ब्रिटिश भू-राजस्व नीति: किसान क्यों हुए गरीब? जानें सच

पृष्ठभूमि एवं परिचय भारत में ब्रिटिश भू-राजस्व नीतियों का इतिहास अत्यंत जटिल एवं किसान-विरोधी रहा है। अंग्रेजों का मुख्य उद्देश्य भारत से अधिकतम राजस्व वसूलना था, न कि यहाँ की कृषि व्यवस्था को सुधारना। इन नीतियों ने भारतीय किसानों को गहरे संकट में डाला। 1. इलाहाबाद की प्रथम संधि (1765) 12 अगस्त 1765 को हुई … Read more

सामाजिक व धार्मिक सुधार आंदोलन: पूरी जानकारी

सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलन का परिचय 19वीं शताब्दी के सामाजिक और धार्मिक सुधार आंदोलन का आधुनिक भारतीय इतिहास में अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान है। इस काल में भारतीय समाज जाति-प्रथा, अंधविश्वास, मूर्तिपूजा और सामाजिक कुरीतियों में जकड़ा हुआ था। सती प्रथा, बाल विवाह, पर्दा प्रथा और छुआछूत जैसी बुराइयाँ समाज को खोखला कर रही थीं। … Read more

प्रेस ने कैसे बदला भारत? जनमत की पूरी कहानी

भूमिका भारत में प्रेस का विकास राष्ट्रीय चेतना और जन जागरूकता के विकास में एक महत्वपूर्ण कारक रहा है। प्रिंटिंग प्रेस के आगमन ने भारतीय समाज में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया और आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को तीव्र गति प्रदान की। 18वीं और 19वीं शताब्दी में प्रेस ने भारतीय राष्ट्रवाद के उदय में निर्णायक भूमिका निभाई। समाचार … Read more

ब्रिटिश शासन से संविधान तक: भारत का विकास 1773-1950

भूमिका भारत के संवैधानिक विकास की यात्रा अत्यंत लंबी और जटिल रही है। ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनकाल से लेकर स्वतंत्र भारत के गणतंत्र बनने तक, यह विकास कई चरणों से गुजरा। 26 जनवरी 1950 को भारत एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बना और इस दिन भारतीय संविधान लागू हुआ। यह संविधान विश्व का सबसे बड़ा … Read more

भारत के गवर्नर जनरल एवं वायसराय — सम्पूर्ण इतिहास

ब्रिटिश शासन में गवर्नर जनरल और वायसराय की भूमिका क्या थी? भारत पर ब्रिटिश शासन की शुरुआत एक व्यापारिक कंपनी के रूप में हुई। 31 दिसंबर 1600 को ईस्ट इंडिया कंपनी ने रानी एलिजाबेथ प्रथम से रॉयल चार्टर प्राप्त किया। धीरे-धीरे यह कंपनी व्यापार से आगे बढ़कर एक राजनीतिक शक्ति बन गई। भारत में ब्रिटिश … Read more

रॉबर्ट क्लाइव से लॉर्ड एमहर्स्ट तक: बंगाल के गवर्नर

परिचय बंगाल में ब्रिटिश शासन की शुरुआत भारतीय इतिहास का एक निर्णायक मोड़ था। यह वह समय था जब एक व्यापारिक कंपनी धीरे-धीरे एक विशाल साम्राज्य में तब्दील हो रही थी। बंगाल के गवर्नरों ने इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।23 जून 1757 को प्लासी के युद्ध के बाद अंग्रेजों की स्थिति बंगाल में मजबूत … Read more

ईस्ट इंडिया कंपनी और पंजाब: रणजीत सिंह का उदय

महाराजा रणजीत सिंह का उदय और पंजाब में शक्ति का विस्तार रणजीत सिंह का जन्म और प्रारंभिक जीवनमहाराजा रणजीत सिंह का जन्म 13 नवंबर 1780 ई० को गुजरांवाला (वर्तमान पाकिस्तान) में सुकरचकिया मिसल के मुखिया महासिंह के घर हुआ था। उनका जन्म एक ऐसे समय में हुआ जब पंजाब राजनीतिक अस्थिरता और विखंडन के दौर … Read more

कैसे हुआ सिन्ध का विलय 1843 में? जानें सच

प्रस्तावना : इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी तथा सिन्ध का विलय अठारहवीं और उन्नीसवीं शताब्दी के दौरान सिन्ध प्रदेश भारतीय उपमहाद्वीप का एक अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र था। इस प्रदेश की भौगोलिक स्थिति अत्यंत सामरिक थी, क्योंकि यह पश्चिम से भारत में प्रवेश करने का मुख्य द्वार था। सिन्धु नदी के किनारे बसा यह प्रदेश व्यापारिक दृष्टि … Read more

ईस्ट इंडिया कंपनी एवं मराठा: युद्ध, संघर्ष और इतिहास

प्रस्तावना शंभाजी कौन थे? छत्रपति शंभाजी महाराज मराठा साम्राज्य के द्वितीय छत्रपति थे, जो छत्रपति शिवाजी महाराज और उनकी प्रथम पत्नी साईबाई निंबालकर के ज्येष्ठ पुत्र थे। उनका जन्म 14 मई 1657 को पुरंदर के किले में हुआ था। मात्र ढाई वर्ष की आयु में माता के निधन के बाद उनका पालन-पोषण दादी जीजाबाई ने … Read more

हैदर अली से टीपू सुल्तान तक: मैसूर युद्ध की कहानी

प्रस्तावना दक्षिण भारत का मध्यकालीन इतिहास उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। शक्तिशाली साम्राज्यों के उत्थान और पतन ने इस क्षेत्र की राजनीतिक दशा को निरंतर बदला है। इन्हीं परिवर्तनों में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ 1565 ई० में तालीकोटा के युद्ध के साथ आया। तालीकोटा का युद्ध दक्षिण भारतीय इतिहास की एक निर्णायक घटना थी। इस युद्ध … Read more