चारों वेद MCQs: ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के महत्वपूर्ण सवाल (UPSC/SSC)

ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद की जानकारी और MCQs

प्राचीन भारत का इतिहास भाग-12 MCQ-2026

चारों वेद MCQs: ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के महत्वपूर्ण सवाल (UPSC/SSC)

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प्रश्न 1. ऋग्वेद मूलतः किसका संकलन है?

(A) यज्ञ विधियों का
(B) विभिन्न देवताओं की स्तुति में गाये गये मंत्रों का
(C) जादू-मंत्र और औषधियों का
(D) दार्शनिक विचारों का

उत्तर: (B) विभिन्न देवताओं की स्तुति में गाये गये मंत्रों का

ऋग्वेद (Rigveda) विविध देवताओं की स्तुति में गाये गये मंत्रों का संकलन है। इसमें इंद्र, अग्नि, वरुण, सोम, मित्र, द्यौस, पृथ्वी, सविता आदि देवताओं की स्तुतियाँ शामिल हैं। इंद्र प्रमुख देवता थे और उनकी स्तुति में लगभग 250 सूक्त हैं। ऋग्वेद को विश्व का सबसे प्राचीन लिखित ग्रंथ माना जाता है और इसकी रचना 1500-1200 ई.पू. के बीच हुई। इसे UNESCO विश्व धरोहर सूची में भी शामिल किया गया है। यह जानकारी प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछी जाती है।
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प्रश्न 2. आरण्यक ग्रंथ किस रूप में लिखे गये हैं?

(A) केवल पद्य में
(B) केवल गद्य में
(C) गद्य और पद्य दोनों में
(D) केवल संगीत रूप में

उत्तर: (C) गद्य और पद्य दोनों में

आरण्यक ग्रंथ (Aranyakas) गद्य और पद्य दोनों में लिखे गये हैं, जो इन्हें ब्राह्मण साहित्य (केवल गद्य) से अलग बनाता है। ‘आरण्यक’ शब्द ‘अरण्य’ (वन) से आया है और ये ग्रंथ वनों में रहकर पढ़े और लिखे जाते थे। इसमें यज्ञ विधि की दार्शनिक व्याख्या मिलती है। प्रमुख आरण्यक हैं — ऐतरेय (ऋग्वेद), शांखायन (ऋग्वेद), तैत्तिरीय (कृष्ण यजुर्वेद), बृहदारण्यक (शुक्ल यजुर्वेद)। यह ग्रंथ ब्राह्मण और उपनिषद के बीच की कड़ी हैं, जहाँ कर्मकांड से दर्शन की ओर विचार बढ़ता है।
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प्रश्न 3. उपनिषदों का प्रतिपाद्य (मुख्य) विषय क्या है?

(A) यज्ञ विधि और कर्मकांड
(B) ब्रह्म, दर्शन और अध्यात्म
(C) देवताओं की स्तुति
(D) जादू-मंत्र और टोना-टोटका

उत्तर: (B) ब्रह्म, दर्शन और अध्यात्म

उपनिषद (Upanishads) का मुख्य विषय ब्रह्म, दर्शन और अध्यात्म है। इनमें आत्मा (Atman) और परमात्मा (Brahman) के संबंध पर गहन विचार किया गया है। उपनिषदों में जगत की उत्पत्ति, जीव का स्वरूप और मोक्ष के मार्ग पर चिंतन मिलता है। प्रसिद्ध महावाक्य जैसे “अहं ब्रह्मास्मि” (मैं ही ब्रह्म हूँ) और “तत्त्वमसि” (वह तुम हो) इन्हीं की देन हैं। उपनिषद् वेदांत दर्शन का आधार हैं और इन्हें बाद में आदि शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत के रूप में व्यवस्थित किया। कुल संख्या 108 मानी जाती है।
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प्रश्न 4. ऋग्वेद का नवम् मण्डल किस देवता को समर्पित है?

(A) इंद्र
(B) अग्नि
(C) सोम
(D) वरुण

उत्तर: (C) सोम

ऋग्वेद का नवम् मण्डल (9th Mandala of Rigveda) सोम देवता को समर्पित है। सोम एक दिव्य पेय था जिसे यज्ञों में देवताओं को अर्पित किया जाता था और इसे प्रिय पेय माना जाता था। इसी मण्डल में कवि अंगिरस का प्रसिद्ध कथन मिलता है: “मैं कवि हूँ, मेरे पिता वैद्य हैं और माता आटा पीसने वाली हैं।” सोम को देवता के रूप में पूजा भी गया। नवम् मण्डल को ‘सोम मण्डल’ कहा जाता है। परीक्षाओं में मण्डल और उनके विषय अक्सर पूछे जाते हैं।
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प्रश्न 5. वैदिक काल के इतिहास की जानकारी मुख्यतः किस साहित्य से प्राप्त होती है?

(A) पुराण साहित्य से
(B) वैदिक साहित्य से
(C) बौद्ध साहित्य से
(D) जैन साहित्य से

उत्तर: (B) वैदिक साहित्य से

वैदिक काल का इतिहास वैदिक साहित्य से प्राप्त होता है, इसलिए इसे ‘वैदिक युग’ कहा जाता है। वैदिक साहित्य में वेद, ब्राह्मण, आरण्यक और उपनिषद् शामिल हैं। पूर्व वैदिक काल (1500-1000 ई.पू.) की जानकारी मुख्यतः ऋग्वेद से और उत्तर वैदिक काल (1000-600 ई.पू.) की जानकारी सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद और अन्य ग्रंथों से मिलती है। यह साहित्य आर्यों की भाषा, समाज, धर्म, राजनीति और अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण जानकारी देता है। इसे भारतीय इतिहास का सबसे प्राचीन लिखित स्रोत माना जाता है।
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प्रश्न 6. पद्यात्मक वेदों का गद्यात्मक विश्लेषण किस साहित्य में मिलता है?

(A) आरण्यक साहित्य में
(B) उपनिषद् साहित्य में
(C) ब्राह्मण साहित्य में
(D) संहिता साहित्य में

उत्तर: (C) ब्राह्मण साहित्य में

पद्यात्मक वेदों का गद्यात्मक विश्लेषण ब्राह्मण साहित्य में मिलता है। ये ग्रंथ पूर्णतः गद्य में हैं और वेद मंत्रों की व्याख्या और यज्ञ विधि का विस्तृत विवरण देते हैं। प्रत्येक वेद का अपना ब्राह्मण ग्रंथ है — ऋग्वेद का ऐतरेय ब्राह्मण, सामवेद का पंचविश ब्राह्मण, यजुर्वेद का शतपथ ब्राह्मण, और अथर्ववेद का गोपथ ब्राह्मणशतपथ ब्राह्मण सबसे बड़ा है, जिसमें 100 अध्याय हैं और इसमें राजा परीक्षित और जनमेजय का उल्लेख है। यह वैदिक साहित्य का महत्वपूर्ण तथ्य है।
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प्रश्न 7. वैदिक साहित्य में सर्वाधिक प्राचीन ग्रंथ कौन सा है?

(A) अथर्ववेद
(B) उपनिषद्
(C) ऋग्वेद
(D) यजुर्वेद

उत्तर: (C) ऋग्वेद

ऋग्वेद (Rigveda) न केवल वैदिक साहित्य का बल्कि विश्व का सबसे प्राचीन ग्रंथ माना जाता है। इसकी रचना लगभग 1500-1200 ई.पू. के बीच हुई। मण्डल 2 से 7 इसके सर्वाधिक प्राचीन भाग हैं। पूर्व वैदिक काल (ऋग्वैदिक काल) की जानकारी मुख्यतः ऋग्वेद से मिलती है। UNESCO ने 2007 में इसकी पांडुलिपियों को ‘Memory of the World’ सूची में शामिल किया। इसे ‘सुरों की माता’ भी कहा जाता है और यह भारतीय ज्ञान परंपरा का आधारभूत स्तंभ है।
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प्रश्न 8. ऋग्वेद का पुरोहित कौन होता था?

(A) उद्गाता
(B) अध्वर्यु
(C) होता या होतृ
(D) ब्रह्मा

उत्तर: (C) होता या होतृ

ऋग्वेद का पुरोहित ‘होता’ या ‘होतृ’ कहलाता था। यज्ञों में होता ऋग्वेद के मंत्रों का पाठ करता था। सामवेद का पुरोहित उद्गाता, यजुर्वेद का अध्वर्यु और अथर्ववेद का ब्रह्मा होता था। ब्रह्मा यज्ञ का निरीक्षण करता और इसे सही ढंग से संपन्न करवाता था। ये चारों पुरोहित मिलकर वैदिक यज्ञ को पूरा करते थे। यह व्यवस्था वेदों और यज्ञों के संचालन में महत्वपूर्ण थी और वैदिक काल के धार्मिक ज्ञान का आधार बनती थी।

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प्रश्न 9. सामवेद का पुरोहित कौन होता था?

(A) होता
(B) उद्गाता
(C) अध्वर्यु
(D) ब्रह्मा

उत्तर: (B) उद्गाता

सामवेद का पुरोहित ‘उद्गाता’ (Udgatri) कहलाता था। उद्गाता यज्ञों में सामगान गाता था। सोम यज्ञ में इसकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती थी। सामवेद के मंत्र विशेष धुनों में गाए जाते थे। इसी कारण भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा का उद्भव माना जाता है। उद्गाता की परंपरा वैदिक यज्ञ और संगीत दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण थी और आज भी इसे सांस्कृतिक इतिहास में प्रमुख माना जाता है।
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प्रश्न 10. यजुर्वेद का पुरोहित कौन होता था?

(A) होता
(B) उद्गाता
(C) अध्वर्यु
(D) ब्रह्मा

उत्तर: (C) अध्वर्यु

यजुर्वेद का पुरोहित ‘अध्वर्यु’ (Adhavaryu) कहलाता था। अध्वर्यु यज्ञ की सभी व्यावहारिक क्रियाएँ जैसे — हवि डालना, यज्ञकुंड बनाना आदि संपन्न कराता था। यजुर्वेद में विभिन्न प्रकार के यज्ञों की विधियाँ वर्णित हैं। अध्वर्यु इन्हीं विधियों का पालन करते हुए यज्ञ कार्य संचालित करता था। यह पद वैदिक यज्ञों के संचालन और यज्ञ कर्मकांड में अत्यंत महत्वपूर्ण था।
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प्रश्न 11. अथर्ववेद का पुरोहित कौन होता था?

(A) होता
(B) उद्गाता
(C) अध्वर्यु
(D) ब्रह्मा

उत्तर: (D) ब्रह्मा

अथर्ववेद का पुरोहित ‘ब्रह्मा’ कहलाता था। ब्रह्मा यज्ञ का निरीक्षणकर्ता होता था। वह यज्ञ में होने वाली गलतियों को सुधारता और समग्र अनुष्ठान पर नजर रखता था। ब्रह्मा को चारों वेदों का ज्ञान होना आवश्यक था, क्योंकि उसे पूरे यज्ञ का संचालन करना होता था। यह पद वैदिक यज्ञ की सही और सुरक्षित प्रक्रिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था।

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प्रश्न 12. ऋग्वेद का उपवेद कौन सा है?

(A) गांधर्ववेद
(B) धनुर्वेद
(C) आयुर्वेद
(D) शिल्पवेद

उत्तर: (C) आयुर्वेद

आयुर्वेद को ऋग्वेद का उपवेद माना जाता है। इसके संकलनकर्ता प्रजापत्य माने जाते हैं। हालांकि कुछ ग्रंथों जैसे सुश्रुत के अनुसार आयुर्वेद अथर्ववेद का उपवेद है। चरक ने लिखा कि चिकित्सक को अथर्ववेद के प्रति अधिक भक्ति दिखानी चाहिए। परीक्षाओं में इस विषय पर दोनों मत याद रखना आवश्यक है। यह उपवेद चिकित्सा और स्वास्थ्य विज्ञान से संबंधित है।

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प्रश्न 13. सामवेद का उपवेद कौन सा है?

(A) आयुर्वेद
(B) धनुर्वेद
(C) गांधर्ववेद
(D) शिल्पवेद

उत्तर: (C) गांधर्ववेद

सामवेद का उपवेद ‘गांधर्ववेद’ है। इसके संकलनकर्ता नारद माने जाते हैं। गांधर्ववेद में संगीत, नृत्य और नाट्यकला का ज्ञान है। चूँकि सामवेद स्वयं संगीतात्मक है, इसलिए इसका उपवेद गांधर्ववेद (संगीत-शास्त्र) बना। नारद को भारतीय संगीत का आदि आचार्य माना जाता है। यह उपवेद संगीत और कला की प्राचीन वैदिक परंपरा का आधार है।

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प्रश्न 14. यजुर्वेद का उपवेद कौन सा है?

(A) आयुर्वेद
(B) गांधर्ववेद
(C) शिल्पवेद
(D) धनुर्वेद

उत्तर: (D) धनुर्वेद

यजुर्वेद का उपवेद ‘धनुर्वेद’ है। इसके संकलनकर्ता विश्वामित्र माने जाते हैं। धनुर्वेद में युद्धकला, अस्त्र-शस्त्र विद्या और सैन्य विज्ञान का ज्ञान है। यजुर्वेद में यज्ञ और कर्मकांड का विवरण है, इसलिए इसका उपवेद क्रिया-प्रधान विद्या यानी युद्धकला बना। यह उपवेद वैदिक युद्धकला और रणनीति का प्रमुख स्रोत है।

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प्रश्न 15. अथर्ववेद का उपवेद कौन सा है?

(A) आयुर्वेद
(B) गांधर्ववेद
(C) धनुर्वेद
(D) शिल्पवेद

उत्तर: (D) शिल्पवेद

अथर्ववेद का उपवेद ‘शिल्पवेद’ है। इसके संकलनकर्ता विश्वकर्मा माने जाते हैं। शिल्पवेद में वास्तुकला, मूर्तिकला, शिल्पकारी और निर्माण कला का ज्ञान है। विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पी माना जाता है। शिल्पवेद भारतीय कला और स्थापत्य की प्राचीन परंपरा का आधार है और यह वैदिक समय की सृजनात्मक विद्या को दर्शाता है।

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प्रश्न 16. गांधर्ववेद के संकलनकर्ता कौन माने जाते हैं?

(A) विश्वामित्र
(B) विश्वकर्मा
(C) नारद
(D) प्रजापत्य

उत्तर: (C) नारद

गांधर्ववेद के संकलनकर्ता देवर्षि नारद माने जाते हैं। नारद को भारतीय पुराणों में संगीत के देवता और ईश्वर के भक्त के रूप में प्रसिद्ध माना गया है। गांधर्ववेद सामवेद का उपवेद है और इसमें संगीत, नृत्य एवं नाट्यकला का विस्तृत ज्ञान है। नारद की वीणा भारतीय संगीत परंपरा की प्रमुख प्रतीक मानी जाती है।

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प्रश्न 17. धनुर्वेद के संकलनकर्ता कौन माने जाते हैं?

(A) नारद
(B) विश्वकर्मा
(C) विश्वामित्र
(D) प्रजापत्य

उत्तर: (C) विश्वामित्र

धनुर्वेद के संकलनकर्ता ऋषि विश्वामित्र माने जाते हैं। विश्वामित्र एक महान ऋषि थे जो क्षत्रिय से ब्राह्मण बने। उन्होंने ऋग्वेद का तृतीय मण्डल रचा और राम व लक्ष्मण को युद्धकला की शिक्षा दी। धनुर्वेद यजुर्वेद का उपवेद है और इसमें युद्धकला और सैन्य विज्ञान का ज्ञान मिलता है।

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प्रश्न 18. शिल्पवेद के संकलनकर्ता कौन माने जाते हैं?

(A) नारद
(B) विश्वामित्र
(C) विश्वकर्मा
(D) प्रजापत्य

उत्तर: (C) विश्वकर्मा

शिल्पवेद के संकलनकर्ता विश्वकर्मा माने जाते हैं। उन्हें देवताओं का दिव्य शिल्पी कहा जाता है। शिल्पवेद में वास्तुकला, भवन निर्माण, मूर्तिकला और यंत्र-निर्माण का ज्ञान है। यह अथर्ववेद का उपवेद है और भारतीय स्थापत्यकला और मंदिर निर्माण की प्राचीन परंपरा इसी पर आधारित मानी जाती है।

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प्रश्न 19. ऋग्वेद में पत्नी को किस रूप में सम्मानित किया गया है?

(A) ‘गृहलक्ष्मी’
(B) ‘जायेदस्तम्’ (पत्नी ही गृह है)
(C) ‘अर्धांगिनी’
(D) ‘गृहस्वामिनी’

उत्तर: (B) ‘जायेदस्तम्’ (पत्नी ही गृह है)

ऋग्वेद में पत्नी को ‘जायेदस्तम्’ कहा गया है, जिसका अर्थ है — पत्नी ही गृह है। इससे स्पष्ट होता है कि ऋग्वैदिक काल में स्त्रियों को अत्यंत सम्मानजनक स्थान प्राप्त था। परिवार और घर की संपूर्ण धुरी पत्नी को माना जाता था। यह उद्धरण प्राचीन भारत में नारी की उच्च सामाजिक स्थिति का प्रमाण है।

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प्रश्न 20. ऋग्वेद के किस मण्डल में यह उल्लेख है कि अश्विनी ने मनु को हल चलाना सिखाया?

(A) तृतीय मण्डल
(B) सप्तम मण्डल
(C) प्रथम मण्डल
(D) दशम् मण्डल

उत्तर: (C) प्रथम मण्डल

ऋग्वेद के प्रथम मण्डल में उल्लेख है कि अश्विनी देवताओं ने मनु को हल चलाना सिखाया। अश्विनी कुमार वैदिक काल के चिकित्सा और कृषि से जुड़े देवता माने जाते हैं। यह तथ्य प्राचीन भारत में कृषि के उद्भव से जुड़ा महत्वपूर्ण पौराणिक साक्ष्य है। यह UPSC और राज्य PSC परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है।

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प्रश्न 21. प्रसिद्ध ‘दाशराज्ञ युद्ध’ (दस राजाओं का युद्ध) का वर्णन ऋग्वेद के किस मण्डल में है?

(A) प्रथम मण्डल
(B) तृतीय मण्डल
(C) सप्तम मण्डल
(D) दशम् मण्डल

उत्तर: (C) सप्तम मण्डल

ऋग्वेद के सप्तम मण्डल में ‘दाशराज्ञ युद्ध’ (दस राजाओं का युद्ध) का वर्णन है। यह युद्ध परुष्णी (रावी) नदी के तट पर भरत राजा सुदास और दस राजाओं के गठबंधन के बीच हुआ था। सुदास विजयी हुआ। यह ऋग्वैदिक काल की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना मानी जाती है। सप्तम मण्डल को वशिष्ठ ऋषि द्वारा रचित माना जाता है।

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प्रश्न 22. चारों वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र) का एक साथ उल्लेख सर्वप्रथम कहाँ मिलता है?

(A) ऋग्वेद के सप्तम मण्डल के ‘नासदीय सूक्त’ में
(B) ऋग्वेद के दशम् मण्डल के ‘पुरुष सूक्त’ में
(C) अथर्ववेद के ‘पृथ्वी सूक्त’ में
(D) यजुर्वेद के ‘ईशोपनिषद्’ में

उत्तर: (B) ऋग्वेद के दशम् मण्डल के ‘पुरुष सूक्त’ में

ऋग्वेद के दशम् मण्डल के ‘पुरुष सूक्त’ में पहली बार चारों वर्ण का एक साथ उल्लेख मिलता है। इसमें कहा गया है कि विराट पुरुष के मुख से ब्राह्मण, भुजाओं से क्षत्रिय, जंघाओं से वैश्य और पैरों से शूद्र उत्पन्न हुए। यह दशम मण्डल परवर्ती काल का है और वर्ण-व्यवस्था का महत्वपूर्ण वैदिक साक्ष्य प्रदान करता है।

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प्रश्न 23. ऋग्वेद के नवम् मण्डल में कुल कितने सूक्त हैं और वे किस देवता को समर्पित हैं?

(A) 100 सूक्त — इंद्र को
(B) 144 सूक्त — सोम देवता को
(C) 120 सूक्त — अग्नि को
(D) 200 सूक्त — वरुण को

उत्तर: (B) 144 सूक्त — सोम देवता को

ऋग्वेद के नवम् मण्डल में कुल 144 सूक्त सोम देवता को समर्पित हैं। इसलिए इसे ‘सोम मण्डल’ भी कहा जाता है। सोम एक दिव्य पेय था जिसे यज्ञों में देवताओं को अर्पित किया जाता था और इसे वनस्पति और चंद्रमा से भी जोड़ा गया है। यह तथ्य UPSC और BPSC परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है।

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प्रश्न 24. यजुर्वेद में किस अनाज की पाँच किस्मों का उल्लेख मिलता है?

(A) गेहूँ
(B) जौ
(C) चावल
(D) बाजरा

उत्तर: (C) चावल

यजुर्वेद में चावल की पाँच किस्में का उल्लेख मिलता है। इनमें ‘महाव्रीहि’ नामक चावल को सबसे उत्तम गुणवत्ता वाला माना गया था। यह तथ्य उत्तर वैदिक काल में कृषि के विकास और धान की खेती की प्रगति का प्रमाण है। उस समय गंगा-यमुना दोआब में कृषि का विस्तार हुआ था, जहाँ धान की खेती विशेष रूप से उपयुक्त थी।

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प्रश्न 25. यजुर्वेद में सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले चावल का क्या नाम बताया गया है?

(A) बासमती
(B) शालि
(C) महाव्रीहि
(D) व्रीहि

उत्तर: (C) महाव्रीहि

यजुर्वेद में चावल की पाँच किस्मों में ‘महाव्रीहि’ को सबसे उत्तम गुणवत्ता वाला बताया गया है। ‘व्रीहि’ संस्कृत में चावल का नाम है और ‘महाव्रीहि’ का अर्थ है — महान या श्रेष्ठ चावल। यह तथ्य उत्तर वैदिक काल में कृषि विज्ञान के विकास और विभिन्न फसलों की पहचान का प्रमाण है। यह SSC और UPSC में अक्सर पूछा जाने वाला रोचक तथ्य है।

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