
प्राचीन भारत का इतिहास भाग-11 MCQ-2026
वेद और उपनिषद के 25 Most Expected MCQs | सभी परीक्षाओं के लिए
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प्रश्न 1. चारों वेदों में सबसे कम ऐतिहासिक महत्व किस वेद का है?
(A) ऋग्वेद
(B) यजुर्वेद
(C) सामवेद
(D) अथर्ववेद
✅ उत्तर: (C) सामवेद
चारों वेदों में सामवेद का ऐतिहासिक महत्व सबसे कम माना जाता है। इसके 1549 मंत्रों में केवल 75 मंत्र ही नए और मौलिक हैं, जबकि शेष 1474 मंत्र ऋग्वेद से लिए गए हैं। इसलिए, सामवेद में नई ऐतिहासिक जानकारी बहुत कम है और यह इतिहास लेखन में सीमित भूमिका निभाता है। हालांकि, सामवेद के मंत्र गाने योग्य हैं और इन्हें सामगान कहा जाता है। इसी कारण इसे भारतीय शास्त्रीय संगीत का आधार ग्रंथ माना जाता है। सामवेद का यह संगीत और सांस्कृतिक महत्व इसे UPSC, SSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।
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प्रश्न 2. सामवेद में कुल कितने मंत्र हैं और उनमें से कितने मौलिक हैं?
(A) 1549 मंत्र, 75 मौलिक
(B) 1017 मंत्र, 100 मौलिक
(C) 1028 मंत्र, 28 मौलिक
(D) 1200 मंत्र, 50 मौलिक
✅ उत्तर: (A) 1549 मंत्र, 75 मौलिक
सामवेद में कुल 1549 मंत्र हैं, जिनमें से केवल 75 मंत्र ही इसके मौलिक मंत्र हैं। शेष 1474 मंत्र ऋग्वेद से लिए गए हैं। ये सभी मंत्र गायन योग्य रूप में संकलित किए गए हैं और इनका गान यज्ञों में ‘उद्गाता’ नामक पुरोहित द्वारा किया जाता था। ‘साम’ शब्द का अर्थ संगीत है। इसी कारण, सामवेद को भारतीय शास्त्रीय संगीत का आदि स्रोत माना जाता है और इसे मूलभूत ग्रंथ कहा जाता है। यह तथ्य प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है।
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प्रश्न 3. सामवेद के मंत्रों का गायन किस पुरोहित द्वारा किया जाता था?
(A) होता
(B) उद्गाता
(C) अध्वर्यु
(D) ब्रह्मा
✅ उत्तर: (B) उद्गाता
सामवेद के मंत्रों का गायन ‘उद्गाता’ नामक पुरोहित द्वारा किया जाता था। वैदिक यज्ञों में विभिन्न पुरोहितों की अलग-अलग भूमिकाएँ थीं। उदाहरण के लिए, ऋग्वेद के मंत्रों का पाठ होता करता था, यजुर्वेद के मंत्रों का पाठ अध्वर्यु करता था, और अथर्ववेद का पुरोहित ब्रह्मा कहलाता था। उद्गाता सामगान में विशेष निपुण होता था। ये सभी पुरोहितों के नाम प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं और इन्हें आपस में मिलाकर भ्रामक प्रश्न बनाए जाते हैं।
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प्रश्न 4. ‘साम’ शब्द का अर्थ क्या है?
(A) यज्ञ
(B) संगीत
(C) ज्ञान
(D) देवता
✅ उत्तर: (B) संगीत
‘साम’ शब्द का अर्थ संगीत होता है। सामवेद में उन मंत्रों का संकलन है जिन्हें गाया जा सकता है। यही कारण है कि सामवेद को भारतीय शास्त्रीय संगीत का मूलभूत आधार ग्रंथ माना जाता है। वर्तमान भारतीय शास्त्रीय संगीत की रागों और तालों की व्यवस्था की जड़ें सामवेद से जुड़ी मानी जाती हैं। भगवद्गीता में भगवान कृष्ण ने कहा है — “वेदानाम् सामवेदोऽस्मि“, अर्थात् वेदों में मैं सामवेद हूँ। इससे सामवेद का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह तथ्य प्रतियोगी परीक्षाओं में आधारभूत प्रश्न के रूप में पूछा जाता है।
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प्रश्न 5. वर्तमान भारतीय शास्त्रीय संगीत का मूलभूत ग्रंथ कौन सा वेद माना जाता है?
(A) ऋग्वेद
(B) सामवेद
(C) यजुर्वेद
(D) अथर्ववेद
✅ उत्तर: (B) सामवेद
वर्तमान भारतीय शास्त्रीय संगीत का मूलभूत ग्रंथ सामवेद को माना जाता है। ‘साम’ का अर्थ संगीत है और इस वेद में गाने योग्य मंत्रों का संकलन है। भारतीय संगीत की सप्तस्वर परंपरा (सा, रे, ग, म, प, ध, नि) की उत्पत्ति सामवेद से मानी जाती है। इसी कारण सामगान को भारतीय संगीत का जनक कहा जाता है। उद्गाता पुरोहित सामगान में विशेष निपुण होता था। भगवद्गीता में भगवान कृष्ण ने स्वयं को वेदों में सामवेद कहा है। यह सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रश्न है।
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प्रश्न 6. ‘यजुर्वेद’ शब्द किस शब्द से निकला है और इसका अर्थ क्या है?
(A) ‘यज्ञ’ — देवता
(B) ‘यजुष’ — यज्ञ
(C) ‘यजु’ — ज्ञान
(D) ‘यज’ — अग्नि
✅ उत्तर: (B) ‘यजुष’ — यज्ञ
‘यजुर्वेद’ शब्द ‘यजुष’ शब्द से निकला है, जिसका तात्पर्य यज्ञ होता है। इस वेद में यज्ञ संबंधी विधियाँ, नियम और मंत्र का विस्तार से वर्णन किया गया है। यजुर्वेद के दो प्रमुख भाग हैं — कृष्ण यजुर्वेद (तैत्तिरीय संहिता) और शुक्ल यजुर्वेद (वाजसनेयी संहिता)। यजुर्वेद का पुरोहित ‘अध्वर्यु’ कहलाता था, जो यज्ञ की सभी क्रियाएँ संपन्न कराता था। यजुर्वेद गद्य और पद्य दोनों में लिखा गया है, जो इसे अन्य वेदों से अलग बनाता है।
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प्रश्न 7. यजुर्वेद का अंतिम अध्याय क्या कहलाता है?
(A) मुण्डकोपनिषद्
(B) कठोपनिषद्
(C) ईशोपनिषद्
(D) छांदोग्योपनिषद्
✅ उत्तर: (C) ईशोपनिषद्
यजुर्वेद‘ईशोपनिषद्’ (ईशावास्योपनिषद्) कहलाता है। यह उपनिषदों में सबसे छोटा और सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसमें 18 श्लोक हैं। महात्मा गांधी ने इसे उपनिषदों में सर्वश्रेष्ठ बताया था। ईशोपनिषद् में परमात्मा की सर्वव्यापकता, कर्म और ज्ञान के समन्वय पर जोर दिया गया है। ‘ईश’ का अर्थ परमेश्वर है और इस उपनिषद् में परमात्मा की सर्वव्यापकता का उपदेश दिया गया है। यह UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में महत्वपूर्ण है।
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प्रश्न 8. गीता में उल्लिखित ‘निष्काम कर्म’ का सर्वप्रथम उल्लेख किस ग्रंथ में मिलता है?
(A) ऋग्वेद
(B) अथर्ववेद
(C) यजुर्वेद
(D) उपनिषद्
✅ उत्तर: (C) यजुर्वेद
गीता में जिस ‘निष्काम कर्म’ (फल की इच्छा किए बिना कर्म करना) का उल्लेख मिलता है, उसका सर्वप्रथम उल्लेख यजुर्वेद में हुआ है। निष्काम कर्म का सिद्धांत कहता है कि मनुष्य को अपना कर्तव्य करते रहना चाहिए और फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। यही नीति भारतीय दर्शन का मूल आधार है। बाद में यह सिद्धांत भगवद्गीता में विस्तार से बताया गया। इस दार्शनिक अवधारणा की उत्पत्ति वैदिक साहित्य में हुई और यह तथ्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है।
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प्रश्न 9. अथर्ववेद में मुख्यतः किन विषयों का वर्णन है?
(A) देवस्तुति और यज्ञविधि
(B) जादू-मंत्र, टोना-टोटका और औषधि
(C) दर्शन और अध्यात्म
(D) इतिहास और भूगोल
✅ उत्तर: (B) जादू-मंत्र, टोना-टोटका और औषधि
अथर्ववेद में जादू-मंत्र (Spells), टोना-टोटका (Charms), रोगों के उपचार, औषधियाँ और जन-सामान्य के जीवन से जुड़ी बातें वर्णित हैं। इस वेद में लोक-जीवन और सामाजिक जीवन की झाँकी मिलती है। इसे ‘ब्रह्मवेद’ और ‘अथर्वाङ्गिरस वेद’ भी कहा जाता है। अथर्ववेद में राजनीति, चिकित्सा, जादू और प्रेम-मंत्र सभी का संकलन है। भारतीय चिकित्सा विज्ञान (आयुर्वेद) की जड़ें भी अथर्ववेद में मिलती हैं। इस वेद का सामाजिक इतिहास को समझने में विशेष महत्व है।
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प्रश्न 10. एकमात्र कौन सा वेद है जिसके अपने कोई आरण्यक ग्रंथ उपलब्ध नहीं हैं?
(A) ऋग्वेद
(B) सामवेद
(C) यजुर्वेद
(D) अथर्ववेद
✅ उत्तर: (D) अथर्ववेद
अथर्ववेद एकमात्र ऐसा वेद है जिसके अपने कोई आरण्यक ग्रंथ उपलब्ध नहीं हैं। अन्य तीन वेद — ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद के आरण्यक ग्रंथ उपलब्ध हैं। ऋग्वेद के आरण्यक हैं — ऐतरेय आरण्यक और शांखायन आरण्यक। अथर्ववेद का एकमात्र ब्राह्मण साहित्य ‘गोपथ ब्राह्मण’ है। यह अनुपलब्धता शायद इसलिए है क्योंकि अथर्ववेद की विषय-वस्तु लोक-जीवन से जुड़ी थी और इसे संन्यासी परंपरा में उतना महत्व नहीं दिया गया। यह तथ्य प्रतियोगी परीक्षाओं में महत्वपूर्ण है।
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प्रश्न 11. अथर्ववेद का एकमात्र ब्राह्मण साहित्य कौन सा है?
(A) ऐतरेय ब्राह्मण
(B) शतपथ ब्राह्मण
(C) गोपथ ब्राह्मण
(D) तैत्तिरीय ब्राह्मण
✅ उत्तर: (C) गोपथ ब्राह्मण
अथर्ववेद का एकमात्र ब्राह्मण साहित्य ‘गोपथ ब्राह्मण’ है। अन्य वेदों के ब्राह्मण साहित्य हैं: ऋग्वेद — ऐतरेय ब्राह्मण, कौषीतकी ब्राह्मण; सामवेद — पंचविश ब्राह्मण, जैमिनीय ब्राह्मण; यजुर्वेद — शतपथ ब्राह्मण, तैत्तिरीय ब्राह्मण। शतपथ ब्राह्मण सभी ब्राह्मण ग्रंथों में सबसे विशाल और महत्वपूर्ण माना जाता है। ब्राह्मण ग्रंथों में यज्ञ विधि और धार्मिक कर्मकांड का विस्तृत विवरण है। यह तथ्य UPSC और राज्य PSC परीक्षाओं में महत्वपूर्ण है।
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प्रश्न 12. भारत का आदर्श राष्ट्रीय वाक्य ‘सत्यमेव जयते’ किस उपनिषद् से लिया गया है?
(A) कठोपनिषद्
(B) मुण्डकोपनिषद्
(C) ईशोपनिषद्
(D) छांदोग्योपनिषद्
✅ उत्तर: (B) मुण्डकोपनिषद्
भारत का आदर्श राष्ट्रीय वाक्य ‘सत्यमेव जयते’ (सत्य की हमेशा विजय होती है) मुण्डकोपनिषद् से लिया गया है। यह उपनिषद् अथर्ववेद का उपनिषद् साहित्य है। ‘सत्यमेव जयते’ का अर्थ है — सत्य की ही हमेशा जीत होती है। इसे भारत के राष्ट्रीय चिह्न (अशोक स्तंभ) के नीचे अंकित किया गया है। यह वाक्य 26 जनवरी 1950 को भारतीय गणराज्य की स्थापना के साथ राष्ट्रीय आदर्श वाक्य बना। यह तथ्य लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछा जाता है।
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प्रश्न 13. ‘सत्यमेव जयते’ किस वेद का उपनिषद् साहित्य है?
(A) ऋग्वेद
(B) सामवेद
(C) यजुर्वेद
(D) अथर्ववेद
✅ उत्तर: (D) अथर्ववेद
‘सत्यमेव जयते’ मुण्डकोपनिषद् से लिया गया है और मुण्डकोपनिषद् अथर्ववेद का उपनिषद् साहित्य है। अथर्ववेद के प्रमुख उपनिषद् हैं — मुण्डकोपनिषद्, माण्डूक्योपनिषद् और प्रश्नोपनिषद्। यजुर्वेद के प्रमुख उपनिषद् हैं — कठोपनिषद्, ईशोपनिषद्, बृहदारण्यकोपनिषद्, तैत्तिरीयोपनिषद्। ऋग्वेद का प्रमुख उपनिषद् ऐतरेय और कौषीतकी है। सामवेद का प्रमुख उपनिषद् छांदोग्योपनिषद् और केनोपनिषद् है। यह जानकारी प्रतियोगी परीक्षाओं में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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प्रश्न 14. यम-नचिकेता संवाद किस उपनिषद् में मिलता है?
(A) मुण्डकोपनिषद्
(B) ईशोपनिषद्
(C) कठोपनिषद्
(D) छांदोग्योपनिषद्
✅ उत्तर: (C) कठोपनिषद्
यम-नचिकेता संवाद कठोपनिषद् में मिलता है। यह उपनिषद् यजुर्वेद का भाग है। इस संवाद में बालक नचिकेता मृत्यु के देवता यमराज के पास जाता है और मृत्यु के रहस्य को जानने की जिज्ञासा व्यक्त करता है। यम नचिकेता की जिज्ञासा और दृढ़ता से प्रभावित होकर उसे आत्मा और परमात्मा का ज्ञान दिया जाता है। यह संवाद भारतीय दर्शन में आत्मा की अमरता का सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली विवरण है। यह साहित्यिक और दार्शनिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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प्रश्न 15. कठोपनिषद् किस वेद का भाग है?
(A) ऋग्वेद
(B) सामवेद
(C) यजुर्वेद
(D) अथर्ववेद
✅ उत्तर: (C) यजुर्वेद
कठोपनिषद् यजुर्वेद का भाग है। इसे ‘कठवल्ली’ भी कहा जाता है। इसमें प्रसिद्ध यम-नचिकेता संवाद है, जो आत्मा की अमरता और मोक्ष के मार्ग को स्पष्ट करता है। कठोपनिषद् में ‘आत्मनं रथिनं विद्धि’ (आत्मा को रथी समझो) का प्रसिद्ध रूपक भी है, जिसमें शरीर को रथ, आत्मा को रथी, बुद्धि को सारथी और मन को लगाम बताया गया है। यह उपनिषद् दार्शनिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसकी जानकारी परीक्षाओं में बार-बार पूछी जाती है।
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प्रश्न 16. भक्ति का सर्वप्रथम उल्लेख किस उपनिषद् में मिलता है?
(A) कठोपनिषद्
(B) मुण्डकोपनिषद्
(C) श्वेताश्वेतर उपनिषद्
(D) ईशोपनिषद्
✅ उत्तर: (C) श्वेताश्वेतर उपनिषद्
भक्ति का सर्वप्रथम उल्लेख श्वेताश्वेतर उपनिषद् में मिलता है। यह उपनिषद् कृष्ण यजुर्वेद से संबंधित है। इसमें भगवान शिव को परमब्रह्म के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है और भक्ति को मोक्ष का मार्ग बताया गया है। ‘भक्ति’ की अवधारणा भारतीय धर्म और संस्कृति का मूल आधार है। भक्ति मार्ग बाद में रामानुज, माध्व और चैतन्य जैसे वैष्णव आचार्यों द्वारा विकसित हुआ। भक्ति की उत्पत्ति का यह वैदिक साक्ष्य UPSC और अन्य परीक्षाओं में पूछा जाता है।
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प्रश्न 17. गायत्री मंत्र ऋग्वेद के किस मण्डल से लिया गया है?
(A) पहले मण्डल से
(B) दूसरे मण्डल से
(C) तीसरे मण्डल से
(D) दसवें मण्डल से
✅ उत्तर: (C) तीसरे मण्डल से
प्रसिद्ध गायत्री मंत्र ऋग्वेद के तीसरे मण्डल से लिया गया है। यह मंत्र सूर्य देवता ‘सविता’ को समर्पित है, इसलिए इसे ‘सावित्री’ भी कहा जाता है। विश्वामित्र ऋषि द्वारा इसे रचित माना जाता है। यह मंत्र हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र मंत्रों में से एक है। उपनयन संस्कार में बालक को गायत्री मंत्र की दीक्षा दी जाती थी। इस मंत्र में सूर्य की दिव्य शक्ति से बुद्धि को प्रेरित करने की प्रार्थना की गई है। यह UPSC और अन्य परीक्षाओं में पूछे जाने वाला महत्वपूर्ण प्रश्न है।
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प्रश्न 18. गायत्री मंत्र किस देवता को समर्पित है?
(A) इंद्र
(B) सविता (सूर्य)
(C) वरुण
(D) अग्नि
✅ उत्तर: (B) सविता (सूर्य)
गायत्री मंत्र सूर्य देवता ‘सविता’ को समर्पित है। ‘सविता’ सूर्य का एक विशेष रूप है, जो सृजन और प्रेरणा का प्रतीक माना जाता है। गायत्री मंत्र में ‘सविता’ की दिव्य शक्ति से बुद्धि को प्रेरित करने की प्रार्थना की गई है। इस मंत्र का छंद ‘गायत्री’ है, इसलिए इसे ‘गायत्री मंत्र’ कहा जाता है। गायत्री छंद में आठ-आठ अक्षरों के तीन पाद होते हैं। हिंदू परंपरा में इसे वेद-माता और गायत्री देवी के रूप में पूजा जाता है।
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प्रश्न 19. मुण्डकोपनिषद् में यज्ञ की तुलना किससे की गई है?
(A) सोने की नाव से
(B) फुटी नाव से
(C) पत्थर से
(D) बादल से
✅ उत्तर: (B) फुटी नाव से
मुण्डकोपनिषद् में यज्ञ की तुलना ‘फुटी नाव’ से की गई है। कहा गया है कि “यज्ञ वह नौका है जिस पर सहज विश्वास नहीं किया जा सकता।” यह उपनिषद् यज्ञ-कर्मकांड की आलोचना करता है और ज्ञान और भक्ति को श्रेष्ठ मार्ग बताता है। यह उपनिषद्कालीन दार्शनिक क्रांति का प्रतीक है, जब कर्मकांड के स्थान पर ज्ञानमार्ग को प्रमुखता दी जाने लगी। मुण्डकोपनिषद् अथर्ववेद से संबंधित है और इसी में ‘सत्यमेव जयते’ का उल्लेख है। यह तथ्य परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है।
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प्रश्न 20. अथर्ववेद के ‘पृथ्वी सूक्त’ को क्या कहा जाता है?
(A) वैदिक राष्ट्रगान
(B) वैदिक राष्ट्रीय वाक्य
(C) वैदिक प्रार्थना
(D) वैदिक स्तोत्र
✅ उत्तर: (B) वैदिक राष्ट्रीय वाक्य
अथर्ववेद का ‘पृथ्वी सूक्त’ वैदिक राष्ट्रीय वाक्य कहलाता है। इसमें पहली बार मातृभूमि की अवधारणा आई है। इसमें कहा गया है — “माता भूमि: पुत्रोऽहम् पृथिव्याः” अर्थात् ‘पृथ्वी हमारी माता है और हम उसके पुत्र हैं।’ इस सूक्त में एक राष्ट्र की कल्पना की गई है। यह भावना आधुनिक राष्ट्रवाद की सबसे प्राचीन वैदिक अभिव्यक्ति मानी जाती है। ‘पृथ्वी सूक्त’ में कुल 63 मंत्र हैं। यह UPSC, UPPSC और अन्य परीक्षाओं में महत्वपूर्ण तथ्य है।
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प्रश्न 21. वैदिक साहित्य में ‘मातृभूमि’ की अवधारणा पहली बार कहाँ आई?
(A) ऋग्वेद में
(B) यजुर्वेद में
(C) अथर्ववेद के पृथ्वी सूक्त में
(D) कठोपनिषद् में
✅ उत्तर: (C) अथर्ववेद के पृथ्वी सूक्त में
वैदिक साहित्य में ‘मातृभूमि’ की अवधारणा पहली बार अथर्ववेद के ‘पृथ्वी सूक्त’ में आई है। इसमें कहा गया है — “माता भूमि: पुत्रोऽहम् पृथिव्याः” अर्थात् ‘पृथ्वी हमारी माता है।’ यह भारतीय संस्कृति में भूमि को माँ मानने की परंपरा का आदिस्रोत है। यही भावना बाद में “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” (जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी महान है) के रूप में विकसित हुई। इस अवधारणा का उद्भव भारतीय राष्ट्रवाद और देशभक्ति की जड़ों को समझने में महत्वपूर्ण है।
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प्रश्न 22. अथर्ववेद में कृषि का पहला अनुसंधानकर्ता किसे कहा गया है?
(A) मनु
(B) इंद्र
(C) पृथुवैन्य
(D) परशुराम
✅ उत्तर: (C) पृथुवैन्य
अथर्ववेद में ‘पृथुवैन्य’ को कृषि का पहला अनुसंधानकर्ता कहा गया है। पृथु वैन्य एक पौराणिक राजा था जिसने कृषि की खोज की और धरती को जोतकर खेती करना सिखाया। इसी राजा के नाम पर पृथ्वी का एक नाम पड़ा। पुराणों में कहा गया है कि राजा पृथु ने पृथ्वी से अनाज उत्पन्न करवाया। यह कथा वैदिक काल में कृषि के उद्भव और विकास को दर्शाती है। यह एक रोचक और अनोखा ऐतिहासिक तथ्य है जो UPSC और अन्य परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है।
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प्रश्न 23. अथर्ववेद में सभा को क्या कहा गया है?
(A) राजदरबार
(B) नरिष्ठा (अनुल्लंघनीय)
(C) जनसभा
(D) देवसभा
✅ उत्तर: (B) नरिष्ठा (अनुल्लंघनीय)
अथर्ववेद में सभा को ‘नरिष्ठा’ अर्थात् अनुल्लंघनीय कहा गया है। इसका मतलब है कि सभा की आज्ञा का उल्लंघन नहीं किया जा सकता। वैदिक काल में ‘सभा’ और ‘समिति’ दो प्रमुख जन-संस्थाएँ थीं। सभा बड़े और श्रेष्ठ लोगों की संस्था थी, जबकि समिति सामान्य जन की संस्था थी। ये दोनों संस्थाएँ राजा की शक्ति पर नियंत्रण रखती थीं। यह तथ्य भारत में लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्राचीनता का प्रमाण है और परीक्षाओं में महत्वपूर्ण है।
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प्रश्न 24. वैदिक साहित्य में मगध और वैशाली का सर्वप्रथम उल्लेख किस वेद में मिलता है?
(A) ऋग्वेद
(B) सामवेद
(C) यजुर्वेद
(D) अथर्ववेद
✅ उत्तर: (D) अथर्ववेद
वैदिक साहित्य में मगध और वैशाली का सर्वप्रथम उल्लेख अथर्ववेद में मिलता है। यह इस बात का प्रमाण है कि उत्तर वैदिक काल तक आर्यों का विस्तार पूर्वी भारत (बिहार क्षेत्र) तक हो गया था। मगध बाद में भारत का सबसे शक्तिशाली महाजनपद बना और मौर्य साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र यहीं थी। वैशाली लिच्छवि गणराज्य की राजधानी थी और विश्व के प्रथम गणराज्यों में से एक मानी जाती है। इन नगरों का अथर्ववेद में उल्लेख उनकी प्राचीनता का प्रमाण है।
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प्रश्न 25. ब्राह्मण साहित्य किस रूप में लिखा गया है?
(A) केवल पद्य में
(B) विशुद्ध रूप से गद्य में
(C) गद्य और पद्य दोनों में
(D) चित्र और गद्य में
✅ उत्तर: (B) विशुद्ध रूप से गद्य में
ब्राह्मण साहित्य विशुद्ध रूप से गद्य (Prose) में लिखा गया है। यह वेदों की पद्यात्मक रचनाओं का गद्यात्मक विश्लेषण और व्याख्या करता है। ‘ब्राह्मण’ शब्द ‘ब्रह्मन्’ से निकला है, जिसका अर्थ कर्मकांड या विधि-विधान है। ब्राह्मण ग्रंथ यज्ञ विधियों का विस्तृत विवरण देते हैं। प्रमुख ब्राह्मण ग्रंथ हैं — शतपथ ब्राह्मण (यजुर्वेद), ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद), तांड्य ब्राह्मण (सामवेद) और गोपथ ब्राह्मण (अथर्ववेद)। वहीं आरण्यक गद्य और पद्य दोनों में लिखे गए हैं। यह भेद परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है।
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