प्राचीन भारत का इतिहास भाग-04 MCQ-2026
हड़प्पा सभ्यता Part-4 UPSC/SSC/UPPSC के लिए 25 Expected MCQs 2026
हड़प्पा सभ्यता (सिंधु घाटी सभ्यता) प्राचीन भारत की एक अत्यंत विकसित शहरी सभ्यता थी, जो अपनी सुनियोजित नगर व्यवस्था, उन्नत जल निकास प्रणाली, पकी ईंटों के मकानों और उत्कृष्ट मृद्भाण्ड कला के लिए प्रसिद्ध है। यह सभ्यता न केवल पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं में भी बार-बार पूछी जाने वाली विषयवस्तु है।
यदि आप UPSC, UPPCS, SSC, BPSC या अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो यह Part-4 आपके लिए विशेष रूप से उपयोगी रहेगा। इस भाग में ऐसे चयनित MCQs शामिल किए गए हैं जो परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
इस पोस्ट में आपको 25 महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न उनके सही उत्तर एवं संक्षिप्त व्याख्या सहित मिलेंगे, जिससे आप न केवल सही उत्तर याद रख पाएंगे बल्कि संबंधित तथ्य भी आसानी से समझ सकेंगे। प्रत्येक प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़ें और व्याख्या अवश्य देखें ताकि आपकी तैयारी मजबूत हो सके।
प्राचीन भारत का इतिहास भाग-4 MCQ-2026
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प्रश्न 1: हड़प्पा सभ्यता में गन्ना और दाल की खेती के साक्ष्य कहा से प्राप्त हुए हैं?
(A) दोनों की खेती के साक्ष्य लोथल से मिले हैं
(B) गन्ना और दाल के उत्पादन की जानकारी किसी भी पुरास्थल से नहीं मिली
(C) केवल दाल की खेती के साक्ष्य मिले हैं
(D) केवल गन्ने की खेती के साक्ष्य मिले हैं
✅ उत्तर: (B) गन्ना और दाल के उत्पादन की जानकारी किसी भी पुरास्थल से नहीं मिली
📝 हड़प्पा सभ्यता की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि था। गेहूँ और जौ मुख्य खाद्य फसलें थीं। इसके अलावा चावल, मटर, सरसों, चना आदि फसलों के भी साक्ष्य मिले हैं, परंतु गन्ना व दाल के उत्पादन की जानकारी यहाँ के किसी भी पुरास्थल से नहीं मिली है। यह एक महत्वपूर्ण नकारात्मक साक्ष्य है जो परीक्षाओं में ‘कौन-सी फसल नहीं उगाई जाती थी’ के रूप में पूछा जाता है। UPSC सहित अनेक परीक्षाओं में यह पूछा गया है।
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प्रश्न 2: रंगपुर और लोथल से क्या विशेष साक्ष्य मिले हैं?
(A) कांसे की मूर्तियाँ
(B) धान की भूसी (Husk of Paddy) के साक्ष्य
(C) अग्नि कुण्ड के साक्ष्य
(D) मिट्टी के हल के साक्ष्य
✅ उत्तर: (B) धान की भूसी (Husk of Paddy) के साक्ष्य
📝 रंगपुर और लोथल से धान की भूसी (Husk of Paddy) के साक्ष्य मिले हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि हड़प्पावासी चावल की खेती से परिचित थे। रंगपुर गुजरात में स्थित है। लोथल भी गुजरात में है और यहाँ से बंदरगाह, युग्म शवाधान, अग्नि कुण्ड आदि के साक्ष्य भी मिले हैं। बणावली से मिट्टी का खिलौना हल (Terracotta Plough) मिला है और आटा पीसने की चक्की के साक्ष्य लोथल से मिले हैं। कालीबंगा से जुते हुए खेत के साक्ष्य मिले हैं।
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प्रश्न 3: हड़प्पा सभ्यता में कपास की खेती का क्या महत्व था?
(A) यह केवल धार्मिक कार्यों में प्रयोग होती थी
(B) हड़प्पावासियों ने सर्वप्रथम विश्व में कपास की खेती की, इसीलिए यूनानियों ने इसे ‘सिन्डन’ कहा
(C) कपास निर्यात का मुख्य साधन था
(D) कपास केवल मेसोपोटामिया से आयात की जाती थी
✅ उत्तर: (B) हड़प्पावासियों ने सर्वप्रथम विश्व में कपास की खेती की, इसीलिए यूनानियों ने इसे ‘सिन्डन’ कहा
📝 हड़प्पावासियों ने ही सर्वप्रथम विश्व में कपास की खेती प्रारंभ की थी। इसीलिए यूनानियों ने कपास को ‘सिन्डन’ (Sindon) कहकर पुकारा है। यह तथ्य हड़प्पा सभ्यता के कृषि ज्ञान की उन्नतता का प्रमाण है। मोहनजोदड़ो से सूती कपड़े का साक्ष्य (A piece of woven cloth) भी मिला है। UPSC, SSC CGL, BPSC, UPPCS सभी परीक्षाओं में यह प्रश्न अनेक बार पूछा गया है।
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प्रश्न 4: कालीबंगा से ‘जुते हुए खेत’ (Ploughed Field) के साक्ष्य किस चरण से मिले हैं?
(A) उत्तर हड़प्पाई चरण से
(B) प्राक् हड़प्पाई चरण से
(C) परिपक्व हड़प्पाई चरण से
(D) पतन चरण से
✅ उत्तर: (B) प्राक् हड़प्पाई चरण से
📝 कालीबंगा के प्राक् हड़प्पाई चरण (Pre-Harappan Phase) से जुते हुए खेत (Ploughed Field) के साक्ष्य मिले हैं। यह विश्व में अब तक प्राप्त सबसे प्राचीन जुते हुए खेत का साक्ष्य है। कालीबंगा राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में घग्घर नदी के किनारे स्थित है। इसका उत्खनन 1961 ई० में ब्रजवासी लाल द्वारा किया गया था। इसके अलावा बणावली से मिट्टी का खिलौना हल (Terracotta Plough) मिला है।
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प्रश्न 5: हड़प्पा सभ्यता में गाय के बारे में क्या सही है?
(A) गाय सर्वाधिक पूजनीय पशु थी
(B) गाय के किसी भी तरह के प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिले
(C) गाय के अनेक साक्ष्य हर स्थल से मिले हैं
(D) केवल लोथल से गाय के साक्ष्य मिले हैं
✅ उत्तर: (B) गाय के किसी भी तरह के प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिले
📝 हड़प्पा सभ्यता में गाय और घोड़े से सम्बंधित प्रमाणों में काफी संदिग्धता है। गाय के तो किसी तरह के प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिले हैं, परंतु कूबड़दार बैल/ककुदमान वृषभ (Humped Bull) सर्वाधिक लोकप्रिय पशु था। सुरकोतड़ा से घोड़े की हड्डी, लोथल से घोड़े की मृण्मूर्ति और राणाघुण्डई से घोड़े के दाँत के साक्ष्य मिले हैं।
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प्रश्न 6: मनका (Beads) बनाने का कारखाना हड़प्पा सभ्यता के किन स्थलों से मिला?
(A) हड़प्पा और मोहनजोदड़ो
(B) चन्हुदड़ो और लोथल
(C) कालीबंगा और बणावली
(D) रोपड़ और धौलावीरा
✅ उत्तर: (B) चन्हुदड़ो और लोथल
📝 मनका (Beads) बनाने का कारखाना चन्हुदड़ो और लोथल से प्राप्त हुआ है। चन्हुदड़ो से दवात (Inkpot), रंजन श्लाका (Lipstick), मनका बनाने का कारखाना और कुछ ईंटों पर कुत्ते और बिल्ली के पंजों के निशान मिले हैं। मनके विभिन्न सामग्रियों सोना, चाँदी, ताँबा, मिट्टी, लाजवर्द मणि आदि से बनाए जाते थे। लोथल से आटा पीसने की चक्की के साक्ष्य भी मिले हैं।
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प्रश्न 7: हड़प्पावासी तौल के लिए किस पद्धति का प्रयोग करते थे?
(A) दशमलव पद्धति (Decimal System)
(B) 16 या उसके गुणक अंकों की पद्धति
(C) रोमन अंक पद्धति
(D) मेसोपोटामिया की षोडशमिक पद्धति
✅ उत्तर: (B) 16 या उसके गुणक अंकों की पद्धति
📝 हड़प्पावासियों ने तौल के लिए 16 या उसके गुणक अंकों का प्रयोग अपने बाटों पर किया करते थे। ये बाट कई प्रकार के पत्थरों के बने हैं, किंतु भूरे चर्ट पत्थर के बाट सबसे अधिक संख्या में मिले हैं। इसके अलावा चूनापत्थर, सेलखड़ी, स्लेट पत्थर, कैल्सीडोनी जैसे पत्थरों से भी बाट बनाए जाते थे। ये बाट अनेक आकार-प्रकार के होते थे — धनाकार, ढोलाकार, शंक्वाकार, बेलनाकार और इनमें भी सर्वाधिक घनाकार बाट मिले हैं।
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प्रश्न 8: हड़प्पा सभ्यता में सर्वाधिक किस प्रकार के बाट (Weights) मिले हैं?
(A) बेलनाकार बाट
(B) शंक्वाकार बाट
(C) घनाकार (Cubical) बाट
(D) ढोलाकार बाट
✅ उत्तर: (C) घनाकार (Cubical) बाट
📝 हड़प्पावासियों के बाट अनेक आकार-प्रकार के होते थे जैसे धनाकार, ढोलाकार, शंक्वाकार, बेलनाकार आदि, परंतु इनमें भी सर्वाधिक घनाकार (Cubical) बाट मिले हैं। बाट मुख्यतः भूरे चर्ट पत्थर के बने होते थे। इसके अलावा चूनापत्थर, सेलखड़ी, स्लेट पत्थर, कैल्सीडोनी जैसे पत्थरों से भी बाट बनाए जाते थे। हड़प्पावासी 16 या उसके गुणक अंकों में तौल करते थे जो आज भी भारत में प्रचलित है।
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प्रश्न 9: हड़प्पा सभ्यता में मातृदेवी की पहचान किन रूपों में की जाती थी?
(A) युद्ध और शक्ति की देवी के रूप में
(B) ‘जननी’, ‘उर्वरता’ या ‘वनस्पति’ की देवी के रूप में
(C) नदी और जल की देवी के रूप में
(D) धन और सम्पदा की देवी के रूप में
✅ उत्तर: (B) ‘जननी’, ‘उर्वरता’ या ‘वनस्पति’ की देवी के रूप में
📝 हड़प्पाकालीन धार्मिक विश्वासों में मातृदेवी की उपासना सर्वाधिक प्रचलित थी। हड़प्पा से प्राप्त एक मुहर में सिर के बल खड़ी एक स्त्री के गर्भ से एक पौधे को निकलते हुए दिखलाया गया है। एक अन्य मुहर में पीपल की दो शाखाओं के बीच स्त्री की आकृति बनी है। ये सारे प्रमाण यह बताते हैं कि हड़प्पावासी मातृदेवी की उपासना ‘जननी’, ‘उर्वरता’ या ‘वनस्पति’ की देवी के रूप में करते थे। परवर्ती हिंदू धर्म में भी यह परंपरा दिखती है।
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प्रश्न 10: हड़प्पाकालीन धार्मिक विश्वासों की क्या विशेषता थी?
(A) इनमें बौद्ध धर्म की विशेषताएँ शामिल थीं
(B) इनमें परवर्ती हिन्दू धर्म की अनेक विशेषताएँ शामिल थीं
(C) इनमें इस्लाम की विशेषताएँ शामिल थीं
(D) ये पूर्णतः मेसोपोटामिया के धर्म जैसे थे
✅ उत्तर: (B) इनमें परवर्ती हिन्दू धर्म की अनेक विशेषताएँ शामिल थीं
📝 हड़प्पाकालीन धार्मिक विश्वासों में परवर्ती हिन्दू धर्म की अनेक विशेषताएँ शामिल थीं। मातृदेवी की उपासना, पशुपति शिव, लिंग-योनि पूजन, वृक्ष पूजा, नाग पूजा, अग्नि पूजा, पशु पूजा — ये सभी बाद के हिंदू धर्म में भी दिखते हैं। यही कारण है कि अनेक विद्वान हड़प्पा सभ्यता को हिंदू सभ्यता की जननी मानते हैं। UPSC, SSC, UPPCS सहित अनेक परीक्षाओं में यह पूछा जाता है।
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प्रश्न 11: हड़प्पा सभ्यता में ‘पशुपति शिव’ की मुहर में किस मुद्रा में पुरुष को दिखाया गया है?
(A) नृत्य मुद्रा में
(B) योग की ‘पद्मासन मुद्रा’ में
(C) युद्ध मुद्रा में
(D) प्रणाम मुद्रा में
✅ उत्तर: (B) योग की ‘पद्मासन मुद्रा’ में
📝 मोहनजोदड़ो से मैके नामक पुराविद् को एक ऐसी मुहर के साक्ष्य मिले हैं, जिसमें सींग वाले एक त्रिमुखी पुरुष को योग की ‘पद्मासन मुद्रा’ में लगभग नग्न बैठे दिखलाया गया है। इसके दाहिनी ओर एक हाथी और एक बाघ व बायीं ओर एक गैंडा व भैंसा और सिंहासन के नीचे एक द्विश्रृंगीय हिरन की आकृति बनी है। मार्शल ने इसका संबंध ऐतिहासिक काल के शिव के साथ स्थापित किया है।
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प्रश्न 12: ‘पशुपति शिव’ की मुहर में कौन-से पशु अंकित हैं?
(A) गाय, बैल, भैंसा और हिरन
(B) हाथी, बाघ, गैंडा, भैंसा और द्विश्रृंगीय हिरन
(C) शेर, हाथी, घोड़ा और बाघ
(D) ऊँट, बैल, हिरन और बकरा
✅ उत्तर: (B) हाथी, बाघ, गैंडा, भैंसा और द्विश्रृंगीय हिरन
📝 मोहनजोदड़ो से प्राप्त पशुपति शिव की मुहर में सींग वाले त्रिमुखी पुरुष के दाहिनी ओर एक हाथी और एक बाघ, बायीं ओर एक गैंडा व भैंसा और सिंहासन के नीचे एक द्विश्रृंगीय हिरन की आकृति बनी है। मार्शल ने इस त्रिमुखी पुरुष का संबंध शिव से जोड़ा है। यह मुहर हड़प्पा सभ्यता के धार्मिक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य मानी जाती है। UPSC 2010, 2013, 2019 में इससे संबंधित प्रश्न पूछे गए हैं।
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प्रश्न 13: हड़प्पा सभ्यता में मेसोपोटामिया से व्यापार संबंध के क्या प्रमाण मिले हैं?
(A) सोने के सिक्के
(B) लोथल से फारस की मोहरें और मोहनजोदड़ो से मेसोपोटामिया मूल की मोहरें
(C) मेसोपोटामिया की कीलाक्षर लिपि
(D) हड़प्पाई सेना के अवशेष
✅ उत्तर: (B) लोथल से फारस की मोहरें और मोहनजोदड़ो से मेसोपोटामिया मूल की मोहरें
📝 हड़प्पावासियों ने मेसोपोटामिया (इराक) और फारस (ईरान) के साथ घनिष्ठ व्यापारिक संबंध स्थापित किए। लोथल से फारस की मोहरें (Persian Seals) और मोहनजोदड़ो से मेसोपोटामिया मूल की मोहरों के साक्ष्य मिले हैं। सारगोन ने दावा किया कि दिल्मुन, मकान और मेलुहा के जहाज उसके बंदरगाह पर लंगर डालते हैं। दिल्मुन को ‘सूर्योदय का क्षेत्र’, ‘साफ सुथरे नगरों वाला स्थान’ और ‘हाथियों का देश’ कहा गया।
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प्रश्न 14: मेसोपोटामिया के शासक सारगोन ने ‘मकान’ (Makan) किसे कहा?
(A) सिंधु क्षेत्र को
(B) मकरान (बलूचिस्तान, पाकिस्तान) को
(C) फारस की खाड़ी में स्थित बहरीन को
(D) अफगानिस्तान को
✅ उत्तर: (B) मकरान (बलूचिस्तान, पाकिस्तान) को
📝 मेसोपोटामिया (इराक) के अक्काद के शासक सारगोन ने तीन क्षेत्रों का उल्लेख किया है — दिल्मुन (फारस की खाड़ी में स्थित बहरीन), मकान (मकरान, बलूचिस्तान, पाकिस्तान) और मेलुहा (सिंधु क्षेत्र)। सारगोन ने कहा कि इन तीनों क्षेत्रों के जहाज उसके बंदरगाह पर लंगर डालते हैं। दिल्मुन को ‘सूर्योदय का क्षेत्र’, ‘साफ सुथरे नगरों वाला स्थान’ और ‘हाथियों का देश’ कहा गया। यह हड़प्पाई व्यापार का महत्वपूर्ण साक्ष्य है।
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प्रश्न 15: लोथल के ‘गोदीबाड़ा’ (Dockyard) की पहचान किस आधार पर की गई?
(A) वहाँ जहाजों के टूटे हुए टुकड़े मिले
(B) लोथल के पूर्वी भाग में मिले पक्की ईंटों के घेरे की व्याख्या गोदीबाड़ा के रूप में की गई
(C) वहाँ से नाविकों की मूर्तियाँ मिलीं
(D) वहाँ से फारसी भाषा में लिखे दस्तावेज मिले
✅ उत्तर: (B) लोथल के पूर्वी भाग में मिले पक्की ईंटों के घेरे की व्याख्या गोदीबाड़ा के रूप में की गई
📝 लोथल के पूर्वी भाग में मिले पक्की ईंटों के घेरे की व्याख्या गोदीबाड़ा या बंदरगाह (Dockyard) के रूप में की गई है। लोथल गुजरात में खंभात की खाड़ी के निकट स्थित होने से यह स्वाभाविक है कि यह एक महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार केंद्र रहा होगा। लोथल से फारस की मोहरें मिलना भी इस बात का प्रमाण है। यह हड़प्पावासियों की समुद्री व्यापार में दक्षता का प्रमाण देता है।
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प्रश्न 16: हड़प्पा सभ्यता में ताँबा किस स्थान से प्राप्त होता था?
(A) कोलार (कर्नाटक) से
(B) खेतड़ी (राजस्थान) से
(C) बदख्शाँ (अफगानिस्तान) से
(D) मध्य एशिया से
✅ उत्तर: (B) खेतड़ी (राजस्थान) से
📝 हड़प्पावासी विभिन्न वस्तुएँ भिन्न-भिन्न स्थानों से प्राप्त करते थे — ताँबा: खेतड़ी (राजस्थान); सोना: कोलार क्षेत्र, कर्नाटक; टिन और चाँदी: अफगानिस्तान और ईरान; सेलखड़ी (Steatite): बलूचिस्तान, पाकिस्तान; फिरोजा और जेड: मध्य एशिया। हड़प्पावासी लाजवर्द मणि (Lapis Lazuli) का बहुतायत में प्रयोग करते थे जिसे वे बदख्शाँ (अफगानिस्तान) से प्राप्त करते थे। यह प्रश्न UPSC, SSC, राज्य सेवा परीक्षाओं में अनेक बार पूछा गया है।
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प्रश्न 17: हड़प्पा सभ्यता में ‘लाजवर्द मणि’ (Lapis Lazuli) कहाँ से प्राप्त होती थी?
(A) कोलार (कर्नाटक) से
(B) मध्य एशिया से
(C) बदख्शाँ (अफगानिस्तान) से
(D) खेतड़ी (राजस्थान) से
✅ उत्तर: (C) बदख्शाँ (अफगानिस्तान) से
📝 हड़प्पावासी एक कीमती पत्थर लाजवर्द मणि (Lapis Lazuli) का बहुतायत में प्रयोग करते थे, जिसे वे बदख्शाँ (अफगानिस्तान) से प्राप्त करते थे। लाजवर्द मणि एक नीले रंग का कीमती पत्थर है। इसका प्रयोग आभूषणों और अलंकरण में होता था। हड़प्पावासी विभिन्न वस्तुएँ दूर-दूर के स्थानों से प्राप्त करते थे जो उनके विस्तृत व्यापार नेटवर्क का प्रमाण है। टिन — अफगानिस्तान और ईरान; सोना — कर्नाटक; ताँबा — राजस्थान से प्राप्त होता था।
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प्रश्न 18: हड़प्पा सभ्यता में सोना (Gold) कहाँ से प्राप्त होता था?
(A) राजस्थान से
(B) कोलार क्षेत्र, कर्नाटक से
(C) अफगानिस्तान से
(D) मध्य एशिया से
✅ उत्तर: (B) कोलार क्षेत्र, कर्नाटक से
📝 हड़प्पावासी अपनी विभिन्न जरूरतों के लिए भिन्न-भिन्न स्थानों से वस्तुएँ मँगाते थे। सोना — कोलार क्षेत्र, कर्नाटक से; ताँबा — खेतड़ी, राजस्थान से; टिन और चाँदी — अफगानिस्तान और ईरान से; सेलखड़ी — बलूचिस्तान, पाकिस्तान से; फिरोजा और जेड — मध्य एशिया से प्राप्त होते थे। यह उनके व्यापक व्यापारिक नेटवर्क का प्रमाण है जो भारतीय उपमहाद्वीप के भीतर और बाहर दोनों में फैला हुआ था।
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प्रश्न 19: हड़प्पा सभ्यता का व्यापार किस पद्धति पर आधारित था?
(A) सोने के सिक्कों से
(B) वस्तु विनिमय प्रणाली (Barter System) से
(C) कागजी मुद्रा से
(D) ऋण प्रणाली से
✅ उत्तर: (B) वस्तु विनिमय प्रणाली (Barter System) से
📝 हड़प्पाई व्यापारिक संबंध वस्तु विनिमय प्रणाली (Barter System) के आधार पर संचालित होता था — अर्थात् एक वस्तु के बदले दूसरी वस्तु देना। हड़प्पावासियों ने तौल के लिए 16 या उसके गुणक अंकों का प्रयोग अपने बाटों पर किया। ये बाट कई प्रकार के पत्थरों के बने होते थे जिनमें भूरे चर्ट पत्थर के बाट सबसे अधिक मिले हैं। सर्वाधिक घनाकार बाट मिले हैं। हड़प्पाई व्यापार मेसोपोटामिया और फारस तक फैला था।
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प्रश्न 20: हड़प्पा सभ्यता में ‘अलंकृत ईंट’ (Decorated Bricks) के साक्ष्य किस स्थल से मिले हैं?
(A) मोहनजोदड़ो से
(B) हड़प्पा से
(C) कालीबंगा से
(D) लोथल से
✅ उत्तर: (C) कालीबंगा से
📝 हड़प्पा सभ्यता में ईंटें सामान्यतः अलंकरण विहीन होती थीं। परंतु इसका एकमात्र अपवाद कालीबंगा है जहाँ से अलंकृत ईंट (Decorated Bricks) के साक्ष्य मिले हैं। यहाँ की ईंटों पर प्रतिच्छेदी वृत्त (Intersected Circle) का अंकन मिलता है। कालीबंगा राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में घग्घर नदी के किनारे स्थित है और 1961 में ब्रजवासी लाल द्वारा उत्खनित है। यह तथ्य UPSC प्रारंभिक परीक्षा में पूछा जा चुका है।
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प्रश्न 21: हड़प्पाई मातृदेवी की पहचान किस मुहर से होती है?
(A) पशुपति शिव की मुहर से
(B) हड़प्पा से प्राप्त एक मुहर जिसमें सिर के बल खड़ी स्त्री के गर्भ से पौधा निकलता दिखाया गया है
(C) एकश्रृंगीय पशु की मुहर से
(D) लोथल से प्राप्त फारसी मुहर से
✅ उत्तर: (B) हड़प्पा से प्राप्त एक मुहर जिसमें सिर के बल खड़ी स्त्री के गर्भ से पौधा निकलता दिखाया गया है
📝 हड़प्पा से प्राप्त आयताकार व लेखयुक्त एक मुहर में सिर के बल खड़ी एक स्त्री के गर्भ से एक पौधे को निकलते हुए दिखलाया गया है। इसी प्रकार एक अन्य मुहर में पीपल की दो शाखाओं के बीच स्त्री की आकृति बनी है तथा पेड़ के नीचे बकरा लिए हुए एक मानव की आकृति है और उसके पीछे भीड़ खड़ी दिखलाई गई है। ये सारे प्रमाण मातृदेवी को ‘जननी’, ‘उर्वरता’ या ‘वनस्पति’ की देवी के रूप में उपासना का संकेत देते हैं।
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प्रश्न 22: हड़प्पा सभ्यता के ‘नगर नियोजन’ (Town Planning) की सबसे विशिष्ट उपलब्धि क्या मानी जाती है?
(A) बड़े-बड़े महल
(B) उन्नत जल निकास प्रणाली
(C) विशाल मंदिर
(D) सोने की सड़कें
✅ उत्तर: (B) उन्नत जल निकास प्रणाली
📝 हड़प्पा सभ्यता की सबसे विशिष्ट उपलब्धियों में से एक उसकी उन्नत जल निकास प्रणाली (Drainage System) है। प्राचीन सभ्यताओं में निकास नालियों का इतना सुंदर प्रबंध और कहीं नहीं मिलता जितना सिंधु सभ्यता में मिलता है। मोहनजोदड़ो की जल निकास प्रणाली अद्भुत थी। घरों में स्नानागार, नरमोखे युक्त सार्वजनिक नालियाँ — यह सब उनकी उन्नत नगर नियोजन व्यवस्था का प्रमाण है।
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प्रश्न 23: हड़प्पा सभ्यता में ‘वणिक वर्ग’ (Commercial Classes) के शासन का अनुमान किस आधार पर लगाया जाता है?
(A) व्यापारिक मुहरों की अधिक संख्या के आधार पर
(B) हड़प्पावासी व्यापार की ओर अधिक आकर्षित थे और कोई स्पष्ट राजतंत्रीय साक्ष्य नहीं मिले
(C) किसी एक राजा की मूर्ति मिलने के आधार पर
(D) शाही महल के अवशेष मिलने के आधार पर
✅ उत्तर: (B) हड़प्पावासी व्यापार की ओर अधिक आकर्षित थे और कोई स्पष्ट राजतंत्रीय साक्ष्य नहीं मिले
📝 हड़प्पा सभ्यता के राजनीतिक स्वरूप के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है। चूँकि हड़प्पावासी व्यापार की ओर अधिक आकर्षित थे, इसलिए ऐसा माना जाता है कि सम्भवतः यहाँ का शासन वणिक वर्ग (Commercial Classes) के हाथों में था। भवनों के निर्माण में आश्चर्यजनक समरूपता यह संभावना व्यक्त करती है कि नगर पालिका या नगर निगम जैसी कोई संस्था अस्तित्व में रही होगी। हण्टर के अनुसार मोहनजोदड़ो का शासन जनतांत्रिक था।
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प्रश्न 24: हड़प्पा सभ्यता में ‘कुम्हार के चाक’ (Potter’s Wheel) का प्रयोग कब से शुरू हुआ?
(A) 7000 ई०पू० के आस-पास
(B) 5000 ई०पू० के आस-पास
(C) 3500 ई०पू० के आस-पास
(D) 2500 ई०पू० के आस-पास
✅ उत्तर: (C) 3500 ई०पू० के आस-पास
📝 स्थानीय उद्भव के सिद्धांत के अनुसार हड़प्पा पूर्व संस्कृति का क्रमिक विकास हुआ। 7000 ई०पू०: मेहरगढ़ में गेहूँ-जौ की खेती और पशुपालन। 5000 ई०पू०: घास-फूस के मकान, हस्त-निर्मित मृद्भाण्ड। 3500 ई०पू०: कुम्हार के चाक का प्रयोग प्रारंभ हुआ, बड़े पैमाने पर मृद्भाण्ड निर्माण शुरू हुआ, इसी काल में शंख, सीपी, फिरोजा और लाजवर्दमणि जैसे उद्योगों का विकास हुआ। 3000 ई०पू०: बड़े पैमाने पर कृषक बस्तियों का निर्माण।
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प्रश्न 25: हड़प्पाई लिपि किस अन्य प्राचीन लिपि के समान मानी जाती है?
(A) संस्कृत लिपि के समान
(B) मेसोपोटामिया की कीलाक्षर और मिस्र की हायरोग्लिफिक लिपि के समान (अपठनीयता की दृष्टि से)
(C) चीनी लिपि के समान
(D) रोमन लिपि के समान
✅ उत्तर: (B) मेसोपोटामिया की कीलाक्षर और मिस्र की हायरोग्लिफिक लिपि के समान (अपठनीयता की दृष्टि से)
📝 हड़प्पाई लिपि के बारे में कहा जाता है कि यह मेसोपोटामिया की कीलाक्षर (Cuneiform) और मिस्र की हायरोग्लिफिक (Hieroglyphic) लिपि की भाँति अभी तक पढ़ी नहीं जा सकी है। यह तुलना उनकी अपठनीयता की दृष्टि से की जाती है। इन तीनों लिपियों में समानता यह है कि ये सभी चित्रात्मक हैं। हालांकि कीलाक्षर और हायरोग्लिफिक को बाद में पढ़ा जा चुका है, परंतु हड़प्पाई लिपि अभी भी अपठनीय बनी हुई है।