वैदिक काल MCQ 2026: Top 25 Questions for UPSC/SSC

Vedic Period MCQ for UPSC in Hindi | वैदिक काल के महत्वपूर्ण प्रश्न

प्राचीन भारत का इतिहास भाग-26 MCQ-2026

वैदिक काल MCQ (1-25) | Vedic Period Questions for UPSC MCQ 2026

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प्रश्न 1. ऋग्वैदिक आर्यों की जीवनशैली को कैसे वर्णित किया जाता है?

(A) पूर्णतः यायावर
(B) पूर्णतः स्थायी
(C) अर्द्धयायावर
(D) पूर्णतः कृषि आधारित

उत्तर: (C) अर्द्धयायावर

ऋग्वैदिक काल के आर्यों की जीवनशैली ‘अर्द्धयायावर’ (semi-nomadic) थी। इसका मतलब है कि वे पूरी तरह घुमंतू नहीं थे और न ही पूरी तरह स्थायी रूप से बसे हुए थे। वे पशुपालन के लिए अपने झुंडों को चराने के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाते थे। इसके बावजूद उन्होंने कुछ स्थायी बस्तियाँ भी बसाई थीं। समय के साथ, उत्तर वैदिक काल में आर्य स्थायी रूप से बसने लगे और कृषि उनके मुख्य व्यवसाय बन गई। इससे सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन हुआ और गंगा के मैदानी इलाकों में नई बस्तियाँ और राज्य / महाजनपद विकसित हुए। यह बदलाव भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था।

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प्रश्न 2. उत्तर वैदिक काल में ‘लौह अयस’ किसे कहा जाता था?

(A) लोहे को
(B) ताँबे को
(C) सोने को
(D) कांसे को

उत्तर: (B) ताँबे को

उत्तर वैदिक काल में ‘अयस’ यानी धातु के दो रूपों का उल्लेख मिलता है — ‘लौह अयस’ जो ताँबे के लिए प्रयुक्त होता था और ‘कृष्ण अयस’ जो लोहे के लिए। यह नाम कुछ भ्रमित करने वाला लगता है, क्योंकि ‘लौह’ का मतलब सामान्यतः लोहे से होता है। लेकिन यहाँ ‘लौह’ का अर्थ लाल या ताम्र रंग से है। ताँबे का रंग लाल-नारंगी होता है, इसलिए उसे ‘लौह अयस’ कहा गया। वहीं, लोहा काले रंग का होता था इसलिए उसे ‘कृष्ण अयस’ कहा गया। ऋग्वैदिक काल में अधिकांशतः केवल एक अयस का ही प्रयोग था, जो ताँबा या कांसा था। यह तथ्य भारतीय धातु-उद्योग और कृषि उपकरणों के विकास के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है।

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प्रश्न 3. षड्दर्शन में से कौन-सा दर्शन परमाणु सिद्धांत के लिए प्रसिद्ध है?

(A) सांख्य दर्शन
(B) योग दर्शन
(C) वैशेषिक दर्शन
(D) पूर्व मीमांसा

उत्तर: (C) वैशेषिक दर्शन

वैशेषिक दर्शन के प्रणेता महर्षि कणाद हैं। इस दर्शन में परमाणु सिद्धांत (Atomic Theory) का प्रतिपादन किया गया। कणाद ने माना कि सम्पूर्ण सृष्टि छोटे-छोटे परमाणुओं से बनी है। यह विचार आधुनिक विज्ञान के परमाणु सिद्धांत से काफी मिलता-जुलता है। वैशेषिक दर्शन यथार्थवादी, विश्लेषणात्मक और वस्तुवादी है। इसमें 9 द्रव्य बताए गए हैं — पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश, काल, दिक्, आत्मा और मन। इस दर्शन के अनुसार, इन द्रव्यों से ही सम्पूर्ण सृष्टि की रचना होती है। यह भारतीय दर्शन की वैज्ञानिक दृष्टि का प्रमाण है।
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प्रश्न 4. वैशेषिक दर्शन के प्रणेता कौन हैं?

(A) पतंजलि
(B) कपिल मुनि
(C) जैमिनि
(D) महर्षि कणाद

उत्तर: (D) महर्षि कणाद

वैशेषिक दर्शन के प्रणेता महर्षि कणाद हैं। उनका वास्तविक नाम ‘उलूक’ था, लेकिन परमाणु (कण) सिद्धांत के प्रतिपादन के कारण उन्हें ‘कणाद’ कहा गया। उनका मुख्य ग्रंथ ‘वैशेषिकसूत्र’ है। इसके अलावा, भारतीय दर्शन में अन्य प्रणेताओं में शामिल हैं: सांख्य दर्शन के प्रणेता कपिल मुनि, योग दर्शन के प्रणेता पतंजलि, और पूर्व मीमांसा के प्रणेता जैमिनिन्याय दर्शन के प्रणेता गौतम और उत्तर मीमांसा (वेदांत) के प्रणेता बादरायण (व्यास) माने जाते हैं।
ये सभी भारतीय दर्शन के महान ऋषि और दार्शनिक थे।

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प्रश्न 5. सांख्य दर्शन के प्रणेता कौन हैं?

(A) पतंजलि
(B) कपिल मुनि
(C) जैमिनि
(D) गौतम

उत्तर: (B) कपिल मुनि

सांख्य दर्शन के प्रणेता महर्षि कपिल हैं। यह भारतीय दर्शन का सबसे प्राचीन दर्शन माना जाता है। इसमें पुरुष (चेतन तत्त्व) और प्रकृति (जड़ तत्त्व) को दो स्वतंत्र तत्त्व माना गया है, इसलिए इसे द्वैतवादी दर्शन कहा जाता है। इसके अनुसार, सम्पूर्ण जगत प्रकृति से उत्पन्न हुआ है और पुरुष (आत्मा) केवल साक्षी है। सांख्य दर्शन का प्रमुख ग्रंथ ‘सांख्यकारिका’ है, जिसे ईश्वरकृष्ण ने लिखा।
इसके अलावा, पतंजलि का योग दर्शन सांख्य दर्शन पर आधारित है और इसे सांख्य का व्यावहारिक स्वरूप माना जाता है।

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प्रश्न 6. ऋग्वेद में उल्लिखित ‘निष्क’ किस धातु का आभूषण था?

(A) चांदी
(B) तांबा
(C) सोना
(D) लोहा

उत्तर: (C) सोना

ऋग्वेद में ‘निष्क’ एक सोने का कीमती हार था जिसे गले में पहना जाता था। यह वैदिक काल में स्वर्णाभूषणों के प्रचलन का प्रमाण है। निष्क को धन और सम्पत्ति के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता था। बाद के काल में, निष्क एक प्रकार का सिक्का भी बन गया। ऋग्वैदिक काल में सोने के आभूषण बनाने की कला का ज्ञान था और सोने को ‘हिरण्य’ कहा जाता था। इस प्रकार, वैदिक आभूषण और मुद्रा से संबंधित जानकारी को समझने में मदद करता है।

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प्रश्न 7. ऋग्वैदिक काल में ‘गविष्ठि’ या ‘गवेष्णा’ का क्या अर्थ था?

(A) गाय की देखभाल
(B) गाय की खोज या युद्ध
(C) धनी व्यक्ति
(D) पुत्री

उत्तर: (B) गाय की खोज या युद्ध

ऋग्वैदिक काल में ‘गविष्ठि’ या ‘गवेष्णा’ शब्द का अर्थ था गाय की खोज या युद्ध। इसका मतलब है कि उस समय गायों की चोरी और उन्हें वापस पाने के लिए युद्ध होना आम बात थी। गायों की पुनः प्राप्ति के लिए किए जाने वाले अभियान को गविष्ठि कहा जाता था। बाद में यह शब्द अन्वेषण (investigation/research) के अर्थ में भी प्रयोग होने लगा। आज अनुसंधान के लिए गवेषणा शब्द प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा, गोमत का अर्थ था धनी और दुहिता का अर्थ था पुत्री। यह तथ्य वैदिक समाज की सामाजिक और आर्थिक जीवन शैली को समझने में मदद करता है।

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प्रश्न 8. ऋग्वेद के अनुसार ‘अहन्या’ किसे कहा जाता था?

(A) जिस गाय को विशेष रूप से पाला जाए
(B) जिस गाय की हत्या न की जाए (अतिथि)
(C) धार्मिक अनुष्ठान में दी गई गाय
(D) गायों का झुंड

उत्तर: (B) जिस गाय की हत्या न की जाए (अतिथि)

ऋग्वेद में ‘अहन्या’ शब्द उस गाय के लिए प्रयोग होता था जिसकी हत्या न की जाए। इसका तात्पर्य ‘अतिथि’ से भी जोड़ा गया था — अर्थात् वैदिक काल में अतिथि को भी सम्मान और सुरक्षाभारत की “अतिथि देवो भव” संस्कृति का प्रतीक है। वैदिक काल से ही गाय की पवित्रता और उसकी हत्या पर निषेध की परंपरा शुरू हो गई थी। इसके अलावा, ‘अघन्या’ शब्द भी इसी अर्थ में प्रयोग होता था। यह तथ्य गोसंरक्षण और वैदिक संस्कृति को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

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प्रश्न 9. उत्तर वैदिक काल में कृषि के विस्तार का मुख्य कारण क्या था?

(A) जनसंख्या में कमी
(B) भारी हलों का विकास और गहरी जुताई की संभावना
(C) वर्षा में वृद्धि
(D) व्यापार में वृद्धि

उत्तर: (B) भारी हलों का विकास और गहरी जुताई की संभावना

उत्तर वैदिक काल में हल काफी भारी बनने लगे थे। काठक संहिता में 24 बैलों से हल चलाने का उल्लेख मिलता है, जो यह दर्शाता है कि खेती में तकनीकी उन्नति हुई थी। भारी हलों से खेतों की गहरी जुताई संभव हुई, जिससे भूमि की उर्वरता बढ़ी और अधिक क्षेत्र में कृषि होने लगी। इसके साथ ही लोहे का ज्ञान (लगभग 1000 ई.पू.) कृषि औजारों को और प्रभावी बनाने में मददगार साबित हुआ। स्थायी बसाहट और जनसंख्या वृद्धि ने भी कृषि के विस्तार को प्रेरित किया। यह उत्तर वैदिक काल की कृषि क्रांति में एक महत्त्वपूर्ण विषय है।

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प्रश्न 10. निम्नलिखित में से कौन-सी विदुषी ऋषि अगस्त्य की पत्नी थीं?

(A) अपाला
(B) घोषा
(C) विश्वावरी
(D) लोपामुद्रा

उत्तर: (D) लोपामुद्रा

लोपामुद्रा ऋषि अगस्त्य की पत्नी थीं और ऋग्वैदिक काल की सबसे प्रसिद्ध विदुषी मानी जाती हैं। उन्होंने ऋग्वेद के कई मंत्रों की रचना की और विवाह के बाद भी अपनी विद्वत्ता और आत्मसम्मान बनाए रखा। ऋग्वेद में उनके और अगस्त्य के बीच संवाद मिलता है, जिसमें वे गृहस्थ जीवन और संन्यास जीवन के बीच संतुलन पर चर्चा करती हैं। इसके अलावा, उत्तर वैदिक काल में अन्य प्रमुख विदुषियाँ थीं जैसे अपाला, घोषा, विश्वावरी, निवावरी और सिक्ता, जिन्होंने समाज में विद्वता और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दिया। लोपामुद्रा का उदाहरण इस बात को दर्शाता है कि वैदिक काल में महिलाएँ भी ज्ञान और सामाजिक सम्मान प्राप्त कर सकती थीं।

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प्रश्न 11. ऋग्वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था का आधार क्या था?

(A) जन्म
(B) कर्म
(C) धन
(D) शिक्षा

उत्तर: (B) कर्म

ऋग्वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था का आधार जन्म नहीं बल्कि कर्म था। इसका मतलब है कि व्यक्ति की जाति उसके किए गए कार्य से तय होती थी। उदाहरण के लिए, जो व्यक्ति विद्या-अध्ययन करता था उसे ब्राह्मण, जो युद्ध करता था उसे क्षत्रिय, जो व्यापार करता था उसे वैश्य, और जो सेवा कार्य करता था उसे शूद्र माना जाता था। लेकिन उत्तर वैदिक काल में यह व्यवस्था बदलकर जन्म-आधारित हो गई। इस बदलाव ने भारतीय समाज में जाति व्यवस्था की नींव को मजबूत किया और दीर्घकालिक सामाजिक प्रभाव डाले।

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प्रश्न 12. उत्तर वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था का आधार क्या हो गया?

(A) कर्म
(B) शिक्षा
(C) जन्म
(D) धन-संपत्ति

उत्तर: (C) जन्म

उत्तर वैदिक काल (लगभग 1000 ई.पू. से 600 ई.पू.) में वर्ण व्यवस्था का स्वरूप पूरी तरह बदल गया। जहां ऋग्वैदिक काल में यह कर्म-आधारित थी, वहीं उत्तर वैदिक काल में यह जन्म-आधारित हो गई। अब व्यक्ति की वर्ण-स्थिति उसके जन्म से तय होने लगी। इस बदलाव ने भारतीय समाज में जाति-व्यवस्था की कठोर नींव रखी और ब्राह्मणों का वर्चस्व अत्यधिक बढ़ गया। यह परिवर्तन भारतीय सामाजिक इतिहास का एक महत्त्वपूर्ण मोड़ माना जाता है। यह विषय सामाजिक संरचना को समझने के लिए जरूरी है।
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प्रश्न 13. ऋग्वैदिक काल में आर्यों के वस्त्र कितने प्रकार के होते थे?

(A) दो
(B) तीन
(C) चार
(D) पाँच

उत्तर: (B) तीन

ऋग्वैदिक काल के आर्यों के वस्त्र मुख्यतः तीन प्रकार के होते थे — वास (निचला वस्त्र), अधिवास (शाल की तरह ओढ़ा जाने वाला वस्त्र), और नीवि (अंडर गारमेंट्स)। वास और अधिवास बाहरी वस्त्र थे, जबकि नीवि शरीर के निकट पहना जाने वाला अंतर्वस्त्र था। इन वस्त्रों में सूती और ऊनी कपड़े दोनों प्रयुक्त होते थे। ऋग्वेद के छठे मंडल में बुनाई का उल्लेख मिलता है, जिससे वैदिक काल में वस्त्र-निर्माण और परंपरा की जानकारी मिलती है। यह तथ्य वैदिक जीवनशैली को समझने में मदद करता है। इस प्रकार, आर्यों की वस्त्र-परंपरा उनकी सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी।

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प्रश्न 14. ऋग्वैदिक काल में ‘अधिवास’ क्या था?

(A) अंडर गारमेंट
(B) निचला वस्त्र
(C) शाल की तरह ओढ़ा जाने वाला वस्त्र
(D) सिर पर पहना जाने वाला वस्त्र

उत्तर: (C) शाल की तरह ओढ़ा जाने वाला वस्त्र

ऋग्वैदिक काल में अधिवास शाल की तरह ओढ़ा जाने वाला वस्त्र था, जबकि वास निचला वस्त्र और नीवि अंडर गारमेंट के रूप में पहना जाता था। ‘अधि’ उपसर्ग का अर्थ होता है ऊपर, इसलिए अधिवास शरीर के ऊपर ओढ़ा जाने वाला था और यह ठंड और धूप से सुरक्षा प्रदान करता था। वैदिक काल में वस्त्र ऊन और कपास दोनों से बनाए जाते थे। वस्त्र बनाने का कार्य वाय (जुलाहे) करते थे और करघा को तसर कहा जाता था। यह जानकारी वैदिक सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन को समझने में मदद करती है। ऋग्वैदिक वस्त्र-परंपरा इस काल की सांस्कृतिक धरोहर का अहम हिस्सा थी।

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प्रश्न 15. ऋग्वैदिक काल में ‘नीवि’ क्या था?

(A) निचला वस्त्र
(B) शाल
(C) अंडर गारमेंट्स
(D) सिर पर ओढ़ने वाला वस्त्र

उत्तर: (C) अंडर गारमेंट्स

ऋग्वैदिक काल में नीवि अंडर गारमेंट्स (अंतर्वस्त्र) थी, जो शरीर के निकटतम पहनी जाती थी। इसके विपरीत, वास निचला वस्त्र (धोती जैसा) और अधिवास शाल जैसा ऊपरी वस्त्र था। वैदिक काल में वस्त्र-निर्माण एक विकसित कला थी और ऋग्वेद में विभिन्न प्रकार के वस्त्रों और उनकी बुनाई का वर्णन मिलता है। ‘नीवि’ शब्द बाद के संस्कृत साहित्य में भी प्रयुक्त हुआ, जहाँ यह कमर के पास बँधे वस्त्र के लिए इस्तेमाल होता था।

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प्रश्न 16. ऋग्वैदिक काल में जौ के सतु को दही में मिलाकर बनाए जाने वाले खाद्य पदार्थ को क्या कहते थे?

(A) यव
(B) करंभ
(C) महाव्रीहि
(D) सोम

उत्तर: (B) करंभ

ऋग्वैदिक काल में जौ (यव) के सतु को दही में मिलाकर करंभ बनाया जाता था, जो वैदिक आर्यों का एक प्रमुख खाद्य पदार्थ था। यह दर्शाता है कि वैदिक काल में भोजन सरल और स्थानीय उत्पादों पर आधारित था। जौ इस काल की एकमात्र मुख्य फसल थी और इससे विभिन्न प्रकार के भोजन तैयार किए जाते थे। वैदिक आर्य शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के भोजन करते थे। सोम एक औषधीय पौधे का रस था, जिसे धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयोग किया जाता था। यह तथ्य वैदिक जीवनशैली को समझने में मदद करता है।

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प्रश्न 17. मैत्रायणी संहिता में पुरुष की तीन अनिवार्य बुराइयों में किसे गिना गया है?

(A) क्रोध, लोभ और मोह
(B) जुआ, शराब और स्त्री
(C) चोरी, झूठ और हिंसा
(D) आलस्य, ईर्ष्या और क्रोध

उत्तर: (B) जुआ, शराब और स्त्री

मैत्रायणी संहिता में बताया गया है कि स्त्रियों को जुआ और शराब के साथ पुरुष की तीन अनिवार्य बुराइयों में गिना गया। यह उत्तर वैदिक काल में स्त्रियों की गिरती हुई सामाजिक स्थिति का प्रमाण है। मैत्रायणी संहिता कृष्ण यजुर्वेद की एक शाखा है। इस काल में समाज का स्त्रियों के प्रति दृष्टिकोण नकारात्मक होता जा रहा था। इसी प्रवृत्ति के प्रमाण अथर्ववेद में कन्या के जन्म की निंदा और तैत्तिरीय आरण्यक में स्त्रियों को शूद्रवत् बताना हैं। यह जानकारी वैदिक समाज को समझने में मदद करती है।

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प्रश्न 18. तैत्तिरीय आरण्यक में स्त्रियों को किसके समान बताया गया है?

(A) देवी के समान
(B) क्षत्रिय के समान
(C) शूद्रवत् पतित
(D) ब्राह्मण के समान

उत्तर: (C) शूद्रवत् पतित

तैत्तिरीय आरण्यक में स्त्रियों को ‘शूद्रवत् पतित’ बताया गया है, जो उत्तर वैदिक काल में स्त्रियों की गिरती हुई सामाजिक स्थिति का स्पष्ट प्रमाण है। यह ग्रंथ कृष्ण यजुर्वेद से संबंधित है और वैदिक शिक्षा में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। ‘आरण्यक’ शब्द इसलिए है क्योंकि यह वन में अध्ययन किए जाने वाले ग्रंथों को कहते हैं। ऋग्वैदिक काल में स्त्रियाँ विदथ और सभा में भाग लेती थीं, लेकिन उत्तर वैदिक काल में उनकी भागीदारी समाप्त हो गई। यह तथ्य वैदिक समाज के अध्ययन में उपयोगी है।

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प्रश्न 19. वृहदारण्यक उपनिषद में किन दो महान व्यक्तित्वों के बीच दार्शनिक वाद-विवाद का वर्णन है?

(A) याज्ञवल्क्य और मैत्रेयी
(B) गार्गी और जनक
(C) याज्ञवल्क्य और गार्गी
(D) अगस्त्य और लोपामुद्रा

उत्तर: (C) याज्ञवल्क्य और गार्गी

वृहदारण्यक उपनिषद में विदेह के राजा जनक के दरबार में गार्गी और याज्ञवल्क्य के बीच एक महत्वपूर्ण दार्शनिक वाद-विवाद हुआ। गार्गी वचक्नवी उत्तर वैदिक काल की एक महान विदुषी थीं, जिन्होंने याज्ञवल्क्य जैसे प्रसिद्ध ऋषि को कठिन प्रश्नों से चुनौती दी। वृहदारण्यक उपनिषद शुक्ल यजुर्वेद का हिस्सा है और यह सबसे बड़ा उपनिषद माना जाता है। याज्ञवल्क्य उत्तर वैदिक काल के सर्वाधिक प्रसिद्ध दार्शनिक ऋषि थे। यह वाद-विवाद और उपनिषदों से संबंधित ज्ञान UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है और वैदिक दार्शनिक दृष्टिकोण को समझने में मदद करता है।

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प्रश्न 20. वृहदारण्यक उपनिषद में वर्णित दार्शनिक वाद-विवाद किसके दरबार में हुआ?

(A) राजा अजातशत्रु के दरबार में
(B) विदेह के राजा जनक के दरबार में
(C) राजा परीक्षित के दरबार में
(D) राजा बिम्बिसार के दरबार में

उत्तर: (B) विदेह के राजा जनक के दरबार में

वृहदारण्यक उपनिषद में याज्ञवल्क्य और गार्गी के बीच दार्शनिक वाद-विवाद विदेह के राजा जनक के दरबार में हुआ। राजा जनक उत्तर वैदिक काल के एक विद्वान और दार्शनिक राजा थे, जिन्हें ज्ञान और दर्शन के संरक्षक के रूप में जाना जाता है। विदेह राज्य वर्तमान बिहार के मिथिला क्षेत्र में स्थित था। राजा जनक को ‘विदेह’ कहा जाता था, जिसका अर्थ है शरीर की आसक्ति से मुक्त। माना जाता है कि सीता के पिता जनक भी इसी वंश के थे। यह तथ्य वैदिक दार्शनिक परंपरा को समझने में मदद करता है।

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प्रश्न 21. अथर्ववेद में किसकी निंदा की गई है?

(A) पुत्र के जन्म की
(B) कन्या के जन्म की
(C) विधवा पुनर्विवाह की
(D) नियोग प्रथा की

उत्तर: (B) कन्या के जन्म की

अथर्ववेद में कन्या के जन्म की निंदा की गई है, जो उत्तर वैदिक काल में स्त्रियों के प्रति बदलते सामाजिक दृष्टिकोण का प्रमाण है। ऋग्वैदिक काल में ऐसा कोई नकारात्मक दृष्टिकोण नहीं था और उस समय पुत्र और कन्या दोनों का समान स्वागत होता था। अथर्ववेद में पुत्र के जन्म के लिए भी प्रार्थनाएँ और मंत्र मौजूद हैं। उसी काल में ऐतरेय ब्राह्मण में कन्या को ‘चिंता का स्पष्ट कारण’ बताया गया। यह परिवर्तन पुत्र-प्रधान समाज के विकास का संकेत है, जिसने बाद में दहेज प्रथा और कन्या-भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथाओं की नींव रखी।

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प्रश्न 22. ऐतरेय ब्राह्मण में कन्या को क्या बताया गया है?

(A) सौभाग्य का स्रोत
(B) देवी का स्वरूप
(C) चिंता का स्पष्ट कारण
(D) परिवार की शोभा

उत्तर: (C) चिंता का स्पष्ट कारण

ऐतरेय ब्राह्मण में कन्या को ‘चिंता का स्पष्ट कारण’ बताया गया है। ऐतरेय ब्राह्मण ऋग्वेद से संबंधित एक ब्राह्मण ग्रंथ है। उत्तर वैदिक काल में स्त्रियों की स्थिति में गिरावट आई और उनका समाज में महत्त्व कम हो गया। ऋग्वैदिक काल में ऐसा नकारात्मक दृष्टिकोण नहीं था और विदुषी स्त्रियों को सम्मान मिलता था। अथर्ववेद में भी कन्या के जन्म की निंदा की गई। यह सामाजिक परिवर्तन पितृसत्तात्मक समाज के सुदृढ़ीकरण का संकेत देता है।

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प्रश्न 23. उत्तर वैदिक काल में विदथ का क्या हुआ?

(A) इसका महत्त्व और बढ़ गया
(B) इसका महत्त्व समाप्त हो गया
(C) यह एक नई संस्था में बदल गई
(D) इसमें स्त्रियों की भागीदारी बढ़ गई

उत्तर: (B) इसका महत्त्व समाप्त हो गया

उत्तर वैदिक काल में विदथ का महत्त्व पूरी तरह समाप्त हो गया। ऋग्वैदिक काल में विदथ सबसे प्राचीन और महत्त्वपूर्ण जनजातीय सभा थी जिसमें स्त्री-पुरुष दोनों भाग लेते थे। उत्तर वैदिक काल में विदथ और सभा दोनों में स्त्रियों की भागीदारी समाप्त हो गई और बाद में विदथ संस्था का अस्तित्व ही समाप्त हो गया। इस काल में समिति और सभा का महत्त्व कुछ बना रहा। इस परिवर्तन से वैदिक काल के लोकतांत्रिक संस्थाओं के ह्रास का पता चलता है। यह तथ्य UPSC में वैदिक राजनीतिक संस्थाओं पर पूछे जाने वाले प्रश्नों के लिए महत्त्वपूर्ण है।

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प्रश्न 24. उत्तर वैदिक काल की प्रमुख विदुषियों में से कौन-सी विदुषी वृहदारण्यक उपनिषद में याज्ञवल्क्य से शास्त्रार्थ के लिए प्रसिद्ध हैं?

(A) मैत्रेयी
(B) सुलभा
(C) गार्गी
(D) कात्यायनी

उत्तर: (C) गार्गी

उत्तर वैदिक काल की प्रमुख विदुषियों में गार्गी वचक्नवी विशेष रूप से प्रसिद्ध थीं। वे वृहदारण्यक उपनिषद में याज्ञवल्क्य के साथ शास्त्रार्थ के लिए जानी जाती थीं। उन्होंने विदेह के राजा जनक के दरबार में ब्रह्म और आत्मा के विषय में कठिन और गहन प्रश्न पूछे। याज्ञवल्क्य की पत्नी मैत्रेयी भी एक महान विदुषी थीं और दर्शन में गहरी रुचि रखती थीं। सुलभा, कात्यायनी और प्राशितैयी अन्य प्रसिद्ध विदुषियां थीं।

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प्रश्न 25. याज्ञवल्क्य की पत्नी के रूप में कौन-सी विदुषी प्रसिद्ध थीं?

(A) गार्गी
(B) मैत्रेयी
(C) सुलभा
(D) वडवा

उत्तर: (B) मैत्रेयी

मैत्रेयी याज्ञवल्क्य की पत्नी थीं और उत्तर वैदिक काल की एक महान विदुषी मानी जाती थीं। जब याज्ञवल्क्य संन्यास लेने वाले थे, तो उन्होंने मैत्रेयी से पूछा कि क्या वे उनकी संपत्ति चाहती हैं। मैत्रेयी ने उत्तर दिया — “यदि संपत्ति से अमरत्व नहीं मिलता, तो मुझे उसकी क्या आवश्यकता?” यह संवाद वृहदारण्यक उपनिषद में मिलता है और भारतीय आध्यात्मिक चिंतन का एक अमूल्य रत्न है। याज्ञवल्क्य की दूसरी पत्नी का नाम कात्यायनी था। मैत्रेयी को ब्रह्मवादिनी भी कहा जाता है।
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