सिद्धार्थ से बुद्ध: कैसे बने भगवान? पूरी कहानी MCQs 2026

महात्मा बुद्ध की ज्ञान प्राप्ति बोधि वृक्ष के नीचे

प्राचीन भारत का इतिहास भाग-28 MCQ-2026

सिद्धार्थ से बुद्ध तक: जन्म, परिवार, गृहत्याग और ज्ञान

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प्रश्न 1. महात्मा बुद्ध का जन्म कब हुआ था?

(A) 483 ई०पू०
(B) 563 ई०पू०
(C) 623 ई०पू०
(D) 599 ई०पू०

उत्तर: (B) 563 ई०पू०

📝 महात्मा बुद्ध, जिनका वास्तविक नाम सिद्धार्थ था, का जन्म 563 ई.पू. में हुआ। उनका जन्म कपिलवस्तु के लुम्बिनी नामक स्थान में हुआ, जो आज के नेपाल में स्थित है। यह घटना बौद्ध धर्म के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इसी से उनके जीवनकाल और शिक्षाओं की शुरुआत मानी जाती है। सिद्धार्थ का जन्म वैशाख पूर्णिमा के दिन हुआ था, इसलिए आज इस दिन को “बुद्ध पूर्णिमा” के रूप में मनाया जाता है। उनके जन्म से जुड़ी यह जानकारी इतिहास और बौद्ध ग्रंथों में दर्ज है। ध्यान देने वाली बात यह है कि जैन धर्म के संस्थापक महावीर स्वामी का जन्म 540 ई.पू. में हुआ, इसलिए दोनों के जन्म वर्ष अलग हैं और भ्रम नहीं होना चाहिए। लुम्बिनी में उनके प्रारंभिक जीवन और परिवार का वातावरण उनके विकास और सीखने की क्षमता के लिए अनुकूल था।

प्रश्न 2. महात्मा बुद्ध का जन्म किस स्थान पर हुआ था?

(A) बोधगया
(B) सारनाथ
(C) लुम्बिनी
(D) कुशीनगर

उत्तर: (C) लुम्बिनी

📝 महात्मा बुद्ध का जन्म कपिलवस्तु के लुम्बिनी नामक स्थान में हुआ था। लुम्बिनी वर्तमान नेपाल में स्थित है और यह UNESCO विश्व धरोहर स्थल है। बौद्ध धर्म के चार प्रमुख तीर्थस्थल हैं: लुम्बिनी (जन्म स्थान), बोधगया (ज्ञान प्राप्ति), सारनाथ (प्रथम उपदेश) और कुशीनगर (महापरिनिर्वाण)। सम्राट अशोक ने लुम्बिनी की यात्रा की थी और वहाँ एक स्तंभ स्थापित किया, जिससे इस स्थान की पहचान सुनिश्चित होती है।

प्रश्न 3. कपिलवस्तु की पहचान के संदर्भ में कौन-सा कथन सही है?

(A) सभी विद्वान मानते हैं कि यह पिपरहवा था
(B) कुछ विद्वान पिपरहवा और कुछ तिलौराकोट मानते हैं
(C) यह राजगृह के पास स्थित था
(D) यह वैशाली के निकट था

उत्तर: (B) कुछ विद्वान पिपरहवा और कुछ तिलौराकोट मानते हैं

📝 कपिलवस्तु की पहचान विद्वानों के बीच विवादास्पद रही है। एक वर्ग का मानना है कि कपिलवस्तु उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में स्थित पिपरहवा था, जबकि दूसरे वर्ग का मानना है कि यह नेपाल में स्थित तिलौराकोट है। दोनों स्थलों पर पुरातात्विक खुदाई में बौद्धकालीन अवशेष मिले हैं। पिपरहवा में 1898 में विलियम पेपे ने खुदाई कराई, जिसमें बुद्ध के अवशेषों वाले कलश मिले थे। यह विषय इतिहासकारों के बीच असहमति को दर्शाता है।

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प्रश्न 4. महात्मा बुद्ध के पिता का नाम क्या था?

(A) आनंद
(B) शुद्धोधन
(C) महाकश्यप
(D) उपालि

उत्तर: (B) शुद्धोधन

📝 महात्मा बुद्ध के पिता का नाम शुद्धोधन था। वे कपिलवस्तु के शाक्य गण के मुखिया थे। शाक्य गण एक गणराज्य था जो कोसल महाजनपद के अधीन आता था। इस कारण महात्मा बुद्ध को ‘शाक्यमुनि‘ भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है ‘शाक्यों के मुनि‘. शुद्धोधन ने अपने पुत्र के भविष्य के बारे में ज्योतिषी से भविष्यवाणी सुनी थी कि यह बालक या तो एक महान राजा बनेगा या एक महान संन्यासी। इसलिए उन्होंने सिद्धार्थ को सांसारिक सुख-सुविधाओं में रखा ताकि वे राज्य का उत्तराधिकारी बन सकें।

प्रश्न 5. शाक्य गण किस महाजनपद के अधीन था?

(A) मगध महाजनपद
(B) वज्जि महाजनपद
(C) कोसल महाजनपद
(D) अवंति महाजनपद

उत्तर: (C) कोसल महाजनपद

📝 शाक्य गण, जो कपिलवस्तु में स्थित था, कोसल महाजनपद के अधीन आने वाला एक गणराज्य था। प्राचीन भारत में 16 महाजनपद थे, जिनमें कोसल एक प्रमुख महाजनपद था। कोसल की राजधानी श्रावस्ती थी। महात्मा बुद्ध के सर्वाधिक अनुयायी कोसल महाजनपद में ही थे और उनके अधिकांश उपदेश भी यहीं दिए गए। महात्मा बुद्ध ने अपने 25 वर्षावास श्रावस्ती में बिताए। कोसल के राजा प्रसेनजित महात्मा बुद्ध के प्रमुख संरक्षक थे।

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प्रश्न 6. महात्मा बुद्ध की माता का नाम क्या था?

(A) यशोधरा
(B) प्रजापति गौतमी
(C) महामाया
(D) अम्बपाली

उत्तर: (C) महामाया

📝 महात्मा बुद्ध की माता का नाम महामाया था। उनका संबंध रामग्राम के कोलिय गण से था। महामाया का विवाह शुद्धोधन से हुआ था। दुर्भाग्यवश, बुद्ध के जन्म के केवल 7वें दिन महामाया का निधन हो गया। इसके बाद उनके पालन-पोषण की जिम्मेदारी उनकी मौसी प्रजापति गौतमी ने संभाली, जिन्होंने बाद में शुद्धोधन से विवाह कर लिया और वे बुद्ध की सौतेली माँ बन गईं। प्रजापति गौतमी ही बौद्ध संघ में प्रवेश पाने वाली प्रथम महिला थीं। महामाया कपिलवस्तु से देवदह जाते समय लुम्बिनी वन में रुकी थीं, जहाँ महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ।

प्रश्न 7. महामाया की मृत्यु बुद्ध के जन्म के कितने दिन बाद हुई?

(A) 3 दिन बाद
(B) 7 दिन बाद
(C) 14 दिन बाद
(D) 30 दिन बाद

उत्तर: (B) 7 दिन बाद

📝 बुद्ध के जन्म के केवल 7वें दिन उनकी माता महामाया का निधन हो गया। इसके बाद बालक सिद्धार्थ का पालन-पोषण उनकी मौसी प्रजापति गौतमी ने किया। प्रजापति गौतमी भी कोलिय वंश की राजकुमारी थीं और महामाया की छोटी बहन थीं। शुद्धोधन ने बाद में प्रजापति गौतमी से विवाह कर लिया। प्रजापति गौतमी बौद्ध संघ में प्रवेश पाने वाली प्रथम महिला बनीं और महिला भिक्षुणी संघ की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रश्न 8. महात्मा बुद्ध का पालन-पोषण किसने किया?

(A) यशोधरा
(B) महामाया
(C) प्रजापति गौतमी
(D) अम्बपाली

उत्तर: (C) प्रजापति गौतमी

📝 माता महामाया के निधन के बाद महात्मा बुद्ध का पालन-पोषण उनकी मौसी प्रजापति गौतमी ने किया। प्रजापति गौतमी महामाया की बहन और कोलिय वंश की राजकुमारी थीं। उन्होंने शुद्धोधन से विवाह किया और सिद्धार्थ को अपने पुत्र की तरह पाला। बाद में, जब बुद्ध ने वैशाली में बौद्ध संघ में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी, तो प्रजापति गौतमी प्रथम महिला बनीं। आनंद के आग्रह और प्रजापति गौतमी के अनुरोध के कारण महात्मा बुद्ध ने यह अनुमति दी। इस प्रकार बौद्ध धर्म में स्त्री-भिक्षुणी परंपरा की शुरुआत हुई।

प्रश्न 9. महात्मा बुद्ध की पत्नी का नाम क्या था?

(A) अम्बपाली
(B) यशोधरा
(C) महामाया
(D) चंदना

उत्तर: (B) यशोधरा

📝 महात्मा बुद्ध की पत्नी का नाम यशोधरा था। 16 वर्ष की अवस्था में शुद्धोधन ने शाक्य गण की एक रूपवती कन्या यशोधरा के साथ सिद्धार्थ का विवाह करा दिया। यशोधरा के अन्य नाम बिम्बा, गोपा, भद्रकच्छना थे। यशोधरा और सिद्धार्थ के पुत्र का नाम राहुल था। जब सिद्धार्थ 29 वर्ष की आयु में गृह त्याग कर चले गए, उस समय राहुल का जन्म हुआ था। बाद में यशोधरा ने भी बौद्ध धर्म अपनाया और बौद्ध संघ में प्रवेश किया। प्रवेश पाने वाले क्रम में पहले गौतमी, फिर नंदा, और फिर यशोधरा को अनुमति दी गई।

प्रश्न 10. यशोधरा के अन्य नाम क्या थे?

(A) महामाया, गौतमी, चंदना
(B) बिम्बा, गोपा, भद्रकच्छना
(C) अम्बपाली, चंपा, वसंत
(D) नंदा, सुप्रिया, धर्मदेवी

उत्तर: (B) बिम्बा, गोपा, भद्रकच्छना

📝 बौद्ध साहित्य में यशोधरा के अनेक नाम मिलते हैं। उनके तीन प्रमुख वैकल्पिक नाम हैं: बिम्बा, गोपा, भद्रकच्छना। विभिन्न बौद्ध ग्रंथों में इन्हें अलग-अलग नामों से संबोधित किया गया है। थेरीगाथा जैसे बौद्ध ग्रंथों में यशोधरा का उल्लेख मिलता है। यशोधरा शाक्य गण की राजकुमारी थीं और उनके पिता का नाम दण्डपाणि था। वे अत्यंत सुंदर और गुणवती थीं। जब सिद्धार्थ ने गृह त्याग किया, उस समय उनके पुत्र राहुल के जन्म के कारण यशोधरा की स्थिति कठिन हो गई थी।

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प्रश्न 11. महात्मा बुद्ध के पुत्र का नाम क्या था?

(A) देवदत्त
(B) आनंद
(C) राहुल
(D) उपालि

उत्तर: (C) राहुल

📝 महात्मा बुद्ध और यशोधरा के पुत्र का नाम राहुल था। ‘राहुल’ का अर्थ है – “एक और बंधन”। कुछ बौद्ध ग्रंथों के अनुसार जब सिद्धार्थ को पुत्र के जन्म की खबर मिली तो उन्होंने कहा “राहुलो जातो” – अर्थात एक और बाधा आ गई। बाद में राहुल भी बौद्ध धर्म में दीक्षित हुए और बौद्ध संघ के सदस्य बने। उन्हें सारिपुत्त ने दीक्षित किया। राहुल बौद्ध संघ में सबसे पहले दीक्षित बालक भिक्षु बने और उनके कारण बाद में बाल भिक्षुओं के लिए नियम बनाए गए।

प्रश्न 12. ‘राहुल’ शब्द का अर्थ क्या है?

(A) महान योद्धा
(B) एक और बंधन
(C) प्रकाश का दूत
(D) सत्य का खोजी

उत्तर: (B) एक और बंधन

📝 ‘राहुल’ शब्द का शाब्दिक अर्थ है “एक और बंधन”। जब सिद्धार्थ ने अपने पुत्र के जन्म का समाचार सुना, तो उन्होंने इसे एक और सांसारिक बंधन के रूप में देखा। यही कारण है कि पुत्र का नाम राहुल रखा गया। यह नामकरण महात्मा बुद्ध की सांसारिक आसक्ति से विरक्ति की मनोदशा को दर्शाता है। उस समय तक उनका मन संन्यास की ओर झुक चुका था और सांसारिक जीवन के प्रति उनका मोहभंग हो रहा था।

प्रश्न 13. किस उम्र में महात्मा बुद्ध की शादी हुई थी?

(A) 12 वर्ष
(B) 16 वर्ष
(C) 20 वर्ष
(D) 25 वर्ष

उत्तर: (B) 16 वर्ष

📝 16 वर्ष की अवस्था में ही शुद्धोधन ने सिद्धार्थ का विवाह यशोधरा से करा दिया। यह विवाह इसलिए जल्दी कराया गया ताकि सिद्धार्थ सांसारिक जीवन में रमकर राज्य का उत्तराधिकारी बने। ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी कि यह बालक या तो महान राजा बनेगा या महान संन्यासी। शुद्धोधन ने इसके लिए सिद्धार्थ के लिए तीन ऋतुओं के लिए अलग-अलग महल बनवाए और उन्हें हर प्रकार की सुख-सुविधाएँ उपलब्ध कराईं। परंतु सिद्धार्थ का मन हमेशा सांसारिक कार्यों में नहीं लगा।

प्रश्न 14. महात्मा बुद्ध ने शहर भ्रमण के दौरान कितने दृश्य देखे जिनसे उनका मन वैराग्य की ओर प्रवृत्त हुआ?

(A) दो
(B) तीन
(C) चार
(D) पाँच

उत्तर: (C) चार

📝 महात्मा बुद्ध ने एक रथ में सवार होकर शहर भ्रमण के दौरान चार दृश्य देखे —
1) वृद्ध व्यक्ति (An old man)
2) रोगी व्यक्ति (A sick man)
3) शव (A corpse) को ले जाते हुए रोती-चिल्लाती भीड़
4) खुशहाल संन्यासी (A religious beggar/ascetic)
पहले तीन दृश्यों ने उन्हें जीवन की क्षणभंगुरता और दुःख का बोध कराया, जबकि चौथे दृश्य ने उन्हें संन्यास की राह दिखाई। इन चार दृश्यों को बौद्ध साहित्य में ‘चार दिव्य संदेश‘ या ‘चार महादेव‘ के रूप में जाना जाता है। यह घटना बौद्ध धर्म के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

प्रश्न 15. शहर भ्रमण के दौरान देखा गया चौथा दृश्य क्या था जिसने बुद्ध को संन्यास के लिए प्रेरित किया?

(A) एक बालक का रोना
(B) एक महल का विध्वंस
(C) एक खुशहाल संन्यासी
(D) एक युद्ध का दृश्य

उत्तर: (C) एक खुशहाल संन्यासी

📝 महात्मा बुद्ध ने शहर भ्रमण के दौरान जो चौथा और अंतिम दृश्य देखा, वह एक खुशहाल संन्यासी (A religious beggar, an ascetic) का था।
पहले तीन दृश्य — वृद्ध व्यक्ति, रोगी व्यक्ति और मृत व्यक्ति — ने उनके मन में जीवन के दुःखों का बोध कराया। इस संन्यासी को देखकर उन्हें अनुभव हुआ कि इन दुःखों से मुक्ति का मार्ग संन्यास में है। संन्यासी की शांत और प्रसन्न मुद्रा ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। इसके बाद उन्होंने 29 वर्ष की आयु में गृह त्याग करने का निर्णय लिया। यह घटना बौद्ध साहित्य में “चार महानिमित्त” (Four Great Signs) के रूप में वर्णित है।

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प्रश्न 16. किस आयु में महात्मा बुद्ध ने गृह त्याग किया?

(A) 25 वर्ष
(B) 29 वर्ष
(C) 35 वर्ष
(D) 40 वर्ष

उत्तर: (B) 29 वर्ष

📝 29 वर्ष की अवस्था में महात्मा बुद्ध ने अपना गृह त्याग किया। इस समय उनकी पत्नी यशोधरा और नवजात शिशु राहुल थे। रात्रि के अंधेरे में, जब सब सो रहे थे, उन्होंने अपने महल को छोड़ दिया। यह घटना बौद्ध साहित्य में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
महत्वपूर्ण तिथियाँ:
– 29 वर्ष: गृह त्याग
– 35 वर्ष: ज्ञान प्राप्ति
– 80 वर्ष: महापरिनिर्वाण
गृह त्याग के बाद उन्होंने 6 वर्षों तक घोर तपस्या की और अंततः बोधगया में ज्ञान प्राप्त किया।

प्रश्न 17. बौद्ध साहित्य में गृह त्याग की घटना को क्या कहा जाता है?

(A) धर्मचक्र प्रवर्तन
(B) महाभिनिष्क्रमण
(C) महापरिनिर्वाण
(D) संबोधि

उत्तर: (B) महाभिनिष्क्रमण

📝 गृह त्याग की घटना को बौद्ध साहित्य में ‘महाभिनिष्क्रमण’ (The Great Renunciation) कहा जाता है। यह बुद्ध के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है। ‘महाभिनिष्क्रमण’ का मतलब है — “महान् त्याग” या “महान् प्रस्थान”। इस घटना के बाद सिद्धार्थ सत्य की खोज में निकल पड़े।
बौद्ध धर्म में अन्य महत्वपूर्ण पद:
– जन्म के लिए: ‘जात’
– ज्ञान प्राप्ति के लिए: ‘संबोधि’
– प्रथम उपदेश के लिए: ‘धर्मचक्र प्रवर्तन’
– मृत्यु के लिए: ‘महापरिनिर्वाण’

प्रश्न 18. गृह त्याग के बाद महात्मा बुद्ध की मुलाकात सर्वप्रथम किस गुरु से हुई?

(A) रुद्रक रामपुत्र
(B) आलार कलाम
(C) महाकश्यप
(D) उपालि

उत्तर: (B) आलार कलाम

📝 गृह त्याग के बाद सर्वप्रथम महात्मा बुद्ध की मुलाकात वैशाली के सांख्य दर्शन के गुरु आलार कलाम (Alara Kalama) से हुई। वे एक प्रसिद्ध ध्यान-गुरु थे और ‘आकिंचन्यायतन समाधि’ की शिक्षा देते थे। सिद्धार्थ ने उनसे ध्यान की शिक्षा ग्रहण की, लेकिन उन्हें वह उत्तर नहीं मिला जो वे खोज रहे थे। इसके बाद वे राजगृह गए और रुद्रक रामपुत्र से मिले, जो ‘नैवसंज्ञानासंज्ञायतन समाधि’ की शिक्षा देते थे। दोनों गुरुओं से संतुष्ट न होने के बाद, सिद्धार्थ ने स्वयं साधना का मार्ग चुना और गया में जाकर तपस्या की।

प्रश्न 19. आलार कलाम किस नगर के गुरु थे?

(A) राजगृह
(B) वैशाली
(C) सारनाथ
(D) श्रावस्ती

उत्तर: (B) वैशाली

📝 आलार कलाम और वैशाली: आलार कलाम वैशाली के एक प्रसिद्ध सांख्य दर्शन के गुरु थे। वैशाली उस समय वज्जि महाजनपद की राजधानी और एक प्रमुख गणराज्य था।
महात्मा बुद्ध के जीवन में वैशाली का विशेष महत्व है —

  • यहीं उन्होंने महिलाओं को बौद्ध संघ में प्रवेश देने की अनुमति दी।
  • यहीं उन्होंने द्वितीय वर्षावास किया।
  • यहाँ के लिच्छवि शासकों ने कूटाग्रामशाला विहार बनवाया।

आलार कलाम के बाद महात्मा बुद्ध राजगृह गए और वहाँ रुद्रक रामपुत्र से मिले।
रुद्रक रामपुत्र के आश्रम में भी उन्हें वांछित ज्ञान नहीं मिला।

प्रश्न 20. गया में महात्मा बुद्ध ने किस नदी के किनारे तपस्या की थी?

(A) गंगा नदी
(B) सरस्वती नदी
(C) निरंजना (फल्गू) नदी
(D) गोमती नदी

उत्तर: (C) निरंजना (फल्गू) नदी

📝 महात्मा बुद्ध और गया:
महात्मा बुद्ध ने गया में निरंजना नदी के किनारे तपस्या की, जिसे आधुनिक काल में फल्गू नदी कहा जाता है।

  • उन्होंने एक पीपल के वृक्ष के नीचे पंचवर्गीय ब्राह्मण भिक्खुओं के साथ 6 वर्षों तक घोर तपस्या की।
  • फल्गू नदी बिहार के गया जिले में बहती है और हिंदुओं के लिए भी पवित्र है, क्योंकि यहाँ पितृ तर्पण किया जाता है।
  • बौद्ध धर्म में यह स्थान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी के निकट बोधगया में महात्मा बुद्ध को ज्ञान प्राप्ति हुई थी।

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प्रश्न 21. महात्मा बुद्ध ने कितने वर्षों तक घोर तपस्या की?

(A) 3 वर्ष
(B) 6 वर्ष
(C) 10 वर्ष
(D) 12 वर्ष

उत्तर: (B) 6 वर्ष

📝 महात्मा बुद्ध ने गया में निरंजना नदी के किनारे एक पीपल वृक्ष के नीचे पंचवर्गीय ब्राह्मण भिक्खुओं के साथ 6 वर्षों तक घोर तपस्या की। इस कठिन तपस्या के दौरान उन्होंने इतना कम भोजन किया कि उनका शरीर अत्यंत कृश हो गया। इतनी कठिन तपस्या के बावजूद उन्हें ज्ञान प्राप्ति नहीं हुई।अंततः उन्होंने मध्यम मार्ग (Middle Path) अपनाने का निश्चय किया। सुजाता द्वारा दी गई खीर खाने के बाद उन्होंने अपनी तपस्या भंग की। इस पर पंचवर्गीय भिक्खु उन्हें छोड़कर सारनाथ चले गए। बौद्ध धर्म में मध्यम मार्ग का सिद्धांत इसी अनुभव से उत्पन्न हुआ।

प्रश्न 22. किसने महात्मा बुद्ध को खीर खिलाई जिसके बाद उन्होंने तपस्या भंग की?

(A) यशोधरा
(B) आम्रपाली
(C) सुजाता
(D) प्रजापति गौतमी

उत्तर: (C) सुजाता

📝 उरुवेला (बोधगया) में एक सेनानी की पुत्री सुजाता ने महात्मा बुद्ध को खीर (दूध और चावल की खीर) खिलाई। इस खीर के सेवन के बाद महात्मा बुद्ध ने अपनी 6 वर्षों की कठोर तपस्या भंग की। सुजाता ने यह खीर एक वृक्ष-देवता के लिए चढ़ाने के उद्देश्य से लाई थी, लेकिन ध्यानमग्न बुद्ध को देखकर उसने उन्हें देवता समझ लिया। खीर खाने के बाद बुद्ध के शरीर में नई ऊर्जा आई और वे पुनः ध्यान में बैठे। पंचवर्गीय भिक्खुओं ने यह देखकर सोचा कि सिद्धार्थ भ्रष्ट हो गए हैं और वे सारनाथ चले गए। सुजाता का यह कार्य बौद्ध धर्म के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में दर्ज है।

प्रश्न 23. खीर खाने के बाद महात्मा बुद्ध कितने दिन समाधिस्थ रहे?

(A) 7 दिन
(B) 21 दिन
(C) 49 दिन
(D) 63 दिन

उत्तर: (C) 49 दिन

📝 सुजाता द्वारा खीर खाने के बाद महात्मा बुद्ध ने पुनः समाधि लगाई और 7 सप्ताह (49 दिन) तक समाधिस्थ रहे। 49वें दिन उन्हें ज्ञान (संबोधि / Enlightenment) प्राप्त हुआ। यह ज्ञान प्राप्ति घटना वैशाख पूर्णिमा के दिन हुई। ज्ञान प्राप्ति पीपल के वृक्ष के नीचे हुई, जिसे बाद में बोधि वृक्ष कहा गया। इस स्थान को बोधगया के नाम से जाना गया। बौद्ध धर्म में 49 की यह संख्या विशेष महत्व रखती है। 7 सप्ताह = 49 दिन — इस गणना को याद रखना उपयोगी है।

प्रश्न 24. ज्ञान प्राप्ति के पश्चात् सिद्धार्थ क्या कहलाए?

(A) महावीर
(B) तथागत और बुद्ध
(C) जिन
(D) अर्हत

उत्तर: (B) तथागत और बुद्ध

📝 संबोधि (Enlightenment) की प्राप्ति के पश्चात् सिद्धार्थ को ‘बुद्ध’ कहा गया।

  • बुद्ध का अर्थ है — “जिसे ज्ञान प्राप्त हो गया हो” या “जागृत।”
  • तथागत — “जो इस प्रकार आया” या “जो इस प्रकार गया।”
  • अन्य नाम — शाक्यमुनि (शाक्यों के मुनि), सम्यक् सम्बुद्ध, भगवान्
  • गौतम बुद्ध नाम उनकी मौसी प्रजापति गौतमी के कारण पड़ा।
  • ज्ञान प्राप्ति का स्थान — बोधगया, पीपल का वृक्ष — बोधि वृक्ष
  • प्रश्न 25. बोधि वृक्ष को किसने कटवाया था?

    (A) पुष्यमित्र शुंग
    (B) मिहिरकुल
    (C) शशांक
    (D) कनिष्क

    उत्तर: (C) शशांक

    📝 महात्मा बुद्ध को जिस पीपल वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था, उस बोधि वृक्ष को बंगाल के गौड़ वंशीय शासक शशांक ने काटवाने का प्रयास किया। शशांक 7वीं शताब्दी का एक शक्तिशाली शासक था, जो बौद्ध धर्म के प्रति विद्वेष रखता था। ह्वेनसांग ने अपने यात्रा-वृत्तांत में शशांक द्वारा बोधि वृक्ष काटने का उल्लेख किया है। शशांक हर्षवर्धन का समकालीन था और दोनों के बीच अक्सर संघर्ष होता रहता था।

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