
प्रस्तावना: इतिहास के पन्नों में छिपी कहानी
जब हम भारतीय सभ्यता के इतिहास की बात करते हैं, तो वैदिक काल एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय है जो हमारी सांस्कृतिक जड़ों को समझने की कुंजी देता है। यह वह दौर था जब समाज अपने आरंभिक रूप में था, जब परंपराएं बन रही थीं और जब सामाजिक संरचनाएं धीरे-धीरे आकार ले रही थीं। आज के प्रतियोगी परीक्षाओं में यह विषय न केवल महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमें यह समझने में भी मदद करता है कि हमारा समाज कैसे विकसित हुआ। आइए, इस यात्रा में हम ऋग्वैदिक काल से लेकर उत्तर वैदिक काल तक के सामाजिक परिवर्तनों को गहराई से समझते हैं।
ऋग्वैदिक काल: सरलता और प्रकृति का युग
भोजन और जीवनशैली
ऋग्वैदिक काल के लोगों का जीवन प्रकृति के बेहद करीब था। यह एक ऐसा समय था जब लोग अपने भोजन के लिए पूरी तरह से प्रकृति पर निर्भर थे। आर्य शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार का भोजन करते थे, जो उनकी व्यावहारिक सोच को दर्शाता है। उनके मुख्य भोजन में जौ से बना ‘करंभ’ (जौ और दही का मिश्रण) शामिल था, जो उस समय की एकमात्र प्रमुख कृषि फसल का उपयोग दिखाता है।
दिलचस्प बात यह है कि गाय को ‘अघन्या’ यानी न मारी जाने वाली कहा जाता था, परंतु धार्मिक यज्ञों में कभी-कभी इसकी भी बलि दी जाती थी। यह विरोधाभास हमें बताता है कि धार्मिक परंपराएं और व्यावहारिक जरूरतें कैसे आपस में जुड़ी थीं। सोमरस, जो एक पवित्र पेय पदार्थ था, धार्मिक अनुष्ठानों में केंद्रीय भूमिका निभाता था। यह सिर्फ एक पेय नहीं था, बल्कि देवताओं को प्रसन्न करने का माध्यम माना जाता था।
सरल धर्म और प्रकृति पूजा
ऋग्वैदिक काल का धर्म आश्चर्यजनक रूप से सरल और प्रकृतिवादी था। लोग इंद्र (वर्षा के देवता), अग्नि (अग्नि के देवता), वरुण (जल और न्याय के देवता) जैसे प्राकृतिक शक्तियों की पूजा करते थे। यहां कोई जटिल कर्मकांड नहीं था, न ही पुरोहित वर्ग का कोई एकाधिकार। मंत्रों के माध्यम से देवताओं की स्तुति की जाती थी और यज्ञ अपेक्षाकृत सरल होते थे। यह एक लोकतांत्रिक धार्मिक व्यवस्था थी जहां हर व्यक्ति सीधे देवताओं से संवाद कर सकता था।
उत्तर वैदिक काल: परिवर्तन का दौर
कर्मकांड का उदय और पुरोहित वर्ग की शक्ति
जैसे-जैसे समय बीता, ऋग्वैदिक काल की सरलता समाप्त होने लगी। उत्तर वैदिक काल में धार्मिक अनुष्ठान अत्यंत जटिल हो गए। अब यज्ञ विशाल आयोजन बन गए जिनमें कई दिन लगते थे और हजारों लोग भाग लेते थे। राजसूय, अश्वमेध और वाजपेय जैसे महायज्ञों का आयोजन होने लगा, जिनमें राजा की शक्ति और प्रतिष्ठा जुड़ी होती थी।
इस बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम था पुरोहित वर्ग का शक्तिशाली होना। ब्राह्मण अब केवल धार्मिक अनुष्ठानों के विशेषज्ञ नहीं रहे, बल्कि वे समाज में सबसे प्रभावशाली वर्ग बन गए। वर्ण व्यवस्था जन्म-आधारित हो गई और ब्राह्मणों का सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक एकाधिकार स्थापित हो गया। इस एकाधिकार के विरुद्ध बाद में बौद्ध और जैन धर्म का उदय हुआ, जो वर्ण-व्यवस्था और ब्राह्मण-प्रभुत्व को चुनौती देते थे।
विवाह परंपराएं: आठ प्रकार की विविधता
उत्तर वैदिक काल की सबसे दिलचस्प सामाजिक विशेषताओं में से एक थी आठ प्रकार की विवाह प्रणालियां। गृह्य सूत्र में वर्णित ये विवाह प्रकार समाज की जटिलता और विविधता को दर्शाते हैं।
शास्त्रसम्मत विवाह (प्रथम चार)
1. ब्रह्म विवाह: यह सबसे प्रतिष्ठित और आदर्श विवाह माना जाता था। इसमें पिता अपनी सुशिक्षित कन्या को एक योग्य वर को देते थे, जो शास्त्रों में पारंगत हो। यह Arranged Marriage का सबसे सम्मानित रूप था।
2. दैव विवाह: इस विवाह में कन्या के पिता अपनी पुत्री को यज्ञ संपन्न करने वाले ब्राह्मण को यज्ञ की दक्षिणा के रूप में देते थे। यह पूरी तरह निःशुल्क और धार्मिक दान माना जाता था।
3. आर्ष विवाह: इसमें वर एक जोड़ी बैल और गाय देकर कन्या को प्राप्त करता था। यह धार्मिक भेंट थी, न कि कन्या का मूल्य।
4. प्रजापत्य विवाह: इसमें कन्या और वर को साथ रहने का आशीर्वाद देकर विवाह संपन्न होता था।
निंदनीय विवाह (शेष चार)
5. असुर विवाह (Marriage by Purchase): इसमें वर पक्ष से धन लेकर कन्या दी जाती थी। यह एक प्रकार का क्रय विवाह था और शास्त्रों में इसकी कठोर निंदा की गई थी।
6. गांधर्व विवाह (Love Marriage): यह प्रेम विवाह था जिसमें युवक-युवती परस्पर प्रेम और सहमति से बिना माता-पिता की अनुमति के विवाह करते थे। महाभारत में शकुंतला-दुष्यंत और अर्जुन-सुभद्रा के विवाह इसके प्रसिद्ध उदाहरण हैं।
7. राक्षस विवाह (Marriage by Capture): इसमें कन्या का बलपूर्वक अपहरण करके विवाह किया जाता था। क्षत्रियों में यह प्रथा कभी-कभी प्रचलित थी।
8. पैशाच विवाह (Marriage involving seduction and rape): यह सबसे निकृष्ट और निंदनीय विवाह था। इसमें अचेतन, सोई हुई या उन्मत्त कन्या के साथ छल-कपट द्वारा जबरदस्ती विवाह किया जाता था।
यह विविधता दर्शाती है कि वैदिक समाज में धर्मशास्त्र और वास्तविक सामाजिक अभ्यास में काफी अंतर था।
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स्त्रियों की बदलती स्थिति: गिरावट का दौर
ऋग्वैदिक काल में स्त्रियों की स्थिति
ऋग्वैदिक काल में स्त्रियों को अपेक्षाकृत अधिक स्वतंत्रता और सम्मान प्राप्त था। वे शिक्षा प्राप्त करती थीं, धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेती थीं और समाज में उनकी राय का महत्व था।
उत्तर वैदिक काल में गिरावट
उत्तर वैदिक काल में स्त्रियों की स्थिति में स्पष्ट गिरावट दिखाई देती है, हालांकि यह पतन पूर्ण नहीं था। कई ब्राह्मण ग्रंथों में स्त्रियों के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण मिलता है:
मैत्रायणी संहिता (कृष्ण यजुर्वेद) में स्त्रियों को जुआ और शराब के साथ पुरुष की तीन अनिवार्य बुराइयों में गिना गया है। ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद से संबंधित) में कन्या को ‘चिंता का स्पष्ट कारण’ बताया गया है। तैत्तिरीय आरण्यक में स्त्रियों को ‘शूद्रवत् पतित’ कहा गया है।
परंतु, यह भी सत्य है कि इस काल में अनेक विदुषी स्त्रियां थीं:
गार्गी वचक्नवी: विदेह के राजा जनक के दरबार में याज्ञवल्क्य से शास्त्रार्थ करने वाली विदुषी। उन्होंने गहन दार्शनिक प्रश्न पूछे जिन्होंने याज्ञवल्क्य को भी चकित कर दिया।
मैत्रेयी: याज्ञवल्क्य की पत्नी, जिनका प्रसिद्ध दार्शनिक संवाद वृहदारण्यक उपनिषद में वर्णित है। इसमें याज्ञवल्क्य ने उन्हें आत्मा, ब्रह्म, मोक्ष और पुनर्जन्म के विषय में गहन ज्ञान दिया।
इसके अलावा सुलभा, वडवा, प्राशितैयी, कात्यायनी जैसी विदुषियां भी इस काल में थीं। विधवा पुनर्विवाह और नियोग प्रथा अभी भी प्रचलित थीं। बाल विवाह, सती प्रथा और पर्दा प्रथा इस काल में पूरी तरह स्थापित नहीं हुई थीं। परंतु उपनयन संस्कार बंद हो गया और विदथ एवं सभा में स्त्रियों की भागीदारी समाप्त हो गई।
गोत्र व्यवस्था: सामाजिक संगठन का आधार
गोत्र व्यवस्था उत्तर वैदिक काल की एक महत्वपूर्ण सामाजिक संस्था थी। ‘गोत्र’ शब्द का शाब्दिक अर्थ है गाय बांधने का स्थान, परंतु सामाजिक संदर्भ में यह ऋषि-वंश परंपरा को दर्शाता है। गोत्र व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य था:
- एक ही पूर्वज (ऋषि) की वंश-परंपरा से उत्पन्न लोगों की पहचान करना
- सगोत्र विवाह को रोकना
जो लोग एक ही गोत्र के होते हैं, वे परस्पर भाई-बहन माने जाते हैं और उनके बीच विवाह निषिद्ध होता है। यह व्यवस्था आज भी हिंदू समाज में विवाह के समय महत्वपूर्ण मानी जाती है और गोत्र की जांच की जाती है। यह एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण था जो आनुवंशिक विविधता को बनाए रखने में मदद करता था।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
प्रमुख ग्रंथ और उनका संबंध
- वृहदारण्यक उपनिषद: शुक्ल यजुर्वेद से संबंधित, सबसे बड़ा उपनिषद
- मैत्रायणी संहिता: कृष्ण यजुर्वेद की शाखा
- ऐतरेय ब्राह्मण: ऋग्वेद से संबंधित
- तैत्तिरीय आरण्यक: कृष्ण यजुर्वेद से संबंधित
याद रखने योग्य तथ्य
- ऋग्वैदिक काल की एकमात्र फसल: जौ
- पवित्र पेय पदार्थ: सोमरस
- जौ और दही से बना भोजन: करंभ
- गाय का उपनाम: अघन्या (न मारी जाने वाली)
- शास्त्रसम्मत विवाह: ब्रह्म, दैव, आर्ष, प्रजापत्य
- निंदनीय विवाह: असुर, गांधर्व, राक्षस, पैशाच
निष्कर्ष: इतिहास से सबक
वैदिक काल का अध्ययन केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक जड़ों को समझने के लिए भी आवश्यक है। यह हमें दिखाता है कि समाज कैसे विकसित होता है, कैसे सरल व्यवस्थाएं जटिल बनती हैं और कैसे सामाजिक संरचनाएं समय के साथ बदलती हैं।
ऋग्वैदिक काल की सरलता से लेकर उत्तर वैदिक काल की जटिलता तक की यात्रा हमें यह भी बताती है कि किसी भी समाज में शक्ति का केंद्रीकरण और एकाधिकार अंततः प्रतिक्रिया को जन्म देता है। ब्राह्मण वर्ग के बढ़ते प्रभुत्व के विरुद्ध बौद्ध और जैन धर्म का उदय इसका प्रमाण है।
वैदिक काल: सामाजिक एवं धार्मिक इतिहास (MCQs)
प्रश्न 1. ऋग्वैदिक काल में आर्य किस प्रकार के भोजन करते थे?
(A) केवल शाकाहारी (B) केवल मांसाहारी (C) शाकाहारी और मांसाहारी दोनों (D) फल-मूल पर निर्भर
प्रश्न 2. मैत्रेयी और याज्ञवल्क्य का प्रसिद्ध दार्शनिक संवाद किस उपनिषद में है?
(A) छांदोग्य उपनिषद (B) वृहदारण्यक उपनिषद (C) कठ उपनिषद (D) ईशावास्योपनिषद
प्रश्न 3. गृह्य सूत्र में वर्णित विवाह के प्रकारों में ‘राक्षस विवाह’ का English अनुवाद क्या है?
(A) Love marriage (B) Marriage by purchase (C) Marriage by capture (D) Arranged marriage
प्रश्न 4. उत्तर वैदिक काल की स्त्रियों के बारे में सत्य कथन कौन-सा है?
(A) बाल विवाह और सती प्रथा पूरी तरह स्थापित थी (B) विदुषी स्त्रियाँ नहीं थीं (C) विधवा पुनर्विवाह और नियोग प्रथा अभी भी प्रचलित थी और अनेक विदुषियाँ थीं (D) स्त्रियों को राजनीतिक अधिकार मिल गए
प्रश्न 5. कृष्ण यजुर्वेद की शाखा से संबंधित ग्रंथ जिसमें स्त्रियों को पुरुष की बुराई बताया गया?
(A) वृहदारण्यक उपनिषद (B) मैत्रायणी संहिता (C) ऐतरेय ब्राह्मण (D) छांदोग्य उपनिषद
प्रश्न 6. ऋग्वैदिक काल में आर्यों के खान-पान की विशेषता क्या थी?
(A) केवल जंगली फल (B) जौ की रोटी और सोमरस (C) जौ से ‘करंभ’ बनाते और शाकाहारी-मांसाहारी दोनों (D) केवल दूध और दही
प्रश्न 7. निम्नलिखित में से कौन-सा विवाह ‘प्रेम विवाह’ की श्रेणी में आता है?
(A) ब्रह्म विवाह (B) आर्ष विवाह (C) गांधर्व विवाह (D) राक्षस विवाह
प्रश्न 8. उत्तर वैदिक काल में ब्राह्मण साहित्य में स्त्रियों की स्थिति को दर्शाने वाला ग्रंथ जिसमें कन्या को ‘चिंता का कारण’ बताया?
(A) तैत्तिरीय आरण्यक (B) मैत्रायणी संहिता (C) अथर्ववेद (D) ऐतरेय ब्राह्मण
प्रश्न 9. वैदिक काल में गोत्र व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य?
(A) संपत्ति का वितरण (B) एक ही वंश-परंपरा से उत्पन्न लोगों की पहचान और सगोत्र विवाह निषेध (C) युद्ध में भाईचारा (D) धार्मिक अनुष्ठानों का वर्गीकरण
प्रश्न 10. असुर विवाह के बारे में गलत कथन है?
(A) वर से धन लेकर कन्या दी जाती थी (B) शास्त्रों में निंदा की गई (C) शास्त्रसम्मत चार विवाहों में से एक (D) यह क्रय विवाह था
प्रश्न 11. ‘पैशाच विवाह’ अंग्रेजी में क्या कहलाता है?
(A) Marriage by capture (B) Love marriage (C) Marriage involving seduction and rape after making drunk (D) Arranged marriage
प्रश्न 12. उत्तर वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था में ब्राह्मणों की स्थिति क्या थी?
(A) कमजोर हो गई (B) प्रभुत्व और एकाधिकार अत्यधिक बढ़ गया (C) क्षत्रिय ब्राह्मणों से शक्तिशाली (D) चारों वर्ण समान
प्रश्न 13. दैव विवाह में वर पक्ष को कन्या देने के बदले पिता क्या प्राप्त करता था?
(A) धन और संपत्ति (B) कुछ नहीं — निःशुल्क (C) एक जोड़ी बैल और गाय (D) केवल आशीर्वाद
प्रश्न 14. उत्तर वैदिक काल में किस प्रकार के विवाह प्रचलित थे?
(A) केवल ब्रह्म विवाह (B) सभी आठ प्रकार के विवाह (C) गांधर्व और राक्षस केवल (D) ब्रह्म, दैव, आर्ष, प्रजापत्य केवल
प्रश्न 15. गार्गी वचक्नवी का उल्लेख किस प्रसंग में मिलता है?
(A) ऋग्वेद में ऋषि अगस्त्य से वाद-विवाद (B) वृहदारण्यक उपनिषद में याज्ञवल्क्य से शास्त्रार्थ (C) छांदोग्य उपनिषद में उद्दालक आरुणि से वाद-विवाद (D) अथर्ववेद में प्रसिद्ध विदुषी के रूप में
प्रश्न 16. ऋग्वैदिक काल और उत्तर वैदिक काल के धर्म में क्या मुख्य अंतर था?
(A) ऋग्वैदिक काल में मूर्तिपूजा थी जबकि उत्तर वैदिक काल में नहीं (B) ऋग्वैदिक काल में प्रकृति पूजा और सरल धर्म था जबकि उत्तर वैदिक काल में कर्मकांड जटिल हो गया (C) दोनों काल में धर्म पूर्णतः समान था (D) उत्तर वैदिक काल में धर्म समाप्त हो गया
सही उत्तर 1: (C) शाकाहारी और मांसाहारी दोनों ऋग्वैदिक काल के आर्य शाकाहारी और मांसाहारी दोनों थे; वे अपने भोजन में अनाज, फल, दूध, दही के साथ-साथ पशुओं का मांस भी खाते थे; धार्मिक यज्ञों में पशुबलि होती थी और उस मांस का उपभोग किया जाता था; गाय को ‘अघन्या’ कहा जाता था, परंतु यज्ञ में कभी-कभी उसकी बलि भी दी जाती थी; सोमरस एक पेय पदार्थ था जो धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग होता था और करंभ जौ और दही से बना खाद्य पदार्थ था; यह जानकारी वैदिक खान-पान और धार्मिक जीवन को समझने के लिए महत्त्वपूर्ण है।
सही उत्तर 2: (B) वृहदारण्यक उपनिषद मैत्रेयी और याज्ञवल्क्य का प्रसिद्ध दार्शनिक संवाद वृहदारण्यक उपनिषद में है; इसमें याज्ञवल्क्य ने मैत्रेयी को आत्मा, ब्रह्म, मोक्ष और पुनर्जन्म के विषय में गहन ज्ञान दिया; यह उपनिषद शुक्ल यजुर्वेद से संबंधित है और सबसे बड़ा उपनिषद माना जाता है; इसी उपनिषद में गार्गी और याज्ञवल्क्य का संवाद भी विदेह के राजा जनक के दरबार में हुआ; ‘उपनिषद’ का अर्थ है — पास बैठकर गुरु से ज्ञान लेना; यह ज्ञानात्मक और दार्शनिक चर्चा उत्तर वैदिक काल की स्त्री-पुरुष शिक्षा और आध्यात्मिक चिंतन को दर्शाती है।
सही उत्तर 3: (C) Marriage by capture गृह्य सूत्र में वर्णित राक्षस विवाह को अंग्रेजी में ‘Marriage by capture’ कहा जाता है क्योंकि इसमें कन्या का बलपूर्वक अपहरण करके उससे विवाह किया जाता था; इसी प्रकार, असुर विवाह को ‘Marriage by purchase’ कहा जाता है क्योंकि इसमें कन्या के पिता से धन लेकर विवाह किया जाता था; गांधर्व विवाह Love/Clandestine marriage था जिसमें प्रेम और सहमति से विवाह होता था; ब्रह्म विवाह Arranged form of marriage था और इसमें पिता की अनुमति एवं सामाजिक मर्यादा होती थी; पैशाच विवाह ‘Marriage involving seduction and rape’ था जो सबसे निंदनीय था; दैव विवाह में पिता कन्या को यज्ञ संपन्न करने वाले ब्राह्मण को देते थे और आर्ष विवाह में एक जोड़ी बैल और गाय दी जाती थी।
सही उत्तर 4: (C) विधवा पुनर्विवाह और नियोग प्रथा अभी भी प्रचलित थी और अनेक विदुषियाँ थीं उत्तर वैदिक काल में यद्यपि स्त्रियों की स्थिति में गिरावट आई, परंतु यह पतन पूर्ण नहीं था; बाल विवाह, सती प्रथा और पर्दा प्रथा इस काल में पूरी तरह नहीं आई थीं; विधवा पुनर्विवाह और नियोग प्रथा अभी भी प्रचलित थीं; इस काल की प्रमुख विदुषियाँ जैसे गार्गी, मैत्रेयी, सुलभा, वडवा, प्राशितैयी, कात्यायनी विद्या और दार्शनिक ज्ञान में प्रतिष्ठित थीं; परंतु उपनयन संस्कार बंद हो गया और विदथ एवं सभा में स्त्रियों की भागीदारी समाप्त हो गई।
सही उत्तर 5: (B) मैत्रायणी संहिता मैत्रायणी संहिता कृष्ण यजुर्वेद की एक महत्त्वपूर्ण शाखा है जिसमें स्त्रियों को जुआ और शराब के साथ पुरुष की तीन अनिवार्य बुराइयों में गिना गया है; इसमें धार्मिक अनुष्ठान, मंत्र और सामाजिक नियम का वर्णन है; उत्तर वैदिक काल में स्त्रियों की स्थिति पर नजर डालते हुए तैत्तिरीय आरण्यक भी कृष्ण यजुर्वेद से संबंधित है जिसमें स्त्रियों को ‘शूद्रवत् पतित’ बताया गया है; इसके विपरीत, वृहदारण्यक उपनिषद शुक्ल यजुर्वेद से और ऐतरेय ब्राह्मण ऋग्वेद से संबंधित हैं।
सही उत्तर 6: (C) जौ से ‘करंभ’ बनाते और शाकाहारी-मांसाहारी दोनों ऋग्वैदिक काल में आर्य शाकाहारी और मांसाहारी दोनों थे; वे अपने भोजन में अनाज, जौ के सतु (भुना आटा), दूध, दही और घी का सेवन करते थे; जौ उस काल की एकमात्र कृषि फसल थी; ‘करंभ’ जौ और दही से बना एक प्रमुख खाद्य पदार्थ था; धार्मिक यज्ञों में सोमरस नामक पेय का प्रयोग होता था; मांसाहार में बकरी, भेड़ और कभी-कभी गाय का मांस भी शामिल था, हालांकि गाय को ‘अघन्या’ (न मारी जाने वाली) कहा जाता था; यद्यपि यज्ञ में कभी-कभी गाय की बलि दी जाती थी।
सही उत्तर 7: (C) गांधर्व विवाह गांधर्व विवाह प्रेम विवाह या स्वयंवर विवाह था जिसमें युवक-युवती परस्पर प्रेम और सहमति से विवाह करते थे; इसमें माता-पिता की अनुमति की अवहेलना होती थी; ‘गंधर्व’ प्रेम और संगीत के देवता माने जाते थे; महाभारत में शकुंतला-दुष्यंत और अर्जुन-सुभद्रा के विवाह इसके प्रसिद्ध उदाहरण हैं; ब्राह्मण और आर्ष विवाह व्यवस्थित (arranged) विवाह थे जबकि राक्षस विवाह में बलपूर्वक अपहरण होता था; गांधर्व विवाह आधुनिक Love Marriage के समान था।
सही उत्तर 8: (D) ऐतरेय ब्राह्मण ऐतरेय ब्राह्मण में कन्या को ‘चिंता का स्पष्ट कारण’ बताया गया है; यह ग्रंथ ऋग्वेद से संबंधित है और ब्राह्मण ग्रंथों के अंतर्गत आता है, जिसमें यज्ञ-विधियों और धार्मिक नियमों की व्याख्या है; तैत्तिरीय आरण्यक में स्त्रियों को ‘शूद्रवत् पतित’ कहा गया और मैत्रायणी संहिता में जुआ और शराब के साथ पुरुष की बुराई के संदर्भ में स्त्रियों का उल्लेख है; अथर्ववेद में कन्या-जन्म की निंदा है; इन सभी ग्रंथों से पता चलता है कि उत्तर वैदिक काल में स्त्रियों के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण था।
सही उत्तर 9: (B) एक ही वंश-परंपरा से उत्पन्न लोगों की पहचान और सगोत्र विवाह निषेध गोत्र व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य था एक ही पूर्वज (ऋषि) की वंश-परंपरा से उत्पन्न लोगों की पहचान करना और सगोत्र विवाह को रोकना; ‘गोत्र’ शब्द का शाब्दिक अर्थ है गाय बाँधने का स्थान, परंतु सामाजिक अर्थ में यह ऋषि-वंश परंपरा को दर्शाता है; जो लोग एक ही गोत्र के हों वे परस्पर भाई-बहन माने जाते हैं और उनके बीच विवाह निषिद्ध होता है; गोत्र व्यवस्था उत्तर वैदिक काल में अस्तित्व में आई थी और आज भी हिंदू समाज में विवाह के समय गोत्र की जाँच की जाती है।
सही उत्तर 10: (C) शास्त्रसम्मत चार विवाहों में से एक असुर विवाह शास्त्रसम्मत चार विवाहों में से नहीं है। शास्त्रसम्मत चार विवाह हैं — ब्रह्म, दैव, आर्ष और प्रजापत्य; असुर विवाह पाँचवें स्थान पर है और इसे निंदनीय विवाह माना गया। इसमें वर पक्ष से धन (मूल्य) लेकर कन्या सौंपी जाती थी, जो एक प्रकार का क्रय विवाह था। इसकी शास्त्रों में कठोर निंदा की गई है। असुर विवाह के साथ ही गांधर्व विवाह, राक्षस विवाह और पैशाच विवाह भी निंदनीय विवाहों में आते हैं।
सही उत्तर 11: (C) Marriage involving seduction and rape after making drunk पैशाच विवाह अंग्रेजी में ‘Marriage involving seduction and rape after making drunk’ कहलाता है। यह आठ विवाह प्रकारों में सबसे निकृष्ट और निंदनीय विवाह था। इसमें अचेतन (बेहोश), सुप्त (सोई हुई) या उन्मत्त (पागल) कन्या के साथ छल-कपट द्वारा जबरदस्ती विवाह किया जाता था। ‘पिशाच’ शब्द भूत-प्रेत के लिए प्रयोग होता है, इसलिए इसे सबसे निकृष्ट विवाह माना गया। आधुनिक कानून की दृष्टि से यह बलात्कार की श्रेणी में आता है। इसी तरह राक्षस विवाह को ‘Marriage by capture’ कहा जाता है।
सही उत्तर 12: (B) प्रभुत्व और एकाधिकार अत्यधिक बढ़ गया उत्तर वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था जन्म-आधारित हो गई और इसके कारण ब्राह्मणों का सामाजिक और धार्मिक प्रभुत्व अत्यधिक बढ़ गया। ब्राह्मण धार्मिक अनुष्ठानों, यज्ञ और शिक्षा के एकाधिकारी बन गए और राजनीतिक एवं आर्थिक क्षेत्र में भी उनका प्रभाव स्थापित हुआ। इस स्थिति के विरोध में बाद में बौद्ध धर्म और जैन धर्म का उदय हुआ, जिन्होंने वर्ण-व्यवस्था और ब्राह्मण-प्रभुत्व को चुनौती दी।
सही उत्तर 13: (B) कुछ नहीं — निःशुल्क दैव विवाह में कन्या का पिता कन्या को यज्ञ संपन्न करने वाले ब्राह्मण को यज्ञ की दक्षिणा के रूप में देता था। इस विवाह में कन्या के पिता को वर पक्ष से कुछ भी नहीं मिलता, बल्कि यह एक धार्मिक दान माना जाता था। यह विवाह ब्रह्म विवाह से थोड़ा भिन्न है। अन्य विवाहों में भेंट भिन्न होती थी — आर्ष विवाह में एक जोड़ी बैल और गाय मिलती थी, असुर विवाह में धन मिलता था। दैव विवाह शास्त्रसम्मत चार विवाहों में से एक था।
सही उत्तर 14: (B) सभी आठ प्रकार के विवाह उत्तर वैदिक काल में गृह्य सूत्र में वर्णित सभी आठ प्रकार के विवाह प्रचलित थे। हालांकि सैद्धांतिक रूप से प्रथम चार विवाह — ब्रह्म, दैव, आर्ष और प्रजापत्य — को शास्त्रसम्मत और शेष चार — असुर, गांधर्व, राक्षस और पैशाच — को निंदनीय माना गया था, व्यवहार में सभी प्रकार के विवाह होते थे। राजाओं और क्षत्रियों में गांधर्व और राक्षस विवाह भी प्रचलित थे। महाभारत में इन सभी प्रकारों के उदाहरण मिलते हैं। वैदिक समाज में विवाह-परंपरा विविधतापूर्ण थी और धर्मशास्त्र और वास्तविक सामाजिक अभ्यास में अंतर दिखाई देता है।
सही उत्तर 15: (B) वृहदारण्यक उपनिषद में याज्ञवल्क्य से शास्त्रार्थ गार्गी वचक्नवी का उल्लेख वृहदारण्यक उपनिषद में होता है, जब वह विदेह के राजा जनक के दरबार में याज्ञवल्क्य से शास्त्रार्थ करती हैं। गार्गी ने याज्ञवल्क्य से कठिन दार्शनिक प्रश्न किए, जिस पर याज्ञवल्क्य ने उन्हें और प्रश्न न पूछने की चेतावनी दी। यह संकेत है कि उत्तर वैदिक काल में महिलाओं की स्थिति में गिरावट आई थी। ‘वचक्नवी’ उपाधि उन्हें उनके पिता वचक्नु के नाम से मिली थी।
सही उत्तर 16: (B) ऋग्वैदिक काल में प्रकृति पूजा और सरल धर्म था जबकि उत्तर वैदिक काल में कर्मकांड जटिल हो गया और पुरोहित वर्ग शक्तिशाली बना ऋग्वैदिक काल में धर्म प्रकृतिवादी और अपेक्षाकृत सरल था, जिसमें इंद्र, अग्नि, वरुण जैसे प्राकृतिक देवताओं की पूजा होती थी और मंत्रों से उनकी स्तुति की जाती थी; उत्तर वैदिक काल में कर्मकांड जटिल हो गया, बड़े यज्ञ होने लगे और पुरोहित वर्ग अत्यंत शक्तिशाली बन गया, जिसके कारण उपनिषदों का दर्शन विकसित हुआ और बाद में बौद्ध-जैन धर्म का उदय हुआ।
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Well done bhai 👍