
प्रस्तावना
- भारत का इतिहास उन वीरों की गाथाओं से भरा पड़ा है, जिन्होंने अंग्रेजों की विस्तारवादी नीतियों को चुनौती दी। इन्हीं में से एक अध्याय है — प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध, जो 1767 से 1769 के बीच लड़ा गया था।
- यह वो युद्ध था जिसमें एक साधारण सैनिक से उठकर शासक बने हैदर अली ने ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना को न सिर्फ रोका, बल्कि मद्रास तक खदेड़ दिया। अंग्रेजों को मजबूरन संधि करनी पड़ी — और यह संधि उनके लिए किसी शर्मनाक समझौते से कम नहीं थी।
- यह युद्ध इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने पहली बार यह साबित किया कि भारतीय शासक अंग्रेजों को सैन्य रूप से हरा सकते हैं। इस युद्ध ने आगे के तीन आंग्ल-मैसूर युद्धों की नींव रखी और भारतीय प्रतिरोध के इतिहास में एक स्वर्णिम पन्ना जोड़ा।
युद्ध की पृष्ठभूमि
दक्षिण भारत की राजनीतिक स्थिति
18वीं सदी के मध्य में दक्षिण भारत की राजनीति बेहद अस्थिर थी। मुगल साम्राज्य का पतन हो चुका था और उसके खाली स्थान को भरने के लिए कई क्षेत्रीय शक्तियाँ आपस में लड़ रही थीं। हैदराबाद का निजाम, मराठा संघ, मैसूर राज्य और ईस्ट इंडिया कंपनी, ये सभी शक्तियाँ दक्षिण भारत पर अपनी पकड़ मजबूत करने की होड़ में थीं।
मैसूर राज्य का उदय
मैसूर राज्य पर वाडियार वंश का शासन था, लेकिन असली सत्ता धीरे-धीरे हैदर अली के हाथों में आ गई। हैदर अली ने अपनी सैन्य प्रतिभा और कूटनीतिक चालाकी से मैसूर को एक शक्तिशाली राज्य में बदल दिया। उन्होंने फ्रांसीसी सहायता से एक आधुनिक सेना तैयार की और दक्षिण भारत में अपना विस्तार करना शुरू किया।
अंग्रेजों की विस्तारवादी नीति
ईस्ट इंडिया कंपनी मद्रास (चेन्नई) से अपना प्रभाव बढ़ा रही थी। प्लासी (1757) और बक्सर (1764) की जीत के बाद अंग्रेजों का आत्मविश्वास चरम पर था। वे दक्षिण भारत को भी अपने नियंत्रण में लाना चाहते थे और मैसूर इस रास्ते में सबसे बड़ी बाधा थी।
युद्ध के मुख्य कारण
अंग्रेजों और हैदर अली के बीच तनाव
हैदर अली ने 1761 में मराठों के खिलाफ अंग्रेजों से सहायता माँगी थी। मराठों ने मैसूर पर हमला किया था और हैदर अली ने कंपनी से अपेक्षा की थी कि वे संधि के अनुसार मदद करेंगे, लेकिन अंग्रेजों ने इस मुश्किल वक्त में हैदर अली की कोई मदद नहीं की। इस विश्वासघात ने हैदर अली के मन में अंग्रेजों के प्रति गहरी नाराजगी भर दी।
निजाम और मराठों की भूमिका
1766 में अंग्रेजों ने हैदराबाद के निजाम और मराठों के साथ मिलकर मैसूर के खिलाफ एक गुप्त गठबंधन बनाया। इस त्रिकोणीय षड्यंत्र का उद्देश्य था, मैसूर को चारों तरफ से घेरकर कुचल देना, लेकिन हैदर अली इतने चतुर थे कि उन्होंने निजाम को अपनी तरफ मिला लिया और मराठों को तटस्थ कर दिया।
अंग्रेजों की कूटनीति और धोखा
अंग्रेजों ने उत्तरी सरकार (Northern Circars) पर कब्जा कर लिया, जो क्षेत्र निजाम का था। इससे निजाम भी अंग्रेजों से नाराज हो गया। इसी राजनीतिक उठापटक के बीच 1767 में युद्ध की चिंगारी भड़क उठी।
हैदर अली — एक असाधारण योद्धा और रणनीतिकार
जीवन परिचय
हैदर अली का जन्म लगभग 1721 में बुदिकोटे (कर्नाटक) में हुआ था। वे एक साधारण सैनिक परिवार से थे और उनकी कोई औपचारिक शिक्षा नहीं थी, लेकिन युद्धभूमि उनकी सबसे बड़ी पाठशाला थी। वे मैसूर की सेना में शामिल हुए और अपनी बहादुरी तथा बुद्धिमत्ता से धीरे-धीरे सेनापति बन गए।
सैन्य शक्ति और आधुनिकीकरण
हैदर अली ने मैसूर की सेना का पूरी तरह कायाकल्प कर दिया। उन्होंने फ्रांसीसी सैन्य विशेषज्ञों की मदद से तोपखाने को आधुनिक बनाया। उनकी घुड़सवार सेना इतनी तेज और अनुशासित थी कि दुश्मन के लिए उनका सामना करना बेहद कठिन था। उन्होंने रॉकेट सेना का भी इस्तेमाल किया — जो उस जमाने में एक क्रांतिकारी कदम था।
मैसूर को मजबूत बनाना
हैदर अली ने न केवल सेना बल्कि मैसूर की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत किया। व्यापार को बढ़ावा दिया, किसानों की स्थिति सुधारी और प्रशासन को कुशल बनाया। उनके शासन में मैसूर दक्षिण भारत की सबसे शक्तिशाली और समृद्ध रियासतों में से एक बन गया।
युद्ध की प्रमुख घटनाएँ
युद्ध की शुरुआत
1767 में जब अंग्रेजों ने निजाम के साथ मिलकर मैसूर पर हमला बोला, तो हैदर अली ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की। उन्होंने अपनी कूटनीतिक चालाकी से निजाम को अंग्रेजों के खिलाफ पाला बदलने पर मजबूर कर दिया। एक झटके में अंग्रेजों का गठबंधन बिखर गया।
महत्वपूर्ण लड़ाइयाँ
चंगमा और त्रिनोमाली के युद्धों में हैदर अली ने अंग्रेजी सेना को कड़ी टक्कर दी। कर्नल स्मिथ के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना ने कुछ छोटी जीतें हासिल कीं, लेकिन वे कभी भी निर्णायक बढ़त नहीं बना सकी। हैदर अली की सेना हर बार नए मोर्चे खोल देती थी।
मद्रास तक पहुँचना — एक ऐतिहासिक क्षण
1769 में हैदर अली ने अपनी सबसे साहसी चाल चली। वे अपनी सेना लेकर सीधे मद्रास (अंग्रेजों की सबसे बड़ी बस्ती) की दीवारों तक जा पहुँचे। मद्रास में अफरा-तफरी मच गई। अंग्रेज इतने भयभीत हो गए कि उन्होंने तुरंत संधि के लिए दूत भेजा। यह वो क्षण था जब पूरा भारत समझ गया कि अंग्रेजों को हराया जा सकता है।
हैदर अली की रणनीति
गुरिल्ला युद्ध तकनीक
हैदर अली खुले मैदान में अंग्रेजों से सीधी टक्कर लेने की बजाय गुरिल्ला रणनीति अपनाते थे। वे दुश्मन की सप्लाई लाइन काट देते थे, छोटे-छोटे दस्तों से अचानक हमला करते थे और पहाड़ी इलाकों का भरपूर फायदा उठाते थे।
अंग्रेजों को चौंकाने वाली चालें
हैदर अली की सेना की गति अद्भुत थी। वे इतनी तेजी से एक जगह से दूसरी जगह पहुँच जाते थे कि अंग्रेज उनका पीछा करते-करते थक जाते थे। उनकी घुड़सवार सेना दुश्मन के पीछे के क्षेत्रों में तबाही मचा देती थी जबकि मुख्य सेना सामने से दबाव बनाए रखती थी।
कूटनीति का माहिराना उपयोग
हैदर अली सिर्फ तलवार से नहीं, दिमाग से भी लड़ते थे। उन्होंने निजाम को अंग्रेजों से अलग कर अपने साथ मिलाया। मराठों को तटस्थ रखा। फ्रांसीसियों से तकनीकी सहायता ली। यह समझ कि एक साथ सभी शत्रुओं से नहीं लड़ा जा सकता — उनकी सबसे बड़ी ताकत थी।
मद्रास की संधि (1769)
- संधि की शर्तें
- 4 अप्रैल 1769 को मद्रास की संधि हुई। इस संधि के तहत दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के जीते हुए प्रदेश वापस कर दिए। सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह थी कि यदि भविष्य में किसी तीसरी शक्ति ने मैसूर पर हमला किया, तो अंग्रेज मैसूर की मदद करेंगे। यह शर्त हैदर अली की बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत थी।
- यह संधि व्यावहारिक रूप से हैदर अली की जीत थी, जो कंपनी कभी भारतीय राजाओं को संधि की शर्तें तय करवाती थी, वही अब हैदर अली की शर्तों पर हस्ताक्षर कर रही थी। यह अंग्रेजी इतिहास में एक दुर्लभ और असहज करने वाला अनुभव था।
- इस संधि ने भले ही युद्ध रोक दिया, लेकिन शांति लंबे समय तक नहीं टिकी। जब 1771 में मराठों ने मैसूर पर हमला किया, तो अंग्रेजों ने संधि के बावजूद कोई मदद नहीं की। इस दूसरे विश्वासघात ने हैदर अली को और अधिक क्रोधित कर दिया — और इसी का परिणाम था द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध।
युद्ध के परिणाम
- यह युद्ध अंग्रेजों के लिए एक बड़ा धक्का था। वे इस युद्ध को जीत नहीं सके और मजबूरन एक ऐसी संधि करनी पड़ी जो उनके लिए अपमानजनक थी। ब्रिटिश इतिहासकारों ने इसे “अनिर्णायक” युद्ध कहकर इसके असल महत्व को छुपाने की कोशिश की।
- इस युद्ध के बाद मैसूर और मजबूत होकर उभरा। हैदर अली की प्रतिष्ठा पूरे भारत में फैल गई। दक्षिण भारत के अन्य राजा और प्रजा देखने लगी कि अंग्रेजों को चुनौती दी जा सकती है।
- इस युद्ध ने अंग्रेजों की “अपराजेय” छवि को पहली बार सार्वजनिक रूप से तोड़ा। पूरे भारत में यह संदेश गया कि ईस्ट इंडिया कंपनी को हराया जा सकता है — बशर्ते सही रणनीति और एकता हो।
इतिहास में महत्व
- इस युद्ध ने सिखाया कि अंग्रेजों से लड़ने के लिए आधुनिक सेना, अच्छी कूटनीति और दृढ़ नेतृत्व की जरूरत है। हैदर अली ने यह तीनों चीजें एकसाथ अपनाईं और सफल हुए।
- इस युद्ध के बाद तीन और आंग्ल-मैसूर युद्ध हुए (1780-84, 1790-92, 1799) हुए। हैदर अली के पुत्र टीपू सुल्तान ने उनकी विरासत को आगे बढ़ाया। हालाँकि 1799 में श्रीरंगपट्टनम की लड़ाई में टीपू वीरगति को प्राप्त हुए, लेकिन मैसूर का यह प्रतिरोध भारतीय इतिहास में अमर हो गया।
- हैदर अली और टीपू सुल्तान ने जो प्रतिरोध की मशाल जलाई, उसने भावी पीढ़ियों को प्रेरणा दी। उन्होंने यह दिखाया कि राष्ट्र की रक्षा के लिए धर्म और जाति से ऊपर उठकर लड़ा जा सकता है। यही भावना आगे चलकर स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा बनी।
निष्कर्ष
प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध सिर्फ दो सेनाओं की लड़ाई नहीं थी — यह दो दुनियाओं का टकराव था। एक तरफ थी ईस्ट इंडिया कंपनी की सुव्यवस्थित, संसाधन-संपन्न और षड्यंत्रकारी ताकत। दूसरी तरफ था एक स्वाभिमानी, बुद्धिमान और दृढ़निश्चयी भारतीय शासक — हैदर अली।
इस युद्ध ने हमें सिखाया कि सही नेतृत्व, आधुनिक सोच और कूटनीतिक समझ से बड़ी से बड़ी ताकत को भी झुकाया जा सकता है। हैदर अली के पास संसाधन कम थे, लेकिन दिमाग और हौसला अपार था।
आज जब हम भारत की आजादी की यात्रा को याद करते हैं, तो हैदर अली जैसे योद्धाओं को भूला नहीं जा सकता। उन्होंने वह बीज बोया जो आगे चलकर स्वतंत्रता की विशाल वटवृक्ष बना।
UPSC Mains ke liye Most Important Questions
प्रश्न 1. प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध (1767–1769) के कारणों का विश्लेषण कीजिए। क्या यह युद्ध अंग्रेजों की कूटनीतिक विफलता का परिणाम था?
प्रश्न 2. हैदर अली की सैन्य एवं कूटनीतिक रणनीतियों का मूल्यांकन कीजिए। उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध किस प्रकार संतुलन स्थापित किया?
प्रश्न 3. प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध के परिणामों और मद्रास की संधि (1769) के प्रभावों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या यह संधि दीर्घकालिक शांति स्थापित कर सकी?
FAQs
Q1. प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध कब हुआ?
उत्तर: 1767 से 1769 के बीच।
Q2. प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध किन-किन के बीच लड़ा गया?
उत्तर: ईस्ट इंडिया कंपनी (अंग्रेज) और मैसूर के शासक हैदर अली के बीच।
Q3. प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध का अंत किस संधि से हुआ?
उत्तर: मद्रास की संधि (Treaty of Madras) — 4 अप्रैल 1769।
Q4. मद्रास की संधि पर हस्ताक्षर कब और कहाँ हुए?
उत्तर: 4 अप्रैल 1769 को मद्रास (अब चेन्नई) में।
Q5. प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध के समय मैसूर का शासक कौन था?
उत्तर: हैदर अली (Hyder Ali)।
Q6. प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध के समय मद्रास प्रेसिडेंसी का गवर्नर कौन था?
उत्तर: चार्ल्स लॉर्ड पिगॉट (Lord Pigot) और बाद में जॉर्ज मैकार्टनी।
Q7. कुल कितने आंग्ल-मैसूर युद्ध हुए?
उत्तर: चार — 1767-69, 1780-84, 1790-92 और 1799।
Q8. हैदर अली का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर: लगभग 1721 में बुदिकोटे, कर्नाटक में।
Q9. हैदर अली ने मैसूर की सत्ता कब संभाली?
उत्तर: 1761 में वे मैसूर के वास्तविक शासक बने।
Q10. हैदर अली किस वंश के शासक थे?
उत्तर: वे किसी वंश के नहीं थे — वे एक सैनिक से उठकर शासक बने। मैसूर पर आधिकारिक रूप से वाडियार वंश का राज था, लेकिन असली सत्ता हैदर अली के हाथ में थी।
Q11. हैदर अली ने किस देश की मदद से अपनी सेना को आधुनिक बनाया?
उत्तर: फ्रांस (France)। फ्रांसीसी सैन्य विशेषज्ञों की सहायता से उन्होंने आधुनिक तोपखाना और प्रशिक्षित पैदल सेना तैयार की।
Q12. हैदर अली की मृत्यु कब और कैसे हुई?
उत्तर: 7 दिसंबर 1782 को द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध के दौरान कैंसर से उनकी मृत्यु हुई।
Q13. हैदर अली के उत्तराधिकारी कौन थे?
उत्तर: उनके पुत्र टीपू सुल्तान, जिन्हें “शेर-ए-मैसूर” कहा जाता है।
Q14. हैदर अली ने किस युद्ध तकनीक का सबसे प्रभावी उपयोग किया?
उत्तर: गुरिल्ला युद्ध (Guerrilla Warfare) और रॉकेट सेना (Rocket Artillery) का।
Q15. प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध का तात्कालिक कारण क्या था?
उत्तर: अंग्रेजों ने हैदराबाद के निजाम और मराठों के साथ मिलकर मैसूर के विरुद्ध गठबंधन बनाया। इस त्रिपक्षीय गठबंधन को तोड़ने के लिए हैदर अली ने युद्ध छेड़ दिया।
Q16. हैदर अली अंग्रेजों से पहले से क्यों नाराज थे?
उत्तर: 1761 में जब मराठों ने मैसूर पर हमला किया, तब हैदर अली ने संधि के आधार पर अंग्रेजों से मदद माँगी, लेकिन अंग्रेजों ने मदद करने से इनकार कर दिया। इस विश्वासघात ने हैदर अली को अंग्रेजों का स्थायी शत्रु बना दिया।
Q17. उत्तरी सरकार (Northern Circars) का इस युद्ध से क्या संबंध है?
उत्तर: अंग्रेजों ने 1765 में निजाम से उत्तरी सरकार छीन लिया था। इससे निजाम भी अंग्रेजों से नाराज था, जिसका फायदा हैदर अली ने उठाया।
Q18. 1766 के त्रिपक्षीय गठबंधन में कौन-कौन शामिल था?
उत्तर: अंग्रेज (ईस्ट इंडिया कंपनी), हैदराबाद का निजाम और मराठा — ये तीनों मैसूर के विरुद्ध एकजुट हुए थे।
Q19. युद्ध के दौरान हैदर अली की सबसे बड़ी कूटनीतिक सफलता क्या रही?
उत्तर: निजाम को अंग्रेजों के खिलाफ पाला बदलवाना। हैदर अली ने निजाम को अपनी तरफ मिला लिया, जिससे अंग्रेजों का गठबंधन टूट गया।
Q20. युद्ध में अंग्रेजी सेना का नेतृत्व किसने किया?
उत्तर: कर्नल जोसेफ स्मिथ (Colonel Joseph Smith) ने।
Q21. हैदर अली किस शहर तक पहुँचने में सफल रहे जिससे अंग्रेजों में भगदड़ मच गई?
उत्तर: मद्रास (Madras) — 1769 में हैदर अली अपनी सेना लेकर सीधे मद्रास की दीवारों तक जा पहुँचे, जिसके बाद अंग्रेजों ने तुरंत संधि का प्रस्ताव रखा।
Q22. हैदर अली ने मद्रास पर हमला क्यों नहीं किया जबकि वे वहाँ तक पहुँच गए थे?
उत्तर: हैदर अली का उद्देश्य मद्रास को जीतना नहीं, बल्कि अंग्रेजों को संधि के लिए मजबूर करना था। मद्रास तक पहुँचकर उन्होंने यह संदेश दे दिया कि वे चाहें तो शहर पर कब्जा कर सकते हैं।
Q23. मद्रास की संधि की मुख्य शर्तें क्या थीं?
उत्तर:
• दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के जीते हुए प्रदेश वापस कर दिए।
• युद्धबंदियों की अदला-बदली हुई।
• यदि किसी तीसरी शक्ति ने मैसूर पर हमला किया तो अंग्रेज मैसूर की सहायता करेंगे।
Q24. मद्रास की संधि की सबसे महत्वपूर्ण और अनोखी शर्त कौन सी थी?
उत्तर: अंग्रेजों का यह वचन कि यदि मैसूर पर किसी तीसरे ने हमला किया तो वे मैसूर की रक्षा करेंगे। यह शर्त भारतीय इतिहास में अनोखी थी क्योंकि इसमें ईस्ट इंडिया कंपनी एक भारतीय शासक के सामने रक्षात्मक स्थिति में थी।
Q25. मद्रास की संधि के बाद अंग्रेजों ने अपना वचन निभाया?
उत्तर: नहीं। 1771 में जब मराठों ने मैसूर पर हमला किया, तब अंग्रेजों ने कोई सहायता नहीं की। इस दूसरे विश्वासघात ने हैदर अली को और अधिक क्रोधित किया और द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध की नींव पड़ी।
Q26. मद्रास की संधि किसके लिए अधिक फायदेमंद थी?
उत्तर: हैदर अली के लिए। यह अंग्रेजों के लिए व्यावहारिक रूप से एक अपमानजनक समझौता था क्योंकि उन्हें एक भारतीय शासक की शर्तें माननी पड़ीं।
Q27. प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध का क्या परिणाम रहा?
उत्तर: यह युद्ध अनिर्णायक रहा लेकिन व्यावहारिक रूप से हैदर अली की जीत थी। अंग्रेजों को उनकी शर्तों पर संधि करनी पड़ी।
Q28. इस युद्ध ने अंग्रेजों की किस छवि को तोड़ा?
उत्तर: प्लासी और बक्सर के बाद अंग्रेज “अपराजेय” माने जाने लगे थे। इस युद्ध ने पहली बार यह साबित किया कि भारतीय शासक अंग्रेजी सेना को हरा सकते हैं या कम से कम बराबरी से टक्कर दे सकते हैं।
Q29. इस युद्ध का द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध से क्या संबंध है?
उत्तर: मद्रास संधि के बाद जब 1771 में मराठों ने मैसूर पर हमला किया और अंग्रेजों ने वचन के बावजूद मदद नहीं की — इस विश्वासघात के कारण 1780 में द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध शुरू हुआ।
Q30. प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध का भारतीय इतिहास में क्या महत्व है?
उत्तर: यह पहला युद्ध था जिसमें किसी भारतीय शासक ने संगठित रूप से ईस्ट इंडिया कंपनी को रोका और उनसे अपनी शर्तों पर संधि करवाई। इसने भविष्य के प्रतिरोध की राह दिखाई।
Q31. चारों आंग्ल-मैसूर युद्धों में से कौन सा युद्ध निर्णायक रहा और क्यों?
उत्तर: चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध (1799) निर्णायक रहा जिसमें टीपू सुल्तान श्रीरंगपट्टनम में वीरगति को प्राप्त हुए और मैसूर पर अंग्रेजों का नियंत्रण हो गया।
Q32. हैदर अली और टीपू सुल्तान में क्या अंतर था?
उत्तर: हैदर अली एक व्यावहारिक और कूटनीतिक शासक थे जो जरूरत पड़ने पर समझौता कर लेते थे। टीपू सुल्तान अधिक आदर्शवादी और कट्टर प्रतिरोधी थे — उन्होंने अंतिम सांस तक लड़ने को प्राथमिकता दी।
Q33. प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध और प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध में क्या अंतर है?
उत्तर:
• प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध: 1767-1769, हैदर अली vs अंग्रेज — मद्रास संधि से समाप्त।
• प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध: 1775-1782, मराठा संघ vs अंग्रेज — सालबाई संधि (1782) से समाप्त।
Q34. हैदर अली की सफलता का सबसे बड़ा कारण क्या था?
उत्तर: दुश्मनों के गठबंधन को तोड़ने की कूटनीतिक चतुराई, आधुनिक सेना, गुरिल्ला रणनीति और मद्रास तक पहुँचने का साहसी निर्णय।
Q35. आंग्ल-मैसूर युद्धों को क्रम से याद करने की Trick क्या है?
उत्तर: “H-H-C-T”
• H = Hyder Ali (प्रथम — 1767-69)
• H = Hyder Ali again (द्वितीय — 1780-84)
• C = Combined (तृतीय — Cornwallis, 1790-92)
• T = Tipu Sultan falls (चतुर्थ — 1799)
Q36. मद्रास संधि का वर्ष याद करने की Trick?
उत्तर: “1769 = 1 + 7 + 6 + 9 = 23” — या बस याद रखो “युद्ध 67 में शुरू, 69 में खत्म”।
Q37. चारों आंग्ल-मैसूर युद्धों की संधियाँ क्या थीं?
उत्तर:
• प्रथम युद्ध (1769) → मद्रास की संधि
• द्वितीय युद्ध (1784) → मंगलौर की संधि
• तृतीय युद्ध (1792) → श्रीरंगपट्टनम की संधि
• चतुर्थ युद्ध (1799) → टीपू सुल्तान की मृत्यु, कोई संधि नहीं
Q38. प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध में अंग्रेजी सेना का नेतृत्व → कर्नल जोसेफ स्मिथ
Q39. हैदर अली ने मैसूर में किस यूरोपीय देश की मदद से आधुनिक सेना बनाई → फ्रांस
Q40. मद्रास की संधि की तारीख → 4 अप्रैल 1769
Q41. प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध के बाद अंग्रेजों ने कब अपना वचन तोड़ा → 1771 में (जब मराठोंने मैसूर पर हमला किया)
Q42. हैदर अली के रॉकेट सैनिकों को क्या कहा जाता था → कुशल रॉकेट मैन (Cushoon)
Q43. मैसूर पर वाडियार वंश का राज था, लेकिन असली सत्ता किसके पास थी → हैदर अली
Q44. प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध शुरू होने का वर्ष → 1767
Q45. हैदर अली की मृत्यु का वर्ष → 1782 (द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध के दौरान)
Q46. चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध में टीपू सुल्तान की मृत्यु कहाँ हुई → श्रीरंगपट्टनम
Q47. हैदर अली ने 1761 में किस युद्ध में मराठों से सहायता माँगी थी → पानीपत के तृतीय युद्ध के बाद मराठों ने मैसूर पर आक्रमण किया, तब उन्होंने अंग्रेजों से मदद माँगी
Q48. “शेर-ए-मैसूर” किसे कहा जाता है → टीपू सुल्तान
Q49. प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध के समय गवर्नर-जनरल कौन था → उस समय गवर्नर-जनरल की प्रथा नहीं थी। मद्रास प्रेसिडेंसी का गवर्नर था। (ध्यान दें — गवर्नर-जनरल पद 1773 के रेग्युलेटिंग एक्ट के बाद बना)
Q50. किस संधि के द्वारा प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध समाप्त हुआ → मद्रास की संधि (Treaty of Madras), 1769
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