इस पोस्ट में आप भारत पर अरबों के आक्रमण से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण MCQ 2026 जानेंगे। यह जानकारी UPPSC, SSC और Railway परीक्षाओं के लिए बहुत उपयोगी है। ध्यान से पढ़ें और तैयारी मजबूत करें।
प्राचीन भारत का इतिहास भाग-02 MCQ-2026
भारत पर अरबों का आक्रमण Most Important MCQ 2026 | UPPSC, SSC, Railway
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Q1. भारत पर अरबों का पहला आक्रमण कब और कहाँ हुआ था?
(A) 636 ई०, थाना
(B) 647 ई०, देवल
(C) 712 ई०, सिंध
(D) 700 ई०, मुल्तान
✅ उत्तर: (A) 636 ई०, थाना
📝 खलीफा उमर (634–644 ई०) के शासनकाल में 636 ई० के आसपास थाना (मुंबई के निकट) क्षेत्र में अरबों का पहला असफल आक्रमण हुआ। उस समय भारत में हर्षवर्धन जैसे शक्तिशाली शासक थे, इसलिए यह प्रयास विफल रहा। अरबों ने इससे सीख लेकर सही अवसर की प्रतीक्षा की।
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Q2. अरबों का दूसरा असफल प्रयास किस खलीफा के समय हुआ?
(A) खलीफा उमर
(B) खलीफा उस्मान
(C) खलीफा अली
(D) खलीफा अल-वालिद
✅ उत्तर: (B) खलीफा उस्मान
📝 647 ई० में खलीफा उस्मान के शासनकाल में भारत पर दूसरा अरब प्रयास हुआ, परन्तु यह भी सफल नहीं हुआ। अरबों ने इन दोनों असफलताओं से सीख लेते हुए अपनी रणनीति को मजबूत किया और अंततः 712 ई० में मुहम्मद बिन कासिम के नेतृत्व में सफलता प्राप्त की।
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Q3. भारत पर अरबों का पहला सफल आक्रमण किस वर्ष हुआ?
(A) 700 ई०
(B) 708 ई०
(C) 712 ई०
(D) 720 ई०
✅ उत्तर: (C) 712 ई०
📝 712 ई० में मुहम्मद बिन कासिम के नेतृत्व में अरबों का भारत पर पहला सफल आक्रमण हुआ। उसने सिंध पर विजय प्राप्त की और इस प्रकार भारत में इस्लाम के राजनीतिक प्रवेश की शुरुआत हुई। यह घटना आने वाली कई शताब्दियों के इतिहास को प्रभावित करने वाली सिद्ध हुई।
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Q4. 712 ई० में अरबों के पहले सफल आक्रमण के समय खलीफा कौन था?
(A) खलीफा उमर
(B) खलीफा उस्मान
(C) खलीफा अल-वालिद
(D) खलीफा अली
✅ उत्तर: (C) खलीफा अल-वालिद
📝 712 ई० में उमय्यद वंश के खलीफा अल-वालिद (705–715 ई०) का शासन था। उन्हीं के काल में इराक के गवर्नर हज्जाज बिन यूसुफ ने सिंध पर आक्रमण की योजना बनाई और मुहम्मद बिन कासिम को नेतृत्व सौंपा। अल-वालिद के शासनकाल में अरब साम्राज्य अपने चरमोत्कर्ष पर था।
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Q5. मुहम्मद बिन कासिम के सिंध आक्रमण के समय इराक का गवर्नर कौन था?
(A) अल-वालिद
(B) हज्जाज बिन यूसुफ
(C) उबैदुल्ला
(D) बुदैली
✅ उत्तर: (B) हज्जाज बिन यूसुफ
📝 हज्जाज बिन यूसुफ इराक का एक शक्तिशाली गवर्नर था जिसने सिंध विजय की योजना बनाई। पहले उसने उबैदुल्ला और बुदैल को भेजा, जो असफल रहे। इसके बाद उसने अपने युवा रिश्तेदार मुहम्मद बिन कासिम को इस महत्वपूर्ण अभियान का नेतृत्व सौंपा, जिसने 712 ई० में सफलता प्राप्त की।
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Q6. मुहम्मद बिन कासिम के समय सिंध का शासक कौन था?
(A) जयसिंह
(B) राजा दाहिर
(C) पुलकेशिन द्वितीय
(D) हर्षवर्धन
✅ उत्तर: (B) राजा दाहिर
📝 712 ई० में जब मुहम्मद बिन कासिम ने सिंध पर आक्रमण किया, तब वहाँ राजा दाहिर का शासन था। राजा दाहिर ने वीरतापूर्वक युद्ध किया और श्राबोर के युद्ध में हाथी पर सवार होकर संघर्ष किया, किन्तु अंततः 20 जून 712 ई० को वे युद्धभूमि में वीरगति को प्राप्त हुए।
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Q7. मुहम्मद बिन कासिम ने सिंध विजय अभियान की शुरुआत किस बंदरगाह से की?
(A) मुल्तान
(B) आरौर
(C) देवल
(D) ब्राह्मणाबाद
✅ उत्तर: (C) देवल
📝 मुहम्मद बिन कासिम ने सिंध विजय अभियान की शुरुआत देवल बंदरगाह से की। उसने ‘मंगनक’ नामक विशाल यंत्र का उपयोग करके किले की दीवारों को तोड़ा। देवल की विजय के बाद सिंध के द्वार खुल गए और आगे ब्राह्मणाबाद, आरौर तथा मुल्तान की विजय का मार्ग प्रशस्त हुआ।
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Q8. मुहम्मद बिन कासिम ने देवल पर आक्रमण में किस विशेष यंत्र का प्रयोग किया?
(A) कटापुल्ट
(B) मंगनक
(C) ट्रेबुशे
(D) बैलिस्टा
✅ उत्तर: (B) मंगनक
📝 ‘मंगनक’ एक विशाल पत्थर फेंकने वाला युद्ध यंत्र था, जिसका उपयोग मुहम्मद बिन कासिम ने देवल बंदरगाह के किले की दीवारों को तोड़ने के लिए किया। इस शक्तिशाली यंत्र ने अरबों को किले पर शीघ्र विजय प्राप्त करने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की।
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Q9. निर्णायक युद्ध ‘श्राबोर का युद्ध’ कब हुआ था?
(A) 20 जून 710 ई०
(B) 20 जून 712 ई०
(C) 15 मई 712 ई०
(D) 10 जुलाई 713 ई०
✅ उत्तर: (B) 20 जून 712 ई०
📝 श्राबोर का युद्ध 20 जून 712 ई० को हुआ, जो सिंध विजय का निर्णायक युद्ध था। इसमें राजा दाहिर ने हाथी पर सवार होकर वीरतापूर्वक युद्ध किया, किन्तु वे युद्धभूमि में मारे गए। उनकी मृत्यु के साथ ही सिंध की राजनीतिक शक्ति पूर्णतः समाप्त हो गई।
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Q10. राजा दाहिर की मृत्यु के बाद उनके किस पुत्र ने प्रतिरोध किया?
(A) दाहिर सिंह
(B) जयसिंह
(C) वीरसिंह
(D) रणसिंह
✅ उत्तर: (B) जयसिंह
📝 राजा दाहिर की मृत्यु के बाद उनके पुत्र जयसिंह ने ब्राह्मणाबाद में प्रतिरोध किया, किन्तु वह भी पराजित हुआ। इसके बाद मुहम्मद बिन कासिम ने ब्राह्मणाबाद और सिंध की राजधानी आरौर पर अधिकार कर लिया। इस प्रकार सम्पूर्ण सिंध अरबों के अधीन हो गया।
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Q11. मुल्तान को ‘स्वर्ण नगर’ क्यों कहा जाता था?
(A) वहाँ सोने की खानें थीं
(B) विजय के दौरान अत्यधिक सोना मिला
(C) वहाँ सोने के मंदिर थे
(D) वहाँ सोने का व्यापार होता था
✅ उत्तर: (B) विजय के दौरान अत्यधिक सोना मिला
📝 मुहम्मद बिन कासिम द्वारा मुल्तान की विजय के दौरान अत्यधिक मात्रा में सोना प्राप्त हुआ, जिसके कारण उसे ‘स्वर्ण नगर’ कहा जाने लगा। यह आर्थिक दृष्टि से अरबों की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक थी और इससे उनके आक्रमण के आर्थिक उद्देश्य भी स्पष्ट होते हैं।
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Q12. मुहम्मद बिन कासिम के शासनकाल में गैर-मुसलमानों पर कौन सा कर लगाया गया?
(A) खराज
(B) जकात
(C) जजिया
(D) उश्र
✅ उत्तर: (C) जजिया
📝 मुहम्मद बिन कासिम के शासनकाल में गैर-मुसलमानों पर जजिया कर लगाया गया। हालांकि ब्राह्मण, महिलाएँ, बच्चे, अपाहिज, साधु, सन्यासी और भिखारी आदि को इससे छूट दी गई थी। यह कर इस्लामी शासन व्यवस्था में गैर-मुस्लिम प्रजा से सुरक्षा और संरक्षण के बदले लिया जाता था।
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Q13. मुहम्मद बिन कासिम ने हिन्दुओं के अतिरिक्त किस धर्म के अनुयायियों पर भी जजिया कर लगाया?
(A) जैन
(B) पारसी
(C) बौद्ध
(D) ईसाई
✅ उत्तर: (C) बौद्ध
📝 मुहम्मद बिन कासिम पहला मुस्लिम शासक था जिसने हिन्दुओं के अतिरिक्त बौद्धों पर भी जजिया कर लगाया। यह उसकी प्रशासनिक नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू था। इससे पहले के कुछ अरब शासकों ने मुख्यतः हिन्दुओं पर ही यह कर लागू किया था।
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Q14. अकबर द्वारा समाप्त किए गए जजिया कर को पुनः किसने लागू किया?
(A) जहाँगीर
(B) शाहजहाँ
(C) औरंगजेब
(D) बाबर
✅ उत्तर: (C) औरंगजेब
📝 मुगल सम्राट अकबर ने जजिया कर को समाप्त कर दिया था, किन्तु बाद में औरंगजेब ने इसे पुनः लागू किया। बाद में मोहम्मद शाह रंगीला के समय इसे पुनः समाप्त कर दिया गया। जजिया कर का यह क्रम — लागू और समाप्त — परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है।
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Q15. मुहम्मद बिन कासिम द्वारा स्थापित ‘मंसूरा’ नगर आधुनिक काल में कहाँ है?
(A) लाहौर
(B) कराची
(C) हैदराबाद (सिंध)
(D) मुल्तान
✅ उत्तर: (B) कराची
📝 मुहम्मद बिन कासिम ने विजित क्षेत्रों में कुछ नए नगर स्थापित किए। ‘मंसूरा’ नगर आधुनिक कराची (पाकिस्तान) के निकट स्थित था। इसके अतिरिक्त ‘महफूजा’ आधुनिक हैदराबाद (सिंध) और ‘मुल्तान’ या ‘स्वर्ण नगर’ भी उसके शासनकाल के महत्वपूर्ण नगर थे।
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Q16. मुहम्मद बिन कासिम द्वारा स्थापित ‘महफूजा’ नगर आधुनिक काल में किस स्थान पर है?
(A) कराची
(B) हैदराबाद (सिंध)
(C) मुल्तान
(D) लाहौर
✅ उत्तर: (B) हैदराबाद (सिंध)
📝 मुहम्मद बिन कासिम द्वारा स्थापित ‘महफूजा’ नगर आधुनिक हैदराबाद (सिंध, पाकिस्तान) में स्थित है। इसके अतिरिक्त ‘मंसूरा’ आधुनिक कराची के निकट तथा ‘मुल्तान’ (स्वर्ण नगर) भी उसके शासनकाल के प्रमुख नगर थे, जो ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
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Q17. अरब यात्री सुलेमान ने भारत की यात्रा किस शताब्दी में की थी?
(A) 7वीं शताब्दी ई०
(B) 8वीं शताब्दी ई०
(C) 9वीं शताब्दी ई०
(D) 10वीं शताब्दी ई०
✅ उत्तर: (C) 9वीं शताब्दी ई०
📝 अरब यात्री सुलेमान ने 9वीं शताब्दी ई० में भारत की यात्रा की थी। उसने प्रतिहार वंशीय शासक मिहिरभोज को अरबों का घोर शत्रु बताया है। उसका यात्रा विवरण उस काल के भारत-अरब राजनीतिक संबंधों की जानकारी देने वाला एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत माना जाता है।
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Q18. अरब यात्री अलमसूदी ने भारत की यात्रा किस शताब्दी में की थी?
(A) 8वीं शताब्दी ई०
(B) 9वीं शताब्दी ई०
(C) 10वीं शताब्दी ई०
(D) 11वीं शताब्दी ई०
✅ उत्तर: (C) 10वीं शताब्दी ई०
📝 अरब विद्वान अलमसूदी ने 10वीं शताब्दी ई० में भारत की यात्रा की थी। उन्होंने भारत के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक जीवन के बारे में महत्वपूर्ण विवरण प्रस्तुत किए। उनका यात्रा-विवरण मध्यकालीन भारत के इतिहास का एक प्रमुख अरबी स्रोत माना जाता है।
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Q19. किस अरब यात्री ने मिहिरभोज को अरबों का घोर शत्रु बताया?
(A) अलमसूदी
(B) अलबरूनी
(C) सुलेमान
(D) इब्न बतूता
✅ उत्तर: (C) सुलेमान
📝 9वीं शताब्दी ई० में भारत की यात्रा करने वाले अरब विद्वान सुलेमान ने मिहिरभोज (प्रतिहार वंशीय शासक) को अरबों का घोर शत्रु बताया है। यह विवरण उस समय की भारत-अरब राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को दर्शाता है। मिहिरभोज ने अरबों को भारत में आगे बढ़ने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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Q20. आर्यभट्ट के ‘सूर्य सिद्धान्त’ का अरबी भाषा में अनुवाद किसके काल में हुआ?
(A) राजा दाहिर के काल में
(B) मुहम्मद बिन कासिम के काल में
(C) हज्जाज बिन यूसुफ के काल में
(D) खलीफा उमर के काल में
✅ उत्तर: (B) मुहम्मद बिन कासिम के काल में
📝 मुहम्मद बिन कासिम के कार्यकाल में अरब विद्वानों द्वारा आर्यभट्ट के ‘सूर्य सिद्धान्त’ तथा विष्णु शर्मा के ‘पंचतंत्र’ का अरबी भाषा में अनुवाद किया गया। इससे भारतीय ज्ञान-विज्ञान का अरब जगत में व्यापक प्रसार हुआ और दोनों सभ्यताओं के बीच बौद्धिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिला।
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Q21. भारत पर अरबों के आक्रमण का प्रमुख नेता कौन था?
(A) महमूद गजनवी
(B) मुहम्मद बिन कासिम
(C) तैमूर लंग
(D) बाबर
✅ उत्तर: (B) मुहम्मद बिन कासिम
📝 मुहम्मद बिन कासिम ने 712 ई० में सिंध पर आक्रमण किया और अरब शासन स्थापित किया। इसे भारत में इस्लामिक शासन की शुरुआत माना जाता है। उसकी इस विजय ने भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास की दिशा को हमेशा के लिए बदल दिया।
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Q22. भारतीय पंचतन्त्र पश्चिम में किस पुस्तक का आधार बनी?
(A) इलियड
(B) ओडिसी
(C) एशप की कहानियाँ
(D) अरेबियन नाइट्स
✅ उत्तर: (C) एशप की कहानियाँ
📝 भारतीय ग्रंथ ‘पंचतन्त्र’ का अनुवाद पहले अरबी भाषा में हुआ, जिसके माध्यम से यह पश्चिमी देशों तक पहुँचा। पश्चिम में लिखित ‘एशप की कहानियाँ’ (Aesop’s Fables) के निर्माण में पंचतन्त्र की कथाओं का महत्वपूर्ण प्रभाव रहा। यह भारत और पश्चिमी जगत के बीच साहित्यिक आदान-प्रदान का प्रमुख उदाहरण है।
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Q23. भारतीय अंक पद्धति को अरबों ने क्या नाम दिया?
(A) अरेबिक न्यूमेरल्स
(B) हिन्दसा
(C) दशमलव
(D) संख्यांक
✅ उत्तर: (B) हिन्दसा
📝 भारतीय अंक पद्धति को अरबों ने भारत से ग्रहण किया और इसे ‘हिन्दसा’ नाम दिया। बाद में यह प्रणाली यूरोप पहुँची, जहाँ इसे ‘अरेबिक न्यूमेरल्स’ कहा गया। भारतीय दशमलव प्रणाली और शून्य की अवधारणा ने विश्व गणित को नई दिशा दी और आधुनिक गणना प्रणाली की नींव रखी।
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Q24. आक्रमण का तात्कालिक कारण क्या था?
(A) धर्म का प्रसार
(B) देवल बंदरगाह के पास अरब जहाज की लूट
(C) व्यापार विवाद
(D) भूमि विवाद
✅ उत्तर: (B) देवल बंदरगाह के पास अरब जहाज की लूट
📝 708 ई० में श्रीलंका (सेरेनदीप) से एक अरब जहाज इराक जा रहा था, जिसे देवल बंदरगाह के निकट समुद्री लुटेरों ने लूट लिया। इराक के गवर्नर हज्जाज बिन यूसुफ ने सिंध के शासक राजा दाहिर से लुटेरों को पकड़कर सौंपने की मांग की, लेकिन दाहिर ने असमर्थता जताई। यही घटना अरब आक्रमण का तात्कालिक कारण बनी।
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Q25. अरबों के भारत पर आक्रमण का वास्तविक (असली) कारण क्या था?
(A) जहाज की लूट का बदला
(B) सिंध की अपार संपत्ति और साम्राज्य विस्तार
(C) धर्म का प्रचार
(D) व्यापारियों की सुरक्षा
✅ उत्तर: (B) सिंध की अपार संपत्ति और साम्राज्य विस्तार
📝 इतिहासकारों के अनुसार अरबों के आक्रमण का वास्तविक उद्देश्य सिंध की अपार संपत्ति पर अधिकार करना, समुद्री व्यापार मार्गों पर नियंत्रण स्थापित करना और इस्लामी साम्राज्य का विस्तार करना था। जहाज की लूट की घटना केवल एक तात्कालिक कारण थी, जबकि मुख्य लक्ष्य राजनीतिक और आर्थिक लाभ प्राप्त करना था।