जैन धर्म | तीर्थंकर, महावीर, त्रिरत्न, संगीति, पंचमहाव्रत Explained MCQ 2026

जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी ध्यान मुद्रा चित्र, UPSC SSC परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण

प्राचीन भारत का इतिहास भाग-36 MCQ-2026

जैन धर्म | तीर्थंकर, महावीर, त्रिरत्न, संगीति, पंचमहाव्रत Explained MCQ 2026

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प्रश्न 1. ‘जैन’ शब्द किस शब्द से निकला है?

(A) जीन
(B) जिन
(C) जन
(D) जीव

उत्तर: (B) जिन

📝 ‘जैन’ शब्द ‘जिन’ से निकला है जिसका अर्थ होता है ‘विजेता’। यह शब्द सर्वप्रथम जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर महावीर के लिए प्रयुक्त किया गया था, क्योंकि महावीर ने अपनी समस्त इन्द्रियों पर विजय प्राप्त कर ली थी। महावीर के काल से पहले इस धर्म को ‘निर्ग्रन्थ’ या ‘निगण्ठ’ के नाम से जाना जाता था, जिसका अर्थ होता है — वह जिसने समस्त सांसारिक ग्रन्थियों या बंधनों से अपना नाता तोड़ लिया हो। बौद्ध साहित्य में महावीर को ‘निगण्ठनाथपुत्त’ कहा गया है। अतः जैन धर्म का वर्तमान नाम महावीर के काल में ही अस्तित्व में आया।

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प्रश्न 2. जैन धर्म को पहले किस नाम से जाना जाता था?

(A) श्रमण धर्म
(B) निर्ग्रन्थ
(C) आजीवक
(D) लोकायत

उत्तर: (B) निर्ग्रन्थ

📝 जैन धर्म का वर्तमान नाम महावीर के काल से प्रचलित हुआ। इससे पूर्व इस धर्म को ‘निर्ग्रन्थ’ या ‘निगण्ठ’ के नाम से जाना जाता था। निर्ग्रन्थ का शाब्दिक अर्थ है — वह व्यक्ति जिसने सांसारिक ग्रन्थियों और बंधनों से पूर्णतः मुक्ति पा ली हो। बौद्ध साहित्यों में महावीर के लिए ‘निगण्ठनाथपुत्त’ या ‘निर्ग्रन्यज्ञात्रीपुत्र’ शब्दों का प्रयोग किया गया है। छठी शताब्दी ईपू में मध्य गांगेय क्षेत्र में जो 62 धार्मिक सम्प्रदाय ब्राह्मणीय व्यवस्था के विरोध में उठे थे, उनमें जैन धर्म एक प्रमुख सम्प्रदाय था।

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प्रश्न 3. जैन धर्म में कुल कितने तीर्थंकर हुए?

(A) 12
(B) 20
(C) 24
(D) 32

उत्तर: (C) 24

📝 जैन धर्म के अंतर्गत कुल 24 तीर्थंकर हुए। ‘तीर्थंकर’ शब्द ‘तीर्थ’ से निःसृत है जिसका अर्थ उस मार्ग या साधन से है जिसके द्वारा संसार रूपी भवसागर को पार किया जा सकता है। तीर्थंकर को ‘Ford makers across the stream of existence’ भी कहा गया है। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव (आदिनाथ) थे और अंतिम यानी 24वें तीर्थंकर महावीर थे। इन 24 तीर्थंकरों में से पार्श्वनाथ 23वें और पहले ऐतिहासिक तीर्थंकर माने जाते हैं। 22वें तीर्थंकर नेमिनाथ महाभारत काल से संबंधित थे।
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प्रश्न 4. जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर कौन थे?

(A) पार्श्वनाथ
(B) महावीर
(C) ऋषभदेव
(D) नेमिनाथ

उत्तर: (C) ऋषभदेव

📝 जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव थे, जिनका एक अन्य प्रसिद्ध नाम ‘आदिनाथ’ था। इन्हीं ऋषभदेव की मूर्ति राजस्थान के माउंट आबू पर्वत के समीप दिलवाड़ा में स्थित प्रसिद्ध जैन मंदिर में प्रतिष्ठापित है। इस मंदिर का निर्माण गुजरात के चालुक्य-सोलंकी वंश के शासक भीम प्रथम के मंत्री ‘विमल’ ने करवाया था। इस मंदिर को ‘आदिशाही का मंदिर’ तथा ‘विमलशाही का मंदिर’ दोनों नामों से जाना जाता है। ऋषभदेव का प्रतीक चिन्ह ‘वृषभ’ (Bull) था। ये जैन परंपरा में सर्वाधिक पूजनीय तीर्थंकर माने जाते हैं।

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प्रश्न 5. दिलवाड़ा के प्रसिद्ध जैन मंदिर का निर्माण किसने करवाया था?

(A) चंद्रगुप्त मौर्य
(B) विमल
(C) चामुण्डराय
(D) भीम प्रथम

उत्तर: (B) विमल

📝 राजस्थान के माउंट आबू पर्वत के समीप दिलवाड़ा में स्थित सफेद संगमरमर के प्रसिद्ध जैन मंदिर का निर्माण गुजरात के चालुक्य-सोलंकी वंशीय शासक भीम प्रथम के मंत्री ‘विमल’ ने करवाया था। इस मंदिर में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव (आदिनाथ) की मूर्ति प्रतिष्ठापित है। इस मंदिर को ‘आदिशाही का मंदिर’ और निर्माता के नाम पर ‘विमलशाही का मंदिर’ भी कहा जाता है। यह मंदिर सफेद संगमरमर की उत्कृष्ट शिल्पकला के लिए भारत ही नहीं बल्कि विश्व भर में प्रसिद्ध है — जैन वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना।

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प्रश्न 6. जैन धर्म के 19वें तीर्थंकर ‘मल्लिनाथ’ का प्रतीक चिन्ह क्या था?

(A) वृषभ
(B) शंख
(C) कलश
(D) सर्प

उत्तर: (C) कलश

📝 जैन धर्म के 19वें तीर्थंकर ‘मल्लिनाथ’ का प्रतीक चिन्ह ‘कलश’ (Urn) था। मल्लिनाथ को लेकर जैन धर्म के दोनों प्रमुख सम्प्रदायों में मतभेद है — श्वेतांबर सम्प्रदाय के अनुसार मल्लिनाथ स्त्री थीं, जबकि दिगंबर सम्प्रदाय उन्हें पुरुष मानता है। यह विवाद आज भी जैन धर्म में अनुत्तरित है। जैन धर्म के विभिन्न तीर्थंकरों के अलग-अलग प्रतीक चिन्ह थे — जैसे ऋषभदेव का वृषभ (Bull), नेमिनाथ का शंख (Conch), पार्श्वनाथ का सर्प आदि। ये प्रतीक चिन्ह उनकी पहचान और मूर्तियों में दर्शाए जाते थे।

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प्रश्न 7. जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर कौन थे?

(A) पार्श्वनाथ
(B) मल्लिनाथ
(C) नेमिनाथ
(D) ऋषभदेव

उत्तर: (C) नेमिनाथ

📝 जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर अरिष्टनेमि या नेमिनाथ थे। ये महाभारत काल से संबंधित थे। प्रसिद्ध जैन साहित्य ‘उत्तराध्ययन सूत्र’ के अनुसार वे कृष्ण के समकालीन और संभवतः उनके सम्बन्धी भी थे। नेमिनाथ का प्रतीक चिन्ह ‘शंख’ (Conch) था — उनकी मूर्तियों में इसी शंख चिन्ह को दर्शाया जाता है। जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों में नेमिनाथ का विशेष महत्व है क्योंकि उनका संबंध महाभारत जैसे महान ऐतिहासिक काल से जोड़ा जाता है, जो उन्हें एक ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाता है।

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प्रश्न 8. जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ का प्रतीक चिन्ह क्या था?

(A) वृषभ
(B) कलश
(C) शंख
(D) सर्प

उत्तर: (D) सर्प

📝 जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ का प्रतीक चिन्ह ‘सर्प’ था — उनकी मूर्तियों में उनके सिर पर एक सर्प को फण फैलाये दर्शाया गया है। पार्श्वनाथ जैन धर्म के पहले ऐतिहासिक तीर्थंकर माने जाते हैं। उनका जन्म काशी नरेश ‘अश्वसेन’ के घर हुआ था और उनकी माता का नाम ‘रानी वामा’ था। उनका जन्म महावीर से लगभग 250 वर्ष पूर्व हुआ था। उनका विवाह ‘प्रभावती’ से हुआ था। 30 वर्ष की अवस्था में गृह त्याग के बाद 83 दिनों की कठोर तपस्या के बाद 84वें दिन पारसनाथ (बिहार) के ‘सम्मेद शिखर’ पर उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ।

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प्रश्न 9. पार्श्वनाथ ने जैन धर्म के कितने महाव्रतों का प्रतिपादन किया था?

(A) दो
(B) तीन
(C) चार
(D) पाँच

उत्तर: (C) चार

📝 जैन धर्म के पंचमहाव्रतों में से प्रथम चार महाव्रतों का प्रतिपादन 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ ने किया था। ये चार महाव्रत हैं — (1) अहिंसा (Non-injury), (2) अमृषा / सत्य (Non-lying), (3) अचौर्य / अस्तेय (Non-stealing), (4) अपरिग्रह (Non-possession of property)। इन चार महाव्रतों में पाँचवाँ महाव्रत ‘ब्रह्मचर्य’ (Celibacy) बाद में 24वें तीर्थंकर महावीर ने जोड़ा। इस प्रकार जैन धर्म के पंचमहाव्रत दो तीर्थंकरों के योगदान से पूर्ण हुए — यही छोटा सा अंतर परीक्षाओं में बड़ा फ़र्क डालता है।

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प्रश्न 10. महावीर ने जैन धर्म के पंचमहाव्रतों में कौन सा महाव्रत जोड़ा?

(A) अहिंसा
(B) अपरिग्रह
(C) ब्रह्मचर्य
(D) अस्तेय

उत्तर: (C) ब्रह्मचर्य

📝 जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर महावीर ने पार्श्वनाथ द्वारा प्रतिपादित चार महाव्रतों में पाँचवाँ महाव्रत ‘ब्रह्मचर्य’ (Celibacy) जोड़ा। इस प्रकार जैन धर्म के पाँचों महाव्रत पूर्ण हुए — अहिंसा, सत्य (अमृषा), अस्तेय (अचौर्य), अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य। ब्रह्मचर्य का अर्थ है यौन संयम अर्थात् काम वासना पर नियंत्रण। महावीर ने स्वयं गृह त्याग के बाद कठोर ब्रह्मचर्य का पालन किया। यह महाव्रत जैन साधुओं और साध्वियों के लिए अनिवार्य माना जाता है।

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प्रश्न 11. महावीर का मूल नाम क्या था?

(A) सिद्धार्थ
(B) वर्द्धमान
(C) नन्दिवर्धन
(D) जामालि

उत्तर: (B) वर्द्धमान

📝 जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर महावीर का मूल नाम ‘वर्द्धमान’ था। उनका यह नाम इसलिए रखा गया क्योंकि उनके जन्म के समय पिता के राज्य में चारों तरफ समृद्धि और वृद्धि हुई थी। बाद में इन्द्रियों पर विजय प्राप्त करने के कारण वे ‘जिन’ और ‘महावीर’ कहलाए। ज्ञान प्राप्ति के बाद उन्हें ‘अर्हत’ (योग्य), ‘केवलिन’ और ‘जिन’ जैसे नामों से भी जाना गया। महावीर का जन्म 540 ईपू (कुछ स्थानों पर 599 ईपू) में वैशाली के कुण्डग्राम में हुआ था। वे जैन धर्म के वास्तविक संस्थापक (Real Founder) माने जाते हैं।

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प्रश्न 12. महावीर का जन्म कहाँ हुआ था?

(A) पाटलिपुत्र
(B) कुशीनगर
(C) वैशाली के कुण्डग्राम में
(D) काशी

उत्तर: (C) वैशाली के कुण्डग्राम में

📝 महावीर का जन्म 540 ईपू (कुछ मतों के अनुसार 599 ईपू) में वैशाली के कुण्डग्राम में हुआ था। यह स्थान वर्तमान में तिरहुत मण्डल के वैशाली जनपद के बसाढ़ ग्राम के आस-पास ‘बासुकुंड’ नामक स्थान पर माना जाता है जो बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में स्थित है। महावीर के पिता का नाम सिद्धार्थ था जो वज्जि महाजनपद के अंतर्गत ज्ञातृक गण (Jnatrika Clan) के मुखिया थे। उनकी माता का नाम ‘त्रिशला’ था जो वैशाली के लिच्छवि नरेश चेटक की बहन थीं।

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प्रश्न 13. महावीर के पिता का क्या नाम था?

(A) अश्वसेन
(B) शुद्धोधन
(C) सिद्धार्थ
(D) चेटक

उत्तर: (C) सिद्धार्थ

📝 महावीर के पिता का नाम ‘सिद्धार्थ’ था। वे वज्जि महाजनपद के अंतर्गत ज्ञातृक गण (Jnatrika Clan) के मुखिया थे। यहाँ एक बड़ी भ्रांति से बचना जरूरी है — गौतम बुद्ध के पिता का नाम ‘शुद्धोधन’ था, वे अलग व्यक्ति हैं। महावीर की माता ‘त्रिशला’ लिच्छवि नरेश चेटक की बहन थीं। मगध नरेश बिम्बसार ने चेटक की पुत्री ‘चेल्लना’ से विवाह किया था, जिससे महावीर का संबंध बिम्बसार से भी बनता था। महावीर की पत्नी का नाम यशोदा और पुत्री का नाम अनोज्जा प्रियदर्शना था।

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प्रश्न 14. महावीर के प्रथम शिष्य और जामाता कौन थे?

(A) इन्द्रभूति
(B) सुधर्मन
(C) जामालि
(D) स्थूलभद्र

उत्तर: (C) जामालि

📝 महावीर के दामाद (जामाता) का नाम ‘जामालि’ था। वे महावीर के प्रथम शिष्य भी थे। जैन धर्म के सिद्धांतों को लेकर महावीर का सर्वप्रथम विवाद इन्हीं जामालि से हुआ था। इतिहास में इन्हें “जैन संघ में पहले मतभेद (First Schism) के नेता” के रूप में जाना जाता है। महावीर की पुत्री का नाम ‘अनोज्जा प्रियदर्शना’ था और जामालि उन्हीं के पति थे। यह तथ्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है और अक्सर छात्र इन्द्रभूति या सुधर्मन के साथ इन्हें confuse कर देते हैं।

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प्रश्न 15. महावीर ने किस भाषा में अपने विचारों का प्रचार किया?

(A) पालि
(B) संस्कृत
(C) अर्द्धमागधी / प्राकृत
(D) अपभ्रंश

उत्तर: (C) अर्द्धमागधी / प्राकृत

📝 जहाँ गौतम बुद्ध ने अपने धर्म प्रचार के लिए ‘पालि’ भाषा का उपयोग किया, वहीं महावीर ने ‘अर्द्धमागधी’ अथवा ‘प्राकृत’ भाषा का प्रयोग किया। ज्ञान प्राप्ति के उपरांत महावीर ने लगभग 30 वर्षों तक अपने विचारों का प्रचार-प्रसार किया। अर्द्धमागधी जन साधारण की भाषा थी जो उस काल में मध्य गांगेय क्षेत्र में बोली जाती थी, यही कारण है कि उनके उपदेश सामान्य जनमानस तक आसानी से पहुँचे। जैन धर्म के अधिकांश प्रारंभिक ग्रंथ इसी अर्द्धमागधी भाषा में लिखे गए।
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प्रश्न 16. महावीर ने कितने गणों की नियुक्ति की थी?

(A) सात
(B) नौ
(C) ग्यारह
(D) बारह

उत्तर: (C) ग्यारह

📝 महावीर ने अपने विचारों का प्रचार-प्रसार करने हेतु ग्यारह गणों की नियुक्ति की। प्रत्येक गण का एक प्रधान होता था जिसे ‘गणधर’ कहा जाता था — इसलिए कुल गणधरों की संख्या भी ग्यारह थी और ये सभी ब्राह्मण थे। इन ग्यारह गणधरों में से केवल दो — ‘इन्द्रभूति’ और ‘आचार्य सुधर्मन’ — महावीर के जीवनकाल तक जीवित रहे, शेष सबकी मृत्यु पहले ही हो गई। महावीर की मृत्यु के पश्चात् आचार्य सुधर्मन को जैन संघ का प्रथम प्रधान (First Pontiff) बनाया गया।

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प्रश्न 17. महावीर की मृत्यु कहाँ और कितने वर्ष की अवस्था में हुई?

(A) वैशाली में, 80 वर्ष
(B) पावा में, 72 वर्ष
(C) राजगृह में, 68 वर्ष
(D) पाटलिपुत्र में, 75 वर्ष

उत्तर: (B) पावा में, 72 वर्ष

📝 महावीर की मृत्यु 72 वर्ष की अवस्था में ‘पावा’ में हुई। यह मृत्यु मल्ल राजा ‘शस्तिपाल’ या ‘हस्तिपाल’ के दरबार में 468 ईपू (कुछ स्थानों पर 527 ईपू) में हुई। महावीर की मृत्यु के पश्चात् जैन संघ के प्रथम प्रधान के रूप में आचार्य सुधर्मन को चुना गया। पावा वर्तमान बिहार में स्थित है और यह जैन धर्म में एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है। महावीर की मृत्यु की तिथि को जैन धर्म में ‘दीपावली’ के रूप में मनाया जाता है — इसीलिए दीपावली का विशेष महत्व है।

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प्रश्न 18. श्रवणबेलगोला की प्रसिद्ध बाहुबली मूर्ति (गोमतेश्वर) का निर्माण किसने करवाया?

(A) विमल
(B) चंद्रगुप्त मौर्य
(C) चामुण्डराय
(D) स्थूलभद्र

उत्तर: (C) चामुण्डराय

📝 मैसूर के गंग वंश के राजा राजमल चतुर्थ (रचमल) के मंत्री एवं सेनापति चामुण्डराय ने 974 ई० में श्रवणबेलगोला (हासन जिला, कर्नाटक) के पास बाहुबली जिन मूर्ति का निर्माण करवाया जिसे ‘गोमतेश्वर की मूर्ति’ कहा जाता है। यह मूर्ति 70 फीट ऊँची है और एक ही पत्थर को काटकर बनाई गई थी। यह ऋषभदेव के पुत्र बाहुबली की मूर्ति मानी जाती है। बाहुबली ने अपने बड़े भाई भरत के साथ हुए घोर संघर्ष में जीत के बाद जीता हुआ राज्य भरत को वापस कर दिया — शक्ति, साधुत्व और त्याग का अद्भुत प्रतीक।

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प्रश्न 19. जैन धर्म के अनुसार मोक्ष प्राप्ति के मार्ग को क्या कहा जाता है?

(A) अष्टांगिक मार्ग
(B) त्रिरत्न
(C) पंचमहाव्रत
(D) चतुर्आर्य सत्य

उत्तर: (B) त्रिरत्न

📝 जैन धर्म में मोक्ष की प्राप्ति के मार्ग को ‘त्रिरत्न’ कहा जाता है। जैन धर्म के त्रिरत्न के अंतर्गत तीन तत्व आते हैं — (1) सम्यक् श्रद्धा या दर्शन (Right Faith), (2) सम्यक् ज्ञान (Right Knowledge), (3) सम्यक् चरित्र (Right Conduct)। इसके विपरीत बौद्ध धर्म में मोक्ष के लिए ‘अष्टांगिक मार्ग’ में विश्वास किया जाता है। जैन और बौद्ध दोनों धर्मों ने मानव जीवन का परम लक्ष्य मोक्ष को माना, परंतु मोक्ष प्राप्ति के मार्ग में दोनों में अंतर है — यह UPSC, SSC जैसी परीक्षाओं में बहुत बार पूछा जाता है।

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प्रश्न 20. जैन धर्म में ‘सल्लेखना’ या ‘संथारा’ का क्या अर्थ है?

(A) ईश्वर की उपासना
(B) निर्जल और निराहार रहकर प्राण त्याग
(C) तीर्थ यात्रा
(D) दान-पुण्य करना

उत्तर: (B) निर्जल और निराहार रहकर प्राण त्याग

📝 जैन धर्म ‘सल्लेखना’ या ‘संथारा’ में विश्वास करता है — इसका अर्थ है निर्जल और निराहार रहकर अर्थात् उपवास के द्वारा प्राण का परित्याग करना (Fasting until death)। यही परंपरा जैन धर्म को एक अतिमार्गीय धर्म बनाती है, जबकि बौद्ध धर्म मध्यममार्गीय है। चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने जीवन के अंतिम समय में राजगद्दी का परित्याग करके कर्नाटक के श्रवणबेलगोला के निकट ‘चंद्रगिरि’ नामक पर्वत पर इसी सल्लेखना पद्धति से अपने प्राण का परित्याग किया था — एक राजा से संन्यासी बनने की यह यात्रा आज भी अद्वितीय है।

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प्रश्न 21. जैन धर्म की प्रथम संगीति (Council) कहाँ आयोजित हुई थी?

(A) वल्लभी
(B) वैशाली
(C) पाटलिपुत्र
(D) राजगृह

उत्तर: (C) पाटलिपुत्र

📝 जैन धर्म की प्रथम संगीति का आयोजन पाटलिपुत्र (कुसुमपुर) में 300 ईपू के आस-पास हुआ था। इसके अध्यक्ष ‘स्थूलभद्र’ थे और समकालीन शासक चंद्रगुप्त मौर्य थे। इस संगीति में ‘बारह अंग’ के रूप में जैनागम साहित्यों का संकलन किया गया। इसी संगीति के परिणामस्वरूप जैन धर्म दो शाखाओं में विभाजित हो गया — श्वेतांबर (स्थूलभद्र के नेतृत्व में) और दिगंबर (भद्रबाहु के नेतृत्व में)। श्वेतांबर श्वेत वस्त्र धारण करते हैं जबकि दिगंबर नग्न रहते हैं।

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प्रश्न 22. जैन धर्म की द्वितीय संगीति कहाँ और किस वर्ष आयोजित हुई?

(A) पाटलिपुत्र, 300 ईपू
(B) वल्लभी, 512 ई०
(C) राजगृह, 483 ईपू
(D) वैशाली, 383 ईपू

उत्तर: (B) वल्लभी, 512 ई०

📝 जैन धर्म की द्वितीय संगीति का आयोजन वल्लभी (काठियावाड़, गुजरात) में 512 ई० में हुआ था। इसके अध्यक्ष ‘देवार्धिगण क्षमाश्रमण’ थे और समकालीन शासक वल्लभी के मैत्रक वंशीय ‘ध्रुवसेन प्रथम’ थे। इस संगीति के परिणामस्वरूप अनेक उपांग साहित्यों की रचना हुई। यहाँ यह भी याद रखें कि जैन धर्म की सबसे प्राचीन शिक्षा ‘चौदह पूर्व’ मानी जाती है जिसे स्थूलभद्र ने भद्रबाहु से सीखा था। द्वितीय जैन संगीति ने जैन साहित्य को एक व्यवस्थित रूप देने में बड़ी भूमिका निभाई।

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प्रश्न 23. जैन और बौद्ध धर्म में आत्मा की अवधारणा के बारे में क्या सही है?

(A) दोनों अनात्मवादी हैं
(B) दोनों आत्मवादी हैं
(C) जैन अनात्मवादी, बौद्ध आत्मवादी है
(D) जैन आत्मवादी, बौद्ध अनात्मवादी है

उत्तर: (D) जैन आत्मवादी, बौद्ध अनात्मवादी है

📝 बौद्ध धर्म अनात्मवादी (No Soul Theory) धर्म है — वह आत्मा के स्थायी अस्तित्व को नहीं मानता। इसके विपरीत जैन धर्म आत्मवादी है और अनेक आत्माओं के अस्तित्व में विश्वास करता है, इसीलिए जैन धर्म की आत्मा विषयक अवधारणा को ‘अनेकात्मवादी’ (Many Soul Theory) कहा जाता है। जैन और बौद्ध दोनों धर्मों में कई समानताएँ हैं जैसे — दोनों अनीश्वरवादी, दोनों अहिंसावादी और दोनों ने कर्म सिद्धांत में विश्वास किया। परंतु आत्मा की अवधारणा में ये दोनों मौलिक रूप से अलग हैं।

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प्रश्न 24. जैन धर्म की किस संगीति में यह दो शाखाओं (श्वेतांबर व दिगंबर) में विभाजित हुआ?

(A) प्रथम जैन संगीति
(B) द्वितीय जैन संगीति
(C) तृतीय जैन संगीति
(D) चतुर्थ जैन संगीति

उत्तर: (A) प्रथम जैन संगीति

📝 जैन धर्म की प्रथम संगीति (लगभग 300 ईपू, पाटलिपुत्र) के परिणामस्वरूप जैन धर्म दो शाखाओं में विभाजित हो गया। स्थूलभद्र के नेतृत्व में ‘श्वेतांबर’ शाखा और भद्रबाहु के नेतृत्व में ‘दिगंबर’ शाखा का उदय हुआ। श्वेतांबर (those who wear white cloth) श्वेत वस्त्र धारण करते हैं जबकि दिगंबर (wear no cloth) नग्न रहते हैं। यह विभाजन मुख्यतः वस्त्र धारण के प्रश्न पर हुआ था। मल्लिनाथ के स्त्री या पुरुष होने जैसे सैद्धांतिक मतभेद भी हैं — और यह विभाजन आज भी जैन धर्म में विद्यमान है।

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प्रश्न 25. महावीर को ज्ञान की प्राप्ति कहाँ हुई थी?

(A) सम्मेद शिखर, बिहार
(B) बोधगया
(C) ऋजुपालिका नदी के किनारे, शाल वृक्ष के नीचे
(D) पावापुरी

उत्तर: (C) ऋजुपालिका नदी के किनारे, शाल वृक्ष के नीचे

📝 गृहत्याग के उपरांत 12 वर्षों की कठोर तपस्या के बाद तेरहवें वर्ष में अंग देश के जृंभिय ग्राम के बाहर ‘ऋजुपालिका नदी’ (उज्जुवालिया नदी) के किनारे शाल वृक्ष के नीचे महावीर को ‘कैवल्य’ या ज्ञान की प्राप्ति हुई। इसके बाद वे ‘जिन’ (विजेता), ‘अर्हत’ (योग्य) और ‘केवलिन’ कहलाए। ध्यान रहे — पार्श्वनाथ को ज्ञान ‘सम्मेद शिखर’ पर हुई थी जबकि गौतम बुद्ध को ‘बोधगया’ में पीपल वृक्ष के नीचे। यह तीनों अंतर एक साथ याद कर लें — परीक्षाओं में बार-बार इन्हीं तीनों को आपस में mix करके पूछा जाता है।
GK के 30 महत्वपूर्ण प्रश्न MCQ 2026 – परीक्षा में बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न-
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