हड़प्पा सभ्यता के 25 धमाकेदार MCQs 2026 | UPSC/SSC/Railway तैयारी का रामबाण

हड़प्पा सभ्यता के 25 महत्वपूर्ण MCQs 2026 UPSC SSC Railway परीक्षा तैयारी

प्राचीन भारत का इतिहास भाग-03 MCQ-2026

हड़प्पा सभ्यता के 25 धमाकेदार MCQs 2026 | UPSC/SSC/Railway तैयारी का रामबाण

हड़प्पा सभ्यता (सिंधु घाटी सभ्यता) प्राचीन भारत की सबसे विकसित और व्यवस्थित सभ्यताओं में से एक थी। इसके नगरों की योजनाएँ, जल निकास प्रणाली, पकी ईंटों के मकान और उन्नत मृद्भाण्ड (Pottery) इस सभ्यता की तकनीकी और सामाजिक उन्नति को दर्शाते हैं।
यदि आप UPSC, UPPCS, SSC, BPSC या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो यह MCQs आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन सवालों के माध्यम से आप न केवल परीक्षा की तैयारी कर पाएंगे, बल्कि हड़प्पा सभ्यता की प्रमुख विशेषताओं को भी आसानी से याद रख पाएंगे।
इस पोस्ट में आपको 25 Most Important MCQs उत्तर और व्याख्या के साथ मिलेंगे। प्रत्येक प्रश्न को ध्यान से पढ़ें और उत्तर समझें ताकि आप परीक्षा में गलती न करें।

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प्र.1. हड़प्पाई लिपि अभी तक क्यों नहीं पढ़ी जा सकी?

(a) क्योंकि यह बहुत पुरानी है
(b) क्योंकि यह वर्णमाला में न लिखकर चित्र के रूप में (Pictographical) लिखी गई है
(c) क्योंकि इसे पढ़ने का प्रयास ही नहीं किया गया
(d) क्योंकि यह एक गुप्त कूट भाषा में लिखी गई है

उत्तर: (b) क्योंकि यह वर्णमाला में न लिखकर चित्र के रूप में (Pictographical) लिखी गई है

📝 हड़प्पाई लिपि (Harappan Script) मेसोपोटामिया की कीलाक्षर (Cuneiform) और मिस्र की हायरोग्लिफिक लिपि की भाँति अभी तक पढ़ी नहीं जा सकी है। हड़प्पाई लिपि अभी तक नहीं पढ़ी जा सकी है क्योंकि यह वर्णमाला में न लिखकर चित्र के रूप में लिखी गई है अर्थात् यह एक Pictographical Script है, न कि Alphabetical। इस लिपि में लगभग 400 अक्षर (Syllable) हैं। यह UPSC, SSC, BPSC, UPPCS सभी परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाने वाला अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न है।

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प्र.2. हड़प्पाई लिपि को पढ़ने की वैज्ञानिक पद्धति से सर्वप्रथम प्रयास किसने किया?

(a) जॉन मार्शल ने, 1921 में
(b) वैडिल महोदय ने, 1925 में
(c) हण्टर महोदय ने, 1934 में
(d) डी०पी० अग्रवाल ने, 1964 में

उत्तर: (c) हण्टर महोदय ने, 1934 में

📝 हड़प्पाई लिपि को पढ़ने की शुरुआत सर्वप्रथम 1925 ई० में वैडिल महोदय ने की थी, परंतु इस लिपि को वैज्ञानिक पद्धति से पढ़ने का सर्वप्रथम प्रयास 1934 ई० में हण्टर महोदय ने किया था। यह एक महत्वपूर्ण तथ्य है जिसे परीक्षाओं में अक्सर गलत तरीके से पेश करके प्रश्न पूछे जाते हैं। वैडिल ने शुरुआत की और हण्टर ने वैज्ञानिक विधि से पढ़ने की कोशिश की — इन दोनों के बीच का अंतर याद रखना अत्यंत जरूरी है। UPSC, UPPCS, SSC CGL में यह अंतर परीक्षण हेतु पूछा जाता है।
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प्र.3. हड़प्पाई लिपि की लेखन शैली को क्या कहते हैं?

(a) बायें से दायें — ब्राह्मी शैली
(b) दायें से बायें — खरोष्ठी शैली
(c) बाउस्ट्रोफेदन (Boustrophedan) — पहले दायें से बायें, फिर बायें से दायें
(d) ऊपर से नीचे — देवनागरी शैली

उत्तर: (c) बाउस्ट्रोफेदन (Boustrophedan)

📝 हड़प्पाई लिपि के लेखन की शैली को ‘बाउस्ट्रोफेदन’ (Boustrophedan) या ‘गौमूत्रिका’ या ‘हलावर्त शैली’ कहा जाता है। इसके लिखे जाने का क्रम पहले दायें से बायें और तत्पश्चात् बायें से दायें होता था। कुछ विद्वानों के अनुसार यह ब्राह्मी लिपि की भाँति बायें से दायें, जबकि कुछ के अनुसार खरोष्ठी लिपि की भाँति दायें से बायें लिखी जाती थी। उल्लेखनीय है कि अशोक के ‘येरांगुडी’ (कुर्नूल जिला, आंध्रप्रदेश) से प्राप्त अभिलेख भी इसी शैली में लिखे गए हैं।

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प्र.4. हड़प्पाई लिपि में कुल कितने अक्षर (Syllable) हैं?

(a) लगभग 100
(b) लगभग 200
(c) लगभग 400
(d) लगभग 600

उत्तर: (c) लगभग 400

📝 हड़प्पाई लिपि (Harappan Script) एक चित्रात्मक लिपि (Pictographical Script) है जिसमें लगभग 400 अक्षर (Syllable) हैं। यह संख्या इसे वर्णमाला से अलग करती है क्योंकि वर्णमाला में आमतौर पर कम अक्षर होते हैं, जबकि चित्रात्मक लिपियों में अधिक चिह्न होते हैं। लिपि का यह चित्रात्मक स्वरूप ही इसके अपठनीय होने का मुख्य कारण है। अशोक के येरांगुडी अभिलेख भी हड़प्पाई लेखन शैली (बाउस्ट्रोफेदन) में लिखे गए हैं। यह तथ्य परीक्षा में अनेक बार पूछा जा चुका है।

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प्र.5. हड़प्पा सभ्यता की सर्वाधिक मान्य तिथि (Most Widely Accepted Time Period) क्या है और यह किसने दी?

(a) 3250-2750 ई०पू०; जॉन मार्शल
(b) 2800-2500 ई०पू०; मैके
(c) 2300-1750 ई०पू०; डी०पी० अग्रवाल
(d) 2500-1500 ई०पू०; व्हीलर

उत्तर: (c) 2300-1750 ई०पू०; डी०पी० अग्रवाल

📝 हड़प्पा सभ्यता की काल-निर्धारण के विषय में विभिन्न विद्वानों ने भिन्न-भिन्न तिथियाँ दी हैं — जॉन मार्शल: 3250-2750 ई०पू०; फेयर सर्विस: 2000-1500 ई०पू०; मैके: 2800-2500 ई०पू०; व्हीलर: 2500-1500 ई०पू०, परंतु डी०पी० अग्रवाल ने 1964 ई० में कोटदीजी, कालीबंगा एवं लोथल से प्राप्त तिथियों के आधार पर 2300-1750 ई०पू० की तिथि दी है, जो वर्तमान में सर्वाधिक मान्य (Most Widely Accepted) है। यह UPSC, BPSC सहित अनेक परीक्षाओं में पूछी जाती है।

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प्र.6. हड़प्पा सभ्यता की तिथि सर्वप्रथम किसने और कितने वर्ष के बीच निर्धारित की?

(a) व्हीलर ने; 2500-1500 ई०पू०
(b) जॉन मार्शल ने; 3250-2750 ई०पू०
(c) मैके ने; 2800-2500 ई०पू०
(d) डी०पी० अग्रवाल ने; 2300-1750 ई०पू०

उत्तर: (b) जॉन मार्शल ने; 3250-2750 ई०पू०

📝 हड़प्पा सभ्यता के उद्भव व पतन की अबूझ पहेली के कारण इसका काल-निर्धारण एक विवाद का विषय है। इस विषय में सर्वप्रथम जॉन मार्शल ने हड़प्पा संस्कृति एवं मेसोपोटामिया की संस्कृति का तुलनात्मक विवेचन करने के पश्चात् इसकी तिथि 3250-2750 ई०पू० बतायी थी। यह पहला वैज्ञानिक प्रयास था, जिसने इस सभ्यता की काल-सीमा निर्धारित की थी। हालांकि बाद में अनेक विद्वानों ने इससे असहमति जताई और वर्तमान में डी०पी० अग्रवाल द्वारा निर्धारित तिथि 2300-1750 ई०पू० सर्वाधिक मान्य है।

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प्र.7. हड़प्पा सभ्यता के नगरों को किन दो भागों में विभाजित किया जाता था?

(a) उत्तरी और दक्षिणी भाग
(b) पश्चिमी किलेबंद दुर्ग और पूर्वी सामान्य आवासीय क्षेत्र
(c) धार्मिक क्षेत्र और व्यापारिक क्षेत्र
(d) केवल राजमहल और सामान्य क्षेत्र

उत्तर: (b) पश्चिमी किलेबंद दुर्ग और पूर्वी सामान्य आवासीय क्षेत्र

📝 हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, कालीबंगा जैसी बस्तियाँ दो भागों में विभाजित थीं — पश्चिम और पूर्व। पश्चिम का हिस्सा ‘किलेबन्द’ होता था जहाँ शहर के प्रशासकीय वर्ग निवास करते थे। पूर्वी भाग में सामान्य लोग रहते थे और यह किलेबन्द नहीं होता था। पश्चिम के हिस्से की चौड़ाई पूर्व की तुलना में कम होती थी। दुर्ग शेष नगर से ऊपर ईंट के ऊँचे चबूतरे पर बनाया जाता था जो बाढ़ से भी सुरक्षा प्रदान करता था।

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प्र.8. हड़प्पा सभ्यता के दुर्गों में स्थित बड़े-बड़े भवनों का क्या कार्य था?

(a) व्यापार केंद्र के रूप में
(b) सम्भवतः प्रशासनिक या धार्मिक केंद्र के रूप में
(c) आवासीय भवनों के रूप में
(d) सैनिक छावनी के रूप में

उत्तर: (b) सम्भवतः प्रशासनिक या धार्मिक केंद्र के रूप में

📝 हड़प्पा सभ्यता के दुर्ग नगरों से ऊँचे, ईंट के चबूतरे पर बनाए जाते थे, जो बाढ़ से सुरक्षा भी प्रदान करते थे। ऐसा प्रतीत होता है कि दुर्ग में स्थित बड़े-बड़े भवन सम्भवतः प्रशासनिक या धार्मिक केंद्र के रूप में कार्य करते थे। मोहनजोदड़ो और हड़प्पा में किलों के चारों ओर ईंट की दीवारें होती थीं। नगर की यह द्विभाजित संरचना — शासक वर्ग का दुर्गीकृत पश्चिमी भाग और सामान्य जन का पूर्वी भाग — हड़प्पा सभ्यता की नगर योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता थी।

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प्र.9. किस हड़प्पाई स्थल का शहर सबसे ‘दीन-हीन’ माना जाता है और क्यों?

(a) लोथल; क्योंकि वहाँ दुर्ग नहीं था
(b) कालीबंगा; क्योंकि वहाँ सुव्यवस्थित जल निकास प्रणाली नहीं थी और कच्ची ईंटों के मकान थे
(c) चन्हुदड़ो; क्योंकि वहाँ कोई हिस्सा दुर्गीकृत नहीं था
(d) रोपड़; क्योंकि वहाँ कोई बड़ा भवन नहीं मिला

उत्तर: (b) कालीबंगा; क्योंकि वहाँ सुव्यवस्थित जल निकास प्रणाली नहीं थी और कच्ची ईंटों के मकान थे

📝 हड़प्पा, मोहनजोदड़ो तथा कालीबंगा की नगर योजना में कुछ अंतर होते हुए भी वह करीब-करीब एक समान था, किंतु कालीबंगा में सुव्यवस्थित जल निकास प्रणाली न होने एवं कच्ची ईंटों के मकान बने होने के कारण यह एक दीन-हीन बस्ती प्रतीत होती है, जबकि हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की जल निकास प्रणाली अत्यंत विकसित थी। कालीबंगा में दुर्ग और निचला हिस्सा दोनों ही अलग-अलग रक्षा प्राचीरों से घिरा है।

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प्र.10. किस हड़प्पाई स्थल में शहर का कोई भी हिस्सा दुर्गीकृत नहीं था?

(a) हड़प्पा
(b) मोहनजोदड़ो
(c) लोथल
(d) चन्हुदड़ो

उत्तर: (d) चन्हुदड़ो

📝 हड़प्पा सभ्यता के विभिन्न स्थलों की नगर योजना में भिन्नताएँ देखी जाती हैं। लोथल व सुरकोतड़ा के दुर्ग और नगर दोनों एक ही रक्षा प्राचीर से घिरे हैं। कालीबंगा में दुर्ग और निचला हिस्सा दोनों अलग-अलग रक्षा प्राचीरों से घिरा था, परंतु चन्हुदड़ो में शहर का कोई भी हिस्सा दुर्गीकृत नहीं था — यह हड़प्पा सभ्यता का एकमात्र ऐसा स्थल है। यह तथ्य UPSC प्रारंभिक परीक्षा सहित अनेक प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछा जाता है।

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प्र.11. हड़प्पा सभ्यता में ‘ऑक्सफोर्ड सर्किल’ किसे कहा जाता था?

(a) मोहनजोदड़ो के विशाल स्नानागार को
(b) जहाँ नगर में प्रवेश करने वाली मुख्य सड़क किसी अन्य सड़क से पहली बार मिलती थी
(c) हड़प्पा के दुर्ग के चारों ओर की गोल दीवार को
(d) नगर के केंद्र में स्थित गोलाकार बाजार को

उत्तर: (b) जहाँ नगर में प्रवेश करने वाली मुख्य सड़क किसी अन्य सड़क से पहली बार मिलती थी

📝 हड़प्पा सभ्यता में सड़कें एक-दूसरे को समकोण (90° Angle) पर काटती थीं, जिससे पूरा शहर जाल-सी पद्धति (Grid on Method) या शतरंज के बोर्ड (Chess Board) की भाँति बिछ जाता था। मुख्य सड़क 8 से 10 मीटर चौड़ी होती थी। आमतौर पर नगर में प्रवेश, सड़क के पूर्वी हिस्सों से किया जाता था और जहाँ यह प्रथम सड़क से मिलती थी, उसे ‘ऑक्सफोर्ड सर्किल’ कहा जाता है। यह हड़प्पा सभ्यता की उन्नत नगर नियोजन का एक महत्वपूर्ण पहलू है।

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प्र.12. मोहनजोदड़ो की सड़कों को विशेष रूप से किससे पक्का बनाने का प्रयास किया गया था?

(a) पत्थरों से
(b) चूने से
(c) ठीकरों व खंडित ईंटों से
(d) लकड़ी से

उत्तर: (c) ठीकरों व खंडित ईंटों से

📝 हड़प्पा सभ्यता में सड़कें प्रायः कच्ची हुआ करती थीं, हालांकि मोहनजोदड़ो की मुख्य सड़कों को ठीकरों व खंडित ईंटों से पक्का बनाने का प्रयास किया गया था। सड़कों का निर्माण इस तरह से किया जाता था कि आस-पास के भवनों को स्वच्छ वायु मिल सके। यह तथ्य मोहनजोदड़ो की नगर नियोजन की विशेषता को दर्शाता है। मुख्य सड़क 8 से 10 मीटर चौड़ी होती थी और सभी सड़कें एक-दूसरे को 90° के कोण पर काटती थीं।

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प्र.13. हड़प्पा सभ्यता में जल निकास की नालियों में ‘नरमोखे’ (Main Hall) क्यों बनाए जाते थे?

(a) सजावट के लिए
(b) नालियों की सफाई करने के लिए; ये लकड़ी या पाषाण खंडों/पत्थर से ढके होते थे
(c) नालियों को मजबूत बनाने के लिए
(d) बाढ़ से बचाव के लिए

उत्तर: (b) नालियों की सफाई करने के लिए; ये लकड़ी या पाषाण खंडों/पत्थर से ढके होते थे

📝 हड़प्पा सभ्यता की जल निकास प्रणाली प्राचीन विश्व में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। सार्वजनिक नालियों में नरमोखे (Main Hall) भी बने होते थे, जिन्हें लकड़ी या पाषाण खंडों से ढक दिया जाता था। समय-समय पर इन्हें हटाकर नालियों की सफाई की जाती थी। वहाँ के अधिकांश घरों में स्नानागार होते थे जो सड़क या गली के पास होते थे ताकि गंदे जल के निकास की व्यवस्था हो सके। ये स्नानागार निकास नालियों से जुड़े होते थे।

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प्र.14. हड़प्पा सभ्यता की जल निकास प्रणाली (Drainage System) के बारे में सबसे उचित कथन कौन-सा है?

(a) यह केवल मोहनजोदड़ो में थी
(b) प्राचीन सभ्यताओं में निकास नालियों का इतना सुंदर प्रबंध और कहीं नहीं मिलता
(c) यह मेसोपोटामिया की नालियों से कम विकसित थी
(d) नालियाँ केवल दुर्ग क्षेत्र में थीं

उत्तर: (b) प्राचीन सभ्यताओं में निकास नालियों का इतना सुंदर प्रबंध और कहीं नहीं मिलता

📝 प्राचीन सभ्यताओं में निकास नालियों का इतना सुंदर प्रबंध और कहीं नहीं मिलता जितना सिंधु सभ्यता में मिलता है — यह इस सभ्यता की एक विशिष्ट उपलब्धि मानी जाती है। मोहनजोदड़ो की जल निकास प्रणाली अद्भुत थी तथा हड़प्पा की निकास प्रणाली तो और भी विलक्षण थी। घरों में स्नानागार, नालियाँ, नरमोखे — यह सब मिलकर एक अत्यंत उन्नत सफाई व्यवस्था का प्रमाण देते हैं। UPSC, UPPCS में यह महत्वपूर्ण प्रश्न है।

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प्र.15. हड़प्पा सभ्यता में भवन निर्माण में ईंटों की चिनाई के लिए कौन-सी पद्धति अपनाई जाती थी?

(a) रोमन बॉन्ड मेथड
(b) इंग्लिश बॉन्ड मेथड (English Bond Method)
(c) फ्रेंच बॉन्ड मेथड
(d) ग्रीक बॉन्ड मेथड

उत्तर: (b) इंग्लिश बॉन्ड मेथड (English Bond Method)

📝 हड़प्पा सभ्यता में भवनों के निर्माण हेतु घनाकार ईंटों का प्रयोग किया जाता था, जिनका मानक 4:2:1 के अनुपात में होता था और इनकी माप प्रायः 24:14:7 सेमी होती थी। हड़प्पावासी नींव के निर्माण हेतु खंडित ईंटों का प्रयोग करते थे। ईंटों की चिनाई के लिए जिस पद्धति का प्रयोग होता था उसे ‘इंग्लिश बॉन्ड मेथड’ (English Bond Method) कहा जाता था। दीवारें प्रायः सीधी होती थीं। यह पद्धति वर्तमान में भी निर्माण कार्यों में प्रयोग की जाती है।
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प्र.16. मोहनजोदड़ो से ‘साहुल-सूत्र’ (Plumb Line) के साक्ष्य किसने खोजे और यह किस काम आता था?

(a) जॉन मार्शल ने; दीवारों की नींव मापने के लिए
(b) मैके नामक पुराविद् ने; दीवारों को सीधा बनाने के लिए
(c) राखाल दास बनर्जी ने; ईंटों की लंबाई मापने के लिए
(d) दयाराम साहनी ने; सड़कों की चौड़ाई मापने के लिए

उत्तर: (b) मैके नामक पुराविद् ने; दीवारों को सीधा बनाने के लिए

📝 ‘मैके’ नामक एक पुराविद् को मोहनजोदड़ो से चूने के पत्थर (Lime Stone) की बनी एक साहुल-सूत्र (Plumb Line) के साक्ष्य मिले हैं। इसका प्रयोग आज की भाँति ही दीवारों को सीधा बनाने के लिए किया जाता होगा। यह हड़प्पावासियों की उन्नत निर्माण तकनीक का प्रमाण है। ईंटों की चिनाई इंग्लिश बॉन्ड मेथड से की जाती थी और दीवारें प्रायः सीधी होती थीं। यह तथ्य परीक्षाओं में पूछा जाने वाला एक विशिष्ट तथ्य है।

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प्र.17. हड़प्पा सभ्यता में भवनों के दरवाजे सामान्यतः किस ओर खुलते थे? इसका अपवाद कौन-सा स्थल था?

(a) मुख्य सड़क की ओर; अपवाद — मोहनजोदड़ो
(b) गली की ओर; अपवाद — लोथल जहाँ दरवाजे मुख्य सड़क की ओर खुलते थे
(c) पूर्व दिशा की ओर; अपवाद — कालीबंगा
(d) उत्तर दिशा की ओर; अपवाद — हड़प्पा

उत्तर: (b) गली की ओर; अपवाद — लोथल जहाँ दरवाजे मुख्य सड़क की ओर खुलते थे

📝 हड़प्पा सभ्यता में भवनों के दरवाजे प्रायः गली की ओर खुला करते थे, परंतु लोथल इसका अपवाद है, जहाँ भवनों के दरवाजे गली की ओर न खुलकर मुख्य सड़क की ओर खुला करते थे। यह तथ्य परीक्षाओं में ‘निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है’ के रूप में अनेक बार पूछा गया है। हड़प्पा सभ्यता के भवनों में घनाकार ईंटों का प्रयोग 4:2:1 के अनुपात में होता था और नींव के लिए खंडित ईंटों का उपयोग किया जाता था।

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प्र.18. हड़प्पा सभ्यता में कौन-सी प्रजाति (Race) सर्वाधिक निवास करती थी?

(a) अल्पाईन (Alpine)
(b) मंगोलाइड (Mangoloid)
(c) भूमध्य सागरीय (Mediterranean)
(d) प्रोटो आस्ट्रेलॉयड (Proto-Australoid)

उत्तर: (c) भूमध्य सागरीय (Mediterranean)

📝 हड़प्पावासी मुख्यतः चार प्रजातियों से सम्बन्धित थे — भूमध्य सागरीय (Mediterranean), अल्पाईन (Alpine), मंगोलाइड (Mangoloid) और प्रोटो आस्ट्रेलॉयड (Proto-Australoid)। इनमें सर्वाधिक भूमध्य सागरीय प्रजाति के लोग निवास करते थे। सम्भवतः वहाँ पर वणिक वर्ग (Commercial Classes) के लोगों का शासन था। किसी भी स्थल से धारदार हथियारों के प्रमाण न मिलने से यह माना जाता है कि वे लोग शांतिप्रिय (Peaceloving) थे।

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प्र.19. हड़प्पावासियों को शांतिप्रिय (Peaceloving) क्यों माना जाता है?

(a) क्योंकि उनके धर्मग्रंथों में शांति का उपदेश है
(b) क्योंकि किसी भी स्थल से तलवारों, ढालों, शिरस्त्राणों जैसे धारदार हथियारों के प्रमाण नहीं मिले
(c) क्योंकि उनके नगरों में युद्ध के कोई चिह्न नहीं मिले
(d) उपरोक्त B और C दोनों

उत्तर: (d) उपरोक्त B और C दोनों

📝 हड़प्पावासियों को शांतिप्रिय माने जाने के पीछे प्रमुख कारण यह है कि किसी भी स्थल से किसी धारदार हथियार (Sharped Weapons) के प्रमाण नहीं मिले। यद्यपि विभिन्न स्थलों से कुठार, भाले, कटार, गदाएँ आदि मिले हैं, तथापि तीर-धनुष के नमूने कम मिले हैं। विशेष रूप से तलवारों, ढालों, शिरस्त्राणों एवं दूसरे रक्षा के हथियारों की अनुपस्थिति उल्लेखनीय है। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर हड़प्पावासियों को शांतिप्रिय माना जाता है।

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प्र.20. हड़प्पा सभ्यता में मृद्भाण्डों (Pottery) में सर्वाधिक किस रंग के पात्र मिलते हैं?

(a) सफेद और नीले
(b) लाल और काले
(c) पीले और हरे
(d) भूरे और सुनहरे

उत्तर: (b) लाल और काले

📝 हड़प्पा सभ्यता के लोग विभिन्न प्रकार के मृद्भाण्डों (Ware) का प्रयोग करते थे। ये मृद्भाण्ड चमकीले एवं गाढ़े रंग के मजबूत पात्र थे जो मुख्यतः चाक पर निर्मित थे। इन पात्रों पर विभिन्न रंगों — लाल, काले, हरे, सफेद एवं पीले से चित्रकारी की गई है। इनमें मुख्यतः लाल एवं काले रंग के मृद्भाण्ड प्राप्त होते हैं। रंगीन मृद्भाण्डों की अपेक्षा सादे पात्रों की अधिकता है। हड़प्पीय चमकीले मृद्भाण्ड (Vitreous Glaze) सर्वाधिक पुराने माने जाते हैं।

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प्र.21. हड़प्पा सभ्यता में मृद्भाण्डों (Pottery) पर किन रंगों का प्रयोग होता था?

(a) केवल सफेद और नीला
(b) लाल, काले, हरे, सफेद और पीले रंग; मुख्यतः लाल और काले
(c) केवल भूरे और काले
(d) सुनहरे और चाँदी के रंग

उत्तर: (b) लाल, काले, हरे, सफेद और पीले रंग; मुख्यतः लाल और काले

📝 हड़प्पा सभ्यता के लोग विभिन्न प्रकार के मृद्भाण्डों (Ware) का प्रयोग करते थे। ये मृद्भाण्ड चमकीले एवं गाढ़े रंग के मजबूत पात्र थे जो मुख्यतः चाक पर निर्मित थे। इन पात्रों पर विभिन्न रंगों से चित्रकारी की गई है जिनमें लाल, काले, हरे, सफेद एवं पीले रंगों का प्रयोग हुआ है। इनमें मुख्यतः लाल एवं काले रंग के मृद्भाण्ड प्राप्त होते हैं। रंगीन मृद्भाण्डों की अपेक्षा सादे पात्रों की अधिकता है। हड़प्पीय चमकीले मृद्भाण्ड (Vitreous Glaze) सर्वाधिक पुराने माने जाते हैं।

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प्र.22. 5000 ई०पू० के आस-पास हड़प्पा पूर्व संस्कृति में क्या महत्वपूर्ण विकास हुआ?

(a) कांसे का प्रयोग शुरू हुआ
(b) घास-फूस और कच्ची मिट्टी के मकान बनने लगे तथा हस्त निर्मित मृद्भाण्ड का प्रयोग शुरू हुआ
(c) बड़े नगरों का निर्माण हुआ
(d) लिखित लिपि का विकास हुआ

उत्तर: (b) घास-फूस और कच्ची मिट्टी के मकान बनने लगे तथा हस्त निर्मित मृद्भाण्ड का प्रयोग शुरू हुआ

📝 स्थानीय उद्भव के सिद्धांत के अनुसार हड़प्पा सभ्यता का विकास क्रमिक था। 7000 ई०पू०: मेहरगढ़ में गेहूँ-जौ की खेती और पशुपालन। 5000 ई०पू०: घास-फूस और कच्ची मिट्टी के मकान बनने लगे, शिकार कम हुआ, अनाज रखने के लिए हस्त-निर्मित मृद्भाण्ड का प्रयोग शुरू हुआ। 3500 ई०पू०: कुम्हार के चाक का प्रयोग, शंख, सीपी, फिरोजा और लाजवर्दमणि जैसे उद्योगों का विकास। 3000 ई०पू०: बड़े पैमाने पर कृषक बस्तियों का निर्माण हुआ।

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प्र.23. हड़प्पा सभ्यता के किस स्थल से ‘युग्म शवाधान (Joint Burial) या मम्मी’ के साक्ष्य मिले हैं?

(a) मोहनजोदड़ो
(b) लोथल
(c) हड़प्पा
(d) धौलावीरा

उत्तर: (b) लोथल

📝 लोथल (गुजरात) से युग्म शवाधान (Joint Burial) या मम्मी के साक्ष्य मिले हैं। लोथल से अनेक महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं — बंदरगाह या गोदीबाड़ा (Dockyard), फारस की मुहरें, धान की भूसी के साक्ष्य (रंगपुर से भी), अग्नि कुण्ड (Fire Pits or Altars) के साक्ष्य, और पंचतंत्र के चालाक लोमड़ी की कथा-सा परिदृश्य उत्पन्न करने वाला एक साक्ष्य। कालीबंगा से भी युग्म शवाधान या मम्मी के साक्ष्य मिले हैं।

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प्र.24. हड़प्पा सभ्यता में ‘हड़प्पाई लिपि’ को पढ़ने का वैज्ञानिक प्रयास सर्वप्रथम किसने किया?

(a) जॉन मार्शल ने, 1921 में
(b) वैडिल महोदय ने, 1925 में (शुरुआत) और हण्टर महोदय ने, 1934 में (वैज्ञानिक पद्धति से)
(c) राखाल दास बनर्जी ने, 1922 में
(d) डी०पी० अग्रवाल ने, 1964 में

उत्तर: (b) वैडिल महोदय ने, 1925 में (शुरुआत) और हण्टर महोदय ने, 1934 में (वैज्ञानिक पद्धति से)

📝 हड़प्पाई लिपि को पढ़ने की शुरुआत सर्वप्रथम 1925 ई० में वैडिल महोदय ने की थी, परंतु इस लिपि को वैज्ञानिक पद्धति से पढ़ने का सर्वप्रथम प्रयास 1934 ई० में हण्टर महोदय ने किया। हड़प्पाई लिपि में लगभग 400 अक्षर (Syllable) हैं और यह चित्रात्मक (Pictographical) लिपि है। यह मेसोपोटामिया की कीलाक्षर व मिस्र की हायरोग्लिफिक लिपि की भाँति अभी तक अपठनीय है क्योंकि यह वर्णमाला में न होकर चित्र के रूप में है।

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प्र.25. हड़प्पा सभ्यता और मेसोपोटामिया सभ्यता में सबसे बड़ी असमानता क्या थी, जिससे वैदेशिक उद्भव के सिद्धांत को अस्वीकार किया गया?

(a) दोनों में पकी ईंटों के उपयोग में अंतर
(b) हड़प्पाई लिपि व माप-तौल की प्रणाली मेसोपोटामिया से भिन्न थी; हड़प्पाई लोग चावल खेती व हाथी पालते थे जिसके साक्ष्य मेसोपोटामिया में नहीं
(c) दोनों सभ्यताएँ अलग-अलग नदियों के किनारे बसी थीं
(d) दोनों सभ्यताओं में मुहरें अलग-अलग धातुओं की बनी थीं

उत्तर: (b) हड़प्पाई लिपि व माप-तौल की प्रणाली मेसोपोटामिया से भिन्न थी; हड़प्पाई लोग चावल खेती व हाथी पालते थे जिसके साक्ष्य मेसोपोटामिया में नहीं

📝 वैदेशिक उद्भव के सिद्धांत को अस्वीकार करने के पीछे प्रमुख कारण यह था कि सूक्ष्म अवलोकन करने पर दोनों सभ्यताओं में समानता की तुलना में असमानता के तत्व अधिक प्रबल थे। हड़प्पाई लिपि व माप-तौल की प्रणाली मेसोपोटामिया से भिन्न थी। हड़प्पाई लोग चावल की खेती करते व हाथी पालते थे, जबकि मेसोपोटामिया में इस तरह के साक्ष्य नहीं मिलते। जितने बड़े पैमाने पर पकी ईंटों का प्रयोग हड़प्पावासियों ने किया, वह अन्यत्र दुर्लभ है। इन्हीं असमानताओं के आलोक में स्थानीय उद्भव के सिद्धांत को अधिक मान्यता मिली।
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