
प्राचीन भारत का इतिहास भाग-37 MCQ-2026
जैन धर्म के 25 महत्वपूर्ण MCQ | UPSC, SSC के लिए MCQ 2026
Real Education Factory
प्रश्न 1. पार्श्वनाथ के पिता का क्या नाम था?
(A) सिद्धार्थ
(B) चेटक
(C) अश्वसेन
(D) शुद्धोधन
✅ उत्तर: (C) अश्वसेन
📝 जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ का जन्म काशी नरेश ‘अश्वसेन’ के घर हुआ था। उनकी माता का नाम ‘रानी वामा’ था। पार्श्वनाथ का जन्म महावीर से लगभग 250 वर्ष पूर्व हुआ था। उनका विवाह ‘प्रभावती’ से हुआ। 30 वर्ष की अवस्था में उन्होंने गृहत्याग किया और 83 दिनों की घोर तपस्या के पश्चात् 84वें दिन पारसनाथ (बिहार) के ‘सम्मेद शिखर’ पर उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई। पार्श्वनाथ जैन धर्म के पहले ऐतिहासिक तीर्थंकर माने जाते हैं। उनका प्रतीक चिन्ह सर्प था।
Real Education Factory
प्रश्न 2. पार्श्वनाथ को ज्ञान की प्राप्ति कहाँ हुई?
(A) ऋजुपालिका नदी के किनारे
(B) बोधगया
(C) सम्मेद शिखर
(D) दिलवाड़ा
✅ उत्तर: (C) सम्मेद शिखर
📝 जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ को 83 दिनों की घोर तपस्या के बाद 84वें दिन पारसनाथ (बिहार) के ‘सम्मेद शिखर’ पर ज्ञान की प्राप्ति हुई। यह स्थान आज भी जैन धर्म का एक प्रमुख तीर्थस्थल है। ध्यान देने योग्य है कि महावीर को ज्ञान की प्राप्ति ‘ऋजुपालिका नदी’ के किनारे शाल वृक्ष के नीचे हुई थी, और गौतम बुद्ध को ‘बोधगया’ में पीपल वृक्ष के नीचे। तीनों महापुरुषों के ज्ञान प्राप्ति के स्थान भिन्न-भिन्न थे। प्रतियोगी परीक्षाओं में इन तीनों का तुलनात्मक प्रश्न बार-बार पूछा जाता है।
Real Education Factory
प्रश्न 3. महावीर की माता ‘त्रिशला’ किसकी बहन थीं?
(A) बिम्बसार
(B) चेटक
(C) अजातशत्रु
(D) प्रसेनजित
✅ उत्तर: (B) चेटक
📝 महावीर की माता ‘त्रिशला’ वैशाली के लिच्छवि नरेश चेटक की बहन थीं। मगध नरेश बिम्बसार ने चेटक की पुत्री ‘चेल्लना’ से विवाह किया था, जिससे महावीर का संबंध बिम्बसार से भी स्थापित होता है। यह संबंध ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे महावीर और बिम्बसार के बीच राजनीतिक-पारिवारिक जुड़ाव का पता चलता है। महावीर के पिता सिद्धार्थ वज्जि महाजनपद के ज्ञातृक गण के मुखिया थे। महावीर का जन्म इस प्रकार एक अत्यंत प्रतिष्ठित राजघराने में हुआ था।
Real Education Factory
प्रश्न 4. महावीर के बड़े भाई का क्या नाम था?
(A) देवदत्त
(B) नन्दिवर्धन
(C) इन्द्रभूति
(D) जामालि
✅ उत्तर: (B) नन्दिवर्धन
📝 महावीर के बड़े भाई का नाम ‘नन्दिवर्धन’ था। पिता सिद्धार्थ की मृत्यु के उपरांत नन्दिवर्धन ही राजा बने। महावीर ने अपने बड़े भाई नन्दिवर्धन की अनुमति (आज्ञा) लेकर ही 30 वर्ष की अवस्था में गृहत्याग किया था। यह तथ्य जैन ग्रंथों में स्पष्ट रूप से वर्णित है। गृहत्याग के तेरहवें महीने में महावीर ने अपने समस्त वस्त्रों का परित्याग कर दिया और नग्न होकर भटकने लगे। उनके इस कठोर जीवन का वर्णन जैन ग्रंथ ‘आचारांगसूत्र’ में मिलता है।
Real Education Factory
प्रश्न 5. महावीर के जीवन काल की कठोर तपस्या का वर्णन किस जैन ग्रंथ में मिलता है?
(A) उत्तराध्ययन सूत्र
(B) आचारांगसूत्र
(C) भगवती सूत्र
(D) कल्पसूत्र
✅ उत्तर: (B) आचारांगसूत्र
📝 गृहत्याग के बाद महावीर जब नग्न होकर भटक रहे थे तब लोगों ने उन्हें अपार कष्ट दिए। इस कठिन और मार्मिक जीवन का चित्रण जैन धर्म के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘आचारांगसूत्र’ में मिलता है। यह जैन धर्म के बारह अंगों में से एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसमें महावीर के तपस्या काल का अत्यंत विस्तृत और भावपूर्ण वर्णन है। ‘उत्तराध्ययन सूत्र’ में 22वें तीर्थंकर नेमिनाथ का वर्णन और कृष्ण से उनके संबंध का उल्लेख मिलता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में जैन ग्रंथों और उनकी विषयवस्तु से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
Real Education Factory
प्रश्न 6. महावीर की पत्नी का क्या नाम था?
(A) प्रभावती
(B) चेल्लना
(C) यशोदा
(D) त्रिशला
✅ उत्तर: (C) यशोदा
📝 महावीर की पत्नी का नाम ‘यशोदा’ था और उनकी पुत्री का नाम ‘अनोज्जा प्रियदर्शना’ था। यशोदा और महावीर की पुत्री के पति यानी महावीर के दामाद का नाम ‘जामालि’ था। यह जामालि ही महावीर के प्रथम शिष्य माने जाते हैं और इन्हीं से जैन संघ में पहला मतभेद हुआ था। उल्लेखनीय है कि 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ की पत्नी का नाम ‘प्रभावती’ था। इन दोनों के नामों में भ्रम न हो इसलिए इन्हें ध्यान से याद रखना आवश्यक है। यह तथ्य BPSC और UPPSC जैसी परीक्षाओं में पूछा जाता रहा है।
Real Education Factory
प्रश्न 7. महावीर की मृत्यु के पश्चात् जैन संघ का प्रथम प्रधान (First Pontiff) कौन बना?
(A) इन्द्रभूति
(B) आचार्य सुधर्मन
(C) स्थूलभद्र
(D) जामालि
✅ उत्तर: (B) आचार्य सुधर्मन
📝 महावीर के ग्यारह गणधरों में से अधिकांश की मृत्यु महावीर के जीवनकाल में ही हो गई थी। जीवित बचे दो गणधर थे — ‘इन्द्रभूति’ और ‘आचार्य सुधर्मन’। महावीर की मृत्यु के पश्चात् ‘आचार्य सुधर्मन’ को जैन संघ का प्रथम प्रधान (First Pontiff) बनाया गया। महावीर की मृत्यु 72 वर्ष की आयु में पावा में 468 ईपू (कुछ मतों के अनुसार 527 ईपू) में हुई। ज्ञातव्य है कि महावीर के सभी ग्यारह गणधर ब्राह्मण थे। यह एक महत्वपूर्ण तथ्य है जो दर्शाता है कि महावीर ने ब्राह्मणों को भी अपने धर्म में शामिल किया।
Real Education Factory
प्रश्न 8. महावीर और पार्श्वनाथ के जन्म के बीच कितने वर्षों का अंतर था?
(A) 100 वर्ष
(B) 150 वर्ष
(C) 200 वर्ष
(D) 250 वर्ष
✅ उत्तर: (D) 250 वर्ष
📝 जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ का जन्म 24वें तीर्थंकर महावीर से लगभग 250 वर्ष पूर्व हुआ था। यह अंतर जैन धर्म की निरंतरता और दीर्घ परंपरा को दर्शाता है। पार्श्वनाथ को जैन धर्म के पहले ऐतिहासिक तीर्थंकर माना जाता है। उन्होंने चार महाव्रतों का प्रतिपादन किया जिनमें महावीर ने पाँचवाँ महाव्रत ‘ब्रह्मचर्य’ जोड़ा। पार्श्वनाथ ने 30 वर्ष की आयु में गृहत्याग किया और 83 दिनों की कठोर तपस्या के बाद ज्ञान प्राप्त किया। प्रतियोगी परीक्षाओं में यह 250 वर्ष का अंतर एक महत्वपूर्ण तथ्य है।
Real Education Factory
प्रश्न 9. गोमतेश्वर (बाहुबली) की मूर्ति कितने फीट ऊँची है?
(A) 50 फीट
(B) 60 फीट
(C) 70 फीट
(D) 80 फीट
✅ उत्तर: (C) 70 फीट
📝 कर्नाटक के हासन जिले में स्थित श्रवणबेलगोला में गोमतेश्वर (बाहुबली) की मूर्ति 70 फीट ऊँची है। इस मूर्ति का निर्माण 974 ई० में गंग वंश के मंत्री चामुण्डराय ने करवाया था। यह मूर्ति एक ही पत्थर को काटकर बनाई गई थी। यह बाहुबली की मूर्ति मानी जाती है जो प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव के पुत्र थे। बाहुबली ने अपने बड़े भाई भरत के साथ हुए संघर्ष में जीत के बाद भी जीता हुआ राज्य भरत को वापस कर दिया था। यह मूर्ति शक्ति, त्याग और साधुत्व का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है।
Real Education Factory
प्रश्न 10. बाहुबली जिन मूर्ति (गोमतेश्वर) का निर्माण किस वर्ष हुआ था?
(A) 874 ई०
(B) 974 ई०
(C) 1024 ई०
(D) 1074 ई०
✅ उत्तर: (B) 974 ई०
📝 श्रवणबेलगोला (हासन जिला, कर्नाटक) में स्थित गोमतेश्वर की बाहुबली मूर्ति का निर्माण 974 ई० में मैसूर के गंग वंश के राजा राजमल चतुर्थ (रचमल) के मंत्री एवं सेनापति चामुण्डराय ने करवाया था। यह मूर्ति 70 फीट ऊँची है और एक ही पत्थर को काटकर निर्मित की गई है। जैन धर्म में यह मूर्ति अत्यंत पूजनीय है और प्रत्येक 12 वर्ष में महामस्तकाभिषेक महोत्सव इसी मूर्ति के सम्मान में आयोजित होता है। बाहुबली ऋषभदेव के पुत्र थे जिन्होंने अपने भाई भरत को विजित राज्य लौटाकर वैराग्य ग्रहण किया था।
Real Education Factory
प्रश्न 11. जैन धर्म के अनुसार ‘कर्म का जीव की ओर बहाव’ को क्या कहते हैं?
(A) संवर
(B) निर्जरा
(C) आसव
(D) बंध
✅ उत्तर: (C) आसव
📝 जैन धर्म ने बौद्ध धर्म की तुलना में ‘कर्म के सिद्धांत’ का अत्यंत विस्तृत विश्लेषण किया है। जैन धर्म के अनुसार — (1) ‘आसव’ का अर्थ है कर्म का जीव की ओर बहाव, (2) ‘संवर’ का अर्थ है कर्म के बहाव का रुक जाना, और (3) ‘निर्जरा’ का अर्थ है पहले से बने कर्म के फल का धीरे-धीरे समापन होना। यह त्रिस्तरीय कर्म विश्लेषण जैन दर्शन की एक विशिष्ट देन है। जैन धर्म में माना जाता है कि आत्मा पर कर्मों का आवरण चढ़ता जाता है और उसे हटाने के लिए तपस्या और संयम आवश्यक है।
Real Education Factory
प्रश्न 12. जैन धर्म के अनुसार ‘कर्म के बहाव का रुक जाना’ क्या कहलाता है?
(A) आसव
(B) संवर
(C) निर्जरा
(D) मोक्ष
✅ उत्तर: (B) संवर
📝 जैन दर्शन में कर्म सिद्धांत के तीन प्रमुख चरण हैं। पहला ‘आसव’ — जिसका अर्थ है कर्म का जीव की ओर बहाव। दूसरा ‘संवर’ — जिसका अर्थ है कर्म के उस बहाव का रुक जाना। तीसरा ‘निर्जरा’ — जिसका अर्थ है पहले से संचित कर्मों के फल का धीरे-धीरे क्षय होना। जैन धर्म के अनुसार जब सभी कर्मों का पूर्णतः क्षय हो जाता है तभी आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। जैन धर्म की यह कर्म विषयक अवधारणा बौद्ध धर्म से अधिक विस्तृत और गहन मानी जाती है।
Real Education Factory
प्रश्न 13. जैन धर्म के किस दार्शनिक सिद्धांत को ‘Many Soul Theory’ कहते हैं?
(A) स्याद्वाद
(B) नयवाद
(C) अनेकांतवाद
(D) अनेकात्मवाद
✅ उत्तर: (D) अनेकात्मवाद
📝 जैन धर्म अनेक आत्माओं के अस्तित्व में विश्वास करता है। इसीलिए जैन धर्म की आत्मा विषयक अवधारणा को ‘अनेकात्मवाद’ (Many Soul Theory) कहा जाता है। इसके विपरीत बौद्ध धर्म ‘अनात्मवादी’ (No Soul Theory) है — अर्थात् वह किसी स्थायी आत्मा के अस्तित्व को नहीं मानता। जैन धर्म के अन्य प्रमुख दार्शनिक सिद्धांत हैं — स्याद्वाद (Doctrine of conditional predication), नयवाद और सप्तभंगीनय तथा अनेकांतवाद । इन सिद्धांतों में जैन दर्शन की बौद्धिक परिपक्वता और गहराई स्पष्टतः दिखती है।
Real Education Factory
प्रश्न 14. जैन धर्म के ‘स्याद्वाद’ का संबंध किससे है?
(A) आत्मा सिद्धांत से
(B) सापेक्षिक सत्य और अनिश्चयता से
(C) कर्म सिद्धांत से
(D) अहिंसा सिद्धांत से
✅ उत्तर: (B) सापेक्षिक सत्य और अनिश्चयता से
📝 जैन दर्शन में ‘स्याद्वाद’ एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है जिसका संबंध सापेक्षिक सत्य और अनिश्चयता से है। इसे ‘Doctrine of Conditional Predication’ भी कहते हैं। ‘स्यात्’ का अर्थ होता है — ‘शायद’ या ‘किसी दृष्टि से’। स्याद्वाद के साथ ‘सप्तभंगीनय’ और ‘अनेकांतवाद’ भी जैन दर्शन के प्रमुख तत्व हैं। बौद्ध धर्म में इसके समकक्ष ‘क्षणिकवाद’, ‘प्रतीत्यसमुत्पाद’ और ‘द्वादशनिदान’ जैसे सिद्धांत हैं। दोनों धर्मों की दार्शनिक अवधारणाएँ एक-दूसरे से भिन्न हैं जो उनकी विशिष्ट पहचान बनाती हैं।
Real Education Factory
प्रश्न 15. ‘उत्तराध्ययन सूत्र’ में किसका उल्लेख कृष्ण के समकालीन के रूप में किया गया है?
(A) महावीर
(B) पार्श्वनाथ
(C) नेमिनाथ
(D) ऋषभदेव
✅ उत्तर: (C) नेमिनाथ
📝 जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर ‘अरिष्टनेमि’ या ‘नेमिनाथ’ महाभारत काल के थे। प्रसिद्ध जैन साहित्य ‘उत्तराध्ययन सूत्र’ के अनुसार वे कृष्ण के समकालीन और संभवतः उनके सम्बन्धी भी थे। नेमिनाथ का प्रतीक चिन्ह ‘शंख’ (Conch) था। यह एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य है क्योंकि इससे जैन तीर्थंकरों का काल महाभारत काल तक पहुँचता है। उत्तराध्ययन सूत्र जैन धर्म के बारह अंगों में से एक प्रमुख ग्रंथ है।
Real Education Factory
प्रश्न 16. जैन धर्म में मोक्ष की प्राप्ति के लिए क्या अनिवार्य माना जाता है जो बौद्ध धर्म से भिन्न है?
(A) ध्यान
(B) मृत्यु
(C) तीर्थयात्रा
(D) दान
✅ उत्तर: (B) मृत्यु
📝 जैन धर्म और बौद्ध धर्म दोनों ने मानव जीवन का चरम लक्ष्य ‘मोक्ष’ को माना है परंतु मोक्ष की अवधारणा में दोनों में मूलभूत अंतर है। जैन धर्म मोक्ष की प्राप्ति के लिए मृत्यु को अनिवार्य मानता है। बौद्ध धर्म के अनुसार इसी जीवन में ‘निर्वाण’ या मोक्ष संभव है, जबकि ‘महापरिनिर्वाण’ मृत्यु के बाद ही होता है। इसके अलावा मोक्ष के मार्ग में भी दोनों में भेद है — जैन धर्म ‘त्रिरत्न’ में विश्वास करता है जबकि बौद्ध धर्म ‘अष्टांगिक मार्ग’ में है।
Real Education Factory
प्रश्न 17. जैन धर्म किस प्रकार का धर्म है — अतिमार्गीय या मध्यममार्गीय?
(A) मध्यममार्गीय
(B) अतिमार्गीय
(C) दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं
✅ उत्तर: (B) अतिमार्गीय
📝 जैन धर्म एक अतिमार्गीय धर्म है। यह ‘सल्लेखना’ या ‘संथारा’ (निर्जल-निराहार रहकर प्राण त्याग) जैसी कठोर साधना में विश्वास करता है। इसके विपरीत बौद्ध धर्म एक मध्यममार्गीय धर्म है — यह न तो पूर्ण भौतिकवाद और न ही पूर्ण अध्यात्मवाद पर बल देता है। अहिंसा के क्षेत्र में भी जैन धर्म, बौद्ध धर्म की तुलना में अधिक कट्टर है। जैन साधु जमीन पर चलते समय भी सूक्ष्म जीवों को बचाने के लिए मुँह पर पट्टी (मुहपत्ती) बाँधते हैं और जमीन झाड़ते हुए चलते हैं। यह जैन धर्म की अतिमार्गीय प्रकृति को दर्शाता है।
Real Education Factory
प्रश्न 18. जैन धर्म और बौद्ध धर्म दोनों ने किस व्यवस्था का विरोध किया?
(A) राजतंत्र
(B) जन्माधारित वर्णव्यवस्था
(C) कृषि व्यवस्था
(D) व्यापार व्यवस्था
✅ उत्तर: (B) जन्माधारित वर्णव्यवस्था
📝 जैन और बौद्ध दोनों धर्मों ने जन्म पर आधारित वर्णव्यवस्था का विरोध किया और कर्म आधारित वर्ण व्यवस्था को स्वीकार किया। दोनों धर्मों के प्रवर्तक — महावीर और गौतम बुद्ध — क्षत्रिय और राजघराने से संबंधित थे। दोनों ने वेदों को ‘अपौरुषेय’ मानने से इनकार किया। दोनों ने उस समय की ब्राह्मणीय सामाजिक और धार्मिक व्यवस्था में व्याप्त बुराइयों का विरोध किया। हालाँकि, ब्राह्मणीय व्यवस्था पर बौद्ध धर्म ने जितना तीव्र प्रहार किया उतना जैन धर्म नहीं कर सका। दोनों धर्मों ने पुनर्जन्म और कर्म के सिद्धांत में विश्वास किया।
Real Education Factory
प्रश्न 19. जैन धर्म में ईश्वर के अस्तित्व के बारे में क्या मान्यता है?
(A) ईश्वर सर्वशक्तिमान है
(B) ईश्वर नहीं है, मुक्ति शुद्ध जीवन से संभव है
(C) ईश्वर की कृपा से मोक्ष मिलता है
(D) ईश्वर अनेक रूपों में हैं
✅ उत्तर: (B) ईश्वर नहीं है, मुक्ति शुद्ध जीवन से संभव है
📝 जैन धर्म एक अनीश्वरवादी (Atheistic) धर्म है। जैन धर्म के अनुसार कोई ईश्वर या सृष्टिकर्ता नहीं है और मानव की मुक्ति किसी अलौकिक सत्ता की दया पर निर्भर नहीं करती। शुद्धता और नैतिकता से परिपूर्ण जीवन जीने से ही मुक्ति संभव है। बौद्ध धर्म भी आरंभ में अनीश्वरवादी था परंतु बाद में उनके अनुयायियों ने महावीर और महात्मा बुद्ध को ईश्वर का रूप दे दिया। जैन धर्म कहता है — मनुष्य की मुक्ति किसी बाह्य सत्ता पर नहीं, बल्कि उसके स्वयं के शुद्ध और सदाचारी जीवन पर निर्भर करती है।
Real Education Factory
प्रश्न 20. जैन धर्म की प्रथम संगीति के अध्यक्ष कौन थे?
(A) भद्रबाहु
(B) स्थूलभद्र
(C) देवार्धिगण
(D) आचार्य सुधर्मन
✅ उत्तर: (B) स्थूलभद्र
📝 जैन धर्म की प्रथम संगीति का आयोजन 300 ईपू के आस-पास पाटलिपुत्र (कुसुमपुर) में हुआ था। इसके अध्यक्ष ‘स्थूलभद्र’ थे। इस संगीति के समय चंद्रगुप्त मौर्य समकालीन शासक थे। इसी संगीति में बारह अंगों के रूप में जैनागम साहित्यों का संकलन किया गया। जैन धर्म की सबसे प्राचीन शिक्षा ‘चौदह पूर्व’ मानी जाती है जिसे स्थूलभद्र ने भद्रबाहु से सीखा था। इसी संगीति के बाद जैन धर्म स्थूलभद्र के नेतृत्व में श्वेतांबर और भद्रबाहु के नेतृत्व में दिगंबर — दो शाखाओं में विभाजित हो गया।
Real Education Factory
प्रश्न 21. जैन धर्म की द्वितीय संगीति के अध्यक्ष कौन थे?
(A) स्थूलभद्र
(B) भद्रबाहु
(C) देवार्धिगण क्षमाश्रमण
(D) आचार्य सुधर्मन
✅ उत्तर: (C) देवार्धिगण क्षमाश्रमण
📝 जैन धर्म की द्वितीय संगीति का आयोजन वल्लभी (काठियावाड़, गुजरात) में 512 ई० में हुआ था। इसके अध्यक्ष ‘देवार्धिगण क्षमाश्रमण’ थे। इस संगीति के समकालीन शासक वल्लभी के मैत्रक वंशीय शासक ‘ध्रुवसेन प्रथम’ थे। इस संगीति के परिणामस्वरूप अनेक उपांग साहित्यों की रचना हुई। प्रथम संगीति में 12 अंगों का संकलन हुआ था जबकि द्वितीय में उपांग साहित्यों की रचना हुई। दोनों संगीतियों के स्थान, वर्ष, अध्यक्ष और परिणाम — ये चारों तथ्य परीक्षा में अक्सर पूछे जाते हैं।
Real Education Factory
प्रश्न 22. जैन धर्म की सबसे प्राचीन शिक्षा क्या मानी जाती है?
(A) बारह अंग
(B) चौदह पूर्व
(C) उपांग साहित्य
(D) आचारांग सूत्र
✅ उत्तर: (B) चौदह पूर्व
📝 जैन धर्म की सबसे प्राचीन शिक्षा ‘चौदह पूर्व’ मानी जाती है। यह अत्यंत प्राचीन ज्ञान परंपरा थी जिसे प्रथम जैन संगीति के अध्यक्ष ‘स्थूलभद्र’ ने ‘भद्रबाहु’ से सीखा था। जैन धर्म के मूल साहित्य को ‘आगम’ कहा जाता है। प्रथम जैन संगीति में ‘बारह अंगों’ के रूप में जैनागम साहित्यों का संकलन किया गया। द्वितीय जैन संगीति में ‘उपांग साहित्यों’ की रचना हुई। चौदह पूर्व की ज्ञान परंपरा जैन धर्म की मूल शिक्षाओं का आधार मानी जाती है।
Real Education Factory
प्रश्न 23. छठी शताब्दी ईपू में मध्य गांगेय क्षेत्र में ब्राह्मणीय व्यवस्था के विरोध में कितने धार्मिक सम्प्रदायों का उदय हुआ था?
✅ उत्तर: (C) 62
📝 छठी शताब्दी ईपू में ब्राह्मणीय सामाजिक व धार्मिक व्यवस्था के खिलाफ मध्य गांगेय क्षेत्र में कुल 62 धार्मिक सम्प्रदायों का उदय हुआ था। इन 62 सम्प्रदायों में से जैन धर्म और बौद्ध धर्म सर्वाधिक प्रसिद्ध और प्रभावशाली रहे। इस काल को भारतीय इतिहास में वैचारिक क्रांति का युग कहा जाता है। इस समय आजीवक, लोकायत, चार्वाक जैसे अनेक सम्प्रदाय भी उठे। यह उस काल की सामाजिक-आर्थिक और धार्मिक उथल-पुथल को दर्शाता है। UPSC प्रीलिम्स में यह ’62’ की संख्या एक महत्वपूर्ण तथ्य के रूप में पूछी जाती है।
Real Education Factory
प्रश्न 24. चंद्रगुप्त मौर्य ने किस पद्धति से अपने प्राण त्यागे थे?
(A) युद्ध में वीरगति
(B) सल्लेखना/संथारा
(C) विष ग्रहण
(D) जलसमाधि
✅ उत्तर: (B) सल्लेखना/संथारा
📝 चंद्रगुप्त मौर्य ने जैन धर्म स्वीकार कर लिया था। उन्होंने जीवन के अंतिम काल में राजगद्दी का परित्याग किया और कर्नाटक के श्रवणबेलगोला (हासन जिला) में स्थित ‘चंद्रगिरि’ नामक पर्वत पर जैन धर्म की ‘सल्लेखना’ पद्धति से अपने प्राण त्यागे। सल्लेखना का अर्थ है — निर्जल और निराहार रहकर (Fasting until death) प्राण का परित्याग करना। यह जैन धर्म की एक अतिमार्गीय साधना पद्धति है। चंद्रगुप्त मौर्य का यह अंत जैन धर्म के प्रति उनकी गहरी आस्था का प्रमाण है।
Real Education Factory
प्रश्न 25. जैन धर्म के ‘त्रिरत्न’ में ‘सम्यक् चरित्र’ के साथ अन्य दो क्या हैं?
(A) सम्यक् तप और सम्यक् दान
(B) सम्यक् श्रद्धा और सम्यक् ज्ञान
(C) सम्यक् वाणी और सम्यक् कर्म
(D) सम्यक् ध्यान और सम्यक् संकल्प
✅ उत्तर: (B) सम्यक् श्रद्धा और सम्यक् ज्ञान
📝 जैन धर्म में मोक्ष प्राप्ति का मार्ग ‘त्रिरत्न’ है जिसके तीन तत्व हैं — (1) सम्यक् श्रद्धा या दर्शन (Right Faith), (2) सम्यक् ज्ञान (Right Knowledge), और (3) सम्यक् चरित्र (Right Conduct)। ये तीनों मिलकर ‘त्रिरत्न’ कहलाते हैं। इसके विपरीत बौद्ध धर्म का ‘अष्टांगिक मार्ग’ मोक्ष का मार्ग है जिसमें सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाणी, सम्यक् कर्म, सम्यक् आजीव, सम्यक् प्रयास, सम्यक् स्मृति और सम्यक् समाधि शामिल हैं। UPSC एवं SSC में जैन त्रिरत्न और बौद्ध अष्टांगिक मार्ग का तुलनात्मक प्रश्न बार-बार आता है।
Download PDF: जैन धर्म के 25 महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न 2026