जैन धर्म MCQ 2026: 25 महत्वपूर्ण प्रश्न (Exam Special)

जैन धर्म MCQ 2026 महावीर ध्यान मुद्रा महत्वपूर्ण प्रश्न

प्राचीन भारत का इतिहास भाग-39 MCQ-2026

जैन धर्म MCQ 2026: 25 महत्वपूर्ण प्रश्न (Exam Special)

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प्रश्न 1. जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव का प्रतीक चिन्ह क्या था?

(A) शंख
(B) कलश
(C) वृषभ (Bull)
(D) सर्प

उत्तर: (C) वृषभ (Bull)

📝 जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव का प्रतीक चिन्ह ‘वृषभ’ (Bull) था। ऋषभदेव को ‘आदिनाथ’ भी कहा जाता था। जैन धर्म में प्रत्येक तीर्थंकर का एक विशेष प्रतीक चिन्ह होता था जो उनकी मूर्तियों में दर्शाया जाता था। उदाहरण के तौर पर — 19वें तीर्थंकर मल्लिनाथ का कलश (Urn), 22वें नेमिनाथ का शंख (Conch), 23वें पार्श्वनाथ का सर्प और 24वें महावीर का सिंह (Lion) प्रतीक चिन्ह था। राजस्थान के माउंट आबू पर्वत के समीप दिलवाड़ा में इसी ऋषभदेव की मूर्ति प्रतिष्ठापित है जिसे ‘आदिशाही का मंदिर’ कहते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में तीर्थंकरों के प्रतीक चिन्ह बार-बार पूछे जाते हैं।

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प्रश्न 2. महावीर का जन्म बिहार के किस जिले में हुआ था?

(A) पटना
(B) वैशाली
(C) मुजफ्फरपुर
(D) नालंदा

उत्तर: (C) मुजफ्फरपुर

📝 महावीर का जन्म वैशाली के कुण्डग्राम में हुआ था। यह स्थान वर्तमान में तिरहुत मण्डल के वैशाली जनपद के बसाढ़ नामक ग्राम के आस-पास स्थित ‘बासुकुंड’ था। यह स्थान बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में स्थित है। वैशाली जिला उस समय अलग प्रशासनिक इकाई नहीं था। अनेक प्रतियोगी परीक्षाओं में यह प्रश्न पूछा जाता है कि महावीर का जन्म बिहार के किस जिले में हुआ था। इस प्रश्न में ‘वैशाली’ और ‘मुजफ्फरपुर’ में भ्रम होता है — वैशाली स्थान का नाम है परंतु प्रशासनिक जिले के रूप में यह क्षेत्र मुजफ्फरपुर जिले के अंतर्गत आता था।
जैन धर्म के 25 महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न 2026 – परीक्षा में बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न-
जैन धर्म के 25 महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न 2026

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प्रश्न 3. महावीर के पिता सिद्धार्थ किस गण के मुखिया थे?

(A) लिच्छवि गण
(B) मल्ल गण
(C) ज्ञातृक गण
(D) वज्जि गण

उत्तर: (C) ज्ञातृक गण

📝 महावीर के पिता सिद्धार्थ वज्जि महाजनपद के अंतर्गत आने वाले ‘ज्ञातृक गण’ (Jnatrika Clan) के मुखिया थे। इसीलिए बौद्ध साहित्य में महावीर को ‘निगण्ठनाथपुत्त’ या ‘निर्ग्रन्यज्ञात्रीपुत्र’ कहा गया है — जिसमें ‘ज्ञात्री’ उनके गण का नाम है। वज्जि महाजनपद भारत का एक प्रमुख गणतांत्रिक महाजनपद था जिसमें लिच्छवि, वज्जि और ज्ञातृक जैसे अनेक गण शामिल थे। इससे स्पष्ट होता है कि महावीर का जन्म एक अत्यंत प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार में हुआ था। BPSC और UPPSC में यह तथ्य अक्सर पूछा जाता है।

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प्रश्न 4. बौद्ध साहित्य में महावीर के लिए किस नाम का प्रयोग किया गया है?

(A) तथागत
(B) निगण्ठनाथपुत्त
(C) केवलिन
(D) अर्हत

उत्तर: (B) निगण्ठनाथपुत्त

📝 बौद्ध साहित्यों में महावीर को ‘निगण्ठनाथपुत्त’ या ‘निर्ग्रन्यज्ञात्रीपुत्र’ कहकर पुकारा गया है। ‘निगण्ठ’ शब्द जैन धर्म के पुराने नाम ‘निर्ग्रन्थ’ का पालि रूप है जिसका अर्थ है — वह जिसने सांसारिक बंधनों से मुक्ति पा ली हो। ‘नाथपुत्त’ का अर्थ है — उस वंश का पुत्र। ‘तथागत’ और ‘केवलिन’ — ये महावीर के लिए जैन ग्रंथों में प्रयुक्त होते हैं जबकि ‘तथागत’ गौतम बुद्ध के लिए है। ‘अर्हत’ का प्रयोग जैन ग्रंथों में महावीर के लिए ज्ञान प्राप्ति के बाद किया गया। यह UPSC में भ्रामक प्रश्न के रूप में पूछा जाता है।

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प्रश्न 5. महावीर की पुत्री का क्या नाम था?

(A) यशोदा
(B) चेल्लना
(C) प्रभावती
(D) अनोज्जा प्रियदर्शना

उत्तर: (D) अनोज्जा प्रियदर्शना

📝 महावीर की पत्नी का नाम यशोदा था और उनकी पुत्री का नाम ‘अनोज्जा प्रियदर्शना’ था। इनके पति यानी महावीर के दामाद का नाम ‘जामालि’ था जो महावीर के प्रथम शिष्य भी माने जाते हैं। चेल्लना मगध नरेश बिम्बसार की पत्नी और चेटक की पुत्री थीं। यशोदा महावीर की पत्नी थीं और प्रभावती 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ की पत्नी थीं। इन नामों में अक्सर परीक्षाओं में भ्रम पैदा किया जाता है। इसलिए इन सभी नामों और उनके संबंधों को ध्यान से याद रखना आवश्यक है।

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प्रश्न 6. मगध नरेश बिम्बसार का महावीर से क्या संबंध था?

(A) बिम्बसार महावीर के शिष्य थे
(B) बिम्बसार ने महावीर की पुत्री से विवाह किया
(C) बिम्बसार की पत्नी चेल्लना, चेटक की पुत्री थी जो महावीर की माता की भाई की बेटी थी
(D) बिम्बसार और महावीर एक ही गण से थे

उत्तर: (C) बिम्बसार की पत्नी चेल्लना, चेटक की पुत्री थी जो महावीर की माता की भाई की बेटी थी

📝 महावीर की माता ‘त्रिशला’ लिच्छवि नरेश ‘चेटक’ की बहन थीं। मगध नरेश बिम्बसार ने चेटक की पुत्री ‘चेल्लना’ से विवाह किया था। इस प्रकार चेटक — महावीर के मामा और बिम्बसार के ससुर — दोनों थे। इससे महावीर और बिम्बसार के बीच एक अप्रत्यक्ष पारिवारिक-राजनीतिक संबंध स्थापित होता है। यह संबंध इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बिम्बसार मगध का शक्तिशाली शासक था और उसका संबंध गौतम बुद्ध से भी था। इस प्रकार महावीर और बुद्ध दोनों उसी कालखंड में सक्रिय थे।

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प्रश्न 7. जैन और बौद्ध धर्म में प्राचीनता की दृष्टि से कौन सा धर्म पुराना है?

(A) बौद्ध धर्म
(B) दोनों समान रूप से प्राचीन हैं
(C) जैन धर्म
(D) दोनों एक ही काल में उदित हुए

उत्तर: (C) जैन धर्म

📝 जैन और बौद्ध धर्म में पहली असमानता प्राचीनता को लेकर है। जैन धर्म, बौद्ध धर्म की तुलना में एक अधिक प्राचीन धर्म है। जैन धर्म में 24 तीर्थंकरों की परंपरा अत्यंत प्राचीन काल से चली आ रही है। जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ का जन्म महावीर से 250 वर्ष पूर्व हुआ था और 22वें तीर्थंकर नेमिनाथ महाभारत काल के थे। इससे स्पष्ट होता है कि जैन धर्म की परंपरा अत्यंत पुरानी है। बौद्ध धर्म की स्थापना 6ठी शताब्दी ईपू में गौतम बुद्ध द्वारा हुई थी जबकि जैन परंपरा इससे पहले से चली आ रही थी।

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प्रश्न 8. महावीर को ज्ञान प्राप्ति के बाद ‘केवलिन’ क्यों कहा गया?

(A) क्योंकि उन्होंने सभी वस्त्र त्याग दिए
(B) क्योंकि उन्हें ‘कैवल्य’ यानी सर्वज्ञता की प्राप्ति हुई
(C) क्योंकि वे केवल एक ही स्थान पर रहे
(D) क्योंकि उनके केवल एक ही शिष्य थे

उत्तर: (B) क्योंकि उन्हें ‘कैवल्य’ यानी सर्वज्ञता की प्राप्ति हुई

📝 ज्ञान प्राप्ति के उपरांत महावीर को अनेक नामों से जाना गया। वे ‘जिन’ (विजेता) कहलाए क्योंकि उन्होंने इन्द्रियों पर विजय प्राप्त की। वे ‘अर्हत’ (योग्य) कहलाए। उन्हें ‘महावीर’ इसलिए कहा गया क्योंकि यह एक अद्भुत पराक्रम था। और उन्हें ‘केवलिन’ इसलिए कहा गया क्योंकि उन्हें ‘कैवल्य’ — अर्थात् पूर्ण ज्ञान या सर्वज्ञता — की प्राप्ति हुई थी। ‘कैवल्य’ जैन धर्म में उस अवस्था को कहते हैं जब साधक समस्त कर्मों से मुक्त होकर सर्वज्ञ हो जाता है। यह UPSC और BPSC परीक्षाओं में पूछा जाता है।

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प्रश्न 9. गृहत्याग के कितने महीने बाद महावीर ने अपने समस्त वस्त्रों का भी परित्याग कर दिया?

(A) 6वें महीने
(B) 9वें महीने
(C) 13वें महीने
(D) 24वें महीने

उत्तर: (C) 13वें महीने

📝 महावीर ने 30 वर्ष की अवस्था में अपने बड़े भाई नन्दिवर्धन की आज्ञा लेकर गृहत्याग किया। गृहत्याग के तेरहवें महीने में उन्होंने अपने समस्त वस्त्रों का परित्याग कर दिया और नग्न होकर इधर-उधर भटकने लगे। इस कठोर जीवन में लोगों ने उन्हें अपार कष्ट दिए। इस मार्मिक अनुभव का विस्तृत चित्रण जैन धर्म के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘आचारांगसूत्र’ में मिलता है। गृहत्याग के बाद 12 वर्षों की कठोर तपस्या के उपरांत तेरहवें वर्ष में उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई।

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प्रश्न 10. महावीर को ज्ञान प्राप्ति किस वृक्ष के नीचे हुई थी?

(A) पीपल वृक्ष
(B) बोधि वृक्ष
(C) शाल वृक्ष
(D) नीम वृक्ष

उत्तर: (C) शाल वृक्ष

📝 12 वर्षों की कठोर तपस्या के बाद तेरहवें वर्ष में अंग देश के जृंभिय ग्राम के बाहर ऋजुपालिका नदी (उज्जुवालिया नदी) के किनारे ‘शाल वृक्ष’ के नीचे महावीर को कैवल्य अर्थात् ज्ञान की प्राप्ति हुई। यहाँ यह ध्यान रखना आवश्यक है कि गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति बोधगया में ‘पीपल वृक्ष’ (बोधि वृक्ष) के नीचे हुई थी। दोनों महापुरुषों के ज्ञान प्राप्ति के वृक्ष भिन्न थे — महावीर का शाल वृक्ष और बुद्ध का पीपल वृक्ष। परीक्षाओं में इस भेद को उलझाकर प्रश्न पूछा जाता है।

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प्रश्न 11. जैन धर्म में ‘निर्जरा’ किसे कहते हैं?

(A) कर्म का जीव की ओर बहाव
(B) कर्म के बहाव का रुक जाना
(C) पहले से बने कर्म के फल का धीरे-धीरे समापन
(D) आत्मा का मोक्ष प्राप्त करना

उत्तर: (C) पहले से बने कर्म के फल का धीरे-धीरे समापन

📝 जैन दर्शन में कर्म सिद्धांत के तीन प्रमुख चरण हैं — (1) आसव: कर्म का जीव की ओर बहाव, (2) संवर: कर्म के बहाव का रुक जाना, (3) निर्जरा: पहले से संचित कर्मों के फल का धीरे-धीरे क्षय होना। ‘निर्जरा’ जैन दर्शन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्धांत है। जैन धर्म के अनुसार तपस्या और संयम के माध्यम से निर्जरा की प्रक्रिया तेज होती है जिससे आत्मा कर्म-बंधन से मुक्त होती जाती है। जब सभी कर्मों का पूर्ण क्षय हो जाता है तभी मोक्ष की प्राप्ति होती है। UPSC प्रीलिम्स में तीनों शब्दों का भेद पूछा जाता है।

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प्रश्न 12. जैन धर्म के ‘अनेकांतवाद’ का क्या अर्थ है?

(A) अनेक ईश्वरों में विश्वास
(B) सत्य के अनेक पक्ष होते हैं — कोई एक दृष्टि पूर्ण नहीं
(C) अनेक जीवों में आत्मा है
(D) अनेक कर्मों का फल मिलता है

उत्तर: (B) सत्य के अनेक पक्ष होते हैं — कोई एक दृष्टि पूर्ण नहीं

📝 ‘अनेकांतवाद’ जैन दर्शन का एक प्रमुख सिद्धांत है जिसका अर्थ है कि किसी भी सत्य के अनेक पक्ष होते हैं और कोई एक दृष्टि सम्पूर्ण सत्य को नहीं जान सकती। इसे ‘Many-sidedness of Reality’ भी कहते हैं। इसी सिद्धांत से ‘स्याद्वाद’ (Doctrine of Conditional Predication) और ‘सप्तभंगीनय’ जुड़े हुए हैं। बौद्ध धर्म में इसके समकक्ष ‘क्षणिकवाद’, ‘प्रतीत्यसमुत्पाद’ और ‘द्वादशनिदान’ जैसे सिद्धांत हैं। जैन दर्शन का अनेकांतवाद एक अत्यंत उदार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है जो यह मानता है कि सत्य सापेक्षिक है।

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प्रश्न 13. दिलवाड़ा के जैन मंदिर का निर्माण किस पर्वत के समीप हुआ?

(A) विंध्याचल
(B) माउंट आबू
(C) गिरनार
(D) पारसनाथ

उत्तर: (B) माउंट आबू

📝 राजस्थान के माउंट आबू पर्वत के समीप दिलवाड़ा में गुजरात के चालुक्य-सोलंकी वंशीय शासक भीम प्रथम के मंत्री ‘विमल’ ने सफेद संगमरमर से प्रसिद्ध जैन मंदिर का निर्माण करवाया था। इस मंदिर में प्रथम जैन तीर्थंकर ऋषभदेव (आदिनाथ) की मूर्ति प्रतिष्ठापित है। इसे ‘आदिशाही का मंदिर’ और ‘विमलशाही का मंदिर’ दोनों नामों से जाना जाता है। यह सफेद संगमरमर की शिल्पकला का एक अद्भुत नमूना है। माउंट आबू राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन है और यह जैन तीर्थ के रूप में भी विख्यात है। UPSC एवं SSC में यह प्रश्न बार-बार आता है।

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प्रश्न 14. जैन धर्म के श्वेतांबर और दिगंबर में मुख्य बाह्य भेद क्या है?

(A) भाषा का भेद
(B) वस्त्र का भेद — श्वेत वस्त्र बनाम नग्नता
(C) पूजा पद्धति का भेद
(D) तीर्थस्थल का भेद

उत्तर: (B) वस्त्र का भेद — श्वेत वस्त्र बनाम नग्नता

📝 जैन धर्म की प्रथम संगीति (300 ईपू, पाटलिपुत्र) के पश्चात् जैन धर्म दो प्रमुख शाखाओं में विभाजित हो गया। ‘श्वेतांबर’ (those who wear white cloth) — स्थूलभद्र के नेतृत्व में — श्वेत वस्त्र धारण करते हैं। ‘दिगंबर’ (wear no cloth or nudes) — भद्रबाहु के नेतृत्व में — नग्न रहते हैं। ‘दिगंबर’ शब्द का अर्थ ही है — जिनके लिए दिशाएँ ही वस्त्र हैं। दोनों सम्प्रदायों में सैद्धांतिक मतभेद भी हैं जैसे 19वें तीर्थंकर मल्लिनाथ के स्त्री या पुरुष होने को लेकर। यह विभाजन आज भी जैन धर्म में विद्यमान है।

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प्रश्न 15. बाहुबली कौन थे जिनकी मूर्ति श्रवणबेलगोला में है?

(A) महावीर के पुत्र
(B) ऋषभदेव के पुत्र
(C) पार्श्वनाथ के शिष्य
(D) चंद्रगुप्त मौर्य के गुरु

उत्तर: (B) ऋषभदेव के पुत्र

📝 श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) में स्थित 70 फीट ऊँची गोमतेश्वर मूर्ति उदार हृदय ‘बाहुबली’ की है जो जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव के पुत्र थे। बाहुबली ने अपने बड़े भाई ‘भरत’ के साथ हुए घोर संघर्ष में विजय प्राप्त की, परंतु उदारता से जीता हुआ राज्य भरत को ही वापस लौटा दिया और स्वयं वैराग्य ग्रहण कर लिया। यह मूर्ति 974 ई० में गंग वंश के मंत्री चामुण्डराय ने बनवाई थी। जैन महामस्तकाभिषेक इसी मूर्ति के लिए प्रत्येक 12 वर्ष में होता है।
जैन धर्म MCQ 2026 ये 25 सवाल बार-बार पूछे जाते हैं | Full Explanation
जैन धर्म के 25 महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न 2026

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प्रश्न 16. चंद्रगुप्त मौर्य ने कर्नाटक के किस पर्वत पर सल्लेखना ग्रहण की थी?

(A) गिरनार पर्वत
(B) चंद्रगिरि पर्वत
(C) विंध्याचल पर्वत
(D) पारसनाथ पर्वत

उत्तर: (B) चंद्रगिरि पर्वत

📝 चंद्रगुप्त मौर्य ने जैन धर्म स्वीकार कर लिया था। जीवन के अंतिम काल में उन्होंने राजगद्दी का परित्याग किया और कर्नाटक के श्रवणबेलगोला (हासन जिला) में स्थित ‘चंद्रगिरि’ नामक पर्वत पर जैन धर्म की सल्लेखना पद्धति (निर्जल-निराहार रहकर प्राण त्याग — Fasting until death) से प्राण त्यागे। श्रवणबेलगोला में दो पहाड़ियाँ हैं — ‘चंद्रगिरि’ और ‘विंध्यगिरि’। गोमतेश्वर की प्रसिद्ध बाहुबली मूर्ति ‘विंध्यगिरि’ पर स्थित है जबकि चंद्रगुप्त की सल्लेखना ‘चंद्रगिरि’ पर हुई। UPSC में यह भेद पूछा जाता है।

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प्रश्न 17. जैन धर्म में वर्णव्यवस्था के विरोध के संदर्भ में बौद्ध धर्म की तुलना में क्या अंतर था?

(A) जैन धर्म ने अधिक तीव्र विरोध किया
(B) बौद्ध धर्म ने अधिक तीव्र प्रहार किया
(C) दोनों ने समान रूप से विरोध किया
(D) किसी ने भी विरोध नहीं किया

उत्तर: (B) बौद्ध धर्म ने अधिक तीव्र प्रहार किया

📝 यद्यपि जैन और बौद्ध दोनों धर्मों ने तत्कालीन जन्माधारित वर्ण और जाति व्यवस्था का विरोध किया, परंतु बौद्ध धर्म ने इस व्यवस्था की बुराइयों पर जितना तीव्र और प्रभावशाली प्रहार किया, उतना जैन धर्म नहीं कर सका। बौद्ध धर्म ने समाज सुधार को अधिक व्यापक रूप से अपनाया और जन-जन तक अपनी बात पहुँचाई। जैन धर्म मुख्यतः व्यक्तिगत मोक्ष और आत्मशुद्धि पर अधिक ध्यान देता था। यह अंतर दोनों धर्मों के सामाजिक प्रभाव और प्रसार में भी दिखता है। UPSC में यह तुलनात्मक प्रश्न महत्वपूर्ण है।

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प्रश्न 18. गौतम बुद्ध की धर्म प्रचार की भाषा क्या थी?

(A) संस्कृत
(B) प्राकृत
(C) पालि
(D) अर्द्धमागधी

उत्तर: (C) पालि

📝 जैन और बौद्ध धर्म की प्रचार भाषाएँ भिन्न थीं। जहाँ महावीर ने ‘अर्द्धमागधी’ अथवा ‘प्राकृत’ भाषा का प्रयोग अपने विचारों के प्रचार के लिए किया, वहीं गौतम बुद्ध ने ‘पालि’ भाषा का प्रयोग किया। दोनों ने जनसाधारण की भाषाओं को अपनाया — न कि संस्कृत को, जो उस काल में केवल ब्राह्मणों की भाषा थी। इससे दोनों के उपदेश व्यापक जनसमुदाय तक पहुँचे। अर्द्धमागधी और पालि दोनों उस समय के मध्य-पूर्वी भारत की बोलचाल की भाषाएँ थीं। यह प्रश्न UPSC प्रीलिम्स, SSC और रेलवे परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है।

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प्रश्न 19. जैन धर्म और बौद्ध धर्म — दोनों ने वेदों के बारे में क्या रुख अपनाया?

(A) दोनों ने वेदों को अपौरुषेय माना
(B) दोनों ने वेदों को अपौरुषेय मानने से इनकार किया
(C) जैन ने माना, बौद्ध ने नहीं माना
(D) बौद्ध ने माना, जैन ने नहीं माना

उत्तर: (B) दोनों ने वेदों को अपौरुषेय मानने से इनकार किया

📝 जैन और बौद्ध — दोनों धर्मों ने वेदों को ‘अपौरुषेय’ (ईश्वर द्वारा निर्मित और अभ्रांत) मानने से स्पष्ट रूप से इनकार किया। यह उस समय की ब्राह्मणीय व्यवस्था के विरुद्ध एक बड़ा वैचारिक विद्रोह था। छठी शताब्दी ईपू में उठे इन 62 धार्मिक सम्प्रदायों में से अधिकांश ने वैदिक परंपरा को चुनौती दी। दोनों धर्मों ने कर्मकांड, यज्ञ और पुरोहित वर्ग की प्रभुसत्ता को भी अस्वीकार किया। दोनों धर्मों के प्रवर्तक क्षत्रिय वर्ण से थे। यह ब्राह्मणीय वर्चस्व के विरुद्ध क्षत्रिय प्रतिक्रिया का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

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प्रश्न 20. महावीर की मृत्यु के समय मल्ल राज्य का राजा कौन था?

(A) चेटक
(B) अजातशत्रु
(C) शस्तिपाल / हस्तिपाल
(D) बिम्बसार

उत्तर: (C) शस्तिपाल / हस्तिपाल

📝 महावीर की मृत्यु 72 वर्ष की अवस्था में पावा में 468 ईपू (कुछ मतों के अनुसार 527 ईपू) में हुई। उस समय मल्ल राजा ‘शस्तिपाल’ या ‘हस्तिपाल’ का दरबार था जहाँ महावीर ने अंतिम सांस ली। पावा वर्तमान बिहार में स्थित है और यह जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है। महावीर की मृत्यु की तिथि को जैन परंपरा में ‘दीपावली’ के रूप में मनाया जाता है। इस प्रकार दीपावली का जैन धर्म में एक विशेष महत्व है जो महावीर के महापरिनिर्वाण से जुड़ा है। BPSC और UPPSC में यह प्रश्न पूछा जाता है।

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प्रश्न 21. जैन धर्म की प्रथम संगीति के समकालीन शासक कौन थे?

(A) अशोक
(B) बिम्बसार
(C) चंद्रगुप्त मौर्य
(D) ध्रुवसेन प्रथम

उत्तर: (C) चंद्रगुप्त मौर्य

📝 जैन धर्म की प्रथम संगीति का आयोजन पाटलिपुत्र (कुसुमपुर) में 300 ईपू के आस-पास हुआ था। इस संगीति के अध्यक्ष ‘स्थूलभद्र’ थे और समकालीन शासक ‘चंद्रगुप्त मौर्य’ थे। इसी चंद्रगुप्त मौर्य ने बाद में जैन धर्म स्वीकार किया और अपने जीवन के अंतिम काल में सल्लेखना पद्धति से श्रवणबेलगोला के चंद्रगिरि पर्वत पर प्राण त्यागे। द्वितीय जैन संगीति (512 ई०, वल्लभी) के समकालीन शासक मैत्रक वंश के ‘ध्रुवसेन प्रथम’ थे। इन दोनों संगीतियों के समकालीन शासकों का भेद परीक्षाओं में पूछा जाता है।

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प्रश्न 22. जैन धर्म के अनुसार मानव की मुक्ति किस पर निर्भर नहीं करती?

(A) तपस्या पर
(B) अहिंसा पर
(C) किसी अलौकिक सत्ता की दया पर
(D) सम्यक् ज्ञान पर

उत्तर: (C) किसी अलौकिक सत्ता की दया पर

📝 जैन धर्म एक अनीश्वरवादी धर्म है। इसके अनुसार कोई ईश्वर या सृष्टिकर्ता नहीं है और मानव की मुक्ति किसी ऐसे अलौकिक सत्ता की दया पर नहीं बल्कि शुद्धता और नैतिकता से परिपूर्ण जीवन जीने से ही संभव है। जैन धर्म के अनुसार — “By living an austere life of Purity and virtue, man can escape the ills of life.” जैन धर्म प्रारंभ में शुद्ध रूप से अनीश्वरवादी था परंतु बाद में अनुयायियों ने महावीर को ईश्वर का रूप दे दिया। यह तथ्य UPSC की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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प्रश्न 23. जैन और बौद्ध धर्म में ‘जन्म-पुनर्जन्म और कर्म’ के सिद्धांत के बारे में क्या समानता है?

(A) दोनों ने इसे अस्वीकार किया
(B) दोनों ने इसमें विश्वास किया
(C) केवल जैन ने स्वीकार किया
(D) केवल बौद्ध ने स्वीकार किया

उत्तर: (B) दोनों ने इसमें विश्वास किया

📝 जैन और बौद्ध धर्म में अनेक समानताएँ हैं। दोनों ने जन्म, पुनर्जन्म और कर्म के सिद्धांत में विश्वास किया। दोनों अनीश्वरवादी धर्म हैं। दोनों अहिंसावादी हैं। दोनों ने जन्माधारित वर्णव्यवस्था का विरोध किया। दोनों ने वेदों की प्रामाणिकता को अस्वीकार किया। दोनों के प्रवर्तक क्षत्रिय राजघरानों से थे। हालाँकि कर्म सिद्धांत के विश्लेषण में जैन धर्म बौद्ध धर्म की तुलना में अधिक विस्तृत है। जैन धर्म में ‘आसव’, ‘संवर’, ‘निर्जरा’ जैसी विस्तृत कर्म शब्दावली है।

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प्रश्न 24. जैन और बौद्ध धर्म में अहिंसा की तुलना में कौन सा धर्म अधिक कट्टर है?

(A) बौद्ध धर्म
(B) दोनों समान
(C) जैन धर्म
(D) यह स्थिति पर निर्भर करता है

उत्तर: (C) जैन धर्म

📝 यद्यपि जैन और बौद्ध दोनों अहिंसावादी धर्म हैं, परंतु अहिंसा के मामले में जैन धर्म, बौद्ध धर्म की तुलना में अधिक कट्टर है। जैन साधु-साध्वी जमीन पर चलते समय भी सूक्ष्म जीवों को न कुचलें इसलिए मुँह पर ‘मुहपत्ती’ बाँधते हैं और पैरों के नीचे की जमीन झाड़ते हुए चलते हैं। जैन धर्म की अतिमार्गीय प्रकृति इसी कट्टर अहिंसा में परिलक्षित होती है। बौद्ध धर्म मध्यममार्गीय होने के कारण अहिंसा का पालन तो करता है परंतु उतनी कट्टरता से नहीं। जैन धर्म में कृषि कार्य भी अहिंसा के कारण वर्जित माना गया क्योंकि इसमें जीवों की हत्या होती है।

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प्रश्न 25. जैन धर्म के ‘त्रिरत्न’ में ‘सम्यक् चरित्र’ के साथ अन्य दो क्या हैं?

(A) सम्यक् तप और सम्यक् दान
(B) सम्यक् श्रद्धा और सम्यक् ज्ञान
(C) सम्यक् वाणी और सम्यक् कर्म
(D) सम्यक् ध्यान और सम्यक् संकल्प

उत्तर: (B) सम्यक् श्रद्धा और सम्यक् ज्ञान

📝 जैन धर्म में मोक्ष प्राप्ति का मार्ग ‘त्रिरत्न’ है जिसके तीन तत्व हैं — (1) सम्यक् श्रद्धा या दर्शन (Right Faith), (2) सम्यक् ज्ञान (Right Knowledge), और (3) सम्यक् चरित्र (Right Conduct)। ये तीनों मिलकर ‘त्रिरत्न’ कहलाते हैं। इसके विपरीत बौद्ध धर्म का ‘अष्टांगिक मार्ग’ मोक्ष का मार्ग है जिसमें सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाणी, सम्यक् कर्म, सम्यक् आजीव, सम्यक् प्रयास, सम्यक् स्मृति और सम्यक् समाधि शामिल हैं। UPSC एवं SSC में जैन त्रिरत्न और बौद्ध अष्टांगिक मार्ग का तुलनात्मक प्रश्न बार-बार आता है।
जैन धर्म MCQ 2026 ये 25 सवाल बार-बार पूछे जाते हैं
जैन धर्म | तीर्थंकर, महावीर, त्रिरत्न, संगीति, पंचमहाव्रत Explained MCQ 2026

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