाय, जंगली सूअर तथा विभिन्न पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यह अभयारण्य अपनी प्राकृतिक सुंदरता एवं ऐतिहासिक किले के कारण प्रसिद्ध है।
Ramgarh Vishdhari Wildlife Sanctuary (रामगढ़ विषधारी वन्यजीव अभयारण्य)
रामगढ़ विषधारी वन्यजीव अभयारण्य राजस्थान के बूंदी जिले में स्थित है। इसे वर्ष 1982 में अभयारण्य का दर्जा मिला तथा वर्ष 2022 में इसे बाघ संरक्षण के लिए टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। यह अरावली पर्वतमाला का भाग है और यहाँ तेंदुआ, भालू, नीलगाय, चीतल आदि वन्यजीव पाए जाते हैं।
मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्यजीव अभयारण्य
मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान
Kanha National Park (कान्हा राष्ट्रीय उद्यान)
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश के मंडला एवं बालाघाट जिलों में स्थित एक प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान है। इसकी स्थापना 1955 में हुई तथा यह भारत का एक प्रमुख टाइगर रिजर्व है। यह उद्यान “बारहसिंगा” (Swamp Deer) के संरक्षण के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहाँ बाघ, तेंदुआ, जंगली कुत्ता एवं विभिन्न वन्यजीव पाए जाते हैं। यह “जंगल बुक” की प्रेरणा के रूप में भी जाना जाता है।
Pench National Park (पेंच राष्ट्रीय उद्यान)
पेंच राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश के सिवनी और छिंदवाड़ा जिलों में स्थित है तथा यह महाराष्ट्र की सीमा से भी जुड़ा हुआ है। इसकी स्थापना 1975 में की गई और यह प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत संरक्षित क्षेत्र है। यह उद्यान प्रसिद्ध लेखक रुडयार्ड किपलिंग की “द जंगल बुक” की प्रेरणा के लिए जाना जाता है। यहाँ बाघ, तेंदुआ, हिरण और विभिन्न पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
Panna National Park (पन्ना राष्ट्रीय उद्यान)
पन्ना राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश के पन्ना एवं छतरपुर जिलों में स्थित है। इसकी स्थापना 1981 में की गई तथा यह प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत संरक्षित क्षेत्र है। यह उद्यान बाघ संरक्षण एवं सफल बाघ पुनर्स्थापन कार्यक्रम के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ केन नदी बहती है, जिससे इस क्षेत्र की जैव विविधता समृद्ध होती है। यहाँ तेंदुआ, चीतल, नीलगाय एवं विभिन्न पक्षी पाए जाते हैं।
Satpura National Park (सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान)
सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश के होशंगाबाद (वर्तमान नर्मदापुरम) जिले में स्थित है। इसकी स्थापना 1981 में की गई तथा यह पचमढ़ी बायोस्फीयर रिजर्व का एक महत्वपूर्ण भाग है। यह भारत का एक अनूठा राष्ट्रीय उद्यान है जहाँ बाघ, तेंदुआ, भालू, गौर (भारतीय बाइसन) एवं अनेक वन्यजीव पाए जाते हैं। यहाँ की भौगोलिक बनावट, गुफाएँ एवं पहाड़ी क्षेत्र इसे विशेष बनाते हैं।
Bandhavgarh National Park (बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान)
बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में स्थित है। इसकी स्थापना 1968 में राष्ट्रीय उद्यान के रूप में हुई तथा यह प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत संरक्षित प्रमुख क्षेत्र है। यह भारत में बाघों की सबसे अधिक घनत्व (Highest Tiger Density) के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ बाघ, तेंदुआ, सांभर, चीतल एवं अन्य वन्यजीव पाए जाते हैं। इसके भीतर प्राचीन बांधवगढ़ किला भी स्थित है।
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Kuno National Park (कूनो राष्ट्रीय उद्यान)
कूनो राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित है। इसकी स्थापना 1981 में अभयारण्य के रूप में हुई तथा बाद में इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला। यह उद्यान ‘चीता पुनर्वास परियोजना’ (Cheetah Reintroduction Project) के लिए विश्व प्रसिद्ध है, जिसके अंतर्गत अफ्रीकी चीतों को यहाँ बसाया गया है। यह शुष्क पर्णपाती वन क्षेत्र है तथा यहाँ हिरण, नीलगाय, तेंदुआ एवं अन्य वन्यजीव पाए जाते हैं।
Madhav National Park (माधव राष्ट्रीय उद्यान)
माधव राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित है। इसकी स्थापना 1958 में राष्ट्रीय उद्यान के रूप में की गई। यह उद्यान मध्य भारत की शुष्क पर्णपाती वनों का प्रतिनिधित्व करता है। यहाँ तेंदुआ, नीलगाय, सांभर, चीतल तथा अनेक पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इस उद्यान में स्थित माधव सागर झील इसकी प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाती है।
Van Vihar National Park (वन विहार राष्ट्रीय उद्यान)
वन विहार राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित है। इसकी स्थापना 1979 में की गई। यह एक जैविक उद्यान (Zoo) और राष्ट्रीय उद्यान का मिश्रित रूप है, जिसे केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के मानकों के अनुसार विकसित किया गया है। यहाँ तेंदुआ, बाघ, भालू, हिरण तथा विभिन्न पक्षी प्रजातियाँ संरक्षित रूप में पाई जाती हैं। यह उद्यान पर्यटकों के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण एवं शिक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।
Fossil National Park Mandla (मण्डला जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान)
मण्डला जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले के पास स्थित है और यह क्षेत्र प्राचीन वनस्पति जीवाश्मों के लिए प्रसिद्ध है। इसकी स्थापना 1983 में की गई। यहाँ लाखों वर्ष पुराने वृक्षों और पौधों के जीवाश्म पाए जाते हैं, जो डाइनासोर काल के पर्यावरण को दर्शाते हैं। यह भारत के सबसे महत्वपूर्ण जीवाश्म स्थलों में से एक है।
मध्य प्रदेश के प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य
Sanjay Dubri Wildlife Sanctuary (संजय दुबरी वन्यजीव अभयारण्य)
संजय दुबरी वन्यजीव अभयारण्य मध्य प्रदेश के सीधी एवं सिंगरौली जिलों में स्थित है। इसकी स्थापना 1975 में की गई। यह अभयारण्य बाघ संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है तथा संजय राष्ट्रीय उद्यान (छत्तीसगढ़ सीमा) से जुड़ा हुआ है। यहाँ तेंदुआ, हिरण, भालू एवं विभिन्न वन्यजीव पाए जाते हैं। यह शुष्क पर्णपाती वन क्षेत्र का उदाहरण है।
Bori Wildlife Sanctuary (बोरी वन्यजीव अभयारण्य)
बोरी वन्यजीव अभयारण्य मध्य प्रदेश के होशंगाबाद (नर्मदापुरम) जिले में स्थित है। इसकी स्थापना 1977 में की गई। यह सतपुड़ा बायोस्फीयर रिजर्व का एक महत्वपूर्ण भाग है और सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान के साथ मिलकर संरक्षित क्षेत्र बनाता है। यहाँ बाघ, तेंदुआ, भालू, सांभर, चीतल तथा विभिन्न पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यह क्षेत्र जैव विविधता और प्राकृतिक वन संपदा के लिए प्रसिद्ध है।
Nauradehi Wildlife Sanctuary (नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य)
नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य मध्य प्रदेश के सागर, दमोह एवं नरसिंहपुर जिलों में फैला हुआ है। यह राज्य का सबसे बड़ा वन्यजीव अभयारण्य माना जाता है। यहाँ बाघ पुनर्स्थापन कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। यह क्षेत्र शुष्क पर्णपाती वन से आच्छादित है और यहाँ तेंदुआ, भेड़िया, सियार, नीलगाय, सांभर आदि वन्यजीव पाए जाते हैं।
Ken Gharial Sanctuary (केन घड़ियाल अभयारण्य)
केन घड़ियाल अभयारण्य मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में केन नदी के किनारे स्थित है। इसकी स्थापना 1981 में की गई। यह अभयारण्य विशेष रूप से घड़ियाल (Gharial) के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ घड़ियाल के साथ-साथ मगरमच्छ (मगर) और गंगा डॉल्फ़िन भी पाई जाती हैं। यह एक महत्वपूर्ण नदी पारिस्थितिकी तंत्र है।
Ratapani Wildlife Sanctuary (रातापानी वन्यजीव अभयारण्य)
रातापानी वन्यजीव अभयारण्य मध्य प्रदेश के रायसेन और सीहोर जिलों में स्थित है। यह भोपाल के निकट स्थित एक महत्वपूर्ण वन्यजीव क्षेत्र है। यहाँ बाघ, तेंदुआ, सांभर, चीतल, नीलगाय आदि वन्यजीव पाए जाते हैं। यह अभयारण्य वन्यजीवों की विविधता और घने वन क्षेत्र के लिए प्रसिद्ध है। इसके बाघ संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इसे भविष्य में टाइगर रिजर्व बनाने की योजना भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
Gandhi Sagar Wildlife Sanctuary (गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य)
गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में चंबल नदी के किनारे स्थित है। इसकी स्थापना 1974 में की गई। यह अभयारण्य अपने शुष्क पर्णपाती वन एवं नदी तंत्र के लिए जाना जाता है। यहाँ तेंदुआ, चीतल, नीलगाय, चिंकारा तथा विभिन्न पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यह क्षेत्र चंबल नदी के घड़ियाल और अन्य जलीय जीवों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
अरुणाचल प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्यजीव अभयारण्य
अरुणाचल प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान
Namdapha National Park (नामदफा राष्ट्रीय उद्यान)
नामदफा राष्ट्रीय उद्यान अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले में स्थित है। इसकी स्थापना 1983 में की गई। यह भारत के सबसे बड़े राष्ट्रीय उद्यानों में से एक है और अत्यंत समृद्ध जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यह उष्णकटिबंधीय वर्षावन (रेनफॉरेस्ट) का क्षेत्र है। यहाँ बाघ, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, लाल पांडा जैसी दुर्लभ प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
Mouling National Park (मौलिंग राष्ट्रीय उद्यान)
मौलिंग राष्ट्रीय उद्यान अरुणाचल प्रदेश के सियांग जिले में स्थित है। इसकी स्थापना 1986 में की गई। यह पूर्वी हिमालयी क्षेत्र का हिस्सा है और अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ उष्णकटिबंधीय एवं पर्वतीय वनों का मिश्रण पाया जाता है। इस उद्यान में बाघ, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, लाल पांडा, गोरल तथा अनेक पक्षी प्रजातियाँ मिलती हैं।
अरुणाचल प्रदेश के प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य
Pakke Wildlife Sanctuary (पक्के/पाखे वन्यजीव अभयारण्य)
पक्के वन्यजीव अभयारण्य अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी कामेंग जिले में स्थित है। इसकी स्थापना 1977 में की गई। यह अभयारण्य हॉर्नबिल (धनुष चोंच वाले पक्षी) के संरक्षण के लिए विश्व प्रसिद्ध है, इसलिए इसे “हॉर्नबिल का अभयारण्य” भी कहा जाता है। यह उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन (ट्रॉपिकल एवरग्रीन फॉरेस्ट) क्षेत्र है, जहाँ बाघ, तेंदुआ, हाथी, हिरण एवं अनेक पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
Kamlang Wildlife Sanctuary (कमलांग वन्यजीव अभयारण्य)
कमलांग वन्यजीव अभयारण्य अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिले में स्थित है। इसकी स्थापना 1974 में की गई। यह क्षेत्र घने उष्णकटिबंधीय सदाबहार एवं पर्णपाती वनों से आच्छादित है तथा अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहाँ हाथी, बाघ, तेंदुआ, हिरण, भालू तथा अनेक दुर्लभ पक्षी एवं प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
Dibang Wildlife Sanctuary (दिबांग वन्यजीव अभयारण्य)
दिबांग वन्यजीव अभयारण्य अरुणाचल प्रदेश के दिबांग घाटी जिले में स्थित है। यह भारत के सबसे बड़े वन्यजीव अभयारण्यों में से एक है। इसकी स्थापना 1998 में की गई। यह उच्च हिमालयी एवं पर्वतीय क्षेत्र में स्थित है, जहाँ हिम तेंदुआ, लाल पांडा, कस्तूरी मृग तथा दुर्लभ पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यह क्षेत्र अत्यंत दुर्गम एवं जैव विविधता से समृद्ध है।
Eaglenest Wildlife Sanctuary (ईगलनेस्ट वन्यजीव अभयारण्य)
ईगलनेस्ट वन्यजीव अभयारण्य अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले में स्थित है। इसकी स्थापना 1989 में की गई। यह पूर्वी हिमालय क्षेत्र का हिस्सा है और पक्षी विविधता के लिए विश्व प्रसिद्ध है, इसलिए इसे “पक्षी स्वर्ग” भी कहा जाता है। यहाँ अनेक दुर्लभ एवं स्थानिक पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें ब्लाइथ्स ट्रैगोपैन और अन्य दुर्लभ प्रजातियाँ शामिल हैं। यह क्षेत्र घने पर्वतीय वनों से आच्छादित है।
Itanagar Wildlife Sanctuary (ईटानगर वन्यजीव अभयारण्य)
ईटानगर वन्यजीव अभयारण्य अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर के निकट स्थित है। इसकी स्थापना 1978 में की गई। यह अभयारण्य घने उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों से आच्छादित है और यहाँ समृद्ध जैव विविधता पाई जाती है। यहाँ हाथी, तेंदुआ, भालू, हिरण तथा विभिन्न पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। राजधानी के पास स्थित होने के कारण यह पर्यटन एवं वन्यजीव संरक्षण दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
हरियाणा के राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्यजीव अभयारण्य
हरियाणा के राष्ट्रीय उद्यान
Sultanpur National Park (सुलतानपुर राष्ट्रीय उद्यान)
सुलतानपुर राष्ट्रीय उद्यान हरियाणा के गुरुग्राम जिले में स्थित एक प्रसिद्ध पक्षी अभयारण्य है। इसे 1971 में वन्यजीव अभयारण्य और 1991 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया। यह विशेष रूप से प्रवासी पक्षियों के लिए जाना जाता है, जो सर्दियों में साइबेरिया और अन्य क्षेत्रों से यहाँ आते हैं। यहाँ अनेक प्रकार के पक्षी एवं जल पक्षी पाए जाते हैं।
Kalesar National Park (कलेसर राष्ट्रीय उद्यान)
कलेसर राष्ट्रीय उद्यान हरियाणा के यमुनानगर जिले में स्थित है और यह शिवालिक पर्वतमाला का भाग है। इसकी स्थापना 2003 में की गई। यह उद्यान बाघ, तेंदुआ, हाथी, सांभर, चीतल एवं अनेक वन्यजीवों के लिए जाना जाता है। यह उत्तर भारत में हाथियों के प्राकृतिक आवासों में से एक है। यहाँ घने वन एवं जैव विविधता पाई जाती है।
हरियाणा के प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य
Bhindawas Wildlife Sanctuary (भिंडवास वन्यजीव अभयारण्य)
भिंडवास वन्यजीव अभयारण्य हरियाणा के झज्जर जिले में स्थित है। यह हरियाणा का सबसे बड़ा पक्षी अभयारण्य माना जाता है। इसकी स्थापना 1986 में की गई। यह एक महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि (वेटलैंड) क्षेत्र है, जहाँ बड़ी संख्या में प्रवासी एवं स्थानीय पक्षी पाए जाते हैं। यहाँ विभिन्न प्रकार के जल पक्षी एवं अन्य वन्यजीवों का निवास है।
Khol Hi-Raitan Wildlife Sanctuary (खोल ही-रैतन वन्यजीव अभयारण्य)
खोल ही-रैतन वन्यजीव अभयारण्य हरियाणा के पंचकुला जिले में स्थित है और यह शिवालिक पहाड़ियों का हिस्सा है। इसकी स्थापना 2004 में की गई। यह क्षेत्र जैव विविधता से भरपूर है और यहाँ तेंदुआ, नीलगाय, जंगली सूअर, चीतल, सांभर जैसे वन्यजीव पाए जाते हैं। यह अभयारण्य पर्यावरण संतुलन और वन संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।
Abubshahar Wildlife Sanctuary (अबूबशहर वन्यजीव अभयारण्य)
अबूबशहर वन्यजीव अभयारण्य हरियाणा के सिरसा जिले में स्थित है। यह अभयारण्य मुख्य रूप से रेतीले और शुष्क क्षेत्र में फैला हुआ है। यहाँ काले हिरण (ब्लैकबक), नीलगाय, चिंकारा, सियार तथा विभिन्न पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यह क्षेत्र थार मरुस्थल के निकट होने के कारण शुष्क वनस्पति और विशिष्ट पारिस्थितिकी के लिए जाना जाता है।
Chhilchhila Wildlife Sanctuary (छिलछिला वन्यजीव अभयारण्य)
छिलछिला वन्यजीव अभयारण्य हरियाणा के कैथल जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि (वेटलैंड) क्षेत्र है। इसकी स्थापना 1986 में की गई। यह अभयारण्य विशेष रूप से प्रवासी पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है, जो सर्दियों में यहाँ बड़ी संख्या में आते हैं। यहाँ विभिन्न प्रकार के जल पक्षी एवं जैव विविधता पाई जाती है। यह क्षेत्र पर्यावरण संरक्षण और पक्षी संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Saraswati Wildlife Sanctuary (सरस्वती वन्यजीव अभयारण्य)
सरस्वती वन्यजीव अभयारण्य हरियाणा के यमुनानगर जिले में स्थित है। यह क्षेत्र सरस्वती नदी के आसपास विकसित किया गया है, जो इसे पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। यहाँ नीलगाय, जंगली सूअर, हिरण, सियार तथा विभिन्न पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यह अभयारण्य जैव विविधता संरक्षण और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास के लिए महत्वपूर्ण है।
उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्यजीव अभयारण्य
उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान
Dudhwa National Park (दुधवा राष्ट्रीय उद्यान)
दुधवा राष्ट्रीय उद्यान उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में भारत-नेपाल सीमा पर स्थित है। इसकी स्थापना 1977 में की गई और यह दुधवा टाइगर रिज़र्व का प्रमुख भाग है। यह तराई क्षेत्र का हिस्सा है, जो घने वनों और आर्द्रभूमि से समृद्ध है। यहाँ बाघ, एक सींग वाला गैंडा, बारहसिंगा, हाथी, तेंदुआ आदि पाए जाते हैं। यह जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है और भारत के महत्वपूर्ण संरक्षण क्षेत्रों में शामिल है।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य
Chandraprabha Wildlife Sanctuary (चन्द्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य
चन्द्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में स्थित है। इसकी स्थापना 1957 में की गई। यह अभयारण्य विंध्य पर्वतमाला के घने वनों, झरनों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ चीतल, नीलगाय, तेंदुआ, जंगली सूअर तथा अनेक पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यह चंद्रप्रभा नदी और उसके झरनों (जैसे भभुआ और लैमना) के लिए भी जाना जाता है।
Katarniaghat Wildlife Sanctuary (कतरनियाघाट वन्यजीव अभयारण्य)
कतरनियाघाट वन्यजीव अभयारण्य उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में भारत-नेपाल सीमा के पास स्थित है और यह दुधवा टाइगर रिज़र्व का भाग है। यह घने तराई वनों से युक्त है तथा इसकी स्थापना 1975 में की गई। यहाँ बाघ, तेंदुआ, हाथी, घड़ियाल, गंगा डॉल्फिन एवं अनेक पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यह विशेष रूप से जलीय जैव विविधता और नदी तंत्र के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है।
Hastinapur Wildlife Sanctuary (हस्तिनापुर वन्यजीव अभयारण्य
हस्तिनापुर वन्यजीव अभयारण्य उत्तर प्रदेश के मेरठ, बिजनौर, गाजियाबाद, मुरादाबाद आदि जिलों में फैला हुआ है। यह गंगा नदी के तराई क्षेत्र में स्थित है और इसकी स्थापना 1986 में की गई। यह क्षेत्र घास के मैदानों और आर्द्रभूमि (वेटलैंड) के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ काला हिरण (ब्लैकबक), चिंकारा, नीलगाय, दलदली हिरण तथा अनेक पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
Soor Sarovar Bird Sanctuary (सूर सरोवर पक्षी अभयारण्य)
सूर सरोवर पक्षी अभयारण्य उत्तर प्रदेश के आगरा के पास स्थित है और इसे कीथम झील (Keetham Lake) के नाम से भी जाना जाता है। इसकी स्थापना 1991 में की गई। यह एक प्रमुख आर्द्रभूमि (वेटलैंड) क्षेत्र है और विशेष रूप से प्रवासी पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ सर्दियों में साइबेरिया और अन्य क्षेत्रों से अनेक प्रवासी पक्षी आते हैं। यह अभयारण्य विभिन्न प्रकार के जल पक्षियों और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण है।
16 महाजनपद MCQ | ये 25 सवाल नहीं आए तो कुछ नहीं आएगा (100% Exam Target)
Okhla Bird Sanctuary (ओखला पक्षी अभयारण्य)
ओखला पक्षी अभयारण्य उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) में यमुना नदी के किनारे स्थित है। इसकी स्थापना 1990 में की गई। यह एक महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि (वेटलैंड) क्षेत्र है, जो प्रवासी एवं स्थानीय पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ सर्दियों में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं। यह अभयारण्य दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र का प्रमुख पक्षी आवास स्थल है।
National Chambal Sanctuary (राष्ट्रीय चंबल वन्यजीव अभयारण्य)
राष्ट्रीय चंबल वन्यजीव अभयारण्य उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में फैला हुआ एक त्रि-राज्यीय संरक्षण क्षेत्र है। यह चंबल नदी के किनारे स्थित है और इसकी स्थापना 1979 में की गई। यह अभयारण्य विशेष रूप से घड़ियाल, गंगा डॉल्फिन और मगरमच्छ के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ विभिन्न प्रकार के जलीय जीव और पक्षी भी पाए जाते हैं।
Bakhira Wildlife Sanctuary (बखिरा वन्यजीव अभयारण्य)
बखिरा वन्यजीव अभयारण्य उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले में स्थित एक बड़ा आर्द्रभूमि (वेटलैंड) क्षेत्र है। यह भारत-नेपाल सीमा के निकट स्थित है और इसकी स्थापना 1980 में की गई। यह अभयारण्य विशेष रूप से प्रवासी एवं स्थानीय पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ सर्दियों में बड़ी संख्या में पक्षी आते हैं। यह क्षेत्र जैव विविधता और जल पक्षी संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।
Surha Tal Wildlife Sanctuary (सुरहा ताल वन्यजीव अभयारण्य)
सुरहा ताल वन्यजीव अभयारण्य उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में स्थित है। यह एक विशाल झील (आर्द्रभूमि) क्षेत्र है और इसकी स्थापना 1991 में की गई। यह अभयारण्य प्रवासी एवं स्थानीय पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ सर्दियों में बड़ी संख्या में पक्षी आते हैं। यह गंगा के मैदानी क्षेत्र की जैव विविधता का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
Ranipur Wildlife Sanctuary (रानीपुर वन्यजीव अभयारण्य)
रानीपुर वन्यजीव अभयारण्य उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में स्थित है और बुंदेलखंड क्षेत्र का भाग है। इसकी स्थापना 1977 में की गई। यह क्षेत्र घने जंगलों और पहाड़ी भू-भाग के लिए जाना जाता है। यहाँ तेंदुआ, नीलगाय, चीतल, सियार तथा अन्य वन्यजीव पाए जाते हैं। यह अभयारण्य जैव विविधता और वन संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष (Conclusion)
National Park और अभयारण्य हमारे देश की प्राकृतिक धरोहर हैं, जो वन्यजीवों और जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति को सुरक्षित रखने का काम भी करते हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से यह टॉपिक बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे जुड़े प्रश्न जैसे—स्थान, राज्य, विशेष जीव आदि बार-बार पूछे जाते हैं। इसलिए केवल नाम याद करना ही नहीं, बल्कि उनकी विशेषताओं को समझना भी जरूरी है।
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