हड़प्पा सभ्यता के 25 MCQs UPSC/SSC/UPPSC में बार-बार पूछे गए (Part-5)

हड़प्पा सभ्यता MCQs Part-5 2026 UPSC SSC UPPSC प्रश्न उत्तर

प्राचीन भारत का इतिहास भाग-05 MCQ-2026

हड़प्पा सभ्यता के 25 MCQs UPSC/SSC/UPPSC में बार-बार पूछे गए (Part-5)

हड़प्पा सभ्यता (सिंधु घाटी सभ्यता) प्राचीन भारत की एक उन्नत शहरी सभ्यता थी, जो अपनी सुव्यवस्थित नगर योजना, जल निकास प्रणाली और पकी ईंटों के निर्माण के लिए प्रसिद्ध है। प्रतियोगी परीक्षाओं में इस विषय से नियमित रूप से प्रश्न पूछे जाते हैं।
यदि आप UPSC, UPPSC, SSC, BPSC या अन्य परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो यह Part-5 आपके लिए बेहद उपयोगी है। इसमें 25 चयनित MCQs उत्तर और संक्षिप्त व्याख्या सहित दिए गए हैं, जो आपकी तैयारी को और मजबूत करेंगे।

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प्रश्न 1. अशोक के ‘येरांगुडी’ अभिलेख की क्या विशेषता है, जो इसे हड़प्पाई लिपि से जोड़ती है?

(A) यह भी सेलखड़ी पर लिखा गया था
(B) यह भी बाउस्ट्रोफेदन (हलावर्त) शैली में लिखा गया है
(C) यह भी चित्रात्मक लिपि में लिखा गया था
(D) यह भी हड़प्पाई भाषा में लिखा गया था

उत्तर: (B) यह भी बाउस्ट्रोफेदन (हलावर्त) शैली में लिखा गया है

📝 हड़प्पाई लिपि के लेखन की शैली को ‘बाउस्ट्रोफेदन’ या ‘गौमूत्रिका’ या ‘हलावर्त शैली’ कहते हैं जिसमें पहले दायें से बायें और फिर बायें से दायें लिखा जाता था। उल्लेखनीय है कि अशोक के ‘येरांगुडी’ (कुर्नूल जिला, आंध्रप्रदेश) से प्राप्त अभिलेख भी इसी ‘हलावर्त शैली’ में लिखा गया है। यह तथ्य UPSC और राज्य सेवा परीक्षाओं में विशेष रूप से पूछा जाता है क्योंकि यह हड़प्पा और मौर्य काल के बीच एक रोचक संबंध दर्शाता है।

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प्रश्न 2. फेयर सर्विस (Fair Service) ने हड़प्पा सभ्यता की तिथि क्या मानी है?

(A) 3250-2750 ई०पू०
(B) 2800-2500 ई०पू०
(C) 2000-1500 ई०पू०
(D) 2500-1500 ई०पू०

उत्तर: (C) 2000-1500 ई०पू०

📝 हड़प्पा सभ्यता की काल-निर्धारण में विभिन्न विद्वानों ने अपनी राय दी है, जिसमे जॉन मार्शल: 3250-2750 ई०पू०; फेयर सर्विस: 2000-1500 ई०पू०; मैके: 2800-2500 ई०पू०; व्हीलर: 2500-1500 ई०पू०; डी०पी० अग्रवाल: 2300-1750 ई०पू० (सर्वाधिक मान्य)। इन सभी विद्वानों के नाम और उनकी दी गई तिथियाँ परीक्षाओं में ‘मिलान करें’ या ‘कौन सही है’ के रूप में पूछी जाती हैं। UPSC, BPSC, UPPCS सभी में यह महत्वपूर्ण है।

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प्रश्न 3. हड़प्पा सभ्यता में किस स्थल से ‘घोड़े की मृण्मूर्ति’ (Terracotta Horse Figurine) के प्रमाण मिले?

(A) हड़प्पा से
(B) सुरकोतड़ा से
(C) लोथल से
(D) राणाघुण्डई से

उत्तर: (C) लोथल से

📝 हड़प्पा सभ्यता में घोड़े के बारे में प्रमाण काफी संदिग्ध हैं। सुरकोतड़ा (गुजरात) से घोड़े की तथाकथित हड्डी के साक्ष्य मिले हैं। लोथल से घोड़े की मृण्मूर्ति (Terracotta Horse Figurine) के प्रमाण मिले हैं। राणाघुण्डई (बलूचिस्तान, पाकिस्तान) से घोड़े के दाँत के प्रमाण मिले हैं। इन साक्ष्यों के बावजूद हड़प्पावासी घोड़े से उतने परिचित नहीं थे जितने वैदिकयुगीन आर्य लोग थे। यह तथ्य आर्य आक्रमण सिद्धांत के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

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प्रश्न 4. हड़प्पा सभ्यता में ‘घोड़े के दाँत’ के प्रमाण कहाँ से मिले है?

(A) लोथल से
(B) सुरकोतड़ा से
(C) राणाघुण्डई (बलूचिस्तान, पाकिस्तान) से
(D) हड़प्पा से

उत्तर: (C) राणाघुण्डई (बलूचिस्तान, पाकिस्तान) से

📝 हड़प्पा सभ्यता में घोड़े के संदर्भ में तीन प्रमुख साक्ष्य हैं — सुरकोतड़ा (गुजरात) से घोड़े की तथाकथित हड्डी; लोथल (गुजरात) से घोड़े की मृण्मूर्ति; राणाघुण्डई (बलूचिस्तान, पाकिस्तान) से घोड़े के दाँत प्राप्त हुए है। इसे देखते हुए, घोड़े के संबंध में यही कहा जा सकता है कि वे लोग इससे उतना परिचित नहीं थे जितना वैदिकयुगीन आर्य लोग थे। इन तीनों साक्ष्यों को एक साथ याद रखना परीक्षा की दृष्टि से आवश्यक है।

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प्रश्न 5. ‘जुते हुए खेत’ (Ploughed Field) का सबसे प्राचीन साक्ष्य किस स्थल से मिला है?

(A) मोहनजोदड़ो
(B) बणावली
(C) कालीबंगा
(D) लोथल

उत्तर: (C) कालीबंगा

📝 कालीबंगा के प्राक् हड़प्पाई चरण (Pre-Harappan Phase) से जुते हुए खेत (Ploughed Field) के साक्ष्य मिले हैं। यह विश्व में अब तक प्राप्त सबसे प्राचीन जुते हुए खेत का साक्ष्य माना जाता है। कालीबंगा राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में घग्घर नदी के किनारे स्थित है। बणावली से मिट्टी का खिलौना हल (Terracotta Plough) मिला है। आटा पीसने की चक्की के साक्ष्य लोथल से मिले हैं। ये तीनों अलग-अलग स्थलों के साक्ष्य परीक्षाओं में मिलान के रूप में पूछे जाते हैं।

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प्रश्न 6. हड़प्पा सभ्यता में ‘टिन’ (Tin) की प्राप्ति कहाँ से होती थी?

(A) कोलार (कर्नाटक) से
(B) खेतड़ी (राजस्थान) से
(C) अफगानिस्तान और ईरान से
(D) मध्य एशिया से

उत्तर: (C) अफगानिस्तान और ईरान से

📝 हड़प्पावासी अपनी जरूरत की वस्तुएँ दूर-दूर से मँगाते थे। जिसमे टिन और चाँदी — दोनों अफगानिस्तान और ईरान से; सोना — कोलार क्षेत्र (कर्नाटक); ताँबा — खेतड़ी (राजस्थान); सेलखड़ी (Steatite) — बलूचिस्तान (पाकिस्तान); फिरोजा और जेड — मध्य एशिया; लाजवर्द मणि — बदख्शाँ (अफगानिस्तान) प्राप्त करते थे। यह विस्तृत आयात नेटवर्क हड़प्पावासियों के उन्नत व्यापारिक संबंधों का प्रमाण है। परीक्षाओं में अक्सर ‘कहाँ से क्या मिलता था’ के रूप में पूछा जाता है।

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प्रश्न 7. हड़प्पा सभ्यता में ‘चाँदी’ (Silver) की प्राप्ति कहाँ से होती थी?

(A) कर्नाटक से
(B) राजस्थान से
(C) अफगानिस्तान और ईरान से
(D) बलूचिस्तान से

उत्तर: (C) अफगानिस्तान और ईरान से

📝 हड़प्पावासी अपनी जरूरत की विभिन्न वस्तुएँ भिन्न-भिन्न स्थलों से प्राप्त करते थे। जिसमे चाँदी (Silver) और टिन — अफगानिस्तान और ईरान से प्राप्त होती थी। सोना — कोलार क्षेत्र (कर्नाटक); ताँबा — खेतड़ी (राजस्थान); सेलखड़ी — बलूचिस्तान (पाकिस्तान); फिरोजा और जेड — मध्य एशिया से प्राप्त होती है। यह विस्तृत व्यापारिक नेटवर्क दर्शाता है कि हड़प्पावासी न केवल भारतीय उपमहाद्वीप में बल्कि मध्य एशिया और पश्चिम एशिया तक व्यापार करते थे।

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प्रश्न 8. हड़प्पाई मुहरों में ‘भूरे चर्ट पत्थर’ की विशेषता क्या थी?

(A) ये केवल धार्मिक कार्यों में प्रयोग होते थे
(B) भूरे चर्ट पत्थर के बाट सबसे अधिक संख्या में मिले हैं
(C) ये केवल हड़प्पा से मिले हैं
(D) इन पर हड़प्पाई लिपि उकेरी जाती थी

उत्तर: (B) भूरे चर्ट पत्थर के बाट सबसे अधिक संख्या में मिले हैं

📝 हड़प्पावासियों के बाट (Weights) कई प्रकार के पत्थरों के बने थे, जैसे – चूनापत्थर, सेलखड़ी, स्लेट पत्थर, कैल्सीडोनी आदि, परंतु इनमें भूरे चर्ट पत्थर के बाट सबसे अधिक संख्या में मिले हैं। ये बाट अनेक आकारों के थे, जैसे धनाकार, ढोलाकार, शंक्वाकार, बेलनाकार, परंतु सर्वाधिक घनाकार बाट मिले हैं। हड़प्पावासी 16 या उसके गुणक अंकों में तौल करते थे। व्यापार वस्तु विनिमय प्रणाली पर आधारित था।

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प्रश्न 9. हड़प्पा सभ्यता में ‘मृद्भाण्डों’ (Pottery) के निर्माण के बारे में क्या सही है?

(A) ये केवल हाथ से बनाए जाते थे
(B) ये मुख्यतः चाक पर निर्मित थे और रंगीन मृद्भाण्डों की अपेक्षा सादे पात्रों की अधिकता थी
(C) ये केवल धार्मिक कार्यों के लिए बनते थे
(D) ये पत्थर से बनाए जाते थे

उत्तर: (B) ये मुख्यतः चाक पर निर्मित थे और रंगीन मृद्भाण्डों की अपेक्षा सादे पात्रों की अधिकता थी

📝 हड़प्पा सभ्यता के मृद्भाण्ड (Pottery) मुख्यतः चाक पर निर्मित होते थे। ये चमकीले एवं गाढ़े रंग के मजबूत पात्र थे। इन पर लाल, काले, हरे, सफेद और पीले रंगों से चित्रकारी की जाती थी। यहाँ से मुख्यतः लाल एवं काले रंग के मृद्भाण्ड मिले है। रंगीन मृद्भाण्डों की अपेक्षा सादे पात्रों की अधिकता है। हड़प्पीय चमकीले मृद्भाण्ड (Vitreous Glaze) सर्वाधिक पुराने माने जाते हैं। 3500 ई०पू० में कुम्हार के चाक के प्रयोग से बड़े पैमाने पर मृद्भाण्ड निर्माण शुरू हुआ।

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प्रश्न 10. हड़प्पा और मेसोपोटामिया सभ्यताओं में कौन-सी समानताएँ थीं, जिनके आधार पर वैदेशिक उद्भव का सिद्धांत प्रस्तुत किया गया?

(A) दोनों में केवल पकी ईंटों का प्रयोग
(B) नदी किनारे बसावट, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था, नगरीय चरित्र और पकी ईंटों का प्रयोग
(C) दोनों में एक ही भाषा का प्रयोग
(D) दोनों में एक ही देवता की पूजा

उत्तर: (B) नदी किनारे बसावट, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था, नगरीय चरित्र और पकी ईंटों का प्रयोग

📝 वैदेशिक उद्भव के सिद्धांत के समर्थकों ने दोनों सभ्यताओं में कई समानताएँ बताईं जैसे – दोनों नदी किनारे बसी थीं (हड़प्पा — सिंधु और सहायक नदियाँ; मेसोपोटामिया — दजला और फरात), दोनों की अर्थव्यवस्था का आधार कृषि था, दोनों नगरीय सभ्यताएँ थीं, दोनों में पकी ईंटों का प्रयोग किया गया है। परंतु सूक्ष्म अवलोकन से असमानताएँ अधिक प्रबल है जैसे – हड़प्पाई लिपि व माप-तौल भिन्न थे, हड़प्पाई लोग चावल उगाते व हाथी पालते थे जो मेसोपोटामिया में नहीं मिलता। इसीलिए यह सिद्धांत अस्वीकार हुआ।

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प्रश्न 11. मोहनजोदड़ो और हड़प्पा से प्राप्त ‘चक्रों’ के मध्य छिद्र को विद्वानों ने किसका प्रतीक माना है?

(A) सूर्य का प्रतीक
(B) योनि का प्रतीक
(C) चक्रवर्ती राजा का प्रतीक
(D) ब्रह्मांड का प्रतीक

उत्तर: (B) योनि का प्रतीक

📝 मोहनजोदड़ो तथा हड़प्पा से विशाल संख्या में चक्र मिले हैं। लोथल से भी ऐसे चमकीले पत्थरों के अवशेष प्राप्त हुए हैं। प्रत्येक चक्र के मध्य में एक छिद्र है जिन्हें विद्वानों ने योनि का प्रतीक माना है। हड़प्पा व मोहनजोदड़ो से कुछ पत्थरों पर ऐसे साक्ष्य मिले हैं जिनकी पहचान लिंग के रूप में की गई है। ये सारे प्रमाण हड़प्पा सभ्यता में ‘लिंग व योनि पूजन’ (Worship of Phalics) की जानकारी देते हैं। यह प्रश्न UPSC, UPPCS सहित अनेक परीक्षाओं में पूछा गया है।

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प्रश्न 12. ऑरेल स्टाइन को पाकिस्तान के बलूचिस्तान में किन स्थलों से लिंग व योनि के स्पष्ट साक्ष्य मिले?

(A) हड़प्पा और मोहनजोदड़ो से
(B) राणाघुण्डई और पेरियानो घुण्डई से
(C) लोथल और कालीबंगा से
(D) सुरकोतड़ा और धौलावीरा से

उत्तर: (B) राणाघुण्डई और पेरियानो घुण्डई से

📝 हाल के वर्षों में ऑरेल स्टाइन को पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र में स्थित राणाघुण्डई व पेरियानो घुण्डई से क्रमशः लिंग व योनि के स्पष्ट साक्ष्य मिले हैं। इन साक्ष्यों की उपासना ‘प्रकृति की प्रचण्ड शक्ति’ के रूप में की जाती थी। यह हड़प्पा सभ्यता में लिंग व योनि पूजन (Worship of Phalics) की व्यापकता का प्रमाण है। राणाघुण्डई से घोड़े के दाँत के साक्ष्य भी मिले हैं जो घोड़े की उपस्थिति का संदिग्ध प्रमाण है।

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प्रश्न 13. मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक मुहर में ‘अर्द्ध मानव तथा अर्द्ध पशु आकृति’ को किससे लड़ते दिखाया गया है?

(A) एक विशाल हाथी से
(B) एक श्रृंगी बाघ से
(C) एक गैंडे से
(D) एक भैंसे से

उत्तर: (B) एक श्रृंगी बाघ से

📝 मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक मुहर में अर्द्ध मानव तथा अर्द्ध पशु आकृति को एक श्रृंगी बाघ से लड़ते हुए दिखलाया गया है। यह प्रमाण मेसोपोटामिया के गिलगमिश की पौराणिक कथा का परिदृश्य उपलब्ध कराता है। गिलगमिश वहाँ के एक राक्षस का नाम था। यह साक्ष्य हड़प्पा और मेसोपोटामिया सभ्यताओं के बीच सांस्कृतिक संपर्क का प्रमाण माना जाता है। UPSC और राज्य सेवा परीक्षाओं में यह तथ्य पूछा जाता है।

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प्रश्न 14. हड़प्पा सभ्यता में मुहरों पर किस पशु का अंकन सामान्य पशुओं में सर्वाधिक लोकप्रिय था?

(A) हाथी
(B) गैंडा
(C) कूबडदार बैल (ककुदमान वृषभ / Humped Bull)
(D) बाघ

उत्तर: (C) कूबडदार बैल (ककुदमान वृषभ / Humped Bull)

📝 वास्तविक पशुओं में गलकम्बल युक्त डीलदार बैल (ककुदमान वृषभ), भैंसा, हाथी, गैंडा, बाघ, हिरण आदि का अंकन हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, कालीबंगा व लोथल से प्राप्त मुहरों पर मिलता है, परंतु सामान्य पशुओं में कूबडदार बैल या ककुदमान वृषभ (Humped Bull) सर्वाधिक लोकप्रिय था। इसके कई प्रमाण विभिन्न पुरास्थलों से प्राप्त हुए हैं। गाय के प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिले हैं, परंतु कूबडदार बैल से गाय की परिचितता का अनुमान लगाया जाता है।
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प्रश्न 15. ‘योग की परंपरा’ को किसकी देन माना जाता है और क्यों?

(A) आर्यों की देन; क्योंकि वे योग के जनक थे
(B) आयेंत्तर (Non-Aryan) लोगों की देन; क्योंकि ऋग्वेद में योग की मुद्राओं का साक्ष्य नहीं मिलता
(C) मेसोपोटामिया की देन; क्योंकि वहाँ से योग के साक्ष्य मिले
(D) चीन की देन; क्योंकि वहाँ योग पहले विकसित हुआ

उत्तर: (B) आयेंत्तर (Non-Aryan) लोगों की देन; क्योंकि ऋग्वेद में योग की मुद्राओं का साक्ष्य नहीं मिलता

📝 ऋग्वेद में योग की मुद्राओं का साक्ष्य प्राप्त नहीं होता। अतः योग की परंपरा को आयेंत्तर (Non-Aryan) लोगों की देन माना जाता है। हड़प्पावासियों को योग में विश्वास था, इसकी जानकारी मोहनजोदड़ो से प्राप्त मुहर व मूर्ति के साक्ष्यों से मिलती है। पशुपति शिव की मुहर में त्रिमुखी पुरुष को ‘पद्मासन मुद्रा’ में दिखाया गया है और एक अन्य मूर्ति में ‘शाम्भवी मुद्रा’ के भी साक्ष्य मिले हैं।

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प्रश्न 16. ‘योग की शाम्भवी मुद्रा’ का साक्ष्य मोहनजोदड़ो से किस रूप में मिला है?

(A) एक मुहर पर खड़े पुरुष की आकृति में
(B) तिपतिया (Tripetal) अलंकरण वाले शाल ओढ़े एक खंडित पत्थर की मूर्ति में जिसमें दृष्टि अर्द्धखुली व नासाग्र पर केन्द्रित है
(C) एक नृत्यरत स्त्री की मूर्ति में
(D) एक पशु की आकृति में

उत्तर: (B) तिपतिया (Tripetal) अलंकरण वाले शाल ओढ़े एक खंडित पत्थर की मूर्ति में जिसमें दृष्टि अर्द्धखुली व नासाग्र पर केन्द्रित है

📝 मोहनजोदड़ो से तिपतिया (Tripetal) अलंकरण वाले शाल ओढ़े एक खंडित पत्थर की मूर्ति के साक्ष्य मिले हैं, जिसमें व्यक्ति के बाल ऊपर की ओर संवरे व फीते से बंधे हैं। उसकी दृष्टि अर्द्धखुली व नासाग्र पर केन्द्रित है। इस मुद्रा को ‘योग की शाम्भवी मुद्रा’ कहा जाता है। इसके अलावा पशुपति शिव की मुहर में योग की ‘पद्मासन मुद्रा’ के साक्ष्य भी मोहनजोदड़ो से ही मिले हैं। ये दोनों साक्ष्य हड़प्पावासियों की योग परंपरा के प्रमाण हैं।

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प्रश्न 17. मोहनजोदड़ो से प्राप्त ‘विशाल स्नानागार’ के आधार पर मार्शल ने क्या मान्यता स्थापित की है?

(A) हड़प्पावासी मनोरंजन के लिए स्नान करते थे
(B) हड़प्पावासी धार्मिक कृत्य करने से पूर्व सामूहिक स्नान करते थे
(C) विशाल स्नानागार केवल राजाओं के लिए था
(D) स्नानागार केवल व्यापारियों द्वारा उपयोग किया जाता था

उत्तर: (B) हड़प्पावासी धार्मिक कृत्य करने से पूर्व सामूहिक स्नान करते थे

📝 मोहनजोदड़ो से विशाल स्नानागार के साक्ष्य मिले हैं। इस तरह के स्नानागार के निर्माण के साक्ष्य अन्य किसी भी स्थान से प्राप्त नहीं होते हैं। उपरोक्त एकमात्र साक्ष्य के आधार पर मार्शल ने यह मान्यता स्थापित की कि आज की तरह ही हड़प्पावासी भी किसी धार्मिक कृत्य को सम्पादित करने के पूर्व सामूहिक स्नान किया करते थे। यह हड़प्पा सभ्यता की एक विशिष्ट उपलब्धि है जो परवर्ती हिंदू धर्म की तीर्थस्नान परंपरा से मेल खाती है।

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प्रश्न 18. कालीबंगा से अग्नि पूजा के कितनी अग्नि-वेदिकाओं के साक्ष्य मिले हैं?

(A) तीन
(B) पाँच
(C) सात (एक कतार में)
(D) दस

उत्तर: (C) सात (एक कतार में)

📝 हड़प्पावासियों में अग्नि पूजा का भी प्रचलन था। कालीबंगा व लोथल से इसके साक्ष्य मिले हैं। कालीबंगा से तो एक कतार में 7 अग्नि-वेदिकाओं के साक्ष्य मिले हैं जिनमें पशुओं की हड्डियाँ व राख मिली है। लोथल से भी ऐसे अग्निकुण्ड के साक्ष्य प्राप्त होते हैं, परंतु अग्नि पूजा के साक्ष्यों की दृष्टि से कालीबंगा के साक्ष्य लोथल से प्राप्त साक्ष्य की तुलना में श्रेष्ठ हैं। यह तथ्य UPSC, UPPCS और BPSC सहित अनेक परीक्षाओं में पूछा जाता है।

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प्रश्न 19. हड़प्पा सभ्यता में ‘पीपल’ वृक्ष के बारे में क्या विशेष साक्ष्य मिला है?

(A) पीपल से लकड़ी के बर्तन बनाए जाते थे
(B) कुछ मुहरों पर पीपल को बाड़े से घिरा दिखलाया गया है और लोग विशेषतः पीपल की पूजा करते थे
(C) पीपल के पत्तों पर हड़प्पाई लिपि लिखी जाती थी
(D) पीपल के नीचे व्यापार होता था

उत्तर: (B) कुछ मुहरों पर पीपल को बाड़े से घिरा दिखलाया गया है और लोग विशेषतः पीपल की पूजा करते थे

📝 हड़प्पावासी वृक्ष व नाग की भी पूजा करते थे। सैंधव सभ्यता की मुहर व मृद्भाण्डों पर पीपल, बबूल, नीम, केला, ताड़, खजूर आदि पेड़ों का चित्रण मिलता है। कुछ मुहरों पर पीपल को बाड़े से घिरा दिखलाया गया है। अनुमान है कि वहाँ के लोग वृक्ष की, विशेषतः पीपल की, पूजा किया करते थे। यह परंपरा आज भी हिंदू धर्म में जारी है जो हड़प्पा सभ्यता की निरंतरता का प्रमाण है।

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प्रश्न 20. हड़प्पा सभ्यता में मंदिरों के अस्तित्व के बारे में क्या सही है?

(A) प्रत्येक नगर में एक मंदिर था
(B) धर्म के अभिन्न अंग के रूप में मंदिरों के होने के कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले
(C) केवल मोहनजोदड़ो में मंदिर के अवशेष मिले हैं
(D) हड़प्पा में तीन मंदिरों के अवशेष मिले हैं

उत्तर: (B) धर्म के अभिन्न अंग के रूप में मंदिरों के होने के कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले

📝 हड़प्पा सभ्यता में धर्म के अभिन्न अंग के रूप में मंदिरों के होने के कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं, जबकि समकालीन मेसोपोटामिया के उत्खननों में इस तरह के अनेक निश्चित व महत्वपूर्ण अवशेष मिले हैं। हड़प्पावासी मातृदेवी, पशुपति शिव, लिंग-योनि, वृक्ष और नाग की पूजा करते थे, परंतु मंदिर के रूप में कोई स्पष्ट भवन नहीं मिला। यह तथ्य UPSC 2006 सहित अनेक परीक्षाओं में पूछा गया है।

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प्रश्न 21. हड़प्पावासियों के अंतिम संस्कार की तीन विधियों में सर्वाधिक प्रचलित कौन-सी थी?

(A) दाह संस्कार
(B) आंशिक समाधिकरण
(C) पूर्ण समाधिकरण
(D) जल में प्रवाह

उत्तर: (C) पूर्ण समाधिकरण

📝 हड़प्पावासी अपने मृतकों के साथ तीन प्रकार के अंतिम संस्कार करते थे — (1) पूर्ण समाधिकरण: शव के सिर को उत्तर और पैर को दक्षिण दिशा में रखकर दफनाना (2) आंशिक समाधिकरण: शव को खुले आसमान के नीचे छोड़ देना, जानवरों के खाने के बाद अवशिष्ट अस्थियों को दफनाना (3) दाह संस्कार: शव को जलाना। इन तीनों में से पूर्ण समाधिकरण सर्वाधिक प्रचलित था। यह UPSC, BPSC, UPPCS में अनेक बार पूछा गया है।

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प्रश्न 22. पूर्ण समाधिकरण में शव को किस दिशा में रखकर दफनाया जाता था?

(A) सिर पूर्व, पैर पश्चिम
(B) सिर उत्तर, पैर दक्षिण
(C) सिर दक्षिण, पैर उत्तर
(D) सिर पश्चिम, पैर पूर्व

उत्तर: (B) सिर उत्तर, पैर दक्षिण

📝 हड़प्पा सभ्यता में पूर्ण समाधिकरण (Complete Burial) की विधि में शव के सिर को उत्तर दिशा में तथा पैर को दक्षिण दिशा में रखकर दफनाया जाता था। यह सर्वाधिक प्रचलित अंतिम संस्कार पद्धति थी। इसके अलावा आंशिक समाधिकरण में शव को खुले आकाश में छोड़ा जाता था, जहाँ चील, कौआ, गिद्ध आदि उसे खाते थे और बाद में अवशिष्ट को दफनाया जाता था। तीसरी विधि दाह संस्कार थी। यह तथ्य अनेक प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछा जाता है।

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प्रश्न 23. ‘युग्म शवाधान (Joint Burial) या मम्मी’ के साक्ष्य किन हड़प्पाई स्थलों से मिले हैं?

(A) हड़प्पा और मोहनजोदड़ो से
(B) लोथल और कालीबंगा से
(C) धौलावीरा और बणावली से
(D) रोपड़ और चन्हुदड़ो से

उत्तर: (B) लोथल और कालीबंगा से

📝 युग्म शवाधान (Joint Burial) या मम्मी के साक्ष्य लोथल और कालीबंगा दोनों से मिले हैं। लोथल के एक कब्रिस्तान (Graveyard) में बकरी की हड्डी के साक्ष्य भी मिले हैं, जबकि रोपड़ में मालिक के शव के साथ कुत्ते को भी दफन किए जाने के साक्ष्य मिले हैं। उल्लेखनीय है कि ऐसे ही साक्ष्य कश्मीर के नवपाषाणकालीन (Neolithic Age) बस्ती बुर्जाहोम से भी प्राप्त हुए हैं। यह तथ्य परीक्षाओं में मिलान के रूप में पूछा जाता है।

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प्रश्न 24. रोपड़ से प्राप्त विशेष साक्ष्य क्या है?

(A) यहाँ से विशाल स्नानागार मिला है
(B) एक कब्र में मालिक के शव के साथ कुत्ते को भी दफनाया गया था
(C) यहाँ से कांसे की नर्तकी मिली है
(D) यहाँ से मिट्टी का हल मिला है

उत्तर: (B) एक कब्र में मालिक के शव के साथ कुत्ते को भी दफनाया गया था

📝 रोपड़ भारत के पंजाब प्रांत के रूपनगर जिले में सतलज नदी के बायें तट पर स्थित है। यह आजादी के बाद भारत में खोजा जाने वाला प्रथम हड़प्पाई पुरास्थल है (उत्खनन: 1953, यज्ञदत्त शर्मा)। यहाँ से एक कब्र में मालिक के शव के साथ कुत्ते को भी दफनाया गया था। उल्लेखनीय है कि ऐसा ही साक्ष्य कश्मीर के नवपाषाण कालीन बस्ती बुर्जाहोम से भी मिला है — यह समानता इन दोनों संस्कृतियों के बीच संबंध का संकेत देती है।

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प्रश्न 25. ‘मलेरिया’ के साक्ष्य किस हड़प्पाई स्थल से मिले हैं?

(A) हड़प्पा से
(B) लोथल से
(C) मोहनजोदड़ो से
(D) कालीबंगा से

उत्तर: (C) मोहनजोदड़ो से

📝 मलेरिया के साक्ष्य मोहनजोदड़ो से मिले हैं। हड़प्पा सभ्यता के पतन के कारणों में कैनेडी ने ‘मलेरिया’ को एक कारण बताया है। मोहनजोदड़ो से मलेरिया के साक्ष्य मिलना इस बात का प्रमाण है कि इस महामारी ने नगर की जनसंख्या को प्रभावित किया होगा। हड़प्पा सभ्यता के पतन के कारणों में आर्यों का आक्रमण (व्हीलर), प्रशासनिक शिथिलता (जॉन मार्शल), जलवायविक परिवर्तन (ऑरेल स्टाइन), मलेरिया (कैनेडी), भूतात्विक परिवर्तन (डेल्स) और बाढ़ (मैके) शामिल हैं।
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