
प्राचीन भारत का इतिहास भाग-09 MCQ-2026
हड़प्पा सभ्यता MCQs 2026 | मुहरें, योग, व्यापार, तौल और अन्नागार से जुड़े Top Questions
Real Education Factory
प्रश्न 1. हड़प्पा सभ्यता में ‘मुहरें’ (Seals) किस सामग्री से बनती थीं?
(A) सोने और चाँदी से
(B) मुख्यतः सेलाखड़ी (Steatite) से; कुछ ताँबे, काँसे, हाथी दाँत से भी
(C) केवल मिट्टी से
(D) केवल पत्थर से
✅ उत्तर: (B) मुख्यतः सेलाखड़ी (Steatite) से; कुछ ताँबे, काँसे, हाथी दाँत से भी
हड़प्पा सभ्यता में मुहरें (Seals) महत्वपूर्ण वस्तु थीं। ये मुहरें मुख्यतः सेलाखड़ी (Steatite) से बनाई जाती थीं, जो बलूचिस्तान (पाकिस्तान) से प्राप्त होती थी। इसके अलावा कुछ मुहरें ताँबे, काँसे और हाथी दाँत से भी बनाई जाती थीं। अधिकांश मुहरें आयताकार आकार की होती थीं और उन पर पशुओं की आकृतियाँ (विशेषकर एकश्रृंगीय पशु) तथा हड़प्पाई लिपि अंकित होती थी। इनका उपयोग व्यापार और प्रशासन दोनों में किया जाता था। लोथल से फारस की मुहरों का मिलना इस बात का प्रमाण है कि हड़प्पा सभ्यता के फारस से व्यापारिक संबंध थे।
Real Education Factory
प्रश्न 2. हड़प्पाई मुहरों पर सर्वाधिक किस पशु का चित्र मिलता है?
(A) हाथी
(B) एकश्रृंगीय पशु (Unicorn)
(C) बाघ
(D) भैंसा
✅ उत्तर: (B) एकश्रृंगीय पशु (Unicorn)
हड़प्पाई मुहरों पर सबसे ज्यादा एकश्रृंगीय पशु (Unicorn) का चित्र मिलता है। यह संभवतः बैल की पार्श्व-दृश्य आकृति है जिसमें केवल एक सींग दिखता है। अलेक्जेंडर कनिंघम ने 1875 में हड़प्पा की इस चित्राक्षर एकश्रृंगीय मुहर की पहली रिपोर्ट भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में प्रकाशित की थी। इसके अलावा मुहरों पर हाथी, बाघ, भैंसा, गैंडा, हिरन और कूबडदार बैल के चित्र भी पाए जाते हैं। ये मुहरें हड़प्पा सभ्यता की शिल्पकला और पशु प्रतीकों की जानकारी देती हैं।
Real Education Factory
प्रश्न 3. हड़प्पा सभ्यता में ‘मृतकों के शव के साथ क्या वस्तुएँ दफनाई जाती थीं?
(A) केवल हथियार
(B) दैनिक उपयोग की वस्तुएँ — मृद्भाण्ड, आभूषण, भोजन आदि और कभी-कभी पशु भी
(C) केवल सोने के आभूषण
(D) कोई वस्तु नहीं दफनाई जाती थी
✅ उत्तर: (B) दैनिक उपयोग की वस्तुएँ — मृद्भाण्ड, आभूषण, भोजन आदि और कभी-कभी पशु भी
हड़प्पाई मुहरों पर सबसे ज्यादा एकश्रृंगीय पशु (Unicorn) का चित्र मिलता है, जो संभवतः बैल की पार्श्व-दृश्य आकृति है जिसमें केवल एक सींग दिखता है। इन मुहरों का सबसे पहले अध्ययन अलेक्जेंडर कनिंघम ने 1875 में किया और इसकी रिपोर्ट भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में प्रकाशित हुई। इसके अलावा मुहरों पर हाथी, बाघ, भैंसा, गैंडा, हिरन और कूबडदार बैल के चित्र भी पाए जाते हैं। ये मुहरें हड़प्पा सभ्यता की शिल्पकला, पशु प्रतीक और प्रशासनिक तकनीक को दिखाती हैं। इसके अलावा, इन मुहरों का प्रयोग व्यापार, लेन-देन और पहचान के लिए भी किया जाता था। कुल मिलाकर, ये मुहरें हड़प्पा समाज की संगठित संस्कृति और व्यापारिक संबंध का प्रमाण हैं।
Real Education Factory
प्रश्न 4. हड़प्पा सभ्यता में ‘व्यापार’ के लिए किस प्रकार की मुहरों का प्रयोग किया जाता था?
(A) सोने की मुहरें
(B) सेलाखड़ी की मुहरें जिन पर पशु और लिपि अंकित होती थी
(C) मिट्टी की मुहरें
(D) लकड़ी की मुहरें
✅ उत्तर: (B) सेलाखड़ी की मुहरें जिन पर पशु और लिपि अंकित होती थी
हड़प्पाई मुहरें (Seals) मुख्यतः सेलाखड़ी (Steatite) से बनाई जाती थीं। इन मुहरों पर हड़प्पाई लिपि और विभिन्न पशुओं के चित्र अंकित होते थे। ये मुहरें व्यापारिक लेनदेन, माल की पहचान और प्रशासनिक कार्यों में प्रयोग होती थीं। लोथल से मिली फारसी मुहरें और मोहनजोदड़ो से मिली मेसोपोटामियाई मुहरें हड़प्पा और अन्य सभ्यताओं के बीच व्यापारिक संबंध का प्रमाण हैं। इन मुहरों में 16 या उसके गुणक में तौल होती थी, जो उनकी व्यापारिक और आर्थिक प्रणाली की जानकारी देती हैं। कुल मिलाकर ये मुहरें हड़प्पा सभ्यता की उन्नत शिल्पकला, प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का प्रमाण हैं।
Real Education Factory
प्रश्न 5. हड़प्पाई ‘योग’ परंपरा के दो मुख्य साक्ष्य कौन-से हैं?
(A) दो मूर्तियाँ — हड़प्पा और लोथल से
(B) पद्मासन मुद्रा (पशुपति शिव मुहर) और शाम्भवी मुद्रा (खंडित मूर्ति) — दोनों मोहनजोदड़ो से
(C) दो मुहरें — कालीबंगा और बणावली से
(D) एक मुहर और एक ग्रंथ
✅ उत्तर: (B) पद्मासन मुद्रा (पशुपति शिव मुहर) और शाम्भवी मुद्रा (खंडित मूर्ति) — दोनों मोहनजोदड़ो से
हड़प्पावासियों को योग में विश्वास था और इसके दो प्रमुख साक्ष्य मोहनजोदड़ो से प्राप्त हुए हैं। पहला, पशुपति शिव की मुहर, जिसमें त्रिमुखी पुरुष को पद्मासन मुद्रा में दिखाया गया है। दूसरा, तिपतिया (Tripetal) अलंकरण वाली खंडित मूर्ति, जिसमें दृष्टि अर्द्धखुली और नासाग्र पर केन्द्रित है — यह शाम्भवी मुद्रा है। ऋग्वेद में योग की मुद्राओं के प्रमाण न मिलने के कारण, इसे हड़प्पाई सभ्यता की देन माना जाता है। ये साक्ष्य हड़प्पावासियों की धार्मिक और सांस्कृतिक प्रगति और योग प्रथाओं के प्रारंभिक प्रयोग को दर्शाते हैं।
Real Education Factory
प्रश्न 6. हड़प्पावासियों की ‘सामाजिक व्यवस्था’ के बारे में क्या ज्ञात है?
(A) यह जाति-आधारित थी
(B) समाज सम्भवतः मातृसत्तात्मक था और भूमध्य सागरीय प्रजाति के लोग सर्वाधिक थे
(C) समाज सैनिक वर्गों में विभाजित था
(D) केवल ब्राह्मण और वैश्य वर्ग थे
✅ उत्तर: (B) समाज सम्भवतः मातृसत्तात्मक था और भूमध्य सागरीय प्रजाति के लोग सर्वाधिक थे
हड़प्पा सभ्यता का समाज संभवतः मातृसत्तात्मक (Matriarchal) था। हड़प्पावासी मुख्यतः चार प्रजातियों — भूमध्य सागरीय (Mediterranean), अल्पाईन (Alpine), मंगोलाइड (Mongoloid) और प्रोटो आस्ट्रेलॉयड — से सम्बन्धित थे, जिसमें भूमध्य सागरीय प्रजाति सर्वाधिक थी। समाज में वणिक वर्ग (Commercial Classes) का प्रभुत्व संभावित था। धारदार हथियारों की अनुपस्थिति से यह अनुमान होता है कि हड़प्पावासी शांतिप्रिय और व्यवस्थित समाज में रहते थे। उनके समाज में सांस्कृतिक, आर्थिक और व्यापारिक गतिविधियाँ उन्नत थीं, और ये सभ्यता संगठित प्रशासन और सामाजिक संरचना की मिसाल प्रस्तुत करती है।
📚 यह पोस्ट जरूर देखें 👇
👉 हड़प्पा सभ्यता (सिंधु घाटी सभ्यता)(Part-5) के MCQ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
Real Education Factory
प्रश्न 7. हड़प्पा सभ्यता की नगर योजना में सड़कों की लंबाई के संदर्भ में कौन-सी पद्धति थी?
(A) सड़कें उत्तर-दक्षिण दिशा में ही बनती थीं
(B) सड़कें एक-दूसरे को 90° पर काटती थीं जिससे Grid on Method जैसी व्यवस्था बनती थी
(C) सड़कें केवल नदी के किनारे-किनारे बनी थीं
(D) सड़कें गोलाकार थीं
✅ उत्तर: (B) सड़कें एक-दूसरे को 90° पर काटती थीं जिससे Grid on Method जैसी व्यवस्था बनती थी
हड़प्पा सभ्यता की सड़क निर्माण योजना अत्यंत व्यवस्थित थी। सड़कें प्रायः एक-दूसरे को समकोण (90°) पर काटती थीं, जिससे पूरा शहर जाल-सी पद्धति (Grid on Method) या शतरंज के बोर्ड (Chess Board) की भाँति व्यवस्थित हो जाता था। नगर की मुख्य सड़क लगभग 8 से 10 मीटर चौड़ी होती थी। नगर में प्रवेश प्रायः पूर्वी हिस्से से होता था। जहाँ यह प्रवेश मार्ग प्रथम सड़क से मिलता था, उसे ‘ऑक्सफोर्ड सर्किल’ कहा जाता था। यह योजना हड़प्पा सभ्यता की संगठित नगर नियोजन, तकनीकी दक्षता और शहरी अनुशासन का प्रमाण देती है। शहर के प्रत्येक क्षेत्र की सुव्यवस्थित सड़कों और योजना से उनकी व्यवस्थित जीवनशैली और प्रशासन झलकती है।
Real Education Factory
प्रश्न 8. हड़प्पा सभ्यता की ‘ईंटों’ के बारे में क्या विशेष तथ्य है?
(A) ईंटें केवल कच्ची मिट्टी की बनती थीं
(B) ईंटें 4:2:1 अनुपात में पकी होती थीं, माप 24:14:7 सेमी; कालीबंगा में इकलौती अलंकृत ईंट मिली
(C) ईंटें केवल पत्थर की बनती थीं
(D) ईंटें केवल चूने से बनती थीं
✅ उत्तर: (B) ईंटें 4:2:1 अनुपात में पकी होती थीं, माप 24:14:7 सेमी; कालीबंगा में इकलौती अलंकृत ईंट मिली
हड़प्पा सभ्यता में भवन निर्माण के लिए पकी ईंटों का प्रयोग किया जाता था, जो लगभग 4:2:1 के अनुपात में होती थीं और माप प्रायः 24:14:7 सेमी था। नींव के लिए खंडित ईंटों का प्रयोग किया जाता था। अधिकांश ईंटें अलंकरण विहीन होती थीं, लेकिन कालीबंगा से अलंकृत ईंट (Decorated Bricks) के प्रमाण मिले हैं, जिन पर प्रतिच्छेदी वृत्त (Intersected Circle) अंकित है। ईंटों की चिनाई ‘इंग्लिश बॉन्ड मेथड’ से की जाती थी। ये तथ्य हड़प्पा सभ्यता की शिल्पकला, तकनीकी दक्षता और व्यवस्थित निर्माण पद्धति को दर्शाते हैं। इसके माध्यम से उनका शहरी नियोजन और वास्तुकला का उच्च स्तर समझा जा सकता है।
Real Education Factory
प्रश्न 9. हड़प्पा सभ्यता में ‘फिरोजा’ (Turquoise) का प्रयोग किसलिए होता था?
(A) खाने में
(B) आभूषणों और अलंकरण में
(C) धार्मिक अनुष्ठान में
(D) व्यापारिक मुद्रा के रूप में
✅ उत्तर: (B) आभूषणों और अलंकरण में
हड़प्पावासी फिरोजा (Turquoise) और जेड (Jade) जैसे कीमती पत्थरों का प्रयोग आभूषण और अलंकरण में करते थे। ये पत्थर मध्य एशिया से प्राप्त होते थे। इसके अलावा लाजवर्द मणि (Lapis Lazuli) बदख्शाँ (अफगानिस्तान) से और सेलाखड़ी बलूचिस्तान से मँगाई जाती थी। लगभग 3500 ई०पू० के आसपास, शंख, सीपी, फिरोजा और लाजवर्दमणि जैसे उद्योगों का विकास हुआ। मनका (Beads) बनाने का कारखाना चन्हुदड़ो और लोथल में मिला है। ये तथ्य हड़प्पा सभ्यता की उन्नत हस्तकला, व्यापारिक नेटवर्क और अलंकरण प्रथाओं को दर्शाते हैं और यह स्पष्ट करते हैं कि हड़प्पावासी अंतरराष्ट्रीय व्यापार और औद्योगिक उत्पादन में दक्ष थे।
Real Education Factory
प्रश्न 10. हड़प्पा सभ्यता से संबंधित उत्खनन वर्ष और उत्खनन कर्ता का सही मिलान कौन-सा है?
(A) हड़प्पा-1922; मोहनजोदड़ो-1921
(B) हड़प्पा-1921 (दयाराम साहनी); मोहनजोदड़ो-1922 (राखाल दास बनर्जी); चन्हुदड़ो-1931 (ननी गोपाल मजूमदार)
(C) लोथल-1973 (रवीन्द्र सिंह बिष्ट); कालीबंगा-1954 (रंगनाथ राव)
(D) रोपड़-1961 (ब्रजवासी लाल); बणावली-1953 (यज्ञदत्त शर्मा)
✅ उत्तर: (B) हड़प्पा-1921 (दयाराम साहनी); मोहनजोदड़ो-1922 (राखाल दास बनर्जी); चन्हुदड़ो-1931 (ननी गोपाल मजूमदार)
हड़प्पाई सभ्यता के प्रमुख स्थलों के उत्खनन का विवरण निम्नलिखित है। हड़प्पा का उत्खनन 1921 में दयाराम साहनी ने किया। मोहनजोदड़ो में 1922 में राखाल दास बनर्जी ने उत्खनन किया। चन्हुदड़ो का उत्खनन 1931 में ननी गोपाल मजूमदार ने किया। रोपड़ में 1953 में यज्ञदत्त शर्मा, लोथल में 1954 में श्री रंगनाथ राव, कालीबंगा में 1961 में ब्रजवासी लाल, बणावली में 1973 में रवीन्द्र सिंह बिष्ट और धौलावीरा में 1990-91 में रवीन्द्र सिंह बिष्ट ने उत्खनन किया। यह विवरण UPSC, BPSC और UPPCS में बार-बार मिलान प्रश्न के रूप में पूछा जाता है। इन उत्खननों ने हड़प्पा सभ्यता की संरचना, जीवनशैली और शिल्पकला को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
Real Education Factory
प्रश्न 11. हड़प्पा सभ्यता में ‘घनाकार बाट’ (Cubical Weights) का सर्वाधिक मिलना क्या दर्शाता है?
(A) हड़प्पावासी घन-आकार के बर्तन बनाते थे
(B) व्यापार में घनाकार बाट सबसे व्यावहारिक और प्रचलित थे
(C) यह धार्मिक प्रतीक था
(D) यह केवल मोहनजोदड़ो में प्रयोग होता था
✅ उत्तर: (B) व्यापार में घनाकार बाट सबसे व्यावहारिक और प्रचलित थे
हड़प्पावासियों के बाट (Weights) विभिन्न आकारों में पाए गए — धनाकार, ढोलाकार, शंक्वाकार, बेलनाकार — लेकिन इनमें घनाकार (Cubical) बाट सबसे अधिक सामान्य थे। ये बाट मुख्यतः भूरे चर्ट पत्थर से बनाए जाते थे। हड़प्पावासी 16 या उसके गुणक अंकों में वस्तुओं को तौलते थे। उनका व्यापार और लेन-देन प्रणाली वस्तु विनिमय (Barter System) पर आधारित थी। हड़प्पावासी मेसोपोटामिया और फारस के साथ भी व्यापार करते थे, जिसका प्रमाण मोहनजोदड़ो और लोथल से मिला है। ये तथ्य हड़प्पा सभ्यता की व्यापारिक दक्षता, आर्थिक संगठन और अंतरराष्ट्रीय संबंध को दर्शाते हैं।
Real Education Factory
प्रश्न 12. हड़प्पा सभ्यता में ‘सड़क निर्माण’ में क्या उद्देश्य ध्यान में रखा जाता था?
(A) केवल सौंदर्य
(B) सड़कों का निर्माण इस तरह से किया जाता था कि आस-पास के भवनों को स्वच्छ वायु मिल सके
(C) केवल व्यापारिक उद्देश्य
(D) केवल सैनिक आवागमन
✅ उत्तर: (B) सड़कों का निर्माण इस तरह से किया जाता था कि आस-पास के भवनों को स्वच्छ वायु मिल सके
हड़प्पावासियों की सड़क निर्माण योजना में विशेष ध्यान रखा जाता था कि आस-पास के भवनों को स्वच्छ वायु मिले। यह हड़प्पा सभ्यता की उन्नत नगर नियोजन और स्वास्थ्य चेतना का प्रमाण है। सड़कें प्रायः 90° पर एक-दूसरे को काटती थीं, जिससे पूरे शहर में Grid Pattern बनता था। मुख्य सड़क लगभग 8 से 10 मीटर चौड़ी होती थी। मोहनजोदड़ो की मुख्य सड़कें ठीकरों और खंडित ईंटों से पक्की बनाई जाती थीं, जबकि अधिकांश सड़कें कच्ची होती थीं। इस योजना से पता चलता है कि हड़प्पावासी सुव्यवस्थित शहरी जीवनशैली, सड़क सुरक्षा और स्वच्छता को महत्व देते थे और उनके शहरों का संगठित और व्यवस्थित ढांचा अत्यंत उन्नत था।
📚 नीचे दी गई पोस्ट जरूर देखें 👇
👉 हड़प्पा सभ्यता (सिंधु घाटी सभ्यता)(Part-2) के MCQ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
Real Education Factory
प्रश्न 13. हड़प्पा सभ्यता की कौन-सी विशेषताएँ इसे अन्य समकालीन सभ्यताओं से श्रेष्ठ बनाती हैं?
(A) केवल विशाल मंदिर
(B) उन्नत जल निकास प्रणाली, नगर नियोजन, बंदरगाह और उन्नत शिल्प-उद्योग
(C) केवल बड़ी आबादी
(D) केवल सोने के आभूषण
✅ उत्तर: (B) उन्नत जल निकास प्रणाली, नगर नियोजन, बंदरगाह और उन्नत शिल्प-उद्योग
हड़प्पा सभ्यता को अन्य समकालीन सभ्यताओं से श्रेष्ठ बनाने वाली विशेषताएँ कई थीं। इनमें सबसे प्रमुख हैं: प्राचीन विश्व की सर्वश्रेष्ठ जल निकास प्रणाली, Grid Pattern पर आधारित संगठित नगर नियोजन, और विश्व का प्रथम बंदरगाह (लोथल)। हड़प्पावासियों ने विश्व में प्रथम कपास की खेती की और उन्नत धातु-कला (Lost Wax Method) में निपुणता दिखाई। इनके पास उन्नत तौल-माप प्रणाली थी, जिसमें वस्तुएँ 16 के गुणज में तौल जाती थीं। इसके अलावा, यह सभ्यता विस्तृत व्यापारिक नेटवर्क के माध्यम से दूर-दराज के देशों के साथ जुड़ी हुई थी। ये सभी विशेषताएँ हड़प्पा सभ्यता को विश्व की महानतम प्राचीन सभ्यताओं में गिनती में लाती हैं और इसकी संगठित सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी प्रगति को दर्शाती हैं।
Real Education Factory
प्रश्न 14. हड़प्पा सभ्यता के धर्म और परवर्ती हिंदू धर्म में क्या-क्या समानताएँ हैं?
(A) केवल गाय की पूजा
(B) मातृदेवी, शिव, लिंग-योनि, पीपल, नाग, अग्नि पूजा और सामूहिक स्नान — सभी परवर्ती हिंदू धर्म में भी प्रचलित हैं
(C) केवल यज्ञ
(D) केवल तीर्थयात्रा
✅ उत्तर: (B) मातृदेवी, शिव, लिंग-योनि, पीपल, नाग, अग्नि पूजा और सामूहिक स्नान — सभी परवर्ती हिंदू धर्म में भी प्रचलित हैं
हड़प्पाकालीन धार्मिक विश्वासों में परवर्ती हिंदू धर्म की कई विशेषताएँ शामिल थीं। इनमें प्रमुख हैं: मातृदेवी की पूजा जो बाद में दुर्गा/काली रूप में विकसित हुई; पशुपति शिव की उपासना, जो शिव पूजा में परिणत हुई; लिंग-योनि प्रतीक जो शिवलिंग पूजा के रूप में आज भी प्रचलित है। इसके अलावा, पीपल की पूजा, नाग पूजा (नाग पंचमी), अग्नि पूजा और सामूहिक स्नान की परंपरा हड़प्पा काल से हिंदू धर्म में जारी है। योग का अभ्यास भी हड़प्पा काल से चलता आया। ये सभी तथ्य हड़प्पा और हिंदू धर्म के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक निरंतरता को प्रमाणित करते हैं और यह दर्शाते हैं कि हड़प्पावासी धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से उन्नत थे।
Real Education Factory
प्रश्न 15. हड़प्पा सभ्यता के पतन के 6 प्रमुख सिद्धांत और उनके प्रतिपादक कौन हैं?
(A) आर्य आक्रमण-व्हीलर; प्रशासनिक शिथिलता-मार्शल; जलवायु परिवर्तन-स्टाइन; मलेरिया-कैनेडी; भूतात्विक परिवर्तन-डेल्स; बाढ़-मैके
(B) आर्य आक्रमण-मैके; मलेरिया-व्हीलर; बाढ़-डेल्स; जलवायु-कैनेडी
(C) केवल बाढ़ और मलेरिया
(D) केवल आर्यों का आक्रमण
✅ उत्तर: (A) आर्य आक्रमण-व्हीलर; प्रशासनिक शिथिलता-मार्शल; जलवायु परिवर्तन-स्टाइन; मलेरिया-कैनेडी; भूतात्विक परिवर्तन-डेल्स; बाढ़-मैके
हड़प्पा सभ्यता के पतन के प्रमुख सिद्धांत और उनके प्रतिपादक निम्नलिखित हैं: आर्यों का आक्रमण — व्हीलर; प्रशासनिक शिथिलता — जॉन मार्शल; जलवायवीय परिवर्तन — ऑरेल स्टाइन; मलेरिया — कैनेडी; भूतात्विक परिवर्तन — डेल्स; और बाढ़ — मैके। वास्तविकता यह है कि कोई एक कारण पर्याप्त नहीं है और विभिन्न स्थलों के पतन के अलग-अलग कारण हो सकते हैं। यह सारणी UPSC, BPSC और UPPCS में बार-बार मिलान प्रश्न के रूप में पूछी जाती है। इन तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि हड़प्पा सभ्यता के पतन में बहु-कारक प्रक्रिया का योगदान था और इसे समझने के लिए विभिन्न दृष्टिकोणों की आवश्यकता है।
Real Education Factory
प्रश्न 16. हड़प्पा सभ्यता में ‘आटा पीसने की चक्की’ के साक्ष्य कहाँ से मिले?
(A) हड़प्पा से
(B) मोहनजोदड़ो से
(C) लोथल से
(D) कालीबंगा से
✅ उत्तर: (C) लोथल से
हड़प्पावासियों के आटा पीसने की चक्की के प्रमाण लोथल से मिले हैं, जो उनके अनाज प्रसंस्करण और खाद्य तैयारी के तरीकों का संकेत देते हैं। लोथल गुजरात में खंभात की खाड़ी के पास स्थित है और इसे ‘लघु हड़प्पा’ या ‘लघु मोहनजोदड़ो’ कहा जाता है। यहाँ से बंदरगाह, फारस की मुहरें, धान की भूसी (रंगपुर से), युग्म शवाधान, अग्नि कुण्ड, पंचतंत्र जैसा परिदृश्य, आटा पीसने की चक्की और मनका बनाने का कारखाना जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। ये सब प्रमाण हड़प्पावासियों की व्यावसायिक, औद्योगिक और सांस्कृतिक दक्षता को दर्शाते हैं और यह स्पष्ट करते हैं कि लोथल केवल नगर नहीं बल्कि व्यापारिक और औद्योगिक केंद्र था।
Real Education Factory
प्रश्न 17. कालीबंगा की नगर योजना में ‘दुर्ग और निचले नगर’ की क्या विशेषता थी?
(A) दोनों एक ही रक्षा प्राचीर से घिरे थे
(B) दोनों अलग-अलग रक्षा प्राचीरों से घिरे थे
(C) दोनों में कोई भी रक्षा प्राचीर नहीं थी
(D) केवल दुर्ग रक्षा प्राचीर से घिरा था
✅ उत्तर: (B) दोनों अलग-अलग रक्षा प्राचीरों से घिरे थे
कालीबंगा (राजस्थान, 1961, ब्रजवासी लाल) में दुर्ग और निचला नगर दोनों अलग-अलग रक्षा प्राचीरों से घिरे हुए थे। यह व्यवस्था लोथल और सुरकोतड़ा से अलग है, जहाँ दुर्ग और नगर दोनों एक ही रक्षा प्राचीर से घिरे थे। चन्हुदड़ो में कोई भी हिस्सा दुर्गीकृत नहीं था। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो में पश्चिमी दुर्गीकृत भाग और पूर्वी सामान्य आवासीय भाग का स्पष्ट विभाजन था। यह वर्गीकरण UPSC में मिलान प्रश्न के रूप में बार-बार पूछा जाता है। इन साक्ष्यों से हड़प्पा सभ्यता के नगर नियोजन, सुरक्षा और प्रशासनिक दृष्टिकोण की उन्नतता का पता चलता है और यह दर्शाता है कि हड़प्पावासी सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था पर विशेष ध्यान देते थे।
Real Education Factory
प्रश्न 18. हड़प्पा सभ्यता में मुहरों पर लिखी गई हड़प्पाई लिपि का क्या उद्देश्य रहा होगा?
(A) केवल धार्मिक उद्देश्य
(B) व्यापारिक पहचान, माल-सामग्री की पहचान और प्रशासनिक उद्देश्य
(C) केवल कला और सौंदर्य
(D) केवल राजा के आदेश
✅ उत्तर: (B) व्यापारिक पहचान, माल-सामग्री की पहचान और प्रशासनिक उद्देश्य
हड़प्पाई मुहरों पर हड़प्पाई लिपि और विभिन्न पशुओं के चित्र अंकित होते थे। ये मुहरें व्यापारिक लेन-देन में माल की पहचान, व्यापारी की पहचान और प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए प्रयोग की जाती थीं। लोथल से मिली फारस की मुहरें यह दर्शाती हैं कि हड़प्पा सभ्यता में मुहरों का प्रयोग अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी होता था। हड़प्पाई लिपि अभी तक अपठनीय है, इसलिए मुहरों पर लिखे पाठ का सटीक अर्थ ज्ञात नहीं है। ये तथ्य हड़प्पा सभ्यता की व्यापारिक दक्षता, प्रशासनिक व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संपर्क का प्रमाण देते हैं।
📚 और अधिक पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे 👇
👉 हड़प्पा सभ्यता (सिंधु घाटी सभ्यता)(Part-1) के MCQ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
Real Education Factory
प्रश्न 19. हड़प्पा सभ्यता के ‘अन्नागार’ (Granary) का प्रशासनिक महत्व क्या था?
(A) यह केवल राजा के खाने के लिए था
(B) यह कृषि उत्पाद के केंद्रीय संग्रह और वितरण का केंद्र था जो प्रशासनिक नियंत्रण को दर्शाता है
(C) यह व्यापार के लिए माल गोदाम था
(D) यह धार्मिक उद्देश्य के लिए था
✅ उत्तर: (B) यह कृषि उत्पाद के केंद्रीय संग्रह और वितरण का केंद्र था जो प्रशासनिक नियंत्रण को दर्शाता है
हड़प्पा और मोहनजोदड़ो जैसे प्रमुख नगरों में अन्नागार (Granary House) के प्रमाण मिले हैं। ये अन्नागार अनाज के केंद्रीय संग्रह और वितरण के केंद्र थे, जो यह दर्शाते हैं कि कृषि उत्पादों पर केंद्रिय प्रशासन का नियंत्रण था। हड़प्पा में अन्नागार की उपस्थिति से स्पष्ट होता है कि यहाँ संगठित प्रशासनिक व्यवस्था और सामाजिक नियंत्रण मौजूद था। तुलनात्मक दृष्टि से, सुमेरियाई सभ्यता में अन्नागार अक्सर मंदिरों के पास पाए जाते थे, जो प्रशासनिक-धार्मिक नियंत्रण का प्रतीक होते थे। हड़प्पा में अन्नागार की उपस्थिति इस सभ्यता की व्यवस्थित कृषि, प्रशासन और समाजिक संगठन की उन्नत प्रणाली को प्रमाणित करती है।
Real Education Factory
प्रश्न 20. हड़प्पा सभ्यता के ‘सेलाखड़ी’ (Steatite) से बनी मुहरों की क्या विशेषता थी?
(A) ये केवल सजावट के लिए थीं
(B) ये आयताकार होती थीं, इन पर पशु और हड़प्पाई लिपि अंकित होती थी और व्यापारिक व प्रशासनिक उद्देश्यों में प्रयोग होती थीं
(C) ये केवल मोहनजोदड़ो में बनती थीं
(D) ये गोलाकार होती थीं
✅ उत्तर: (B) ये आयताकार होती थीं, इन पर पशु और हड़प्पाई लिपि अंकित होती थी और व्यापारिक व प्रशासनिक उद्देश्यों में प्रयोग होती थीं
हड़प्पाई मुहरें (Seals) मुख्यतः सेलाखड़ी (Steatite) से बनाई जाती थीं, जो बलूचिस्तान से प्राप्त होती थी। ये मुहरें आयताकार होती थीं और इन पर एकश्रृंगीय पशु, कूबडदार बैल, हाथी, बाघ आदि और हड़प्पाई लिपि का अंकन होता था। इन मुहरों का उपयोग व्यापारिक पहचान, माल की पहचान और प्रशासनिक कार्यों के लिए किया जाता था। अलेक्जेंडर कनिंघम ने 1875 में हड़प्पा की एकश्रृंगीय मुहर पर पहली रिपोर्ट प्रकाशित की थी। ये मुहरें हड़प्पा सभ्यता की शिल्पकला, प्रशासनिक दक्षता और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संपर्क का प्रमाण हैं और यह दर्शाती हैं कि हड़प्पावासी व्यवस्थित और उन्नत समाज के सदस्य थे।
Real Education Factory
प्रश्न 21. हड़प्पा सभ्यता की कौन-सी उपलब्धियाँ आज भी भारतीय जीवन में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जारी हैं?
(A) केवल मृद्भाण्ड निर्माण
(B) कपास की खेती, योग, पीपल पूजा, मातृदेवी पूजा, लिंग-योनि पूजन, 16 के गुणक में तौल
(C) केवल ईंट निर्माण
(D) केवल व्यापार
✅ उत्तर: (B) कपास की खेती, योग, पीपल पूजा, मातृदेवी पूजा, लिंग-योनि पूजन, 16 के गुणक में तौल
हड़प्पा सभ्यता की अनेक उपलब्धियाँ आज भी भारतीय जीवन में जीवित हैं। इनमें प्रमुख हैं: कपास की खेती, जो आज भारत को विश्व में प्रमुख कपास उत्पादक बनाती है; योग, जिसे आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) के रूप में मनाया जाता है; पीपल पूजा और मातृदेवी पूजा, जो हिंदू धर्म में आज भी प्रचलित हैं। लिंग-योनि पूजन के रूप में शिवलिंग पूजा, 16 के गुणक में तौल जैसी प्रणाली आज भी सेर-पाव में दिखाई देती है, और नाग पूजा नाग पंचमी के रूप में मनाई जाती है। ये सभी तथ्य हड़प्पा सभ्यता की महत्ता, सामाजिक और धार्मिक निरंतरता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
Real Education Factory
प्रश्न 22. हड़प्पा सभ्यता में ‘दुर्ग का ऊँचे चबूतरे पर निर्माण’ का क्या उद्देश्य था?
(A) शत्रुओं से सुरक्षा
(B) बाढ़ से सुरक्षा और प्रशासकीय वर्ग का आम जनता से अलगाव
(C) आकाश से नगर दिखाई दे
(D) धार्मिक महत्व
✅ उत्तर: (B) बाढ़ से सुरक्षा और प्रशासकीय वर्ग का आम जनता से अलगाव
हड़प्पा सभ्यता में दुर्ग शेष नगर से ऊपर ईंट के ऊँचे चबूतरे पर बनाया जाता था। यह चबूतरा नगरों को बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रखने के लिए था, जो सिंधु घाटी के नगरों में आम और भयावह होती थीं। दुर्ग में प्रशासकीय वर्ग निवास करता था, जो आम जनता के पूर्वी आवासीय भाग से ऊँचाई और रक्षा प्राचीर के माध्यम से अलग होता था। यह व्यवस्था हड़प्पा समाज के वर्गीकरण, सुरक्षा उपाय और प्रशासनिक संगठन का प्रमाण देती है। दुर्ग की यह संरचना इस सभ्यता की शहरी नियोजन क्षमता और सामरिक सोच को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
Real Education Factory
प्रश्न 23. हड़प्पा सभ्यता में ‘घरों के दरवाजे’ कहाँ की ओर खुलते थे और इसका एक विशेष अपवाद क्या था?
(A) मुख्य सड़क की ओर; अपवाद — मोहनजोदड़ो
(B) गली की ओर; अपवाद — लोथल जहाँ दरवाजे मुख्य सड़क की ओर खुलते थे
(C) नदी की ओर; अपवाद — कालीबंगा
(D) पूर्व दिशा की ओर; अपवाद — हड़प्पा
✅ उत्तर: (B) गली की ओर; अपवाद — लोथल जहाँ दरवाजे मुख्य सड़क की ओर खुलते थे
हड़प्पा सभ्यता के भवनों के दरवाजे प्रायः गली की ओर खुलते थे। हालांकि, लोथल इसका अपवाद है, जहाँ भवनों के दरवाजे मुख्य सड़क की ओर खुलते थे, न कि गली की ओर। यह विशेषता लोथल को अन्य हड़प्पाई स्थलों से अलग बनाती है और इसे शहरी नियोजन और नगर संरचना में अद्वितीय बनाती है। यह तथ्य UPSC, UPPCS और BPSC जैसी परीक्षाओं में अक्सर ‘कौन-सा कथन सही/गलत है’ के रूप में पूछा जाता है। लोथल की यह व्यवस्था हड़प्पा सभ्यता के सुव्यवस्थित भवन निर्माण, सड़क और सार्वजनिक योजनाओं की उन्नत सोच को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
Real Education Factory
प्रश्न 24. हड़प्पा सभ्यता का ‘आद्य ऐतिहासिक काल’ में होने का सबसे मुख्य कारण क्या है?
(A) यह बहुत पुरानी सभ्यता है
(B) इसमें लिखित और पुरातात्विक दोनों साक्ष्य मिले हैं परंतु लिपि अपठनीय है
(C) यह केवल भारत में थी
(D) यहाँ कोई नगर नहीं था
✅ उत्तर: (B) इसमें लिखित और पुरातात्विक दोनों साक्ष्य मिले हैं परंतु लिपि अपठनीय है
‘आद्य ऐतिहासिक काल’ (Proto Historical Period) उस काल को कहते हैं जिसमें लिखित और पुरातात्विक दोनों प्रकार के साक्ष्य उपलब्ध हैं, लेकिन लिखित साक्ष्य अभी तक पढ़े नहीं जा सके हैं। हड़प्पा सभ्यता ठीक इसी श्रेणी में आती है क्योंकि हड़प्पाई लिपि के प्रमाण मिले हैं, परंतु यह अपठनीय है। इसी कारण, हड़प्पा सभ्यता के इतिहास को केवल पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर समझा और लिखा गया है। यह तथ्य UPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है। इससे स्पष्ट होता है कि हड़प्पा सभ्यता का अध्ययन आधुनिक पुरातत्व और ऐतिहासिक अनुसंधान पर आधारित है और यह सभ्यता प्राचीन भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Real Education Factory
प्रश्न 25. हड़प्पा सभ्यता का समग्र अवलोकन करने पर यह किस प्रकार की सभ्यता सिद्ध होती है?
(A) केवल कृषि आधारित ग्रामीण सभ्यता
(B) विश्व की प्रथम नगरीय, व्यापारोन्मुख, शांतिप्रिय, उन्नत तकनीक वाली और परवर्ती भारतीय संस्कृति की पूर्वज सभ्यता
(C) केवल धार्मिक सभ्यता
(D) केवल सैन्य सभ्यता
✅ उत्तर: (B) विश्व की प्रथम नगरीय, व्यापारोन्मुख, शांतिप्रिय, उन्नत तकनीक वाली और परवर्ती भारतीय संस्कृति की पूर्वज सभ्यता
हड़प्पा सभ्यता विश्व की महानतम प्राचीन सभ्यताओं में से एक है। यह विश्व की प्रथम नगरीय सभ्यता थी और कांस्य युगीन थी। हड़प्पावासियों ने विश्व में प्रथम कपास की खेती की और उनके नगरों में प्राचीन विश्व की सर्वश्रेष्ठ जल निकास प्रणाली थी। यह सभ्यता व्यापारोन्मुख थी, और मेसोपोटामिया और फारस तक व्यापार करती थी। हड़प्पावासी शांतिप्रिय थे क्योंकि तलवारों और युद्धक उपकरणों के प्रमाण नहीं मिले। तकनीकी दृष्टि से उन्नत थे — Lost Wax Method, बंदरगाह आदि। धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से, यह परवर्ती हिंदू धर्म की जननी भी मानी जाती है, जैसे मातृदेवी, शिव, योग और पीपल पूजा। हड़प्पा सभ्यता स्थानीय उद्भव से विकसित हुई, मेहरगढ़ से क्रमिक विकास के साथ। यह भारतीय सभ्यता का एक गौरवशाली अध्याय है।
📚 प्रैक्टिस सेट करने के लिए यह पोस्ट जरूर देखें 👇
👉 हड़प्पा सभ्यता (सिंधु घाटी सभ्यता) के MCQ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें